Feb ०१, २०१७ १०:०९ Asia/Kolkata

1789, जॉर्ज वॉशिंगटन को सर्वसम्मति से अमेरिका का प्रथम राष्ट्रपति चुना गया।

1797, इक्वाडोर की राजधानी क्वीटो में आये विनाशकारी भूकंप में 41 हजार से अधिक लोग मारे गये।

1895, अमरीका के शिकागो में पहले रोलिंग लिफ्ट पुल का उद्घाटन हुआ।

1920, लंदन से दक्षिण अफ्रीका के बीच पहली विमान सेवा शुरू हुई।

1924, महात्मा गांधी को उनके ख़राब स्वास्थ्य के कारण समय से पहले ही जेल से रिहा कर दिया गया।

1948, श्रीलंका को ब्रिटिश साम्राज्य से आज़ादी मिली।

1965, अमरीका ने नेवादा में परमाणु परीक्षण किया।

1990, भारत के राज्य केरल के एर्नाकुलम ज़िले को देश का पूर्ण साक्षर ज़िला घोषित कर दिया गया।

2004, सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक लांच हुई।

 

4 फ़रवरी सन 1945 ईसवी को द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी की निश्चित पराजय के चिन्ह दिखाई पड़ने के बाद क्रिमिया प्रायद्वीप में याल्टा नामक बैठक हुई। यह प्रायद्वीप रूस के दक्षिण में कालासागर के तट पर स्थित है। इसमें अमरीका सोवियत संघ और ब्रिटेन के राष्ट्राध्यक्षों ने भाग लिया। इस बैठक का उददेश्य द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल देशों की अंतिम राजनैतिक एवं सैनिक स्थिति की समीक्षा करना था। इस सम्मेलन में जर्मनी से बिना किसी शर्त के हथियार डलवाने पर अंतिम निर्णय लिया गया और यह भी तय हुआ कि जर्मनी की पराजय के बाद अमरीका ब्रिटेन और रूस की सरकारें जर्मनी के अधीन क्षेत्रों का एक एक भाग अपने अधिकार में लेंगी इसी प्रकार फ़्रांस को भी इस बॅटवारे में एक भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया। इस सम्मेलन में किये जाने वाले दूसरे निर्णयों में जर्मनी के निरस्त्रीकरण, युद्ध अपराधियों पर मुक़ददमा चलाए जाने, जर्मन सरकार से तावान वसूलने आदि की ओर संकेत किया जा सकता है। इसी प्रकार इस सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना के लिए भूमि समतल की गयी। इस सम्मेलन के तीन महीने बाद द्वितीय विश्व युद्ध मई सन 1945 में जर्मनी के हार स्वीकार कर लेने के बाद समाप्त हो गया।

 

4 फ़रवरी सन 1948 ईसवी को श्रीलंका को ब्रिटेन से स्वतंत्रता मिली। और आज के दिन को इस देश में राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाता है।

भारत के दक्षिण पूर्व में स्थित यह देश 16वीं शताब्दी के मध्य में पुर्तग़ाल और फिर हालैंड के अधिकार में चला गया और सन, 1798 ईसवी से यह औपचारिक रूप से ब्रिटेन का उपनिवेश बन गया। प्रथम विश्व युद्ध के आरंभिक वर्षों में इस देश में स्वतंत्रता आंदोलन आरंभ हुआ। सन 1931 में ब्रिटेन को श्रीलंका में संसद तथा प्रशासनिक परिषद के गठन पर विवश होना पड़ा किंतु उस उसम तक इस देश को विदेश नीतियों में स्वावलंबन नहीं मिला था। इसी कारण इस देश की जनता का संघर्ष जारी रहा। यहॉ तक कि 1948 में यह देश औपचारिक रूप से स्वतंत्र हो गया।

 

4 फ़रवरी सन 1976 ईसवी को ग्वाटेमाला के निकट भयानक भूकम्प आया जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7 दशमलव 5 मापी गयी। इसमें 23 हज़ार लोग मारे गये और लगभग 15 लाख बेघर हो गये थे।

 

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15 बहमन सन 1357 हिजरी शम्सी को जब इमाम ख़ुमैनी की ईरान वापसी के बाद शाह के विरूद्ध जनता का संघर्ष चरम सीमा पर पहुंच चुका था शाह के प्रधान मंत्री शापूर बख़्तियार ने एक साक्षात्कार में लोगों को शांत करने का प्रयास किया। उसने लोकतंत्र का दिखावटी समर्थन करके जनता को क्रान्ति से रोकना चाहा। बख़्तियार ने इस साक्षात्कार में घोषणा की कि वह इमाम ख़ुमैनी को इस बात की कदापि अनुमति नहीं देगा कि वे अंतरिम सरकार का गठन करें। यह घोषणा ऐसे समय में की गयी कि जब हर नगर में शाह के विरुद्ध प्रदर्शन और हड़तालें हो रही थीं। सैनिक अपने ठिकाने छोड़ कर निकले जा रहे थे इसी प्रकार अधिकारी अपने पदो से त्यागपत्र दे रहे थे जिसके कारण व्यवहारिक रूप से देश का नियंत्रण सरकार के हाथ से निकल चुका था।

 

15 बहमन सन 1371 हिजरी शम्सी को ईरान की विख्यात कावियत्री सुरूर बाकूची का 56 वर्ष की आयु में निधन हुआ। वे सन 1315 में ईरान के काशान नगर में पैदा हुईं। एक धार्मिक परिवार में उनका पालन पोषण हुआ। 32 वर्ष की आयु से उन्होंने शेर लिखना आरंभ किया । उनकी काव्य रचनाओं में इंसाने तनहा सुख़न आशना और परवाने हाए शब का नाम लिया जा सकता है।

 

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9 जमादिस्सानी सन 699 हिजरी क़मरी को विख्यात कवि इब्ने फरह अशबीली का निधन हुआ। वे वर्तमान स्पेन के दक्षिण में स्थित अशबीलिया में जन्में थे। इस शहर पर स्पेन की सेना के आक्रमण के समय वे गिरफतार करके स्पेन लाए गये । वे कुछ समय बाद जेल से भाग कर मिस्र चले गये जहां उन्होंने क़ाहेरा के विद्वानों से शिक्षा ली। उसके बाद वे दमिशक़ चले गये और वहॉ शिक्षा दीक्षा में लग गये। इब्ने फरह एक अच्छे इतिहासकार भी थे।