Jan १६, २०१८ २२:३० Asia/Kolkata

17 जनवरी वर्ष 1941 को सुभाषचन्द्र बोस ब्रिटिश पहरे से चुपचाप ढंग से निकलकर जर्मनी के लिए रवाना हुए।

17 जनवरी वर्ष 1595 को फ्रांस के राजा हेनरी चतुर्थ ने स्पेन के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।

17 जनवरी वर्ष 1601 को मुग़ल बादशाह अकबर ने असीरगढ़ के अभेद क़िले में प्रवेश किया।

17 जनवरी वर्ष 1601 को फ़्रांस ने स्पेन के साथ समझौता किया जिसके तहत फ़्रांस को ब्रीस, बगेस वोल्रोमेय तथा गेक्स इलाका प्राप्त हुआ।

17 जनवरी वर्ष 1757 को जर्मनी ने प्रूशिया के ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा की।

17 जनवरी वर्ष 1852 को ब्रिटेन ने दक्षिण अफ़्रीक़ा के ट्रांसवाल की स्वतंत्रता को मान्यता दी।

17 जनवरी वर्ष 1863 को अमेरिकी राज्य वर्जीनिया में गृह युद्ध शुरु हुआ।

17 जनवरी वर्ष 1895 को फ्रांसीसी राष्ट्रपति कैसिमिर पेरियर ने इस्तीफ़ा दिया।

17 जनवरी वर्ष 1913 को रेमंड प्वाइनकेयर फ्रांस के राष्ट्रपति चुने गये।

17 जनवरी वर्ष 1941 को सुभाषचन्द्र बोस ब्रिटिश पहरे से चुपचाप ढंग से निकलकर जर्मनी के लिए रवाना हुए।

17 जनवरी वर्ष 1945 को द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति के दिनों में सोवियत सेना का पोलैण्ड की राजधानी वारसा में आगमन हुआ।

17 जनवरी वर्ष 1946 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की पहली बैठक हुई।

17 जनवरी वर्ष 1948 को नीदरलैंड तथा इंडोनेशिया, संघर्ष विराम पर सहमत हुए।

17 जनवरी वर्ष 1961 को जनवादी कोंगो के प्रधानमंत्री पेट्रिस लुमुम्बा की देश के नये सैन्य शासकों ने हत्या कर दी।

17 जनवरी वर्ष 1976 को यूरोपीय स्पेस एजेंसी ने हरमस रॉकेट लांच किया।

17 जनवरी वर्ष 1979 को सोवियत संघ ने परमाणु परीक्षण किया।

17 जनवरी वर्ष 1980 को नासा ने फ्लाटसटकोम-3 लांच किया।

17 जनवरी वर्ष 1985 को भारतीय क्रिकेटर अजहरुद्दीन ने इंगलैंड के खिलाफ दूसरा टेस्ट शतक लगाया।

17 जनवरी वर्ष 1987 को टाटा फुटबॉल अकादमी खुली।

17 जनवरी वर्ष 1989 को कर्नल जेके बजाज उत्तरी ध्रुव पर पहुंचने वाले पहले भारतीय बने।

17 जनवरी वर्ष 1995 को जापान में 7.2 तीव्रता के भूकंप में 5,372 लोगों की मौत हुई।

17 जनवरी वर्ष 2002 को अमेरिकी विदेश मंत्री कॉलिन पावेल भारत पहुँचे और उन्होंने आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के रुख़ का समर्थन किया।

17 जनवरी वर्ष 2007 को आस्ट्रेलिया के क्रिकेटर माइकल बेवन ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से सन्न्यास लिया।

17 जनवरी वर्ष 2008 को केन्द्र सरकार ने विकलांगों को नौकरियां देने के लिए 1800 करोड़ रुपये की एक योजना को मंज़ूरी प्रदान की।

17 जनवरी वर्ष 2008 को मेडागास्कर में हिन्द महासागर के ताड़ के पेड़ की नई प्रजाति मिली।

17 जनवरी वर्ष 2009 को भारतीय ओलम्पिक संघ के महासचिव रणधीरसिंह ने अपने पद से इस्तीफ़ा दिया।

17 जनवरी वर्ष 2010 को भारत के उच्चतम न्यायालय ने ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से हमला किए जाने की स्थिति में आत्मरक्षा के अधिकार की प्रो-ऐक्टिव परिभाषा देते हुए कहा है कि क़ानून का पालन करने वाले लोगों को कायर बनकर रहने की ज़रूरत नहीं है। उसकी दो सदस्यीय खंडपीठ ने आत्मरक्षा के अधिकार के 10 सूत्रीय निर्देश तय करते हुए कहा कि इन परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को अपराधी नहीं बनाया जा सकेगा, भले ही उसने हमलावर को जानलेवा क्षति पहुँचायी हो।

17 जनवरी वर्ष 2013 को इराक़ में सिलसिलेवार बम धमाकों में 33 लोग मारे गये।

17 जनवरी वर्ष 1941 को सुभाषचन्द्र बोस ब्रिटिश पहरे से चुपचाप ढंग से निकलकर जर्मनी के लिए रवाना हुए। सुभाष चन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 में हुआ था। वह नेता जी के नाम से भी जाने जाते हैं, भारत के स्वतन्त्रता संग्राम के अग्रणी नेता थे। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान, अंग्रेज़ों के खिलाफ़ लड़ने के लिये, उन्होंने जापान के सहयोग से आज़ाद हिन्द फौज का गठन किया था। उनके द्वारा दिया गया जय हिन्द का नारा भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया है। "तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा" का नारा भी उनका था जो उस समय अत्यधिक प्रचलित हुआ।

कुछ इतिहासकारों का मानना है कि जब नेता जी ने जापान और जर्मनी से मदद लेने की कोशिश की थी तो ब्रिटिश सरकार ने अपने गुप्तचरों को 1941 में उन्हें ख़त्म करने का आदेश दिया था।

नेता जी ने 5 जुलाई 1943 को सिंगापुर के टाउन हाल के सामने 'सुप्रीम कमाण्डर' के रूप में सेना को सम्बोधित करते हुए "दिल्ली चलो!" का नारा दिया और जापानी सेना के साथ मिलकर ब्रिटिश व कामनवेल्थ सेना से बर्मा सहित इम्फाल और कोहिमा में एक साथ जमकर मोर्चा लिया।

21 अक्टूबर 1943 को सुभाष बोस ने आजाद हिन्द फौज के सर्वोच्च सेनापति की हैसियत से स्वतन्त्र भारत की अस्थायी सरकार बनायी जिसे जर्मनी, जापान, फिलीपींस, कोरिया, चीन, इटली, मान्चुको और आयरलैंड ने मान्यता दी। जापान ने अंडमान व निकोबार द्वीप इस अस्थायी सरकार को दे दिये। सुभाष उन द्वीपों में गये और उनका नया नामकरण किया।

1944 को आजाद हिन्द फौज ने अंग्रेजों पर दोबारा आक्रमण किया और कुछ भारतीय प्रदेशों को अंग्रेजों से मुक्त भी करा लिया। कोहिमा का युद्ध 4 अप्रैल 1944 से 22 जून 1944 तक लड़ा गया एक भयंकर युद्ध था। इस युद्ध में जापानी सेना को पीछे हटना पड़ा था और यही एक महत्वपूर्ण मोड़ सिद्ध हुआ।

6 जुलाई 1944 को उन्होंने रंगून रेडियो स्टेशन से महात्मा गांधी के नाम एक प्रसारण जारी किया जिसमें उन्होंने इस निर्णायक युद्ध में विजय के लिये उनका आशीर्वाद और शुभकामनायें माँगीं।

नेताजी की मृत्यु को लेकर आज भी विवाद है। जहाँ जापान में प्रतिवर्ष 18 अगस्त को उनका जन्म दिन धूमधाम से मनाया जाता है वहीं भारत में रहने वाले उनके परिवार के लोगों का आज भी यह मानना है कि सुभाष की मौत 1945 में नहीं हुई। वे उसके बाद रूस में नज़रबन्द थे।

 

17 जनवरी वर्ष 1841 ईसवी को ब्रिटेन के पर्वतारोही जार्ज एवरेस्ट ने विश्व की सबसे ऊंची पर्वत चोटी का पता लगाया। इस चोटी का नाम इसके बाद एवरेस्ट रख दिया गया। जार्ज एवरेस्ट इस 8848 मीटर ऊंची चोटी पर चढ़ने में सफल नहीं हो सके थे। वर्ष 1953 में भारत और ब्रिटेन के दो पर्वतारोही इस चोटी की ऊंचाई तक पहुंचने में सफल हुए। एवरेस्ट चोटी हिमालय पवर्त श्रृंखला में स्थित है।

 

17 जनवरी सन 1860 ईसवी को रूस के लेखक आन्तवन चेख़ोफ का जन्म हुआ। वे एक ग़रीब परिवार में पले बढ़े और बचपन तथा जवानी कठिनाइयों में बितायी किन्तु इसके बावजूद उन्होंने मास्को विश्वविद्यालय में चिकित्सा विज्ञान की शिक्षा पूरी की। बचपने से ही उन्हें लेखन से लगाव था। वे उस समय के समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के लिए लेख लिखते थे। सन 1902 ईसवी में जर्मनी में उनका निधन हुआ।

17 जनवरी वर्ष 1891 ईसवी को रूस के लेखक एलिया एरम्बर्ग का जन्म हुआ। वे कुछ दिनों तक स्पेन में पत्रकारिता करते रहे और साथ ही शायरी भी जारी रखी। हालांकि वे एक सामाजिक आलोचक थे किन्तु रूस की कम्युनिस्ट सरकार उनके बारे में कोई सतर्कता नहीं बरतती थी। सन 1967 ईसवी में उनका निधन हो गया।

 

17 जनवरी सन 1991 ईसवी को अमरीका के नेतृत्व में बहुराष्ट्रीय सेनाओं ने कुवैत और इराक़ में इराक़ी सेना के ठिकानों पर आक्रमण किया और कुवैत पर इराक़ का अतिग्रहण समाप्त हो गया। यह संकट सन 1990 के अगस्त महीने में इराक़ी सेना द्वारा कुवैत के अतिग्रहण के बाद आरंभ हुआ। अमरीका पहले स्वयं ही इराक़ का घनिष्ट मित्र और क्षेत्र में अशांति फैलाने के लिए उसे प्रेरित करने वाला देश था किन्तु जब उसे इराक़ पर आक्रमण करना हुआ तो पहले उसने अंतर्राष्ट्रीय माध्यमों का सहारा लिया ताकि विश्व जनमत इस आक्रमण के लिए तैयार हो सके। संयुक्त राष्ट्र संघ की सहमति के बाद आज के ही दिन इराक़ पर अमरीका के आक्रमण आरंभ हुए। यह युद्ध इराक़ी सेना को कुवैत से निकालने के लिए आरंभ हुआ था किन्तु इसके बहाने अमरीका ने खाड़ी के क्षेत्र में अपनी सैनिक स्थिति मज़बूत कर ली जिससे क्षेत्र की शांति और स्थिरता सदैव के लिए ख़तरे में पड़ गयी।

17 जनवरी सन् 2009 को ज़ायोनी शासन ने ग़ज़्ज़ा के विरुद्ध वहां की जनता के प्रतिरोध के कारण युद्ध विराम की घोषणा कर दी, ग़ज़्ज़ा के विरुद्ध ज़ायोनी शासन के पाश्विक हमले 22 दिनों तक जारी रहे। इन हमलों से ज़ायोनी शासन का उद्देश्य इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हमास को नष्ट करना या कम से कम वार्ता के लिए बाध्य करना था किन्तु फ़िलिस्तीनियों द्वारा हमास के समर्थन तथा विश्व समुदाय के कड़े विरोध के कारण ज़ायोनी शासन इन हमलों को रोकने के लिए बाध्य हो गया। इन पाश्विक हमलों में 1400 से अधिक लोग शहीद तथा 5500 लोग घायल हो गए । ग़ज़्ज़ा पट्टी पर ज़ायोनी शासन के हमले इतने व्यापक थे कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस बारे में जांच के लिए एक आयोग का गठन किया। आयोग की रिपोर्ट में ज़ायोनी शासन को युद्ध अपराधी घोषित किया गया। इस रिपोर्ट की संयुक्त राष्ट्र संघ की मानवाधिकार परिषद एवं महासभा ने भी पुष्टि की। इसके बावजूद, ज़ायोनी शासन वर्ष 2007 से ग़ज़्ज़ा का परिवेष्टन जारी रखे हुए है।  

 

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27 दैय सन 1334 हिजरी शम्सी को ईरान के संघर्षकर्ता धर्मगुरु नवाब सफ़वी और उनके तीन साथियों को शाह के सैनिक न्यायालय ने दिखावटी मुक़द्दमा चलाकर मौत की सज़ा सुना दी और इन लोगों को शहीद कर दिया गया। नवाब सफ़वी सन 1305 हिजरी शम्सी में जन्मे थे। वे इराक़ के नजफ़ नगर में उच्चस्तरीय शिक्षा प्राप्त करने के बाद स्वेदश लौटे और शाह के अत्याचारों को देखकर उसकी सरकार के विरुद्ध संघर्ष में लग गये। यहॉ तक कि उन्हें शाह के सुरक्षाकर्मियों ने गिरफ़तार किया और आज के दिन उन्हें मृत्युदंड सुनाया गया।

 

27 दैय सन  1366 हिजरी शम्सी को इराक़ की इस्लामी क्रान्ति की उच्च परिषद के वरिष्ठ सदस्य सैयद मेहदी हकीम और उनके पुत्र सैयद मोहसिन हकीम को सूडान की राजधानी ख़ारतूम में सद्दाम हुसैन के सुरक्षाकर्मियों ने शहीद कर दिया। वे इराक़ के तानाशाह सद्दाम हुसैन के कटटर विरोधी थे।

 

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21 जमादिल अव्वल सन 320 हिजरी क़मरी को विख्यात मुस्लिम चिकित्सक, भूशास्त्री और दार्शनिक अबु जाफ़र अहमद बिन इब्राहीम बिन अबी ख़ालिद पूर्वोत्तरी ईरान के शीरवान नगर में पैदा हुए। वे इब्ने जज़्ज़ार के नाम से विख्यात थे। वे बड़े सदाचारी चिकित्सक थे। उन्होंने एक पुस्तक तिब्बुल फ़क़्र के नाम से लिखी है। इसके अतिरिक्त भी लगभग बीस पुस्तकें उनसे संबंधित बताई जाती हैं।

21 जमादिउल अव्वल सन 610 हिजरी क़मरी को सातवीं शताब्दी हिजरी के विख्यात साहित्यकार और धर्मगुरू बुरहानुद्दीन अबुल फ़त्ह अली मितरज़ी का ख़्वारज़्म में निधन हुआ। ख़्वारज़्म नगर उस समय ईरान का ही एक भाग था। वे सन 536 हिजरी क़मरी में पैदा हुए थे। मितरज़ी उस समय अरबी साहित्य, और क़ुरआन की तफ़सीर के विख्यात विद्वान उस्ताद जारल्लाह ज़मख़्शरी  के शिष्य थे। ज़मख़्शरी को अनेक साहित्यिक क्षेत्रों में दक्षता प्राप्त थी। अलमग़रिब फ़ी लुग़तिल फ़िक़हीया उनकी महत्वपूर्ण पुस्तक है। उन्होंने और भी अनेक पुस्तकें लिखी हैं।