यूरोप में इस्लामोफ़ोबिया और दक्षिणपंथी विचारधारा में वृद्धि 2
यूरोप में इस्लामोफ़ोबिया और दक्षिणपंथी विचारधारा के बारे में यह हमारा दूसरा कार्यक्रम है।
यूरोप में दक्षिणपंथी विचारधारा की जड़ें बहुत गहरी हैं और पिछली एक शताब्दी से वहां इस विचारधारा का विस्तार हो रहा है। यूरोपीयों ने पांच करोड़ इंसानी जानों और दसियों देशों के विनाश के रूप में इसकी भारी क़ीमत चुकाई है, 1930 के दशक में जर्मनी में न्यू नाज़ियों का सत्ता पर क़ब्ज़ा, 1920 के दशक में इटली में फासिवादियों का सत्ता में आना और दूसरे विश्व युद्ध के रूप में उन्हें इसकी क़ीमत अदा करनी पड़ी। यूरोप में दूसरे विश्व युद्ध की कड़वी यादों के बाद, दक्षिणपंथियों के सत्ता में पहुंचने का भय लोगों के दिलों में बैठ चुका है।
हालांकि हालिया कुछ वर्षों में दाएं और बाएं बाज़ू की पार्टियों की नीतियों के कारण, यह डर किसी हद तक कम हो चुका है। दाएं बाज़ू की चरमपंथी पार्टियां हालिया वर्षों में कई यूरोपीय देशों में चुनाव जीत चुकी हैं और यूरोप में राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मुख्य धारा में शामिल हो चुकी हैं। हालांकि यूरोप में दक्षिणपंथी पार्टियों और न्यू नाज़ी एवं फासिवादी पार्टियों के बीच अंतर है। पिछले कार्यक्रम में हमने चरमपंथी दक्षिणपंथी पार्टियों की चर्चा की थी।
दक्षिणपंथी विचारधार के विस्तार के इतिहास को तीन चरणों में बांटा जा सकता है। दूसरे विश्व युद्ध और फासिवाद की पराजय के बाद, अधिकांश यूरोपीय देशों में राजनीतिक व्यवस्था स्थिर हो गई। इस नई व्यवस्था में दक्षिपंथी पार्टियां एक दम से ख़त्म तो नहीं हुईं, लेकिन जातिवादी एवं यहूदी विरोधी नारों के कारण, अलग थलग पड़ गईं। फासिवाद की पराजय, आर्थिक विकास, बेरोज़गारी में कमी और जातिवाद के फीका पड़ने के कारण, दक्षिणपंथी पार्टियां अप्रासंगिक हो गईं। 1970 के दशक में दक्षिणपंथी विचारधारा के उभरने का दूसरा चरण है। स्कैंडेनेवियाई देशों में कर विरोधी पोपुलिस्ट पार्टियों ने प्रगति की। इसके बावजूद, बीसवीं सदी के अंतिम एक चौथाई भाग में नए आंदोलनों और पार्टियों का उदय हुआ, जो लोगों का समर्थन प्राप्त करने में सफल रहीं। इस काल में इन पार्टियों की लोकप्रियता में उल्लेखनीय है वृद्धि हुई। उदाहरण स्वरूप, ऑस्ट्रिया की फ़्रीडम पार्टी की लोकप्रियता 1986 में 5 प्रतिशत थी, जबकि 1999 में यह बढ़कर 27 प्रतिशत हो गई। फ़्रांस की राष्ट्रीय मोर्चा पार्टी एक कमज़ोर पार्टी से मज़बूत पार्टी में बदल गई और हर चुनाव में उसे कम से कम 10 प्रतिशत वोट प्राप्त होते हैं। वास्तव में 1980 के दशक से पहले तक दक्षिपंथी विचारधारा का मतलब, न्यू फ़ाशिज़्म था। इटली की एमएसआई केवल ऐसी पार्टी थी, जो ख़ुद को कट्टर दक्षिणपंथी बताती थी और उसे फासिवादी पार्टी माना जाता था। लेकिन 1980 के दशक में सबकुछ बदल गया और राजनीति के मैदान में नई पार्टियों का उदय हुआ। इस दशक के शुरू में 6 नई पार्टियों ने संसद में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, दशक के अंत तक इनकी संख्या बढ़कर 10 हो गई और 1990 के दशक के मध्य तक यह संख्या 15 हो गई। इक्कीसवीं सदी में प्रवेश के साथ ही, इन पार्टियों ने मुख्य धारा बनने और सत्ता हासिल करने के लिए प्रयास तेज़ कर दिए और इनमें से कुछ को सफलता भी प्राप्त हुई। इटली में एलएन पार्टी कैबिनेट में शामिल हो गई। 2002 में नीदरलैंड की दक्षिणपंथी पार्टी एलपीएफ़ ने 17 प्रतिशत मत प्राप्त किए और संसद में 36 सीटें जीतकर कैबिनेट में भागीदार बन गई। उसी साल फ़्रांस में राष्ट्रीय मोर्चा पार्टी के नेता जॉन मैरी लोपन ने लगभग 50 लाख वोट प्राप्त करके समाजवादी उम्मीदवार ल्योनल जोस्पन को हरा दिया और जैक शीराक के साथ दूसरे चरण में मुक़ाबला किया, इस प्रकार यूरोप और दुनिया का ध्यान उनकी ओर गया। फ़्रांस के राष्ट्रपति चुनाव में लोपन के दूसरे चरण में पहुंचने को यूरोपीय मीडिया ने देश में राजनीतिक भूकम्प बताया। आम विचारधारा के विपरीत इन पार्टियों की लोकप्रियता में वृद्धि होती गई।
जॉन मैरी लोपन की बेटी मैरियन लोपन ने 2012 में राष्ट्रीय मोर्चा पार्टी का नेतृत्व किया और लगभग 18 प्रतिशत मत प्राप्त किए। कुछ समाज शास्त्रियों का मानना है कि इन पार्टियों के उदय को फासिवाद का उदय नहीं माना जाना चाहिए। हालांकि कुछ अवसरों पर इन दोनों के बीच कुछ समानताएं पायी जा सकती हैं।
वर्तमान कट्टरवादी दक्षिणपंथी पार्टियां, दो विश्व युद्धों के बीच की परिस्थितियों के बिल्कुल विपरीत परिस्थितियों में उभरी हैं। इन पार्टियों ने ऐसे वातावरण में कि जब शीत युद्ध अपने अंतिम दौर में था और साम्यवाद का पतन हो रहा था। ग्लोबलाइज़ेशन, यूरोपीय एकता, अप्रवासन और बहु संस्कृतिवाद के माहौल में प्रगति की। इन पार्टियों के वर्गीकरण में मोटे तौर पर उन पार्टियों, संस्थाओं और गुटों को शामिल किया जा सकता है, जो हिंसात्मक गतिविधियों में भी शामिल हो जाते हैं। विचारधारा के आधार पर कट्टर दक्षिणपंथी पार्टियों के वर्गीकरण में शोधकर्ताओं के दृष्टिकोण अलग अलग हैं। उन्हीं में से एक के आधार पर, इन्हें दो धड़ों में बांटा जा सकता है, पारम्परिक पार्टियां जिनका रूझान न्यू फ़ाशिज़्म की ओर है और नई पार्टियां जो पोपुलिस्ट रूझान रखती हैं। पारम्परिक धड़ा सफल नहीं रहा, लेकिन नई विचारधारा को फ़्रांस, ऑस्ट्रिया, इटली, नीदरलैंड और स्विट्ज़रलैंड जैसे देशों में उल्लेखनीय है भूमिका है सफलता प्राप्त इस धड़े ने फासिवाद से दूरी अपनाते हुए उदार दृष्टिकोण अपनाया।
कट्टर दक्षिणपंथी विचारधारा में विविध विशेषताओं के साथ साथ विरोधाभासी विशेषताएं भी पायी जाती हैं, जिसके कारण उनकी पहचान में कठिनाई होती है। इन विशेषताओं में इस्लाम विरोधी पहचान, ग्लोबलाइज़ेशन का विरोध, यूरोपीय संघ का विरोध और पोपुलिस्ट शनाख़्त के विरोध का उल्लेख किया जा सकता है। वर्तमान समय में इस प्रक्रिया का विस्तार ब्रिटेन, फ़्रांस, बेल्जियम, नीदरलैंड, ऑस्ट्रिया और नॉर्डिक देशों में हो रहा है। यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के लिए ब्रिटेन में आयोजित होने वाला जनमत संग्रह, ब्रिटेन की स्वाधीन राष्ट्रीय पार्टी के अप्रवासी विरोध के प्रचार के बाद हुआ है।
ब्रिटिश प्रधान मंत्री डेविड कैमरन ने इस आशा के साथ कि अप्रवासियों को निंयत्रित करने में वह यूरोपीय संघ से विशिष्टताएं प्राप्त कर सकते हैं, यूरोपीय संघ से बाहर जाने के मुद्दे पर जनमत संग्रह का आयोजन कराया। कैमरन ब्रिटेन के यूरोपीय संघ में बने रहने के पक्ष में थे और उन्हें आशा थी कि ब्रिटेन की अधिकांश जनता इसके पक्ष में वोट करेगी लेकिन जनमत संग्रह के नतीजे कैमरन की आशा के बिल्कुल विपरीत थे। जनमत संग्रह के नतीजों का एलान करते हुए ब्रिटिश प्रधान मंत्री ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया।
अब फ़्रांस की राष्ट्रीय मोर्चा पार्टी और नीदरलैंड की फ़्रीडम पार्टी ने भी यूरोपीय संघ से निकलने के लिए जनमत संग्रह के आयोजन की मांग की है। कट्टर दक्षिणपंथी पार्टियां समस्याओं को दूसरों के कांधों पर लादने का प्रयास कर रही हैं। समाज शास्त्रियों का मानना है कि कट्टर दक्षिणपंथी सत्ताधारी व्यवस्था के विरोधी, लोकतंत्र और जनतंत्र विरोधी हैं। अधिकांश समाज शास्त्रियों के अनुसार, कट्टर दक्षिणपंथी राष्ट्रवाद पर सबसे अधिक बल देते हैं। कट्टर दक्षिणपंथियों की पांच विशेषताओं का उल्लेख किया गया हैः राष्ट्रवाद, जातिवाद, अप्रवासी फ़ोबिया, लोकतंत्र विरोध और एक वर्चस्ववादी सरकार का गठन। अधिकांश समाज शास्त्रियों के निकट यह कट्टर दक्षिणपंथियों की प्रमुख विशेषताए हैं।