शनिवार- 25 जनवरी
1971, भारत में हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य घोषित किया गया।
1579, डच गणराज्य की स्थापना हुई।
1755, मॉस्को विश्वविद्यालय की स्थापना हुई।
1831, पौलैंड की संसद ने स्वतंत्रता की घोषणा की।
1952, सार के प्रशासन को लेकर फ्रांस और जर्मनी के बीच विवाद हुआ।
1959, ब्रिटेन ने पूर्वी जर्मनी से व्यापार समझौता किया।
1969, अमरीका और उत्तरी विएतनाम के बीच पेरिस में शांति वार्ता प्रारम्भ।
1971, भारत में हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य घोषित किया गया।
1975, शेख़ मुजीबुर्रहमान बांग्लादेश के राष्ट्रपति बने।
1980, मदर टेरेसा को भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
1991, यूगोस्लाविया में तनाव दूर करने के लिए सर्बिया और क्रोएशिया के नेताओं की बैठक हुई।
1992, रूस के राष्ट्रपति बोरिस येल्त्सिन ने अमरीकी शहरों को लक्ष्य करके तैनात परमाणु प्रक्षेपास्त्रों को हटाने की घोषणा की।
1994, तुर्की का प्रथम दूरसंचार उपग्रह 'तुर्कसैट प्रथम' अटलांटिक महासागर में गिरा।
2003, चीन के लोकतंत्र समर्थक नेता फ़ेंग-जू को देश निकाला दिया गया।
2004, अंतरिक्ष यान ऑपर्च्युनिटी मंग्रल ग्रह पर सफलतापूर्वक उतरा।
2010, इराक़ की राजधानी बग़दाद में तीन मिनी बसों द्वारा बम विस्फोट में एक होटल को निशाना बनाया गया। इसमें कम से कम 36 लोगों की मौत हो गई और 71 अन्य घायल हो गए।
25 जनवरी 1456 ईसवी को प्रकाशन उद्योग अस्तित्व में आया। तौरैत तथा इंजील नामक दो आसमानी ग्रंयों को एक पुस्तक के रुप में छापा गया। अब इस पुस्तकों के केवल कुछ ही पन्ने सुरक्षित हैं। जिन्हें संग्रहालयों में रखा गया है।
25 जनवरी सन 1832 ईसवी को फ़्रांस के चित्रकार एडवर्ड माने का जन्म हुआ। उन्हें पहले तो समुद्री यात्राओं में रुचि थी किंतु बाद में चित्रकला से उन्हे लगाव पैदा हो गया और उन्होंने अपनी क्षमताओं को इस क्षेत्र में प्रदर्शित किया। सन 1883 ईसवी में उनका निधन हुआ।
25 जनवरी सन 1871 ईसवी को कॉकेशिया के संघर्षकर्ता धर्मगुरु शैख़ शामील का मदीना नगर में निधन हुआ। वे सन 1797 ईसवी में उत्तरी कॉकेशिया के दाग़िस्तान क्षेत्र में जन्में थे। 19वीं शताब्दी के आरंभ में ईरान- रुस युद्ध में रुस द्वारा कॉकेशिया का अतिग्रहण कर लिए जाने के बाद इस क्षेत्र की जनता ने रुसियों का विरोध आरंभ कर दिया। शैख़ शामील ने भी, जिन्हें दाग़िस्तान का धार्मिक एवं राजनैतिक नेता चुना गया था, सन 1834 ईसवी में रुस के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष आरंभ किया। कई बार पराजय का सामना करने के बाद रुस की ज़ार सरकार ने शैख़ शामील के मुक़ाबले में 50 हज़ार सैनिक भेजे जिससे शैख़ शामील का संघर्ष कुछ समय के लिए कुचल दिया गया किंतु दो वर्ष बाद उनका संघर्ष फिर आरंभ हो गया। रूस के सैनिकों की संख्या और आधुनिक हथियारों के सामने शैख़ शामील का संघर्ष सफल न हो सका। वे अपनी आयु के अंतिम दिनों में मदीना नगर चले गये थे और आज के दिन उनका इसी नगर में निधन हो गया।
25 जनवरी सन 1871 ईसवी को जर्मनी के चिकित्सक और शोधकर्ता हप्येप ने कोढ़ रोग पैदा करने वाले जीवाणु का पता लगाया। यह बीमारी अत्यंत ख़तरनाक और संक्रामक होती है। यह रोग अधिकतर गर्म क्षेत्रों में होता है किंतु दूसरे क्षेत्रों में भी इस बीमारी का ख़तरा रहता है। इस बीमारी के सटीक उपचार की खोज अभी तक नहीं हो सकी है।
25 जनवरी सन 1966 को ब्रिटेन के विख्यात राजनीतिज्ञ विन्सटन चर्चिल का 91 वर्ष की आयु में निधन हुआ। वे सन 1874 ईसवी में पैदा हुए और सन 1895 ईसवी में ब्रिटेन की सेना में भर्ती हुए। सन 1900 में उन्हें सांसद चुना गया जिसके बाद वे कई बार मंत्री और दो बार प्रधान मंत्री बने। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान प्रधान मंत्री पद पर रहना उनकी प्रसिद्धि का मुख्य कारण बना। उन्होंने इस युद्ध में अपनी चतुराई भरी नीतियों से ब्रिटेन के उद्देश्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण पुस्तकें भी लिखीं हैं।
25 जनवरी वर्ष 2006 ईसवी को फ़िलिस्तीन के इस्लामी प्रतिरोध संगठन हमास ने फ़िलिस्तीन के संसदीय चुनाव में बड़ी सफलता प्राप्त की। इस संसदीय चुनाव में हमास ने पहली बार भाग लिया था। विदेशी पर्यवेक्षकों की उपस्थिति में होने वाले इस चुनाव में हमास ने ज़ायोनी शासन और पश्चिमी संचार माध्यमों और सरकारों के प्रोपेगैंडों के बावजूद 132 सीटों में 76 सीटें प्राप्त करके बहुमत प्राप्त किया। इस प्रकार से हमास ने इस्माईल हनिया को अपने भावी प्रधानमंत्री के रूप में पेश किया और घोषणा की कि पीएलओ की भागीदारी से राष्ट्रीय सरकार के गठन का इरादा रखता है किन्तु ज़ायोनी शासन और पश्चिमी सरकारों विशेषकर अमरीका ने आर्थिक, राजनैतिक, सामरिक और प्रचारिक दबाव डालते हुए इस बहाने से कि यह आंदोलन ज़ायोनी शासन को औपचारिकता नहीं देता, फ़िलिस्तीन की क़ानूनी सरकार को गिराने का प्रयासस किया।
25 जनवरी वर्ष 1926 को ब्रिटिश साहित्यकार और पूर्वी मामलों के विशेषज्ञ एडवर्ड ब्राउन का निधन हुआ। उनका जन्म वर्ष 1862 ईसवी में हुआ था। वे कैंब्रिज विश्वविद्यालय में पूर्वी भाषाओं के प्रोफ़ेसर थे और तुर्की, अरबी और फ़ारसी भाषा का उन्हें पूर्ण ज्ञान था। ब्राउन वर्षों तक ईरान में रहे और उन्होंने इस देश के इतिहास, साहित्य और सामाजिक स्थितियों पर शोध किया। उन्होंने अपने शोध को तारीख़े अदबियाते फ़ार्सी और येक साल दरमियाने ईरानियान जैसी पुस्तकों में प्रकाशित किया जो फ़ारसी भाषा में लिखी गयी थीं। उनकी अन्य महत्त्वपूर्ण पुस्तकों में इन्क़ेलाबे ईरानियान नामक पुस्तक का नाम लिया जा सकता है। इस पुस्तक में ईरान में इस्लामी क्रांति के संबंध में किए शोध का वर्णन किया गया है। इसी प्रकार उन्होंने अरूज़ी समरक़ंदी की पुस्तक चहार मक़ाले का अंग्रेज़ी में अनुवाद भी किया है।
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5 बहमन सन 1357 हिजरी क़मरी को शाह की सरकार द्वारा ईरान के विभिन्न नगरों में दो से अधिक लोगों का एक स्थान पर इकट्ठा होना वर्जित कर दिया गया किंतु इसके बावजूद जनता ने सैनिक सरकार की चेतावनियों और धमकियों की कोई परवाह किये बिना शाह की सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन किये। कड़ी दमनात्मक कार्रवाइयों से भी जनता को नियंत्रित करने में सेना को सफलता न मिल सकी बल्कि इस प्रकार की कार्रवाइयों से देश भर में लोगों ने प्रदर्शन किये और भारी संख्या में लोग सेना के हाथों शहीद हुए। आज ही के दिन ईरानी वायु सेना के बहुत से अधिकारी सड़कों पर उतर आए और उन्होंने शाह की सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन करते हुए इमाम ख़ुमैनी के प्रति अपनी निष्ठा की घोषणा की।

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29 जमादिल अव्वल सन 1274 हिजरी क़मरी को ईरान के प्रसिद्ध धर्मगुरू और साहित्यकार आयतुल्लाह शैख़ मुहम्मद क़ासिम ऊर्दूबादी का ईरान के पश्चिमोत्तरी नगर तबरीज़ में जन्म हुआ। वे अपनी माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के बाद इराक़ के पवित्र नगर नजफ़ गये और प्रसिद्ध धर्मगुरुओं से शिक्षा प्राप्त की। वरिष्ठ धर्म गुरू बनने के बाद वे अपने पैतृक नगर लौट आए और शिक्षा देने तथा पुस्तकें लिखने में व्यस्त हो गये। उन्होंने विभिन्न पुस्तकें लिखी हैं । आयतुल्लाह ऊर्दूबादी का 1333 हिजरी क़मरी में स्वर्गवास हो गया।

29 जमादिल अव्वल सन 1279 हिजरी क़मरी को अरब जगत के विख्यात शायर और साहित्यकार अब्दुल बाक़ी बिन सुलैमान फारुक़ी का निधन हुआ। उन्होंने युवावस्था में ही शायरी में ख्याति प्राप्त कर ली थी। उन्हे पैग़म्बरे इसलाम और उनके परिजनों से विशेष लगाव था जिसे उनकी शायरी में स्पष्ट रुप से देखा जा सकता है। उन्होंने पैग़म्बरे इस्लाम और उनके परिजनों के बारे में कई पुस्तकें लिखीं। इन पुस्तकों में अल बाक़ियातुस्सालेहात का नाम लिया जा सकता है।
