शनिवार- 15 फ़रवरी
15 फ़रवरी सन 1869 ईसवी को उर्दू के विख्यात शायर मिर्ज़ा असदुल्लाह ख़ां ग़ालिब का जन्म हुआ।
15 फ़रवरी सन 2003 ईसवी को इराक़ युद्ध के विरोध में विभिन्न देशों के 600 शहरों में आठ करोड़ के क़रीब लोगों ने प्रदर्शन किए। यह दुनिया के इतिहास के सबसे बड़े प्रदर्शन थे।
15 फ़रवरी सन 2005 ईसवी को दुनिया भर में लोकप्रिय वेबसाइट यू-ट्यूब इंट्रोट्यूज़ कराई गई। इस वेबसाइट पर अपनी वीडियोज़ अपलोड की जा सकती हैं और दूसरों की वीडियोज़ देखी जा सकती हैं।
15 फ़रवरी सन 1782 ईसवी को ब्रिटेन और फ्रांस के बीच समुद्री युद्ध आरंभ हुआ। सात महीने तक जारी रहने वाली यह लड़ाई दोनों देशों के बीच भारत पर अधिकार और इस देश के संसाधनों के शोषण को लेकर होने वाली लड़ाइयों में से एक थी। इससे पहले फ़्रांस 13 महीने तक जारी रहने वाले युद्ध में ब्रिटेन से पराजित होने के बाद पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर करके भारत की ओर से विमुख हो गया था किंतु आज के दिन आरंभ होने वाली लड़ाई ने दर्शा दिया कि फ्रांस इतनी सरलता से भारत में अपने वर्चस्ववादी लक्ष्यों से पीछे नहीं हटना चाहता था। सात महीने तक चलने वाली इस समुद्री लड़ाई में फ्रांस को विजय तो मिली किंतु यह देश दोबारा व्यवहारिक रूप से भारत नहीं लौट पाया और ब्रिटेन ही भारतीय उपमहाद्वीप को अकेले लूटता रहा।
15 फ़रवरी सन 1808 ईसवी को रूस के ज़ार शासक ने फ़िनलैंड पर अपना अतिग्रहण पूरा किया। फ़िनलैंड ने जो रूस जैसे शक्तिशाली देश का पड़ोसी होने के नाते सदैव स्वयं को ख़तरे में देखता था स्वीडन से जो रूस का प्रतिस्पर्धी समझा जाता था सहायता की अपील की। स्वीडन ने सहायता करने के बजाए फ़िनलैंड पर अधिकार कर लिया। 18 शताब्दी में स्वीडन की शक्ति क्षीण होने और रूस की शक्ति में वृद्धि के साथ ही फ़िनलैंड का कुछ भाग रूस के अधिकार में चला गया और अंततः आज के दिन फ़िनलैंड पर पूर्ण रूप से रूस का अधिकार हो गया। फ़िनलैंड की जनता ने स्वतंत्रता की लड़ाई आरंभ की जिसके कारण रूस ने उसे कुछ विशिष्टताएं दीं और वर्ष 1917 में रूस में क्रान्ति आने के साथ ही फ़िनलैंड स्वतंत्र हो गया।
15 फ़रवरी सन 1936 ईसवी को रूस के चिकित्सक और जीव वैज्ञानिक पेट्रोविच पावलोफ़ का 87 वर्ष की आयु में निधन हुआ। वे सन 1849 ईसवी में एक धार्मिक परिवार में जन्मे थे। 1879 ईसवी में उन्होंने चिकित्सा विज्ञान की शिक्षा पूरी की किंतु वे अधिकतर जीवों के शरीर की गतिविधियों के बारे में अध्यन करते रहे। सन 1904 में उन्हें नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
15 फ़रवरी सन 1989 ईसवी को अफ़ग़ानिस्तान पर दस वर्ष तक आतिग्रहण जारी रखने के बाद रूस की लाल सेना अफ़ग़ान जनता के कड़े प्रतिरोध के कारण इस देश से बाहर निकलने पर विवश हुई। 1979 ईसवी में अफ़ग़ानिस्तान पर अधिकार करने के पीछे सोवियत संघ का लक्ष्य यह था कि वह काबुल में अपनी पिट्ठू सरकार सत्ता में पहुंचाकर दक्षिण एशिया में अपना प्रभाव बढ़ाएगा। सोवियत संघ की इस रणनीति से क्षेत्र में अमरीका के हित ख़तरे में पड़ सकते थे अतः वाशिंग्टन को इस पर गहरी आपत्ति हुई। अमरीका ने रूसी सेना को इस क्षेत्र से बाहर निकालने के लिए गतिविधियां तेज़ कर दीं। दूसरी ओर अफ़ग़ान संघर्षकर्ता भी अतिक्रमणकारी रूसी सेना के विरुद्ध डटे हुए थे। अमरीका ने इस बीच तालेबान संगठन को अस्तित्व प्रदान किया जो रूसी सेना से भिड़ गया। अंततः 10 वर्ष के अतिग्रहण के बाद रूसी सेना को अफ़ग़ानिस्तान से निकलना पड़ा।

15 फ़रवरी सन 1869 ईसवी को भारतीय उपमहाद्वीप के विख्यात कवि मिर्ज़ा ग़ालिब का निधन हुआ। वे 27 सितम्बर सन 1797 को आगरा में पैदा हुए। मिर्ज़ा ग़ालिब ने अपने पूर्वजों का सैनिक पेशा छोड़कर लेखन एवं शायरी को अपना पेशा बनाया और जीवन के अंत तक इसी में व्यस्त रहे। ग़ालिब को बहुत अधिक ऐश्वर्यपूर्ण जीवन उपलब्ध नहीं हुआ और उन्होंने अपनी मान मर्यादा के विरुद्ध कोई काम नहीं किया। सन 1855 में प्रख्यात कवि ज़ौक़ के निधन के बाद वे बहादुर शाह ज़फ़र के उस्ताद नियुक्त किए गए। ग़ालिब जितनी अच्छी शायरी करते थे वे उतने ही अच्छे गद्य भी लिखते थे। उन्होंने शायरी के साथ ही गद्य लिखने की एक नई शैली की आधारशिला रखी। ग़ालिब ने पत्राचार को एक नया अंदाज़ दिया। उनका कहना था कि उन्होंने पत्रों को संवाद का रूप दिया है।
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20 जमाद्धिउस्सानी हिजरत से आठ वर्ष पूर्व पैग़म्बरे इसलाम (स) की चहेती पुत्री और हज़रत अली(अ) की पत्नी और इमाम हसन और हुसैन (अ) की माता हजरते फ़ातेमा जहरा स का जन्म हुआ। उनका पालन पोषण पैग़म्बरे इसलाम (स) ने स्वयं किया। जिससे वे परिपूर्णताओं की चरम सीमा पर पहुंच गयी। विवाह के पश्चात हज़रत फातेमा ज़हरा ने एक पत्नी और फिर एक मॉ की आदर्श भूमिका निभाई। साथ ही उन्होंने सामाजिक दायित्व भी निभाये। पैग़मबरे इस्लाम (स) के स्वर्गवास के बाद वर्ष 11 हिजरी क़मरी में हज़रते फातेमा जहरा की भी शहादत हो गयी। हज़रत फातेमा ज़हरा के जन्मदिन को ईरान में महिला दिवस के रुप में मनाया जाता है।
20 जमादिस्सानी सन 1320 हिजरी क़मरी ईरान में इस्लामी क्रान्ति के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी का ख़ुमैन नगर में जन्म हुआ। उनका पूरा नाम रूहुल्लाह मूसवी ख़ुमैनी था। इमाम ख़ुमैनी ने पहले अपने ही नगर में फिर क़ुम नगर जाकर धार्मिक शिक्षा ग्रहण की। वे शीघ्र ही वरिष्ठ धर्मगुरूओ में गिने जाने लगे। उन्हें दर्शनशासत्र का भी व्यापक ज्ञान था। साथ ही वे एक अच्छे कवि भी थे। युवाकाल से इमाम खुमैनी ने अपनी राजनैतिक गतिविधियां आरंभ कीं किंतु अत्याचारी शाही शासन के विरूद्ध उनका असली संघर्ष 1342 हिजरी शम्सी को बहुत तेज़ हो गया। जिसके कारण उन्हें देशनिकाला देकर तुर्की और फिर इराक भेजा गया। देशनिकाले की 14 वर्ष की अवधि में इमाम ख़ुमैनी अत्यचारी शाही शासन के भ्रष्टाचारों और अपराधों का पर्दाफाश करते रहे। जिसके कारण जनता ने शाह के विरुद्ध संघर्ष आरंभ कर दिया। अंतत: शाह को ईरान छोडकर भागना पड़ा और इस्लामी क्रान्ति सफल हो गयी। जिसके बाद अत्यंत संवदेनशील परिस्थितियों में दस वर्ष तक इमाम ख़ुमैनी ने देश का नेतृत्व किया। और नयी इस्लामी शासन व्यवस्था के आधारों को मज़बूत बनाया।