Jan ३१, २०१७ ०९:२४ Asia/Kolkata

तेहरान के केन्द्र में स्थित तेहरान की सबसे ऊंची पुरानी इमारत आग लगने से पूरी तरह ढह गयी जिसके मलबे में दब कर कुछ दमकलकर्मी हताहत हो गये जिसके बाद पूरे ईरान में शोक व्याप्त हो गया।

आज के कार्यक्रम में हम ईरानी नागरिकों की जान बचाने के लिए बलिदानी व त्यागी दमकल कर्मियों के बारे में चर्चा करेंगे।

आग की ज्वाला जब उठती है तो लोगों की नज़रें उन बीर दमकलकर्मियों की प्रतीक्षा बरने लगती देते हैं जो कभी भी आग और उसके भयावह चेहरे से भयभीत नहीं होते। आग की धधकती ज्वाला में अपनी जान की परवाह किए बिना कूद पड़ना और लोगों को वहां से सुरक्षित निकालना, हर एक के बस की बात नहीं है, यह दमकल कर्मी हैं जो अपने दायित्व के प्रति इतने प्रतिबद्ध होते हैं कि उनको अपनी ख़ुशी और दुख की परवाह नहीं होती। अभी कुछ दिन पहले तेहरान में एक ऐसी ही घटना घटी, तेहरान की सबसे प्राचीन बहुमंज़िला इमारत में आग लग गयी और देखते ही देखते आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया और फिर एक बार ही पूरी इमारत ढह गयी। इमारत में लगी आग को नियंत्रित करने वाले दमकलकर्मी भी इस इमारत के मलबे में दब गये। इमारत के अचानक गिरने और उसमें लोगों व दमकल कर्मियों के दब जाने की घटना ने पूरे ईरान को शोकाकुल कर दिया। हर ओर लोग अपनी भीगी आंखों से मलबे के नीचे दबे लोगों के ज़िंदा निकलने की दुआएं कर रहे हैं।

 

तेहरान के व्यापारिक कांप्लेक्स में से एक प्लास्को भी था जिसका निर्माण 53 वर्ष पहले किय गया था। इस इमारत में पिछले गुरुवार को आग लगी, आग इतनी भीषण थी कि लगभग तीन घंटे के बाद पूरी इमारत ध्वस्त हो गयी। घटना की सूचना मिलते ही वीर दमकल कर्मी घटना स्थल पर पहुंच गये और आग की लपटों को नियंत्रित करने का भरसक प्रयास करने लगे। दमकलकर्मी आग के कुछ भाग को नियंत्रित करने में सफल रहे और उन्होंने आग को पूरी तरह नियंत्रित करने का प्रयास जारी रखते हुए इमारत में मौजूद व्यापारियों के माल और उनकी संपत्ति को अधिक से अधिक सुरक्षित करने का प्रयास किया। दमकल कर्मियों ने इमारत के भीतर फंसे लोगों को बाहर निकाला और वह चप्पे चप्पे में जाकर लोगों को तलाश करके निकालने का प्रयास कर रहे थे कि अचानक इमारत को हे वाले भीषण नुक़सान की वजह से यह बहुमंज़िला इमारत कुछ ही क्षण में ध्वस्त हो गयी। इस घटना में बीस से अधिक वीर दमकल कर्मी जिन्होंने कुछ देर पहले तक सैकड़ों लोगों की जान बचाई थी, लोगों की नज़रों के सामने इमारत के मलबे में दब गये।

इस हृदय विदारक घटना ने पूरे ईरान को आश्चर्यचकित कर दिया। ईरान और दुनिया के संचार माध्यम इस घटना की क्षण क्षण की सूचना दे रहे थे। ईरानी जनता को किसी दूसरी चीज़ की परवाह नहीं थी वह बस इस घटना और मलबे के नीचे दबे लोगों के बारे में चिंतित थी। सोशल मीडिया और संचार माध्यम इस हवाले से ताज़ा और नये समाचार देने में व्यस्त हो गये। सहायताकर्मी, पुलिस, सेना और इंजीनियर, घटना स्थल पर पहुंच गये ताकि इमारत के दैत्याकार मलबे के नीचे दबे लोगों को सुरक्षित निकाल सकें। भारी मात्रा में लोहे और फौलाद का मलबा और मबले के नीचे धधकती आग के कारण मलबे के नीचे का तापमान 200 सेन्टीग्रेट से अधिक हो गया जिसके कारण दमकल कर्मियों और इंजीनियर्स का कार्य और भी कठिन हो गया था। मलबे को जितना हटाया जाता, मबले के नीचे से आग की ज्वाला उतनी ही भड़क उठती थी और मलबे के नीचे दबे हुए साथियों के जीवित रहने की आशा धीरे धीरे कम होती जा रही थी। उन दमकलकर्मियों की भीगी ऑंखों और भरभराते हुए काधों ने जिन्होंने अपनी आंखों के सामने अपने सहकर्मियों को मलबे में दबते हुए देखा था और लोगों हक्का बक्का चेहरों ने ऐसा दर्दनाक मंज़र पेश किया जिससे आठ करोड़ ईरानी जनता शोकाकुल हैं।

 

ईरान का इतिहास अपने वीर सपूतों के साहस, बलिदान और त्याग की घटनाओं से भरा हुआ है। यह साहसी और बलिदानी लोग यदि न होते तो ईरान का इतिहास वैसा न होता जैसा आज है। ईरानियों के लिए “शहीद” शब्द बहुत परिचित और पवित्र है। इस्लामी संस्कृति में सबसे अच्छी और सुन्दर मौत, शहादत है। इस्लामी संस्कृतिक में जो व्यक्ति ईश्वर के मार्ग में संघर्ष करते हुए मारा जाता है उसे शहीद कहा जाता है। इसी आधार पर इस्लामी कथनों में आया है कि यदि कोई व्यक्ति मुसलमानों की सेवा करते हुए या उनके जान व माल और उनके सम्मान की रक्षा करते हुए मारा जाए वह भी शहीद है और उसे भी शहीदों की श्रेणी में रखा जाता है।

दूसरों की तुलना में शहीद का स्थान परलोक में सबसे ऊंचा और सबसे अच्छा होगा। पैग़म्बरे इस्लाम का कहना है कि वह लोग जो मुसलमानों को बाढ़ या आग के ख़तरे से मुक्ति दिलाते हैं वह स्वर्ग में अवश्य जाएंगे।

भौतिकतावादकें आज के अंधकारमयी संसार में बहुत से लोग भौतिक मायामोह और नैतिक आनंदों से अधिक नहीं देखते। वास्तव में दुनिया में छायी भौतिकवादी संस्कृति, त्याग और बलिदान जैसे सर्वोच्च मूल्यों का स्थान ले ही नहीं सकती। सैक्युलरिज़्म के नैतिक मूल्य इस प्रकार के बलिदान को मानवीय समाज के जारी रहने के लिए आवश्यक समझता है और त्यागियों व बलिदानियों की सराहना और प्रशंसा करता है किन्तु एक बुद्धिमान व्यक्ति के सामने इस बात को ठोस तर्क नहीं पेश कर सकता कि बलिदान क्यों करना चाहिए। वह व्यक्ति जो मनुष्य के जीवन और उसके अस्तित्व को ज़िंदगी और मौत के मध्य सीमित समझता है, वह हर क़ीमत पर अपनी ज़िंदगी की रक्षा करता है चाहे इसके लिए दूसरों की जान ही क्यों न लेनी पड़े।

स्वभाविक सी बात है कि इस प्रकार का व्यक्ति दूसरों के लिए अपने जीवन को ख़तरे में डालने को मूर्खता समझता है। हालांकि मनुष्य  प्रवृत्ति अंधकारमयी संसार में कहीं न कहीं, सच्चाई का पता देती और भौतिकवाद में डूबी दुनिया में कभी कभार बलिदान और त्याग का नमूना देखने को मिल जाता है किन्तु भौतिकवाद में घिरी दुनिया से हमेशा इस प्रकार की सर्वोच्च आशा नहीं की जा सकती। इन सबके बावजूद इस्लामी संस्कृति के कारण ईरानियों ने अपने अतीत के इतिहास को जारी और बाक़ी रखते हुए बहुत से स्थानों पर त्याग और बलिदान के नमूने पेश किए हैं। यह वही संस्कृति है जिसने एक बार फिर इतिहास रच दिया। साहसिक दमकलकर्मियों ने अपनी जान को गंवा दी किन्तु दूसरे सैकड़ों लोगों की जान बचा ली। वह अपनी मौत को नुक़सान और विनाश नहीं समझते थे क्योंकि उनको पता था कि प्रलय में वह अपने ईश्वर के सामिप्य में कल्याण भरा जीवन प्राप्त करेंगे। यही वह आस्था है जो नायक बनाती और मनुष्य के जीवन में चार चांद लगा देती है।

 

यद्यपि ईरान और ईरानी जनता को बहुत दुख है किन्तु सहृदयता और प्रेम का वह मंच दिखा जिसने ईरान का पूरी दुनिया में नाम ऊंचा किया । यह भावना ईरानी समाज की ऐसी परत है जिससे लोग अपरिचित है जो दुख और ख़तरे के अवसर पर पूरे ईरान  पर हो चाती है। इस घटना के आरंभ में ही जिससे भी जो हो सका उसने भरपूर सहायता की। बहुत से लोग जब रात के समय उनको घटना की सूचना मिली घटना स्थल पर पूरी रात खड़े रहे और भीगी आंखों से दुआएं करते रहे। रक्तदान की घोषणा होते ही तेहरान के हज़ारों लोग रक्तदान केन्द्रों पर रक्तदान करने पहुंच गये। दूसरे शहर के दमकल कर्मी बिना बुलाए ही तेहरान में अपने साथियों की मदद के लिए पहुंच गये। विश्व विद्यालय के छात्रों और छात्राओं ने दमकल विभागों के सामने दुआ के कार्यक्रम आयोजित किए। महिलाएं, बच्चे और पुरुष, भीगी आंखों से दमकल विभाग पहुंचे और शहीदों की सेवाओं में श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

प्लास्को एक व्यापारिक इमारत थी जिसके जलने से छह सौ से अधिक दुकानें और कारख़ाने जल कर राख हो गये। प्लास्को की इमारत में जिन लोगों की दुकानें और कारख़ाने थे,  उनके क़र्जदाताओं ने यह खुलकर घोषणा कर दी कि जब तक यह लोग पैसे देने की क्षमता नहीं रखते हम अपने बक़ाया राशि नहीं लेंगे। शहीदों की कुछ माताएं और पत्नियां जिन्होंने अपनी बेटों और पतियों को ईश्वर के मार्ग में जेहाद के दौरान खो दिया था, घटना के दूसरे ही दिन प्लास्को के शहीदों के परिजनों से मुलाक़ात करने पहुंच गयीं और उन्होंने प्लास्को के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह कारनामे अभी यहीं पर समाप्त नहीं हुए बल्कि लोगों ने प्लास्को का मलबा हटाने वाले इंजीनियरों, वहां पर तैनात डाक्टरों और अधिकारियों के लिए खाने और नाशते का भी प्रबंध किया ताकि वे बिना किसी विलंब के अपने काम को जारी रख सकें। ईरानी जनता के हर वर्ग के लोग जिस से जो हो सकता है निसंकोच सहायता कर रहा है।

आज ईरान के आठ करोड़ लोग 25 दमकलकर्मियों के शोक में डूबे हुए हैं। ये ऐसे युवा थे जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों की जान बचाई और अपनी जान क़ुरबान करके एक बार फिर मानवीय और इस्लामी मूल्यों को जीवित कर दिया।