मंगलवार - 11 फ़रवरी
11 फ़रवरी सन 660 ईसा पूर्व को जापान के पहले तानाशाह ई मू सिंहासन पर बैठे।
इस प्रकार से विश्व की सबसे दीर्घकालीन राजशाही शासन व्यवस्था की स्थापना हुई। इस व्यवस्था में बहुत से उतार चढ़ाव आए। इस समय जापान में नरेश तो है किंतु सारी शक्ति प्रधान मंत्री के पास होती है। जापान के लोग इस देश में राजशाही शासन व्यवस्था की स्थापना के दिन को राष्ट्रीय दिवस के रुप में मनाते हैं।
11 फ़रवरी सन 1929 ईसवी को वैटिकन और इटली के बीच लेटरैन समझौता हुआ जिसके बाद वैटिकन को औपचारिक रुप से स्वतंत्रता मिली। वैटिकन 19वीं शताब्दी के मध्य तक इटली की चर्च सरकार के अधीन था और इसे भी इटली का ही एक भाग समझा जाता था। वर्ष 1870 में इटली की सेना ने इस क्षेत्र पर अधिकार कर लिया किंतु इटली के नरेश ने विश्व के कैथोलिक ईसाइयों के क्रोध को दृष्टिगत रखते हुए घोषणा की थी कि वैटिकन महल पादरी के पास ही रहेगा और यह उनकी धार्मिक सरकार का केंद्र होगा। सन 1929 में लेटरैन समझौते के बाद उक्त घोषणा को औपचारिक रुप दे दिया गया। वैटिकन इटली की राजधानी रोम में स्थित है यह विश्व का सबसे छोटा और कम जनसंख्या वाला देश है यह विश्व के कैथोलिक ईसाइयों के धार्मिक नेता का केन्द्र है। इसका क्षेत्रफल आधे किलोमीटर से कम है यहॉं की जनसंख्या एक हज़ार से कुछ अधिक है ।
11 फ़रवरी सन 1990 ईसवी को दक्षिणी अफ़्रीक़ा के नस्लभेद विरोधी नेता दिवंगत नेल्सन मंडेला 27 वर्ष जेल में व्यतीत करने के बाद स्वतंत्र हुए। मंडेला को दक्षिणी अफ़्रीक़ा की नस्लभेदी सरकार के विरुद्ध संघर्ष के कारण सन 1963 ईसवी में आजीवन कारावास का दंड दिया गया किंतु जेल में भी निरंतर संघर्ष जारी रखने तथा देश की जनता और विश्व जनमत द्वारा उनके समर्थन के कारण जेल से उन्हें मुक्ति मिली और दक्षिणी अफ़्रीक़ा के काले लोगों ने विशेष रुप से उन्हें सम्मान दिया। सन 1991 ईसवी में तत्कालीन शासन व्यवस्था को हटाने पर सहमति हुई और सन 1994 में बहुजातीय लोगों की सम्मिलिति से इस देश में चुनाव कराए गये जिसमें नेल्सन मंडेला दक्षिणी अफ़्रीका के पहले राष्ट्रपति बने।
दिसंबर 2013 में नेल्सन मंडेला का निधन हुआ।

11 फ़रवरी वर्ष 2011 को मिस्र के तानाशाह हुस्नी मुबारक को जो स्वयं को अजीवन राष्ट्रपति कहते थे, जनक्रांति के बाद सत्ता से हटना पड़ा। हुस्नी मुबारक तत्कालीन राष्ट्रपति अनवर सादात के सहायक थे और वर्ष 1981 में एक सैन्य परेड में अनवर सादात की हत्या के बाद राष्ट्रपति बने। अनवर सादात कैंप डेविड समझौता करने और फ़िलिस्तीनी राष्ट्र की उमंगों विश्वासघात करने के कारण ख़ालिद इस्लामबोली के हाथों मारे गये थे। हुस्नी मुबारक सत्ता से हटने से पहले तक अनवर सादात के मार्ग पर अग्रसर थे और मध्यपूर्व में ज़ायोनी शासन और अमरीकी नीतियों को जारी रखने वाले व्यक्ति थे। हुस्नी मुबारक ने मिस्र के भीतर भी अपातकाल लगाकर राजनैतिक घुटन का वातावरण उत्पन्न कर दिया था और जनता विशेषकर इस्लाम वादियों का दमन किया। इन्होंने मिस्र और ज़ायोनी शासन के मध्य धनिष्ठ संबंधों के बारे में जनता के विरोध पर तनिक भी ध्यान नहीं दिया। उसके शासन काल में मिस्र की अर्थव्यवस्था धराशायी हो गयी थी और जनता को भीषण आर्थिक समस्याओं का सामना था। यही कारण था कि मिस्र में भी इस्लामी जागरूकता की लहर फैल गयी और जनता तानाशाही व्यवस्था को गिराने के लिए अत्तहरीर स्क्वायर पर एकत्रित होने लगी। मिस्र के तहरीर स्क्वायर से उठने वाली लहर ने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया और देश के विभिन्न क्षेत्रों में जनता तानाशाही व्यवस्था के विरुद्ध प्रदर्शन करने लगी। मिस्री सैनिकों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही जनता का भरपूर दमन किया। प्रदर्शनकारी समस्त धमकियों और हिंसक घटनाओं के बावजूद 18 दिनों तक तहरीर स्क्वायर पर डटे रहे। अंततः हुस्नी मुबारक को जनता की मांगों के समक्ष घुटने टेकने पड़े और 11 फ़रवरी वर्ष 2011 को सत्ता उन्होंने अपने समर्थक जनरलों के हवाले कर दी। कुछ महीनों बाद देश की सैन्य परिषद जनता के क्रोध को कम करने के लिए हुस्नी मुबारक और उनके पुत्रों पर मुक़द्दमा चलाने पर विवश हुई।

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22 बहमन सन 1357 हिजरी शम्सी का दिन ईरान के लिए एक ऐतिहासिक और निर्णायक दिन था। अल्लाहो अकबर के प्रेरणादायक नारों और ईरानी जनता के बलिदान तथा त्याग ने इस देश में तानाशाही शासन के अत्याचारों और अन्याय के अंधकार का अंत करके इस्लामी क्रान्ति का प्रकाश चारों ओर फैला दिया। आज के दिन ईरान की इस्लामी क्रान्ति सफल हुई। आज के दिन महिलाएं पुरुष बूढे, बच्चे, जवान सब ही अत्याचार और अन्याय के मुकाबले में पंक्तिबद्ध हुए। जनता ने सड़कों पर पथराव किया और वे मौत की कोई परवाह किये बिना टैंकों के सामने मज़बूत दीवार के समान डट गयी।
सेना ने भी इस संघर्ष में अंतत:अपनी निष्पक्षता की घोषणा कर दी।
इसी बीच रेडियो और टीवी संस्थानों पर जनता का अधिकार हो गया जिसके कुछ ही देर बाद टीवी और रेडियो से इस्लामी क्रान्ति की सफलता के समाचार प्रसारित किये गये। यह समाचार वास्तव में अन्याय के महल के धराशायी होने पर सत्य की शुभ सूचना था इस भारी परिवर्तन से ईरान में इस्लामी शासन व्यवस्था के लिए भूमिका समतल हुई।

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16 जमादिस्सानी सन 421 हिजरी क़मरी को स्पेन के कवि और लेखक इब्ने दर्राज क़स्तली का निधन हुआ। उनका जन्म 347 हिजरी क़मरी में हुआ। वे अरबी भाषा में शेर कहते थे। उन्होंने अरबी शायरी में एक नयी शैली आरंभ की। उनकी शायरी का, साहित्य और कला की दृष्टि से विशेष महत्व है साथ ही उनके शेर तत्कालीन घटनाओं का लिखित प्रमाण समझे जाते हैं।