Jan २१, २०१७ १३:३२ Asia/Kolkata

1857, कलकत्ता विश्वविद्यालय की स्थापना।

1936, अलबर्ट सैरुएट फ्रांस के प्रधानमंत्री बने।

1950, भारतीय संविधान सभा ने देश के पहले राष्ट्रपति का चुनाव किया और "जन गण मन, अधिनायक जय हे" को देश के राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया।

1951, प्रेम माथुर भारत की पहली महिला कमर्शियल पायलट बनीं।

1952, मुम्बई में 'पहला अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म' महोत्सव आयोजित किया गया।

1965, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल का निधन हुआ।

1966, एयर इंडिया का बोइंग विमान, आल्पस में दुर्घटनाग्रस्त हुआ जिसमें भारत के परमाणु कार्यक्रम के पितामह डॉ. होमी भाभा सहित 114 लोगों की मौत हो गई।

1973, अमरीका ने वियतनाम युद्ध बंद होने के साथ लाओस और कंबोडिया में भी युद्धबंदी का ऐलान किया।

1991, लिथुआनिया गणराज्य ने सोवियत संघ के सैनिकों हटाने की मांग की।

1993, सोमालिया में अमरीकी सैनिकों के साथ संघर्ष में तीन व्यक्ति मारे गये और अनेक घायल हो गये।

1996, अमरीका के इतिहास में पहली बार देश की प्रथम महिला हिलेरी क्लिंटन को न्यायालय में पेश होने का आदेश दिया गया।

2006, कुवैत की संसद ने बीमार चल रहे अमीर शासक को उनके पद से हटा दिया।

2007, रूस एवं भारत के बीच एटमी रिएक्टर बनाने हेतु समझौता हुआ।

2011, मॉस्को के डोनोडिडोवो हवाई अड्डे पर बम विस्फोट में 35 लोगों की मौत, 180 घायल।

 

24 जनवरी 1667 ईसवी को ब्रिटेन और हॉलैंड के बीच ब्रेडा समझौता हुआ। इस समझौते के आधार पर हॉलैंड ने अमरीका महाद्वीप में अपने उपनिवेशों पर नियंत्रण न रख पाने के कारण उन्हें ब्रिटेन के हवाले कर दिया। इस समझौते के आधार पर ब्रिटेन को मिलने वाला सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र वर्तमान न्यूयार्क राज्य था। ब्रिटेन ने इसके बदले में दक्षिणी अमरीका के गूयान क्षेत्र को हालैंड के हवाले कर दिया।

24 जनवरी सन 1776 ईसवी को जर्मनी के लेखक अर्नेस्ट हूफ़मैन का जन्म हुआ। वे अद्भुत विचार शक्ति और सामाजिक परिस्थितियों  के विशलेषण में विशेष दक्षता रखते थे। उन्होंने क़ानून के विषय से कोई विशेष लगाव न रखने के बावजूद इस विषय की शिक्षा पूरी की और फिर संगीत में लग गये। इस विषय में अधिक सफलता न मिलने के कारण वे साहित्य में रुचि लेने लगे। उन्हें साहित्य में सफलता मिली। उन्होंने कई रोचक पुस्तकें लिखीं। सन 1822 ईसवी में उनका निधन हुआ।

24 जनवरी सन 1859 ईसवी को तेल के लिए खोदे गये कुएं से पहली बार तेल निकला। इस प्रकार से मनुष्य को धरती के भीतर से उर्जा के अत्यंत महत्वपूर्ण स्रोत से लाभ उठाने का अवसर मिला। यह कुऑ अमरीका के पेन्सिलवानिया राज्य में खोदा गया। 230 मीटर गहराई तक ख़ुदाई के बाद इस कुएं से तेल निकला। इस कुएं की खुदाई के लिए प्रयोग किये गये उपकरण अमरीका के एक संग्रहालय में रखे हुए हैं।

 

24 जनवरी सन 1946 ईसवी को संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा द्वारा पारित प्रस्ताव के आधार पर परमाणु ऊर्जा आयोग का गठन किया गया। यह प्रस्ताव अमरीका केनेडा और ब्रिटेन ने पेश किया।

 

24 जनवरी सन 1972 ईसवी को जापान के सैनिक शोइची योकोई को जंगल से बाहर निकाला गया। उन्होंने यह समझते हुए कि द्वितीय विश्व युद्ध जारी है, 28 वर्ष जंगलों में छिपते हुए बिताए।

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4 बहमन सन 1357 हिजरी शम्सी को ईरान में इमाम ख़ुमैनी की पेरिस से वापसी निकट होने की सूचना फैलने के बाद शाह के पिटठू प्रधान मंत्री शापूर बख़्तियार ने, जो समझ रहा था कि इमाम ख़ुमैनी की ईरान वापसी के बाद परिस्थितियॉ उसके नियंत्रण से बाहर हो जाएंगी, एक मूर्खतापूर्ण आदेश जारी करके समस्त हवाई अड्डों को बंद करवा दिया। सरकार के इस निर्णय से जनता में आक्रोश बढ़ गया। कुछ प्रतिष्ठित लोगों और वरिष्ठ धर्मगुरुओं ने इस आदेश के विरुद्ध धरना दिया और लोगों ने भी प्रदर्शन करना तथा सरकार के विरोध में नारे लगाना आरंभ कर दिया और हवाई अड्डों को पुन: खोले जाने की मांग की।

 

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28 जमादिउल अव्वल सन 283 हिजरी क़मरी को इस्लामी जगत के प्रसिद्ध कवि इब्ने रुमी का निधन हुआ। वे 221 हिजरी क़मरी में इराक़  की वर्तमान राजधानी बग़दाद में पैदा हुए। उनकी माता ईरानी और पिता रोम के थे। उन्होंने युवावस्था तक अपने समय के प्रचलित सभी ज्ञानों की शिक्षा प्राप्त कर ली और शायरी में भी बहुत दक्ष हो गये। वे सामाजिक मामलों पर गहरी नज़र रखते थे और उनपर टिप्पणी करते थे। इसी लिए उनके शेरों में तत्कालीन समाज की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित किया गया है। इब्ने रुमी के निधन के बाद उनके शिष्यों ने उनके शेरों को सेकलित किया।

 

28 जमादिउल अव्वल सन 1226 हिजरी क़मरी को ईरान के प्रसिद्ध धर्मगुरु हाज मुल्ला मिर्ज़ा ख़लीली का जन्म हुआ। उन्होंने अपने समय के वरिष्ठ व प्रतिष्ठित धर्मगुरुओं से शिक्षा ली। उन्हें गणित के अतिरिक्त इस्लामी विषयों जैसे फ़िक़ह व उसूल आदि का व्यापक ज्ञान था। वे थोड़े ही समय में बड़े गणितज्ञ और महान धर्मगुरु बन गये। आयु के अंतिम भाग तक वे ज्ञान और अध्ययन से जुड़े रहे और बहुत सी पुस्तकें लिखीं। इनमें ख़ज़ायनुल अहकाम जैसी पुस्तकें शामिल हैं। 1297 हिजरी क़मरी में मिर्ज़ा ख़लील निधन हुआ।