Feb ०७, २०१७ ११:५८ Asia/Kolkata

9 फ़रवरी सन 1649 ईसवी को ब्रिटेन में लोकतांत्रित शासन का आरंभ हुआ और ओलिवर क्रोमवेल इस देश के राष्ट्रपति बना वे ऐसी सेना के कमांडर थे जिसे संसद के समर्थकों ने इस लिए बनाया था कि वे ब्रिटेन के नरेश चार्ल प्रथम के अत्याचार पर विरोध करते हुए उनसे मुकाबला कर सकें।

 चार्ल प्रथम की सेना संसद की सेना के साथ लड़ाई में पराजित हो गयी और सन 1649 में संसद के आदेश पर चार्ल की गर्दन उड़ा दी गयी। ब्रिटेन की संसद ने इसी प्रकार आज के दिन राजशाही व्यवस्था को समाप्त करके उसके स्थान पर लोकतांत्रित शासन व्यवस्था को स्थापित किया तथा क्रोमवेल को राष्ट्रपति चुना किंतु क्रामवेल ने सन 1653 में संसद को भंग करके ब्रिटेन में अत्याचार पर आधारित शासन आरंभ कर दिया। सन 1653 में क्रोमवेल का निधन हो गया और फिर उनके पुत्र ने उनका स्थान संभाला किंतु 8 महीने के बाद उन्हें आंतरिक विरोध और अपनी अयोग्यता के कारण त्यागपत्र देना पड़ा। इस प्रकार ब्रिटेन में फिर से राजशाही शासन व्यवस्था बहाल हो गयी। क्रोमवेल ने अपने 9 वर्षीय शासन काल में कई युद्ध किये जिनमें सबसे भीषण आयर लैंड पर होने वाला आक्रमण और वहॉ की जनता का जनसंहार था।

 

9 फ़रवरी सन 1984 ईसवी को पूर्व सोवियत संघ के नेता यूरी एंड्रोपोव का निधन हुआ वे सोवियत संघ की गुप्तचर सेवा केजीबी के प्रमुख भी रह चुके थे। वे 15 महीनों से कुछ कम समय तक सत्ता में रहे।

 

9 फ़रवरी सन 1992 ईसवी को अलजीरिया के संसदीय चुनावों में इस्लामी प्रवृत्ति वाले धड़े की भारी सफलता के बाद इस देश में सत्तासीन सैनिकों ने चुनावों के परिणामों को निरस्त और अलजीरिया इस्लामी मुक्तिमोर्चे को गैर कानूनी घोषित कर दिया। कुछ समय बाद इस देश के कई नेताओं को गिरफ़तार भी कर लिया गया। सेनाधिकारियों के इस क़दम से इस देश में हिंसा का क्रम आरंभ हुआ जिसमें बहुत सारे लोग मारे जा चुके हैं।

 

***

20 बहमन सन 1357 हिजरी शम्सी को ईरान की वायु सेना के अधिकारियों द्वारा इस्लामी क्रान्ति के प्रति अपने समर्थन और इमाम ख़ुमैनी के प्रति अपने आज्ञापालन की घोषणा के बाद शाह के पिटठु सुरक्षाकर्मियों ने तेहरान में वायु सेना की एक छावनी पर आक्रमण किया इसकी सूचना बहुत तेज़ी से तेहरान में फैली जिसके नतीजे में कोने कोने से लोग वायु सेना की सहायता के लिए निकल पड़े। जनता ने जिसके पास हथियार के नाम पर कोई विशेष चीज़ नहीं थी अपने दृढ़ संकल्प द्वारा शाह के पिटठू सुरक्षाकर्मियों को पराजित कर दिया। इस प्रकार शाह के पतन का अंतिम चरण आरंभ हो गया।

 

20 बहमन सन 1364 हिजरी शम्सी को इराक़ द्वारा थोपे गये युद्ध के दौरान ईरानी जियालों ने वलफ़ज्र 8 नामक सैनिक कार्रवाई शुरू की। यह कार्रवाई दोनों देशों की सीमा के दक्षिणी बिंदु पर हुई। इसमें हज़ारों ईरानी सैनिक तूफ़ानी नदी अरवंद के उस पार गये और इराक़ के दक्षिण पूर्वी नगर फ़ाव को जीत लिया। यह कार्रवाई इतनी अनापेक्षित जटिल और सफल थी कि विश्व के सैन्य मामलों के विशेषज्ञ और इराक़ी सरकार इससे आश्चर्यचकित रह गये। यह कार्रवाई सददाम पर युद्ध रोकने के लिए दबाव बनाने हेतु की गयी थी। इसमें इराक़ के लगभग हज़ारों सैनिक हताहत और घायल हुए थे।

 

***

14 जमादिस्सानी सन 505 हिजरी क़मरी को ईरान के विश्व विख्यात विद्वान इमाम मोहम्मद ग़ज़ाली का निधन हुआ। उनका पूरा नाम अबू हामिद मोहम्मद ग़ज़ाली तूसी था। उन्होंने बहुत ही तीव्र गति से शिक्षा में प्रगति की। 28 वर्ष की आयु में उन्हें बड़े वरिष्ठ मुसलमान धर्मगुरुओं में गिना जाने लगा। उनकी ख्याति जब सीमा पार कर गयी तो उन्हें इराक़ के नगर बग़दाद बुलाया गया जहॉ वे शिक्षा दीक्षा में लग गये किंतु कुछ वर्षो के बाद स्वास्थ्य बिगड़ जाने के कारण उन्होंने पढ़ाना छोड़ दिया और बग़दाद से हज के लिए मक्का गये। उसके पश्चात बैतुल मुकददस जाकर वहीं रहने लगे। कुछ दिनों के बाद वे दोबारा ईरान वापस हुए और रुचि रखने वालों के ज्ञान की प्यास बुझाने लगे। उन्होंने अनेक पुस्तकें लिखीं जिनमें कीमियाए सआदत और नसीहतुल मुलूक आदि की ओर संकेत किया जा सकता है।

 

14 जमादिस्सानी सन 1312 हिजरी क़मरी को ईरान के प्रसिद्ध धर्मगुरु आयतुल्ला मिर्ज़ा हबीबुल्ला रश्ती का निधन हुआ। वे उच्च स्तरीय इस्लामी शिक्षा ग्रहण करने के लिए इराक़ के नजफ नगर गये जहां उन्होंने शैख मुर्तज़ा अन्सारी जैसे विख्यात मुस्लिम धर्मगुरुओं से शिक्षा ली और कुछ दिनों में वह स्वयं भी बडे धर्मगुरु बन गये।