Feb ०१, २०१७ ०९:३२ Asia/Kolkata

1451, सुल्तान महमत द्वितीय ने उस्मानी साम्राज्य की गद्दी संभाली।

1503, पुर्तग़ाली और उस्मानी साम्राज्य के बीच दीव की लड़ाई भारत के दीव में हुई।

1690, मेसाचुसेट्स उपनिवेश ने अमरीका में पहली बार कागज़ की मुद्रा वितरित की।

1760, सदाशिव राव भाऊ के नेतृत्व में मराठा सेना ने उदगीर के युद्ध में निज़ाम को हरा दिया।

1815, विश्व में पनीर उत्पादन का पहला कारख़ाना स्विट्ज़रलैंड में खोला गया।

1916, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना हुई।

1925, भारत की पहली बिजली संचालित ट्रेन सेवा मुम्बई से कुर्ला के बीच शुरू हुई।

1934, पहली बार विमान से पार्सल भेजने का सिलसिला शुरू हुआ। इसे शुरू करने वाले कंपनी को आज लुफ्थांसा के नाम से जाना जाता है।

1945, रूस, द्वितीय विश्व युद्ध में जापान के ख़िलाफ़ शामिल होने पर सहमत हुआ।

1970, भारत के पहले और दुनिया के सबसे बड़े कोयला आधारित उर्वरक संयंत्र की तलचर में आधारशिला रखी गई।

1972, जापान के सप्पारो में एशिया में पहली बार शीतकालीन ओलंपिक का आयोजन किया गया।

1988, पहली परमाणु पनडुब्बी (आईएनएस चक्र) भारतीय सेना में शामिल हुई।

2005, भारतीय मूल के पहले सांसद दलीप सिंह सौंद को सम्मानित करने के लिए अमरीकी प्रतिनिधी सभा में लाए गये विधेयक को आम राय से मंज़ूरी मिली।

2006, मिस्र का जहाज़ अल सलाम-98 लाल सागर में डूबा गया।

 

3 फ़रवरी सन 1809 ईसवी को जर्मनी के संगीतकार फलिक्स मेन्डलसन बारटोल्डी का हैमबर्ग नगर में जन्म हुआ। बाल्यकाल से ही उन्हें संगीत से गहरा लगाव हो गया और युवावस्था तक पहुँचते पहुँचते उन्हें जर्मनी के बड़े कलाकारों में गिना जाने लगा।

38 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ।

 

3 फ़रवरी सन 1915 ईसवी को प्रथम विश्व युद्ध के दौरान स्वेज़ नहर पर, जो ब्रिटेन के नियंत्रण में थी, जर्मनी और उसमानी शासन की संयुक्त सेनाओं ने आक्रमण किया चूँकि स्वेज़ नहर भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ती है इस लिए दोनों पक्षों के लिए इस नहर पर अधिकार करना अत्यंत महत्वपूर्ण और लाभदायक था। यदि यह नहर ब्रिटेन के अधिकार से निकल जाती तो एशिया में उसके उपनिवेश खतरे में पड़ जाते। इसी लिए ब्रिटिश सैनिकों ने संयुक्त सेना के आक्रमण का कड़ा प्रतिरोध किया और आक्रमणकारियों को पराजित किया। 1956 ईसवी में मिस्र के राष्ट्रपति जमाल अब्दुन्नासिर द्वारा इस नहर के राष्ट्रीयकरण की घोषण किये जाने तक यह ब्रिटेन के अधिकार में रही।

 

3 फ़रवरी सन 1943 ईसवी को जर्मनी और पूर्व सोवियत संघ के बीच स्टालिनग्राड नामक रक्तरंजित युद्ध समाप्त हुआ। इसमें सोवियत संघ की सेना को विजय प्राप्त हुई। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी की सेना ने सोवियत संघ के बड़े भाग पर अधिकार कर लेने के बाद महत्वपूर्ण नगर स्टालिनग्राड पर 17 जुलाई सन 1942 से आक्रमण आरंभ किया किंतु भीषण सर्दी और खाद्य सामग्री के अभाव और इसी प्रकार सोवियत संघ की सेना के निरंतर आक्रमण के कारण जर्मन सेना घिर गयी और भारी क्षति उठाने के बाद उसने हथियार डाल दिए। यही विफलता जर्मनी की पराजय के क्रम का आरंभ बिंदु बन गयी। स्टालिनग्राड को अब वोल्गोग्राड कहा जाता है।

 

3 फ़रवरी सन 1966 ईसवी को रुस का चालक रहित अंतिरक्ष यान लूना 9 चंद्रमा पर पहली बार पूर्ण नियंत्रण में रहते हुए उतरा।

 

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14 बहमन सन 1357 हिजरी शम्सी को जब ईरान में चारों ओर इमाम ख़ुमैनी की स्वदेश वापसी पर जश्न का क्रम जारी था। इमाम ख़ुमैनी ने एक संवाददाता सम्मेलन में ईरान की इस्लामी शासन व्यवस्था की भावी नीतियों का उल्लेख किया और घोषणा की कि शीघ्र ही वे अन्तरिम क्रान्ति सरकार का गठन करेंगे। इमाम ख़ुमैनी ने इसी प्रकार कहा कि इस अन्तरिम सरकार का दायित्व होगा कि जनमत संग्रह की भूमिका तैयार करे ताकि संविधान की रचना के बाद उस पर लोगों की राय ज्ञात हो सके। इमाम ख़ुमैनी ने इसी प्रकार शाह के पिटठू प्रधान मंत्री शापूर बख़्तियार को चेतावनी दी कि यदि जनता का दमन जारी रहा तो वे जेहाद का आदेश दे देंगे। उन्होंने इसी प्रकार सेना से कहा कि वह जनता से मिल जाए। दूसरी ओर यह समाचार भी मिला कि 35 हज़ार अमरीकी ईरान की भूमि से निकल गये हैं और शेष दस हज़ार भी शीघ्र ही ईरान छोड़ देंगे।

 

14 बहमन सन 1368 हिजरी शम्सी को फ़ारसी साहित्य के प्रसिद्ध प्रोफ़ेसर सैयद हसन सादात नासिरी का अफ़ग़ानिस्तान के दौरे के दौरान निधन हो गया। उन्होंने अपने जीवन को फ़ारसी साहित्य की सेवा से विशेष कर दिया था। उन्होंने फ़ारसी भाषा और साहित्य के संबंध में कई मूल्यवान पुस्तकें लिखी हैं। उनकी महत्त्वपूर्ण पुस्तक , सरामदाने फ़रहंगो व हुनरे, ईरान का नाम लिया जा सकता है। उन्होंने इसी प्रकार साएब तबरीज़ी के दीवान में संशोधन भी किया है।

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8 जमादिस्सानी सन 769 हिजरी क़मरी को ईरानी शायर इब्ने यामीन फरयूमदी का निधन हुआ। वे सन 685 हिजरी क़मरी में जन्मे थे। वह अपनी उपदेश से भरी शायरी से मशहूर हुए। उनके द्वारा लिखे गये लगभग 10 हज़ार शेर अभी सुरक्षित हैं। जो शायरी के विभिन्न प्रारुपों में हैं।

8 जमादिस्सानी सन 1377 हिजरी क़मरी को विख्यात धर्मगुरु आयतुल्ला सैयद अब्दुल हुसैन शरफ़ुद्दीन आमेली का निधन हुआ। वे सन 1290 हिजरी क़मरी में इराक़ के काज़मैन नगर में जन्मे थे। जहॉ उन्होने अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद लेबनान का रुख़ किया और इस देश के जबले आमिल नामक क्षेत्र में शिक्षा दीक्षा में व्यस्त हो गये। उन्होंने इस्लाम की बड़ी सेवा की है। वे इस्लामी जगत में एकता पर बल देते थे। उन्होंने इस संदर्भ में कई पुस्तकें और लेख लिखे हैं।