मंगलवार - 21 जनवरी
21 जनवरी सन 1855 ईसवी को गन डिज़ाइनर जान ब्राउनिंग का जन्म हुआ।
21 जनवरी सन 1924 ईसवी को रूस के क्रान्तिकारी नेता व्लादमीर लेनिन का निधन हुआ।
21 जनवरी सन 2009 ईसवी को टोयोटा ने जनरल मोटर को पीछे छोड़ दिया जो दुनिया की सबसे बड़ी कार उत्पादक कंपनी थी।
21 जनवरी सन 1737 ईसवी को बंगाल की खाड़ी में भयानक तूफ़ान आने से तीन लाख लोगों की मौत हो गयी। इसे इस क्षेत्र का सबसे विध्वंसक और विनाशकारी तूफ़ान कहा जाता है। बंगाल की खाड़ी हिंद महासागर के उत्तर में स्थित है। इसमें थोड़े थोड़े समय पर तूफ़ान आते रहे हैं जिससे लोगों की जानी एवं आर्थिक हानि पहुंची है।
21 जनवरी सन 1793 ईसवी को फ़्रांस के राजा लुई 16वें को इस देश में क्रान्ति की सफलता के चार वर्ष बाद ग्यूटीन द्वारा मृत्युदंड दे दिया गया। वे सन 1774 ईसवी में फ़्रांस के नरेश बने थे। वे अपनी पत्नी मैरी ऐनटोनेट के दबाव में रहते थे। देश की ख़राब आर्थिक और सामाजिक स्थिति को देखकर जनता ने सन 1789 ईसवी में लुई 16वें के विरुद्ध संघर्ष आरंभ कर दिया और तीन वर्ष बाद औपचारिक रुप से राजशाही शासन व्यवस्था समाप्त हो गयी किंतु लुई को विदेशी सरकारों से गुप्त सहायता प्राप्त करने के कारण देशद्रोह के आरोप में मृत्युदंड दे दिया गया। इसी प्रकार उनकी पत्नी सहित उन्के परिवार के कई लोगों को भी मौत की सज़ा दे दी गयी।

21 जनवरी सन 1924 ईसवी को पूर्व सोवियत संघ में कम्यूनिस्ट क्रान्ति के नेता विलादमीर एलीच औलियानोव का निधन हुआ। वे लेनिन के नाम से प्रसिद्ध थे। सन 1870 ईसवी में लेनिन का जन्म हुआ था। उन्होंने विश्वविद्यालय की शिक्षा के दौरान ही रुस की राजशाही व्यवस्था के विरुद्ध संघर्ष आरंभ किया और सन 1900 में रुस से बाहर जाने तक उनहें कई बार जेल और देशनिकाले की सज़ा दी गयी जिसके दौरान उन्होंने कई पुस्तकें लिखीं। रुस से बाहर निकलने के बाद भी लेनिन ने अपने संघर्ष और लेखन को जारी रखा। वे सन 1917 में रुस लौटे और उन्होंने कम्यूनिस्ट क्रान्ति का नेतृत्व पूरी तरह से संभाल लिया। इस क्रान्ति की सफलता के बाद वे रुस के राष्ट्राध्यक्ष बने और 1924 ईसवी में आज के दिन उनका निधन हो गया। लेनिन के विचारों का मार्क्सवाद पर विशेष रुप से प्रभाव दिखाई देता है। इस प्रकार से कि इस विचारधारा को मार्कसिज़्म लेनिनिज़्म कहा जाता है।

***
पहली बहमन सन 1343 हिजरी शम्सी को ईरान में शाह के प्रधान मंत्री हसन अली मन्सूर, मोहम्मद बोख़ाराई नामक क्रान्तिकारी के हाथों मारे गए। हसन अली मन्सूर अमरीका के पिट्ठू थे। उन्होंने एक कानून पारित कराके अमरीकियों को ईरान में न्यायिक छूट दिला दी थी अर्थात यदि अमरीकी, ईरान में कोई अपराध करते तो उनपर इस देश में मुक़द्दमा चलाने की अनुमति नहीं थी। इस प्रकार से ईरान में प्राकृतिक स्रोतों को लूटने के लिए अमरीकियों को खुली छूट मिल गयी। इसके अतिरिक्त हसन अली मन्सूर ने इस्लामी क्रान्ति के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी को देश निकाला देकर तुर्की भिजवाने में मुख्य रुप से भूमिका निभाई। इमाम ख़ुमैनी को देशनिकाला दिए अभी अधिक समय नहीं बीता था कि तत्कालीन संसद के सामने हसन अली मन्सूर को, मुहम्मद बोख़ाराई ने गोली मार दी। इस घटना के कुछ ही दिनों बाद उनकी मौत हो गयी।
पहली बहमन सन 1357 हिजरी शम्सी को ईरान में जनता की क्रान्ति के मुक़ाबले में अत्याचारी शाह की सरकार ने अपनी कमज़ोर स्थिति को देखते हुए, जेल के द्वार खोल दिए जिससे क्रान्तिकारी क़ैदी स्वतंत्र हुए और इसी दिन दोपहर के बाद वायु सेना के बहुत से अधिकारियों ने प्रदर्शन करके जनता के प्रति अपनी समरस्ता और सदभावना की घोषणा की। आज ही के दिन ईरानी प्रिंट मीडिया में यह समाचार प्रकाशित हुआ कि इमाम ख़ुमैनी कुछ ही दिनों में स्वदेश लौट रहे हैं।
***
25 जमादिउल अव्वल सन 643 हिजरी क़मरी को सीरिया के हलब नगर में अरब जगत के विख्यात साहित्यकार और बुद्धिजीवी इब्ने यईश का निधन हुआ। वे अरबी साहीत्य में दक्षता रखते थे। उनके अनेक शिष्य वरिष्ठ साहित्यकारों में गिने जाते है। इनमें इब्ने ख़लक़ान जैसे साहित्यकारों का नाम उल्लेखनीय है।

25 जमादीउल अव्वल वर्ष 64 हिजरी क़मरी को तीसरे उमवी शासक मुआवीय इब्ने यज़ी का संदिग्ध रूप परिस्थतियों में से देहॉंत हुआ। उन्होंने अपने पिता यज़ीद की मृत्यु के बाद शासन संभाला किन्तु चूंकि वे पैग़म्बर इस्लाम के परिजनों से श्रद्दा रखते थे अत: शासन में उन की कोई रूचि नहीं थी। मुआविया दृष्यी ने अपने एक भाषण में हज़रतअली अलैहिस्सलाम से अपने दादा मुआविया के युद्ध एवं हज़रत इमाम हुसैन से अपने पिता यज़ीद के युद्ध की आलोचना करते हुए पैग़म्बर इस्लाम के परिजनों का गुणगान किया । उन्होंने कहा कि मैं शासन को नहीं संभालूंगा और ज़िम्मेदारी को भी स्वीकार नहीं करूंगा। तुम जानों और तुम्हारा शासन। मुआविया इब्ने यज़ीद का शासन से अलग होजाने के कुछ दिन बाद संदिग्ध रूप से देहांत हो गया और मरवान बिन हकम ने शासन संभाला।
