रविवार - 16 फ़रवरी
16 फ़रवरी सन 1959 को क्यूबा में क्रांतिकारी नेता फिदेल कास्त्रो 32 साल की उम्र में प्रधानमंत्री बने।
- 16 फ़रवरी सन 1896 को हिंदी के प्रसिद्ध कवि, साहित्यकार और लेखक सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जन्म हुआ।
- 16 फ़रवरी सन 1914 को लॉस एंजेलिस और सैन फ़्रांसिस्को के बीच पहले विमान ने उड़ान भरी।
- 16 फ़रवरी सन 1944 को हिन्दी सिनेमा के पितामाह दादा साहब फाल्के का नासिक में 74 वर्ष की आयु में निधन हुआ।
- 16 फ़रवरी सन 1959 को क्यूबा में क्रांतिकारी नेता फिदेल कास्त्रो 32 साल की उम्र में प्रधानमंत्री बने।
- 16 फ़रवरी सन 2001 को अमेरिकी और ब्रिटिश विमानों ने इराक़ पर हमला किया।
- 16 फ़रवरी सन 2005 को पर्यावरण की रक्षा के लिए दुनिया के प्रमुख देशों के सहमत होने के सात साल बाद क्योटो संधि अस्तित्व में आई।
16 फ़रवरी सन 1918 ईसवी को प्रथम विश्व युद्ध में शामिल होने और 1917 में क्रान्ति का सामना करने के कारण रुस के कमज़ोर हो जाने के बाद लिथवानिया ने अपनी स्वाधीनता की घोषणा की किंतु मॉस्को इसके बाद भी लिथवानिया को दोबारा अपने अधीन करने की चेष्ट में रहा। यहॉ तक कि सन 1940 में उसने यह लक्ष्य प्राप्त कर लिया। बाद में जर्मनी ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान तीन वर्ष तक लिथवानिया को अपने अधिकार में युद्ध के समापन के बाद लिथवानिया की जनता के प्रतिरोध के बावजूद मास्को ने इस देश पर पुन: क़ब्ज़ा कर लिया। यहॉ तक कि 1980 के दशक में सोवियत संघ में राजनैतिक परिवर्तनों और कुछ अंतर्राष्ट्रीय परिवर्तनों के कारण लिथवानिया की स्वाधीनता की भूमि समतल हुई और मार्च 1990 में यह देश स्वतंत्र हो गया।
16 फ़रवरी सन 1946 ईसवी को पहली बार संयुक्त राष्ट्र संघ में सोवियतसंघ के प्रतिनिधि ने वीटो अधिकार का प्रयोग किया। आज के दिन संयुक्त राष्ट्र संघ में रूस के प्रतिनिधि ने सुरक्षा परिषद में लाए गए प्रस्ताव को वीटो किया और इस प्रकार पहली बार वीटो अधिकार का सुरक्षा परिषद में प्रयोग हुआ। वीटो पावर सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों अमरीका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन के पास है। वीटो पावर का प्रस्ताव 1945 में याल्ट सम्मेलन में अमरीका ब्रिटेन और रूस द्वारा पारित किया गया फिर इसे संयुक्त राष्ट्र के घोषणापत्र में स्थान मिल गया। उस समय से अब तक कई बार वीटो के अधिकार पर विश्व के अनेक देशों ने आपत्ति जताई है क्योंकि वीटो पावर संपन्न देशों को यह अधिकार देता है कि वे अकेले ही सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र के निर्णय को निरस्त कर दें। इसलिए विश्व के अन्य देश इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समस्त राष्ट्रों की बराबरी और लोकतांत्रितक सिद्धान्तों के विपरीत मानते हैं।
16 फ़रवरी सन 1959 को क्यूबा में क्रांतिकारी नेता फिदेल कास्त्रो इस देश के इतिहास में सबसे कम उम्र में प्रधान मंत्री बने। केवल 32 साल की उम्र में क्यूबा के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले कास्त्रो 1965 में इस देश के राष्ट्रपति भी बने। कास्त्रो ने साल 2011 के अप्रैल महीने में स्वेच्छा से सत्ता छोड़ दी। 25 नवम्बर 2016 में 90 साल की आयु में उनका निधन हुआ।

16 फ़रवरी सन 1984 ईसवी को दक्षिणी लेबनान में जेबशीत कालोनी के इमामे जुमा और इस क्षेत्र में अतिग्रहणकारी ज़ायोनी शासन के विरुद्ध इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन आरंभ करने वाले शैख़ राग़िब हर्ब को शहीद कर दिया गया। उनकी हत्या ज़ायोनी शासन ने करवाई। शैख़ राग़िब हर्ब संघर्षकर्ता धर्मगुरू थे। शहीद होने से पहले भी ज़ायोनी शासन के विरुद्ध दक्षिणी लेबनान की जनता को प्रतिरोध के लिए प्रेरित करने के कारण वह गिरफ़तार किए गए किंतु जनता के व्यापक प्रदर्शनों के कारण उन्हें छोड़ दिया गया। छूटने के बाद भी उन्होंने अतिग्रहणकारी शासन के विरुद्ध संघर्ष जारी रखा यहां तक कि आज के दिन उन्हें शहीद कर दिया गया।

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27 बहमन सन 1370 हिजरी शम्सी को लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन के महासचिव सैयद अब्बास मूसवी को ज़ायोनी शासन ने वायु आक्रमण करके शहीद कर दिया। यह आक्रमण ज़ायोनी शासन के उन दसियों आक्रमणों के क्रम की एक कड़ी था जो उसने योजनाबद्ध ढंग से लेबनानी और फ़िलिस्तीनी संघर्षकर्ताओं की टारगेट किलिंग के लिए किए हैं। सैयद अब्बास मूसवी की शहादत ने इस्लामी जगत को शोकाकुल कर दिया और ज़ायोनी शासन की इस आतंकवादी कार्यवाही पर विश्व भर के मुसलमानों में आक्रोष व्याप्त हो गया। इस दुखद घटना में सैयद अब्बास मूसवी की पत्नी और छह वर्षीय बच्चा तथा उनके कई साथी शहीद हो गए। ज़ायोनी शासन की इस नृशंस कार्यवाही पर विश्व के मानवाधिकार संगठनों ने चुप्पी साध ली। पश्चिमी मीडिया ने तो इस आतंकवादी कार्यवाही को तर्कसंगत दर्शाने का भी प्रयास किया।

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21 जमादिस्सानी सन 384 हिजरी क़मरी को ईरान के प्रसिद्ध साहित्यकार और इतिहासकार मोहसिन बिन अली तनूख़ी का 55 वर्ष की आयु में निधन हुआ। उन्होंने बड़े ही कम समय में ज्ञान प्राप्त कर लिया और न्यायाधीश बन गये। उन्होंने साहित्य और इस्लामी इतिहास के क्षेत्र में सराहनीय कार्य किया है।