रविवार- 2 फ़रवरी
2 फ़रवरी सन 1792 ईसवी को ऑस्ट्रिया के तानाशाह लियोपोल्ड और प्रॉस के नरेश फ़्रेडरिक गयूम के बीच बर्लिन समझौते पर हस्ताक्षर हुए।
यह समझौता फ़्रांस की क्रान्ति का मुक़ाबला करने के लिए दो अगस्त 1719 ईसवी को पेल नेट्ज़ में दोनों पक्षों के बीच होने वाली सहमति का परिणाम था। क्योंकि कुछ योरोपीय शासक फ़्रांस में सामने आने वाले क्रान्तिकारी विचारों से भयभीत थे। इस समझौते और ऑस्ट्रिया प्रॉस तथा ब्रिटेन द्वारा फ़्रांस पर आक्रमण और फ़्रांस की राजशाही व्यवस्था के समर्थकों द्वारा विदेशियों का साथ दिए जाने के बावजूद फ़्रांस की क्रान्ति सफलता तक पहुंची।
- 2 फ़रवरी सन् 1509 में भारत में दीव (गोवा, दमन और दीव) के पास पुर्तग़ाल व तुर्की के बीच युद्ध हुआ।
- 2 फ़रवरी सन् 1556 में चीन के शैन्सी प्रांत में आये ज़बरदस्त भूकंप में करीब लाखों लोगों की मौत हुई।
- 2 फ़रवरी सन् 1626 में चार्ल्स प्रथम इंग्लैंड के सम्राट बने।
- 2 फ़रवरी सन् 1878 में यूनान ने तुर्की के ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा की।
- 2 फ़रवरी सन् 1892 में रशिया ने कैलिफ़ोर्निया में ‘फ़र ट्रेडिंग कॉलोनी’ की स्थापना की।
- 2 फ़रवरी सन् 1901 में क्वीन विक्टोरिया का अंतिम संस्कार हुआ।
- 2 फ़रवरी सन् 1913 में न्यूयार्क में ‘ग्रैंड सेंट्रल टर्मिनल’ की ओपनिंग हुई।
- 2 फ़रवरी सन् 1920 में फ़्रांस ने मैमेल पर क़ब्ज़ा किया।
- 2 फ़रवरी सन् 1922 में जेम्स जॉयस का लिखा उपन्यास ‘यूलिसिस’ पहली बार प्रकाशित किया गया।
- 2 फ़रवरी सन् 1939 में हंगरी ने सोवियत संघ के साथ संबंध समाप्त किये।
- 2 फ़रवरी सन् 1952 में भारत ने मद्रास में पहला टेस्ट क्रिकेट जीता।
- 2 फ़रवरी सन् 1953 में अखिल भारतीय खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड का गठन किया गया।
- 2 फ़रवरी सन् 1966 में पाकिस्तान ने ‘कश्मीर समझौते’ के लिए एक महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया।
- 2 फ़रवरी सन् 1992 में अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश एवं रूस के राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन द्वारा शीत युद्ध की समाप्ति की घोषणा।
- 2 फ़रवरी सन् 2007 में अंतर्राष्ट्रीय पैनल (आईपीसीसी) ने ग्लोबल वार्मिंग पर रिपोर्ट प्रस्तुत की।
2 फ़रवरी सन 1844 ईसवी को ब्रिटेन के वैज्ञानिक जॉन डेल्टन का 78 वर्ष की आयु में निधन हुआ। गहन अध्ययन के बाद उन्होंने भौतिक शास्त्र तथा रसायन शास्त्र सहित विज्ञान के कई विषयों में बहुत से अविष्कार किये। उन्होंने विभिन्न गैसों के मिश्रण के नियम का भी पता लगाया। इसी प्रकार रंगों के विशलेषण तथा मिश्रण से पैदा होने वाले सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभावों का पता भी उन्होंने लगाया।
2 फ़रवरी सन 1971 ईसवी को योगान्डा के सेनाधिकारी मेजर जनरल ईदी अमीन ने सैनिक शासक के रूप में इस देश की सत्ता संभाली। उन्होंने देश को चलाने के लिए 18 सदस्यों का एक मंत्रिमंडल बनाया था।
2 फरवरी सन 1907 ईसवी को डीमित्री ऐवेनोविच मेन्डलिफ़ नामक रुसी वैज्ञानिक का 73 वर्ष की आयु में सेन्ट पीटर्ज़बर्ग में निधन हुआ। वे सन 1834 ईसवी में जन्मे और रासायनशास्त्र के क्षेत्र में अपनी शिक्षा पूरी की। उन्होंने पृथ्वी पर मौजूद रसायनिक तत्वों को सुव्यवस्थित तालिका बनाई।

2 फ़रवरी सन 1970 ईसवी को ब्रिटेन के दार्शनिक ब्रट्रेन्ड रसेल का 97 वर्ष की आयु में निधन हुआ। उन्होंने सन 1950 में सहित्य का नोबल पुरस्कार प्राप्त किया।
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13 बहमन सन 1357 हिजरी शम्सी को ईरान के शासक शाह के समर्थक अमरीकी विदेश मंत्रालय ने इमाम ख़ुमैनी के 12 बहमन के भाषण और उसमें अमरीका की हस्तक्षेप पूर्ण नीतियों के मुक़ाबले में अपने दृष्टिकोण की घोषण के बाद इस भाषण को अमरीका विरोधी बताया। शाह ने भी इमाम ख़ुमैनी की ईरान वापसी पर अपनी चिंता व्यक्त की क्योंकि उसे ज्ञात था कि इमाम ख़ुमैनी और ईरान की क्रान्तिकारी जनता उसके कटटर विरोधी हैं। पूर्व सोवियत संघ की सरकारी न्यूज़ एजेंसी तास ने भी इमाम ख़ुमैनी की ईरान वापसी पर अपनी प्रतिक्रिया जताते हुए लिखा कि इमाम ख़ुमैनी के ईरान में प्रवेश से इस देश में जारी संघर्ष अपने निर्णायक चरण में पहुंच गया है।
दूसरी ओर भारी संख्या में लोग तेहरान के अलवी मदरसे में इमाम ख़ुमैनी से मिलने गये। इमाम ख़ुमैनी ने इस अवसर पर भाषण दिया और शाह की सरकार को तर्क एवं मानवाधिकार का विरोधी बताया। और घोषणा की कि हर राष्ट्र को अपने भविष्य के निर्धारण का अधिकार है।

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7 जमादिस्सानी सन 525 हिजरी क़मरी को ईरान के विख्यात धर्मगुरू ऐनुल क़ोज़ात हमदानी को फॉसी देकर शहीद कर दिया गया। वे महान धर्मगुरू और बड़े कवि थे। सन 462 में उनका जन्म हुआ। वे बहुत ही साहसी व्यक्ति थे सत्य बोलने से तनिक भी नहीं हिचकिचाते थे। उपनी बे लाग बातों के कारण सन 525 हिजरी क़मरी में वे सुल्तान संजर सलजुक़ी के मंत्री के आदेश पर गिरफ़तार करके बग़दाद की जेल में डाले दिए गये। कुछ दिन बाद उन्हें उनकी मातृभूमि हमदान में लाकर उनकी पाठशाला के अंदर फॉसी दे दी गयी। उन्होंने कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं है।
7 जमादिस्सानी सन 643 हिजरी क़मरी को मिस्र के विद्वान बहाउददीन अबुल अब्बास का क़ाहेरा में निधन हुआ। वे क़ाज़ी अशरफ़ के नाम से प्रसिद्ध थे। उन्होंने उपने पिता के ही समान क़ाहेरा में न्यायाधीश के पद पर आसीन रहकर इस बड़े और संवेदनशील दायित्व का निर्वाह किया। उन्हें तत्कालीन वरिष्ठ धर्मगुरुओं से पैगम्बरे इस्लाम के कथनों को सुनने और उन्हें एकत्रित करने का बड़ा शौक़ था। उनके द्वारा लिखी गयी पुस्तकों में केवल एक ही सुरक्षित रह गयी है जो पैगम्बरे इस्लाम के कथनों का संकलन है उन्होने इसे अपने हाथ से लिखा।