शनिवार- 1 फ़रवरी
1979, 14 वर्षों तक निर्वासित जीवन बिताने के बाद ईरान की इस्लामी क्रांति के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी ईरान वापस लौटे।
1790, अमरीका के न्यूयॉर्क शहर में पहली बार 'सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ द यूनाइटेड स्टेट्स' का आयोजन किया गया।
1793, फ़्रांस ने ब्रिटेन और नीदरलैंड के ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा की।
1797, लार्ड कॉर्नवालिस ने बंगाल के गवर्नर जनरल के पद की शपथ ली।
1814, फिलीपींस में ज्वालामुखी फटने से क़रीब 1,200 लोगों की मौत हो गई।
1835, ईस्ट इंडिया कंपनी ने दार्जिलिंग को सिक्किम के पट्टे पर लिया।
1855, ईस्ट इंडिया रेलवे का विधिवत उद्घाटन हुआ।
1881, दिल्ली के सबसे पुराने कॉलेज सेंट स्टीफ़न कॉलेज की स्थापना हुई।
1884, ऑक्सफ़ोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी का पहला वॉल्यूम 'ए टू आंट' का प्रकाशन हुआ।
1908, पुर्तग़ाल नरेश कार्लास प्रथम और युवराज लुइस फ़िलिप की लिस्बन में हत्या हुई तथा मैनुअल द्वितीय शासक बने।
1922, महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन तेज़ करने की जानकारी भारत के वायसराय को दी।
1949, 'प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया' ने 'एसोसिएटेड प्रेस ऑफ इंडिया' का अधिग्रहण कर लिया।
1953, नीदरलैंड, बेल्जियम, इंग्लैंड और स्कॉटलैंड में आई बाढ़ से 2500 से ज्यादा लोगों की मौत हुई जिसमें सिर्फ नीदरलैंड में ही 1836 लोग मारे गए।
1958, मिस्र और सीरिया को मिलाकर 'यूनाइटेड अरब रिपब्लिक' नाम के संघ का गठन किया गया, जो सिर्फ़ 1961 तक बाक़ी रहा।
1974, साओ पाउलो, ब्राज़ील में 25 मंज़िला बैंक की इमारत में आग से 227 लोगों की मृत्यु हो गई।
1979, 14 वर्षों तक निर्वासित जीवन बिताने के बाद ईरान की इस्लामी क्रांति के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी ईरान वापस लौटे।
1985, भारत के पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी मोहम्मद अज़हरूद्दीन ने कानपुर में शतक बनाकर लगातार तीन टेस्ट मैचों में शतक बनाकर विश्व रिकार्ड बनाया।
1992, केन्द्रशासित प्रदेश दिल्ली को नया नाम 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली' दिया गया।
2002, अमरीकी पत्रकार डेनियल पर्ल की आतंकवादियों ने सिर क़लम करके हत्या कर दी।
2003, अंतरिक्ष से वापिस लौटते वक़्त हुई 'कोलम्बिया यान दुर्घटना' में भारतीय मूल की कल्पना चावला समेत 7 अंतरिक्ष यात्री मारे गये।
2004, सऊदी अरब में हज यात्रा के दौरान मची भगदड़ में 251 लोगों की मौत और 244 घायल हुए।
पहली फ़रवरी सन 1753 ईसवी को फ़्रांस के राजनीतिज्ञ गणितज्ञ एवं जनरल, लाज़ार कारनो का जन्म हुआ। यह विद्वान जिन्हें नवीन अंक गणित के पंडितों में गिना जाता है सैनिक रणनीतियों में भी पूर्णत: दक्ष थे। फ़्रांस के क्रान्तिकारियों की सफलता में प्रभावशाली भूमिका निभाने वालों में कारनो का नाम भी शामिल है। क्रान्ति की सफलता के बाद फ़्रांस के युद्ध मंत्रालय सहित अन्य कई बड़े पदों पर वे असीन रहे। 1823 ईसवी में उनका निधन हुआ।
1 फ़रवरी सन 1814 ईसवी को रोतीर नामक स्थान पर इसी नाम से रक्तरंजित युद्ध हुआ। यह युद्ध ओब नदी के निकट प्रॉस स्वेडन और ऑस्ट्रिया के एक लाख साठ हज़ार सैनिकों और फ़्रांस के 42 हज़ार सैनिकों के बीच हुआ। फ़्रांस की सेना की कमान नेपोलियन बोनापार्ट के हाथ में थी। इस युद्ध में फ़्रांस की सेना जो उत्साह के अभाव और सैनिक संख्या की कमी का शिकार थी, संयुक्त सेना के ताज़ा दम सैनिकों से हार गयी। बोनापार्ट की पराजय के साथ ही यह लड़ाई समाप्त हुई।

1 फ़रवरी सन 1946 ईसवी को नार्वे के नेता ट्रेग्वे लाई को संयुक्त राष्ट्र संघ का प्रथम महासचिव चुना गया।
1 फ़रवरी सन 1908 ईसवी को पुर्तगाल के राजा कार्रलोस प्रथम की उनके पुत्र के साथ लिसबन में हत्या कर दी गयी।
1 फ़रवरी सन 1992 ईसवी को अमरीका के राष्ट्रपति जार्ज बुश सीनियर और रूस के राष्ट्रपति बोरिस येल्तसीन ने कैम्प डेविड घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किये। इस घोषणा पत्र के अनुसार दोनो देशों ने एक दूसरे को अपना शत्रु न समझने का संकल्प किया था।
1 फ़रवरी सन 2000 ईसवी को न्यू मैक्सिको की लॉस एलेम्स राष्ट्रीय प्रयोगशाला में वैज्ञानिकों ने एड्ज़ के जीवाणुओं की उत्पत्ति का पता लगाने की घोषणा की। वैज्ञानिकों के अनुसार इन रोगाणुओं की उत्पत्ति 1930 ईसवी के आस पास हुई।
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12 बहमन सन 1357 हिजरी शम्सी को ईरान की इस्लामी क्रान्ति के संस्थापक स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी ने 15 वर्ष के निर्वासन के बाद अपने देश ईरान की धरती पर दोबारा क़दम रखा।
इमाम ख़ुमैनी की स्वदेश वापसी से लोगों के हर्षोल्लास की सीमा न रही।
ईरान की जागरूक जनता ने इमाम ख़ुमैनी का अनुदाहरणीय भव्य स्वागत किया। इमाम ख़ुमैनी ने तेहरान के मेहराबाद हवाई अडडे पर जनता के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए एक छोटा सा भाषण दिया और फिर क्रान्ति के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए तेहरान के कबरिस्तान बहिशते ज़हरा गये और फिर वहॉं अत्यंत महत्वपूर्ण भाषण दिया जिसके दौरान उन्होंने ईरान के तत्कालीन प्रधान मंत्री बख़तियार को एक बार पुन: अमरीका का पिटठू घोषित किया और कहा कि जनता के सहयोग से मैं सरकार का गठन करूंगा । बहिशते ज़हरा से लौटकर इमाम ख़ुमैनी ने एक साधारण से आवास में रहना आरंभ किया और इस्लामी क्रान्ति को आगे बढ़ाते रहे यहॉं तक कि दस दिन बाद 22 बहमन सन 1357 हिजरी शम्सी को इस्लामी क्रान्ति सफल हो गयी। इमाम ख़ुमैनी की वापसी की तिथि अर्थात 12 बहमन से इस्लामी क्रान्ति की सफलता की तिथि अर्थात 22 बहमन के बीच दस दिनों को ईरान में स्वतंत्रता प्रभात का नाम दिया गया है और हर वर्ष ईरान में इन दिनों जश्न मनाए जाते हैं।

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6 जमादिस्सानी सन 437 हिजरी क़मरी को ईरान के लेखक और शायर नासिर ख़ुसरो क़ुबादियानी ने विभिन्न देशों की अपनी सात वर्षीय यात्रा आरंभ की। उन्होंने उस यात्रा में मिस्र के तत्कालीन हेजाज़ अर्थात वर्तमान सऊदी अरब और रोम आदि देशों का दौरा किया। इस लम्बी यात्रा के अनुभवों को नासिर ख़ुसरो ने एक पुस्तक में लिखा है जिसे विभिन्न पहलुओं से महत्व प्राप्त है। इसे साहित्यिक धरोहर होने के अतिरिक्त ऐतिहासिक और भौगोलिक जानकारियों का भंडार होने की दृष्टि से भी बहुत महत्व प्राप्त है।