Jan २२, २०१७ १७:२१ Asia/Kolkata

अतिवादी दक्षिणपंथी विचारधारा के विस्तार ने यूरोपीय देशों और यूरोपीय यूनियन में राजनैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक समीकरण बदल दिए हैं।

टीकाकारों का कहना है कि वर्ष 2008 में यूरोप को भीषण आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा जिसके परिणाम में वित्तीय संकट से निपटने के लिए कटौती की नीति, यूरोप की ओर से पलायनकर्ताओं की लहर, रूस से यूरोपीय यूनियन की तनावपूर्ण नीति और आतंकवाद के बढ़ते ख़तरों से यूरोप में अतिवादी दक्षिण पंथियों की बढ़ती गतिविधियों और इस्लामोफ़ोबिया का मार्ग समतल हुआ। यूरोप में हालिया कुछ वर्षों के दौरान होने वाले चुनावों और जनमत संग्रहों में इन लोगों ने बहुत अधिक सफलताएं अर्जित की और उनकी सफलताओं का यह क्रम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

अतिवादी दक्षिणपंथी विचारों में वृद्धि ने यूरोप में मध्यमार्गी वामपंथियों और पारंपरिक दक्षिणपंथियों के मध्य पायी जाने वाली सीमा को महत्वहीन कर दिया है या सीमा ही समाप्त कर दी है। यूरोप की पारंपरिक पार्टियों विशेषकर मध्यमार्गी कंज़रवेटिव पार्टियां, समाज में अपने जनाधार को बचाने और चरमपंथी वामदलों के प्रभाव को कम करने के लिए सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनैतिक मंचों पर चरमपंथी दक्षिणपंथी पार्टियों के नारे तक दोहराने लगे हैं। जिन क्षेत्रों में यूरोप की कंज़रवेटिव पार्टी, चरमपंथी दक्षिण पार्टियों से निकट हुई है उनमें से एक शरणार्थियों का विरोध, विदेशियों का विरोध और इस्लामोफ़ोबिया है। दूसरी ओर यूरोप के पारंपरिक दक्षिणपंथी दल का वर्ष 2008 के वित्तीय संकट के बाद और आर्थिक कटौती के कार्यक्रमों के लागू होने के बाद जनाधार समाप्त हो गया और मध्यमार्गी दक्षिणी पंथी पार्टी के बहुत से पारंपरिक समर्थक, वाम दलों या कट्टरवादी दक्षिणपंथियों में शामिल हो गये हैं।

हालिया कुछ वर्षों में यूरोपीय देशों में होने वाले चुनावों में पारंपरिक वामपंथी पार्टियों को बुरी तरह पराजय का सामना करना पड़ा और यूरोप के किसी भी देश में पारंपरिक मध्यमार्गी वाम पंथी पार्टियों के सत्ता में वापस लौटने की अधिक उम्मीद नज़र नहीं आती। यहां तक कि उन यूरोपीय देशों में जहां इन्होंने अपनी दो ध्रुवीय व्यवस्था की अब तक रक्षा कर रखी है, मध्यमर्गी वामपंथी और दक्षिणपंथी पार्टियां न केवल यह कि सरकार बनाने में सक्षम नहीं हैं बल्कि यह पार्टियां, कमज़ोर सरकार बनाने या विपक्षी दलों तथा या छोटी पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाने पर विवश हैं कि जिनके साथ गठबंधन के मज़बूत रहने की कोई गैरंटी नहीं है।  वर्ष 2016 में स्पेन इन देशों में से एक था। छह महीने के दौरान होने वाले दो चुनावों में पीपल्ज़ कंज़रवेटिव पार्टी सरकार बनाने के लिए संसद में बहुमत प्राप्त करने में विफल रही और आख़िरकार एक कमज़ोर पार्टी से साथ मिलकर सरकार बनाने पर विवश हो गयी। इसके मुक़ाबले में मुख्य स्पेन में सोशलिस्ट पार्टी की दोनों चुनाव में कुछ सीटें कम हुयीं।

यूरोप में चुनावों और जनमत संग्रहों में प्रतिस्पर्धा का रूख़ , वाम पंथी और मध्यमार्गी दक्षिणपंथी पार्टी से हट कर से मध्यमार्गी दक्षिणपंथियों और कट्टरपंथी दक्षिणपंथियों की ओर मुड़ गया है। बहुत से यूरोपीय देशों में दक्षिणपंथी और मध्यमार्गी वामपंथी पार्टियां, कटटरवादी दक्षिणपंथ की ओर से रुझहान से मुक़ाबले के लिए एक दूसरे से निकट हो गयी हैं और कुछ मामलों में कट्टरपंथी दक्षिणपंथ के विरुद्ध एकजुट भी हो गयी हैं। जर्मनी के प्रांतीय चुनावों में या फ़्रांस के क्षेत्रीय और निकाय चुनावों में यह स्थिति देखी गयी। फ़्रांस में सोशलिस्ट पार्टी की लोकप्रियता में कमी के दृष्टिगत ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्ष 2017 के राष्ट्रपति चुनाव में असल मुक़ाबला मध्यमार्गी दक्षिणपंथ प्रत्याशी फ़्रांस्वा फ़्यून और राष्ट्रीय मोर्चे की मारीन लोपेन के मध्य होगा। मारीन लोपेन के बारे मे कहा जाता है कि उनका रुझहान इस्लामोफ़ोबिया की ओर अधिक है और वह शरणार्थियों की कड़ी विरोधी भी है।

अगस्त 2017 में जर्मनी में होने वाले संसदीय चुनाव के बारे में अनुमान लगाया जा रहा है कि कट्टरपंथी दक्षिणपंथी पार्टी अलटरनेटिव फ़ार जर्मन प्रांतीय चुनाव में ज़बरदस्त सफलता प्राप्त करते हुए 16 में से 10 प्रांतों में जीत दर्ज करेगी और इस प्रकार वह संसदीय चुनावों में भी ज़बरदस्त सफलता प्राप्त कर सकती है।

आस्ट्रिया के राष्ट्रपति चुनाव में भी दक्षिणपंथी और मध्यमार्गी वामपंथी पार्टियां पहले ही चरण में मैदान से बाहर हो गयीं और ग्रीन पार्टी और कट्टरपंथी वापदल दूसरे चरण के चुनाव में पहुंच गयीं। वर्ष 2017 में हालैंड के संसदीय चुनाव में सर्वेक्षण से पता चलता है कि इस्लामोफ़ोबिया के क्षेत्र में सक्रिय ग्रेट वेल्डर्ज़ के नेतृत्व में फ़्रीडम कट्टरपंथी दक्षिणपंथी, मध्यमार्गी वामदल और दक्षिणपंथियों के लिए मुख्य चुनौती बन गया है।

इटली में भी फ़ाइव स्टार पार्टी संसदीय चुनाव में दूसरे नंबर पर है यह पार्टी यूरोपीय संघ के विरुद्ध और यूरो की कड़ी विरोधी है। सर्वक्षणों से पता चलता है कि वर्ष 2017 में मध्यावधि चुनाव होने की स्थिति में यह पार्टी मध्यमार्गी दक्षिण पंथियों और वामपंथियों को कड़ी टक्कर देगी। यूरोप के दूसरे देशों में भी कहीं ज़्यादा तो करी कम कटटरवादी दलों दक्षिणपंथी ने राजनैतिक समीकरण और पार्टियों के मध्य सीमों को  बुरी तरह धराशायी किया है। यूरोप में राजनैतिक पार्टियों के मध्य सीमाओं के परिवर्तन  से वर्ष 2017 में यूरोपीय संघ के लिए गंभीर चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं। कट्टरपंथी दक्षिणपंथी दलों के शरणार्थी विरोधी दृष्टिकोणों और इस्लामोफ़ोबिया के दृष्टिगत, आस्थाओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दम भरने वाले यूरोपीय देशों में इस्लाम विरोधी कार्यवाहियों में वृद्धि देखी जा सकती है।

 

इस परिवर्तन के कारण यूरोप में कट्टरपंथी पहचानना ज़रूरी लगता है। यूरोप में कट्टरपंथी दक्षिणपंथी विचार धारा कैसे पैदा हुई, उसके लक्ष्य क्या हैं, उनके रूझहान क्या हैं? यूरोप में इस्लाम विरोधी रुझहानों के बढ़ने से यूरोप में रहने वाले मुसलमान अल्पसंख्यकों की स्थिति क्या होगी।

कुल मिलाकर कट्टरपंथी दक्षिणपंथी दल की परिभाषा में शोधकर्ताओं के मध्य गंभीर मतभेद पाये जाते हैं और यहां तक कि कुछ स्थानों पर शोधकर्ताओं का कहना है कि कट्टरपंथी दक्षिणपंथी दलों की परभाषा की परिधि में कुछ ग़ैर क़ानूनी संस्थाएं और आतंकी गुट भी शामिल होते हैं। सामाज और राजनीति शास्त्र के बुद्धिजीवी, चुनौतीपूर्ण, अप्रसन्नता, आपत्ति जताने वाले, विदेशियों का भय पैदा करने वाले, वैश्विककरण के विरोधी, साथ साथ रहने वालों के विरोधियों और कट्टरपंथी राष्ट्रवादी के लिए यूरोप में कट्टरपंथी दक्षिणपंथ शब्द का प्रयोग करते हैं। इन सबके बावजूद कि हम वैश्विककरण के नये काल में कट्टरपंथी दक्षिणपंथी दल के परिवर्तन के बारे में बात करते हैं, इस बात में हमको ग़लती नहीं करना चाहिए कि कट्टरपंथी दक्षिणपंथी दल को इस काल में केवल एक नई प्रक्रिया के रूप में और फांसीवादी विचार धारा से उसके संबंध की अनेदखी में ढूंढा जाए। आज के काल में कट्टरपंथी वाम दल, प्राचीन काल के फांसीवादी ही हैं जो नये वेष के साथ कट्टरपंथी वामदल के रूप में सामने आया है। दक्षिणपंथी दलों के विचारों पर वर्तमान स्थिति के पड़ने वाले प्रभाव से पता चलता है कि कट्टरपंथी वाम सुनोयोजित प्रक्रिया है जिसमें विभिन्न प्रकार गुट और रुझहान वाले लोग सक्रिय हैं जो आपनी आडियालोजी को बनाने में एक दूसरे से भिन्न हैं। इनमें से कुछ गुट एक दूसरे के साथ सहयोग करते हैं और कुछ दूसरों से प्रतिस्पर्धा करते हैं यहां तक कि उनके विरुद्ध संघर्ष भी करने से नहीं चूकते। वर्ष 2006 में फ़्रेडरश एबर्ट संस्था ने बुद्धिजीवियों के साथ कट्टरपंथी दक्षिणपंथी की सही परिभाषा जानने के लिए एक बैठक की। इस बैठक में कट्टरपंथी दक्षिणपंथी दल की परिभाषा इस प्रकार की गयी। कट्टरपंथी दक्षिणपंथ एक ऐसी विचारधारा का उदाहरण है जो असमानता के मुक़ाबले में संयुक्त दृष्टिकोण पेश करते हैं। यह राजनैतिक मंच पर तानाशाही, लोकतांत्रिक और नाज़िज़्म जैसे विभिन्न रूपों में स्वयं को पेश करते हैं और समाजिक मंच पर यह लोग विदेशियों के विरोधी और डारविन के समाजिक सिद्धांत से संपन्न होते हैं।

राजनीति शास्त्र के बुद्धिजीवी कारपेर एग्नाज़ी का कहना है कि कट्टरपंथी दक्षिणपंथी दलों को दो गुटों में विभाजित किया जा सकता है। पहला गुट मूल रूप से प्राचीन पारंपरिक पार्टियों के वारिस और फांसीवाद से कम से कम संपर्क के कारण उसकी वारिस हैं। दूसरा गुट नई परंपरा से हटकर कट्टरपंथी दक्षिणपंथी दल हैं और यूरोपीय देशों के चुनावों में कट्टरपंथी वामदलों ने जो सफलताएं अर्जित की हैं वह कट्टरपंथी दक्षिणपंथी दल का दूसरा गुट हैं। इन पार्टियों ने शरणार्थियों के विरुद्ध उठने वाली लहरों पर सवार होकर चुनावों में ज़बरदस्त जीत दर्ज की। उनका कहना है कि शरणार्थियों का मुद्दा, सामान्य मुद्दे से कहीं अधिक है और इसको बहुत बड़ा मुद्दा समझते हैं। इस प्रकार के कट्टरपंथी दक्षिणपंथी दलों की दो महत्वपूर्ण विशेषताएं हैं। यह चाहती हैं कि पलायनकर्ताओं के विरुद्ध पायी जाने वाली भावनाओं के आधार पर मतदाताओं के विचारों को परिवर्तित कर दें और उनके शरणार्थी विरोधी रुझहानों के कारण, दूसरी पार्टियां उनकी सदैव अलोचना और निंदा करती रहती हैं।