गुरुवार- 23 जनवरी
23 जनवरी वर्ष 1556 को चीन के शेनसी प्रांत में आये विनाशकारी भूकंप में हज़ारों लोग मारे गए।
23 जनवरी वर्ष 1556 को चीन के शेनसी प्रांत में आये विनाशकारी भूकंप में हज़ारों लोग मारे गए।
23 जनवरी वर्ष 1793 को ह्यूमन सोसायटी ऑफ फ़िलाडेल्फिया का गठन हुआ।
23 जनवरी वर्ष 1849 को एलिज़ाबेथ ब्लैकवेल मेडिकल डिग्री हासिल करने वाली पहली अमेरिकी महिला बनीं।
23 जनवरी वर्ष 1897 को भारत के स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाषचंद्र बोस का जन्म ओडिशा के कटक में हुआ था।
23 जनवरी वर्ष 1924 को सोवियत संघ ने 21 जनवरी को हुई लेनिन की मृत्यु की आधिकारिक घोषणा की।
23 जनवरी वर्ष 1924 को भारतीय राजनेता और शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे का जन्म हुआ।
23 जनवरी वर्ष 1966 को इंदिरा गांधी भारत की तीसरी प्रधानमंत्री बनीं।
23 जनवरी वर्ष 1968 को उत्तरी कोरिया ने अमरीकी जहाज़ यूएसएस पुएब्लो को अपनी समुद्री सीमा का अतिक्रमण करने का आरोप लगाकर ज़ब्त कर लिया।
23 जनवरी वर्ष 1973 को अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने वियतनाम शांति समझौते की घोषणा की।
23 जनवरी वर्ष 2004 को मध्य प्रदेश में गोवध पर पूर्णतया प्रतिबंध लागू हो गया।
23 जनवरी वर्ष 2006 को भारत ने पाकिस्तान को सर्वाधिक वरीयता प्राप्त राष्ट्र का दर्जा देने की सिफ़ारिश को मंजूर किया।
23 जनवरी वर्ष 2007 को भारत एवं रूस के बीच मध्यम आकार के बहुउद्देशीय परिवहन विमान के उत्पादन हेतु एक घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर हुए।
23 जनवरी वर्ष 2008 को अमरीका और कुछ पश्चिमी देशों ने मिलकर ईरान के विरुद्ध तीसरा प्रतिबंध लगाने की योजना पर सहमति जताई।
23 जनवरी वर्ष 2009 को फ़िल्मी और टेलीविज़न कार्यक्रमों में धूम्रपान दृश्यों पर लगा प्रतिबंध समाप्त हो गया।
23 जनवरी सन 1556 ईसवी को चीन के शेन्सी राज्य में भीषण भूकम्प आया।शेन्सी चीन का बहुत घनी आबादी वाला राज्य था। इसी लिए इस भूकम्प से भारी जनहानि हुई। इस भूकंप में लगभग आठ लाख तीस हज़ार लोग मौत की नींद सो गये। यह क्षेत्र भूकम्प की पट्टी पर स्थित है और यहॉं भूकम्प आते रहते हैं।
23 जनवरी सन 1964 ईसवी को अमरीका के मिसीसिपी नगर में पहली बार किसी पशु के अंग को मनुष्य के शरीर में लगाया गया। इस प्रक्रिया को प्रतिरोपण कहा जाता है। मिसिसिपी के मेडिकल सेंटर में एक चिंपैंज़ी का ह्रदय एक मनुष्य के शरीर में लागाया गया था किंतु वो व्यक्ति इसके थोड़ी ही देर बाद मर गया।
23 जनवरी सन 1950 ईसवी को इस्राईल की संसद ने बैतुल मुक़द्दस को इस सरकार की राजधानी घोषित किया। ज़ायोनी संसद का यह निर्णय, जो फ़िलिस्तीन में अवैध रुप से इस्राईली सरकार की स्थापना के दो वर्षों के बाद लिया गया था मुसलमानों के आक्रोष का कारण बना और ज़ायोनी शासन को व्यापक प्रयासों के बावजूद विभिन्न देशों के दूतावासों को बैतुल मुक़द्दस स्थानान्तरित करवाने में सफल नही हो सका। अब भी तेलअबीब को इस अवैध शासन की राजधानी का दर्जा प्राप्त है। हालांकि अब अमरीकि सरकार इस ओर क़ानूनी फ़ैसले का लागू करने की कोशिश कर रही है।

23 जनवरी सन 1979 को फिलिस्तीनी संघर्षकर्ता " अबूहसन सलामा" को इस्राईली एजेन्टों ने मार डाला।
उन्हें म्यूनिख ओलंपिक में 12 इस्राईलियों को बंधक बनाने का मुख्य योजनाकार माना जाता है। यह घटना 5 सितम्बर सन 1972 में हुयी थी जिसमें 12 इस्राईली बंधक, 5 फिलिस्तीनी और एक जर्मन सुरक्षाकर्मी मारा गया था जबकि 3 फिलिस्तीनी गिरफ्तार कर लिये गये थे। बंधक बनाने की इस पूरी घटना के मुख्य योजनाकार अबूहसन सलामा को बताया गया। इस घटना के सात साल बाद बैरुत की एक सड़क पर स्थित घर से निकलते समय बम विस्फोट हुआ जिसमें वह अपने चार साथियों के साथ मारे गये। धमाके के दो साल बाद पता चला कि इस हमले की ज़िम्मेदार एक जर्मन यहूदी महिला थी जो मोसाद के लिए काम करती थी और अपने साथियों के साथ बहुत पहले से अबू सलामा के घर के सामने वाली इमारत में रहने लगी थी।
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3 बहमन सन 1357 हिजरी शम्सी को ईरान में इस्लामी क्रान्ति की सफलता के अवसर पर एक केंद्रीय समन्वय समिति का गठन किया गया। इसका उद्देश्य देश में अराजकता को रोकना था। इस समिति ने ईरान के समस्त कर्मचारियों, मज़दूरों और आम लोगों का आहवान किया कि वे इस्लामी क्रान्ति की सफलता तक भूख हड़ताल करें और जुलूस निकालें। इसी प्रकार आज के दिन पवित्र नगर क़ुम को सैनिकों और पुलिसकर्मियों से ख़ाली करवा लिया गया और इस नगर का नियंत्रण जनता के हाथ में आ गया।

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27 जमादिल औवल सन 584 हिजरी क़मरी को पवित्र क़ुरआन के हाफ़िज़ और पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैह व आलेही व सल्लम तथा उनके परिजनों के कथनों का ज्ञान रखने वाले प्रसिद्ध ज्ञानी मुहम्मद बिन हाज़िम हमदानी का बग़दाद में स्वर्गवास हुआ। वे ज़ैनुद्दीन के नाम से भी प्रसिद्ध थे और उस समय के प्रचलित ज्ञानों में अद्वतीय व्यक्ति थे। उन्होंने अपने 35 वर्षीय जीवन के दौरान बहुत सी पुस्तकें लिखी हैं जिनमें अलएतेबार फ़ी बयानिन्नासिख़ वल मन्सूख़ का नाम विशेष रूप से लिया जा सकता है। इसके अतिरिक्त सिलसिलतुज़्ज़हब भी उनकी एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक है।
27 जमादीउल अव्वल सन 1178 हिजरी क़मरी को पैग़म्बर इस्लाम एवं उन के परिजनों के कथनों को एकत्रित करने वाले बुद्धिजीवी अब्दुल करीम बिन अहमद का स्वर्गवास हो गया वह सीरिया के हलब नगर के सब से प्रसिध मुहद्दिस थे उन्होंने फ़िक़्ह, उसूले फ़िक़्ह, क़ुरआन की व्याख्या, हदीस और अपने काल के प्रचलित ज्ञानों को अपने पिता एवं अन्य समकालीन बुद्धिजिवियों से प्राप्त किया कुछ समय पश्चात वे नेत्रहीन हो गए किन्तु उन्हों ने अपना मनोबल गिरने नहीं दिया और ज्ञान प्राप्ति में पहले से अधिक हदीस ज्ञान में व्यस्त हो गए। हलवी की अनेक रचनाएं हैं जिन में से अद इयतुस्सफ़र पुस्तक की ओर संकेत किया जा सकता है।
