बुधवार- 29 जनवरी
29 जनवरी सन 1693 ईसवी को जॉन फिलिप रैमो नामक फ़्रांसीसी संगीतकार का डिजवन नगर में जन्म हुआ।
उन्होंने स्फूल की शिक्षा के साथ ही संगीत भी सीखा और युवावस्ता तक पहुँचते संगीत के विशेषज्ञ ही संगीत भी सीखा और युवावस्था तक पहुँचत संगीत के विशंषज्ञ हो गये। उन्हें पश्चिम संगीत के जनमों में गिना जाता है।
- 29 जनवरी सन् 1528 में मुग़ल साम्राज्य वंश के संस्थापक बाबर ने मवाड़ के राजा राणा साँगा को हराकर चंदेरी के क़िले पर क़ब्ज़ा किया।
- 29 जनवरी सन् 1676 में ‘थियोडोर तृतीय’ रूस के ज़ार बने।
- 29 जनवरी सन् 1780 में देश के पहले समाचार पत्र ‘हिक्की गजट’ या ‘बंगाल गजट’ या कलकत्ता जनरल एडवरटाइज़र का कोलकाता से प्रकाशन आरंभ हुआ।
- 29 जनवरी सन् 1916 में ‘प्रथम विश्व युद्ध’ में फ़्रांस पर जर्मनी ने पहली बार हमला किया।
- 29 जनवरी सन् 1949 में ब्रिटेन ने ज़ायोनी शासन को मान्यता दी।
- 29 जनवरी सन् 1976 में सोवियत संघ अंगोला में राजनीतिक समझौते के लिए सहमत हुआ।
- 29 जनवरी सन् 1978 में वायुमंडल की ओजोन परत पर होने वाले दुष्प्रभाव के कारण एयरोसोल स्प्रे को प्रतिबंधित करने वाला पहला देश स्वीडन बना था।
- 29 जनवरी सन् 1989 में सीरिया और ईरान ने लेबनान में संघर्ष रोकने के लिए समझौता किया।
- 29 जनवरी सन् 1992 में भारत आसियान का क्षेत्रीय सहयोगी बना।
- 29 जनवरी सन् 1996 में फ़्रांस के राष्ट्रपति जैक्स शिराक ने भविष्य में परमाणु परीक्षण पर रोक लगाने की घोषणा की।
- 29 जनवरी सन् 2006 में भारत के तेंज़ इरफ़ान पठान टेस्ट क्रिकेट में पहले ओवर में हैट्रिक लेने वाले विश्व के पहले गेंदबाज़ बने।
29 जनवरी सन 1713 ईसवी को क्लोड क्लेरों नामक फ़्रांसीसी गणितज्ञ का पेरिस में जन्म हुआ। वे बचपने से ही गणित में विशेष रुचि रखते थे। 18 वर्ष की आयु में वे फ़्रांस की विज्ञान एकेडमी के सदस्य बन गये और 23 वर्ष की आयु में उन्हें गणित के क्षेत्र में विशेष रुप से ख्याति प्राप्त हो गयी। सन 1765 ईसवी में क्लोड क्लेरों का निधन हुआ।
29 जनवरी सन 1921 ईसवी को मलिक फैसल प्रथम को ब्रिटेन द्वारा तैयार की गयी भूमिका के आधार पर इराक़ का नरेश चुना गया। वे मक्का के शासक हुसैन बिन अली के पुत्र थे। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन ने हुसैन बिन अली को वचन दिया था कि यदि वे जर्मनी के घटक उसमानी शासन के विरुद्ध विद्रोह करें तो उन्हे सऊदी अरब का नेरश बना दिया जाएगा किंतु लंदन सरकार ने अपने वचन की अनदेखी करते हुए सऊदी अरब में अब्दुल अज़ीज़ बिन सऊद की सरकार का समर्थन किया और हुसैन बिन अली का दिल रखने के लिए उनके बेटे फैसल को सीरिया का नरेश नियुक्त कर दिया किंतु फ़्रांस ने जिकसका सीरिया पर नियंत्रण था लंदन के इस निर्णय का विरोध किया और फैसल को सीरिया से निकाल दिया जिसके बाद लंदन ने उन्हें इराक़ का नरेश बना दिया जो ब्रिटेन के निंयत्रण में था। वे सन 1933 में अपने निधन तक इराक़ के नरेश रहे और ब्रिटेन की साम्राज्यवादी नीतियों का संरक्षण करते रहे।

29 जनवरी सन 1963 ईसवी को अमरीका के शायर रॉबर्ट फ़्रास्ट का निधन हुआ। वे सन 1847 ईसवी में पैदा हुए थे। आरंभ में फ्रांसट ने अपने पिता की भांति पत्रकारिता की किंतु शायरी से अधिक से अधिक लगाव के कारण उन्होंने चार बार साहित्य का पुलिट्ज़र पुरस्कार जीता।

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3 जमादिस्सानी सन 11 हिजरी क़मरी को पैग़म्बरे इस्लाम की महान सुपुत्री हज़रत फ़ातेमा ज़हरा की शहादत हुई। पैग़म्बरे इस्लाम की सेवा में रहकर उन्होंने इस्लामी नियमों का ज्ञान प्राप्त किया उनके पति हज़रत अली अलैहिस्सलाम थे। उन्होंने इमाम हसन तथा इमाम हुसैन जैसे महान पुत्रों को जन्म दिया। उन्होंने अपना पूरा जीवन निर्धनों की सहायता ईश्वर की उपासना और महिला जाति के मार्गदर्शन में बिताया।
उनका एक कथन है जो व्यक्ति ईश्वर और प्रलय पर विश्वास रखता है उसे चाहिए अपनी ज़बान से अच्छी बात ही निकाले नहीं तो चुप रहे। ईश्वर सदाचारियों सहनशील और पवित्र लोगों से प्रेम करता है। वह बुरी बातें कहने वालों से अप्रसन्न होता है।

3 जमादिउस्सानी सन 1273 हिजरी क़मरी को ईरान के प्रसिद्ध धर्मगुरू और शोधकर्ता मीर सैयद हसन मुदर्रिस इस्फ़हानी का 63 वर्ष की आयु में स्वर्गवास हो गया। उनका जन्म 1210 हिजरी क़मरी में इस्फ़हान में हुआ था। उन्होंने आरंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने समय के प्रसिद्ध धर्मगुरूओं से धार्मिक शिक्षा प्राप्त की और शिक्षा पूरी करने के बाद अपने पैतृक नगर में शिक्षा देने लगे। वह ज्ञान के उस शिखर पर पहुंचे थे कि उस समय के प्रसिद्ध विद्वान और शोधकर्ता उनसे ज्ञान प्राप्त करने आते थे। उन्होंने इसी प्रकार कई महत्त्वपूर्ण पुस्तकें लिखी हैं जिनमें जवामेउल कलाम और अबू अली सीना की प्रसिद्ध पुस्तक शिफ़ा पर उनके फ़ुट का नाम लिया जा सकता है।
