मंगलवार- 28 जनवरी
28 जनवरी वर्ष 1950 को न्यायाधीश हरिलाल जेकिसुनदास कनिया ने उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का पद सम्भाला।
28 जनवरी वर्ष 1556 को मुग़ल शासक हुमायूँ की मौत हुई।
28 जनवरी वर्ष 1813 को युनाइटेड किंगडम में पहली बार 'प्राइड एंड प्रेजुडिस' किताब का प्रकाशन हुआ।
28 जनवरी वर्ष 1835 को पश्चिम बंगाल में कलकत्ता मेडिकल कॉलेज की शुरुआत हुई।
28 जनवरी वर्ष 1860 को ब्रिटेन ने औपचारिक रूप से निकारागुआ को मास्क्विटो तट लौटा दिया।
28 जनवरी वर्ष 1878 को 'येल डेली न्यूज़' युनाइटेड स्टेट्स में प्रकाशित होने वाला पहला दैनिक समाचारपत्र बना।
28 जनवरी वर्ष 1878 को अमेरिका के न्यू हेवन में पहला टेलीफोन एक्सचेंज बना।
28 जनवरी वर्ष 1887 को फ्रांस की राजधानी पेरिस में एफिल टाॅवर का काम शुरू।
28 जनवरी वर्ष 1909 को क्यूबा पर से अमेरिका का नियंत्रण समाप्त हो गया।
28 जनवरी वर्ष 1909 को सेना के प्रथम भारतीय सेनाध्यक्ष के.एस. करियप्पा का जन्म हुआ।
28 जनवरी वर्ष 1932 को जापानी सेना ने शंघाई (चीन) पर कब्ज़ा किया।
28 जनवरी वर्ष 1933 को चौधरी रहमत अली ख़ाँ ने मुस्लिम लीग की मांग के तहत बनने वाले अलग राष्ट्र के लिए पाकिस्तान का नाम सुझाया।
28 जनवरी वर्ष 1933 को कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़े भारतीय मुस्लिम और नेशनल मुस्लिम मूवमेंट के संस्थापक रहमत अली चौधरी ने देश में मुस्लिम बहुल राज्याें के संघ का नाम पाकिस्तान सुझाया।
28 जनवरी वर्ष 1935 को आइसलैंड गर्भपात को क़ानूनी स्वीकृति देने वाला पहला देश बना।
28 जनवरी वर्ष 1939 को आयरिश कवि विलियम बटलर योटस का निधन।
28 जनवरी वर्ष 1942 को जर्मनी की सेना ने लीबिया के बेंगाजी पर कब्जा किया।
28 जनवरी वर्ष 1943 को एडोल्फ़ हिटलर ने जर्मनी के सभी युवकों को फ़ौज में जबरन भर्ती का आदेश दिया।
28 जनवरी वर्ष 1945 को अमेरिकी ट्रकों का काफ़िला बर्मा रोड से पहली बार गुजरा।
28 जनवरी वर्ष 1950 को न्यायाधीश हीरालाल कानिया ने उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का पद सम्भाला।
28 जनवरी वर्ष 1961 को एचएमटी घड़ियों की पहली फैक्ट्री की आधारशिला बेंगलुरु में रखी गयी।
28 जनवरी वर्ष 1962 को अमेरिकी अंतरिक्ष यान चांद पर पहुँचने में असफल रहा।
28 जनवरी वर्ष 1964 को दक्षिणी रोडेशिया में दंगे भड़के।
28 जनवरी वर्ष 1986 को कैप कैनवरल फ़्लोरिडा से उड़ान भरने के बाद अमेरिकी अंतरिक्ष शटल 'चैलेंजर' में विस्फोट हुआ और सभी सात अंतरिक्ष यात्री मारे गए।
28 जनवरी वर्ष 1986 को 25वें अंतरिक्ष यान (51एल)- चैलेंजर 10 में उड़ान भरने के 73 सेकंड बाद ही विस्फोट हो गया।
28 जनवरी वर्ष 1992 को अल्ज़ीरिया में तीन दशक तक सत्ता में रहने के बाद 'नेशनल लिबरेशन फ़्रंट' ने इस्तीफ़ा दिया।
28 जनवरी वर्ष 1997 को चेचेन्या के विद्रोही नेता जनरल असलन मस्कादेपू काकेशियाई गणराज्य के राष्ट्रपति चुने गये।
28 जनवरी वर्ष 1998 को 'राजीव गांधी हत्याकांड' में 26 अभियुक्तों को मृत्युदंड।
28 जनवरी वर्ष 1999 को भारत में पहली बार संरक्षित भ्रूण से मेमने का जन्म।
28 जनवरी वर्ष 2000 को अंडर -19 का युवा विश्वकप क्रिकेट के फ़ाइनल में भारत ने श्रीलंका को हराया।
28 जनवरी वर्ष 2002 को झारखंड के गुमला ज़िले में बारूदी सुरंग विस्फोट से 9 पुलिसकर्मियों सहित 11 मारे गये।
28 जनवरी वर्ष 2002 को पाकिस्तान में आतंकवादी संगठन द्वारा एक अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल का अपहरण।
28 जनवरी वर्ष 2003 को पश्चिम बंगाल के हावड़ा ज़िले में एक बस और तेल टैंकर में हुई भिड़न्त में 42 मरे व कई घायल हुए।
28 जनवरी वर्ष 2005 को पुर्तग़ाल के सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई बम विस्फोट के अभियुक्त अबू सलेम के प्रत्यर्पण की इजाजत दी।
28 जनवरी वर्ष 2006 को फ़्रांस की एमेली मास्को ने आस्ट्रेलियाई ओपन टेनिस का महिला एकल ख़िताब जीता।
28 जनवरी वर्ष 2008 को निजी क्षेत्र की कंपनी 'जिंदल पावर एंड स्टील लिमिटेड' का लाभ बढ़ा।
28 जनवरी वर्ष 2008 को थाइलैंड की संसद ने दक्षिण पंथी समक सुंदरावेज को देश का प्रधानमंत्री निर्वाचित किया।
28 जनवरी वर्ष 2010 को बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति मुजीबुर्रहमान के 5 हत्यारों को फ़ांसी पर लटकाया गया।
28 जनवरी वर्ष 2013 को जॉन कैरी अमेरिका के विदेश मंत्री बने।
सर हरिलाल जेकिसुनदास कनिया का जन्म वर्ष 1890 में सूरत के एक मध्यम वर्ग परिवार में हुआ था। उनके दादा गुजरात में ब्रिटिश सरकार के लिए राजस्व अधिकारी थे, और उनके पिता, जेकिसुनदास, भावनगर रियासत के शामलदास कॉलेज में संस्कृत प्राध्यापक और फिर प्रधानाचार्य थे। उनके बड़े भाई, हीरालाल जेकिसुनदास, भी वकील थे। हीरालाल जेकिसुनदास के बेटे मधुकर हीरालाल जेकिसुनदास भी 1987 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश, और आगे चलके मुख्य न्यायाधीश बने।

1925 में कनिया का विवाह सर चुन्नीलाल मेहता की बेटी कुसुम मेहता से हुआ। कनिया ने 1910 में शामलदास कॉलेज से कला स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की, और शासकीय विधी महाविद्यालय, बम्बई से 1912 में विधी स्नातक और 1913 में उसी विषय में स्नताकोत्तर की उपाधि प्राप्त की थी। अपनी पढ़ाई ख़त्म करने के बाद कनिया बम्बई के उच्च न्यायालय में वकील के तौर पर काम करने लगे। वकालत के साथ-साथ, थोड़े समय के लिए वह इंडिया लॉ रिपोर्ट्स के कार्यकारी सम्पादक भी थे। 1930 में कुछ वक़्त के लिए वह बम्बई उच्च न्यायालय में कार्यकारी न्यायाधीष बने और जून 1931 में वह उसी न्यायालय में अपर न्यायाधीष नियुत्त हुए। यह पद उन्होने 1933 तक सम्भाला। इसके बाद सहयोगी न्यायाधीष के रूप में नियुक्त होने के लिए कनिया ने तीन महीने इंतेज़ार किया। इन तीन महीनों के लिए वह फिर वकालत को लौटे और अंततः जून 1933 में उनकी पदोन्नति हुई।
28 जनवरी सन 1725 ईसवी को रूस में रोमानोफ़ परिवार के तीसरे नरेश पीटर महान का 53 वर्ष की आयु में निधन हुआ। वे सन 1969 ईसवी में सिंहासन पर बैठे। उनका मानना था कि गर्म पानी तक पहुँच, रुस को सबसे महान समुद्री और व्यापारिक शक्ति में परिवर्तित कर देगी। इसी कारण उन्होंने कालासागर की ओर रुख़ किया। पीटर महान की यह भी योजना थी कि वे उसमानी शासन और पोलैंड तथा स्वीडन के माध्यम से योरोप की ओर बढ़े। उन्हें इस योजना में किसी सीमा तक सफलता भी मिली। उन्होंने योरोप के विकसित देशों से संबंध बढ़ाकर रुस में बहुत से सुधार किये। वे एक निर्दयी और क्रूर व्यक्ति थे। वे अपने लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए कोई भी काम करने से पीछे नहीं हटते थे इसी कारण उनके शासन काल में लोग उनके अतिक्रमण से सुरक्षित न थे।
28 जनवरी सन 1882 ईसवी को मोरक्को के राष्ट्रवादी और स्वतंत्रताप्रेमी नेता अमीर अब्दुल करीम रीफ़ी का जन्म हुआ। उन्होंने युवावस्था से अपने देश पर फ़्रांस और स्पेन के अधिकार के विरुद्ध संघर्ष आरंभ किया और पहाड़ी क्षेत्रों में उन्होंने कई गुट बनाए। उल्लेखनीय है कि प्रथम विश्व युद्ध में स्पेन ने अपनी सीमाओं को विस्तृत करने की नीति के अंतर्गत मोरक्को में कई बार लोगों का जनसंहार किया। मोरक्को में स्वतंत्रता की लड़ाई के चरम सीमा पर पहुँच जाने के बाद फ़्रांस ने हज़ारों मोरक्को वासियों को मौत के घाट उतार दिया। इस प्रकार से फ़्रांस और स्पेन के विरुद्ध 18 वर्षों तक चलने वाला स्वतंत्रता संघर्ष कुचल दिया गया। संघर्ष की विफलता के बाद अब्दुल करीम रीफ़ी और उनके साथ कई नेताओं को 1926 में गिरफ़तार करके देशनिकाला दे दिया गया। जिसके बाद अब्दुल करीम मिस्र चले गये और वहॉ वे अब्दुन्नासिर के नेतृत्व में जनता के विदुद्ध अमरीका एवं ज़ायोनी शासन संघर्ष में शामिल हो गये।
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8 बहमन सन 1357 हिजरी शम्सी को ईरान में शाह के पिटठू प्रधान मंत्री शापूर बख़्तयार ने घोषणा की कि वह इस्लामी क्रान्ति के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी से मिलने के लिए पेरिस जा रहा है किंतु इमाम ख़ुमैनी ने बख़्तयार के इस भ्रांति में डालने वाले क़दम के बारे में कहा: जो कहा जा रहा है कि मैं शापूर बख़्तियार को प्रधान मंत्री के रुप में स्वीकार करता हूँ, निरा झूठ है। जब तक वे त्यागपत्र नहीं दे देते मैं उनसे नहीं मिलूंगा। इसी प्रकार आज के दिन जनता तेहरान के मेहराबाद हवाई अड्डे पर एकत्रित हुई ताकि इमाम ख़ुमैनी के भव्य स्वागत के लिए तैयारियां की जा सके।

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2 जमादिस्सानी सन 193 हिजरी क़मरी को अब्बासी शासक हारून रशीद की मृत्यु हुई। वो सन 170 हिजरी को सत्ता में पहुंचा। आरंभ में उसकी सरकार का नियंत्रण उसकी मां के हाथ में था। अपनी मॉ की मृत्यु के बाद हारून रशीद ने यहिया बरमकी को अपना मंत्री बनाया और फिर सत्ता संबंधी मामले यहया बरमकी और उनके पुत्रों के हाथ में चले गये। हारून रशीद एक सत्ता लोभी शासक था और वो पैग़म्बरे इस्लाम के परिजनों तथा उनके समर्थकों का कटटर शत्रु था और उनके साथ कड़ाई का बरताव करता था।
अंतत:आज के दिन जब वो अपने विरोधियों के विद्रोह को कुचलने के लिए ख़ुरासान की यात्रा पर था तो उसकी मृत्यु हो गयी।
2 जमादिस्सानी सन 1338 हिजरी क़मरी को ईरान के साहित्यकार और धर्मगुरू मिर्ज़ा हसन आक़ा तबरेज़ी का निधन हुआ। उन्होंने आरंभिक शिक्षा अपनी मातृभूमि तबरेज़ और उच्चस्तरीय शिक्षा इराक़ के नजफ़ नगर में प्राप्त की और फिर स्वदेश लौट कर वे 40 वर्ष तक शिक्षा एवं प्रशिक्षण में व्यस्त रहे।