अमरीका के नए राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प और मीडिया के साथ उनके टकराव
अभी डोनल्ड ट्रम्प को राष्ट्रपति बने कुछ ही समय बीता है लेकिन सभी को पता चल गया है कि वे संचार माध्यमों को झूठा और मीडिया कर्मियों को धरती पर सबसे अधिक भ्रष्ट समझते हैं और उन पर हमला करने का कोई अवसर हाथ से जाने नहीं देते।
वे सुबह ट्वीट करके अपना दिन शुरू करते हैं और दिन भर में कई विवादित ट्वीट कर देते हैं। दो करोड़ से अधिक लोग उनके ट्वीटर पेज पर उनके ट्वीट्स को फ़ॉलो करते हैं। वे अपने ट्वीट्स में दूसरो पर कटाक्ष करने, कंपनियों व देशों को धमकी देने या समझौतों का मज़ाक़ उड़ाने में संकोच नहीं करते। उन्होंने ट्वीटर के हद से अधिक प्रयोग पर ह ने वाली आलोचनाओं के जवाब में फ़ॉक्स न्यूज़ से कहा कि मुझे ट्वीट करना अच्छा नहीं लगता और मुझे दूसरे बहुत से काम होते हैं लेकिन संचार माध्यम बहुत झूठे हैं और उनसे मुक़ाबले के लिए मेरे पास ट्वीट ही एकमात्र साधन है। जब वे मेरे ख़िलाफ़ झूठ फैलाते हैं तो मैं ट्वीट करके लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर सकता हूं। अगर मीडिया सच्चा हो, जो कि वह नहीं है, तो मैं कभी भी ट्वीट नहीं करूंगा।
मीडिया पर ट्रम्प के हमले, उनके चुनाव अभियान के दौरान शुरू हुए थे। उस समय उन्होंने कहा था कि उनका मुक़ाबला हिलेरी क्लिंटन से नहीं है बल्कि वे मीडिया से लड़ रहे हैं। उन्होंने कई बार न्यूयार्क टाइम्ज़ समेत अमरीका के मशहूर संचार माध्यमों पर चोट की है। एक बार उन्होंने कहा कि वे एक ऐसे समाचारपत्र के बारे में बात करना चाहते हैं जो दीवालिया होने वाला है और जल्द ही बैठ जाएगा। इसी तरह उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान इस समाचारपत्र द्वारा करवाए गए सर्वेक्षण के परिणामों पर प्रश्न खड़े किए थे। यहां तक कि उन्होंने न्यूयार्क टाइम्ज़ के समाचारिक सूत्रों पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए कहा था कि उन्हों तो लगता है कि इन सूत्रों का अस्तित्व ही नहीं है। अभी हाल ही में ट्रम्प ने कहा है कि उन्हें आशा है कि कोई समझदार आदमी दुर्भागी और झूठे न्यूयार्क टाइम्ज़ को ख़रीद लेगा या इसका सही संचालन करेगा या तो फिर सम्मान के साथ इसे बंद कर देगा। ट्रम्प ने इसी तरक पोलिटिको, वॉशिंग्टन पोस्ट और हफ़िंग्टन पोस्ट जैसे अमरीका के अन्य मशहूर संचार माध्यमों को भी अविश्वसनीय बताया है और सीएनएन के बारे में कहा है कि यह घृणित है, आपको पता है न कि इसकी रेटिंग बड़ी तेज़ी से गिर रही है क्योंकि मैंने इसके इंटरव्यू के आग्रह को ठुकरा दिया है। सीएनएन धांधली और पक्षपात करने वाला संचार माध्यम है।
वास्तविकता यह है कि बहुत कम राजनीतिज्ञ होंगे जो इस प्रकार के वाक्य मीडिया में और उनके विरुद्ध प्रयोग करते हों तथा उन्हें बुरा भला कह कर और कटाक्ष करके अपना क्रोध प्रकट करते हों लेकिन अमरीका के 45वें राष्ट्रपति के रूप में ट्रम्प ने वाइट हाउस में जाने से पहले, अपने प्रख्यात ट्रम्प टावर में अमरीकी संचार माध्यमों के संचालकों के साथ अपनी पहली बैठक में कहा कि हम इस समय एक ऐसे हॉल में हैं जिसमें झूठे लोग भरे हुए हैं। उन्होंने सीएनएन के वरिष्ठ एंकर वूल्फ़ ब्लिट्ज़र से कहा कि चुप रहो और बदतमीज़ी न करो, तुम लोग एक जाली समाचारिक संगठन हो। उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव के बाद अपने पहले पत्रकार सम्मेलन में वाइट हाउस में सीएनएन के विशेष रिपोर्टर जिम कोस्टा से कहा कि चुप रहो, मैं तुम्हें पूछने का मौक़ा नहीं दूंगा, तुम लोगों की ख़बरें झूठी हैं। सीएनएन के पत्रकार ने ट्रम्प से पूछा कि जब आप हमारे संगठन पर हमला कर रहे हैं तो कम से कम हम यह तो अवसर दीजिए कि हम अपना सवाल पूछ सकें। ट्रम्प ने कहा कि तुम्हारा मीडिया ग़लत ख़बरें फैलाता है इस लिए मैं तुम्हें सवाल पूछने की अनुमति नहीं दूंगा। जब सीएनएन के पत्रकार ने अपनी बात दोहराई तो ट्रम्प ने उत्तर में कहा कि चुप रहो और बदतमीज़ी न करो।
ये सारी बातें ऐसी स्थिति में हैं जब ट्रम्प ने यूरोप के संचार माध्यमों पर भी ढिलाई, आलस्य और इस्लामी चरमपंथियों के हमलों को सही कवरेज न देने का आरोप लगाया है। जर्मनी के पत्रकार संघ के प्रमुख फ़्रैंक ओबरेल का कहना है कि समस्या यह है कि ट्रम्प, ग़लत या आधी सच्ची बातों को जनता के मंच पर इस तरह पेश कर देते हैं कि मानो उन बातों को सभी स्वीकार करते हैं लेकिन जो भी जर्मनी में प्रकाशित होने वाली सूचि पर ध्यान दे तो उसे पता चलेगा कि जो बात ट्रम्प कह रहे हैं वह पूरी तरह से निराधार और खोखली है। अलबत्ता अमरीका में राजनैतिक इतिहास के प्रोफ़ेसर एलेन लिचमैन का मानना है कि ट्रम्प की लोकप्रियता संचार माध्यमों की वजह से ही बढ़ी है और वे विदित रूप से दिखावे के लिए मीडिया की आलोचना करते हैं। लिचमैन ने एक टीवी कार्यक्रम में कहा कि संचार माध्यमों के कारण ही डोनल्ड ट्रम्प, मीडिया मैन में परिवर्तित हुए हैं।
ऐसा प्रतीत होता है कि लिचमैन की बात बड़ी हद तक सही है क्योंकि ट्रम्प ऐसी स्थिति में मीडिया पर हमले करते हैं कि जब फ़ॉक्स न्यूज़ ने मई 2016 में चुनाव प्रचार के दौरान रहस्योद्घाटन किया था कि वॉशिंग्टन पोस्ट को पिछले वर्षों में ट्रम्प की धांधली के बारे में जो फ़ाइल मिली थी उसे ख़ुद ट्रम्प ने ही लीक किया था। इस अमरीकी समाचारपत्र ने बताया था कि उसे एक ऑडियो फ़ाइल मिली है जिससे पता चलता है कि 1970 से 1990 के बीच के बरसों में ट्रम्प, अपनी ग़लत पहचान बता कर अपने आपको ट्रम्प का प्रवक्ता ज़ाहिर करते थे और अपने निजी जीवन की बहुत सी बातें संचार माध्यमों को बता देते थे। वेनेटी फ़ेयर नामक पत्रका के रिपोर्टर ने फ़ाक्स न्यूज़ से बात करते हुए कहा कि ट्रम्प जॉन मिलर और जॉन बारोन जैसे काल्पनिक नामों से मीडिया से संपर्क करते थे और अपने जीवन के बारे में गुप्त सूचनाएं उन्हें देते थे। पीपल मैगज़ीन की पूर्व पत्रकार सू कार्सवेल ने भी इस टेलीफ़ोनी संपर्क के बारे में, जो वर्ष 1991 में हुआ था, कहा कि ट्रम्प ने उन्हें दो बार फ़ोन किया और इस काम के लिए उनसे क्षमा मांगी और फिर उनके दिल से यह बात निकालने के लिए उन्हें और उनके दो सहयोगियों को डिनर के लिए आमंत्रित किया। ट्रम्प की ओर से इस बात को झुठलाए जाने से अप्रसन्न कार्सवेल का का कहना है कि उन्हें इसके लिए क्षमा मांगनी चाहिए क्योंकि उनके द्वारा इस बात को झुठलाए जाने से वे झूठी बन गई हैं।
बहुत से टीकाकारों का कहना है कि मीडिया के बारे में ट्रम्प का रवैया अप्रचलित है और बहुत कम राजनीतिज्ञ हैं जो मीडिया के प्रति अपने आक्रोश को कटाक्ष और अभद्र भाषा के माध्यम से व्यक्त करते हैं। लेकिन ट्रम्प ने अमरीका के राष्ट्रपति के रूप में अनेक बार ऐसा किया है और प्रतीत यही होता है कि वे अपना रवैया बदलना नहीं चाहते। अमरीका के नए राष्ट्रपति अपने कार्यकाल के पहले ही दिन सीआईए के कार्यालय गए और वहां भी उन्होंने संचार माध्यमों पर हमला किया। इस मौक़े पर उन्होंने अपने 15 मिनट के भाषण में से 9 मिनट अमरीकी संचार माध्यमों पर हमले किए और सीआईए के एजेंटों को संबोधित करते हुए कहा कि आप जानते हैं कि मैंने मीडिया के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ दिया है और संचार माध्यम के लोग, धरती पर सबसे अविश्वसनीय लोगों में शामिल हैं।
जो बात निश्चित है वह यह है कि ट्रम्प मीडिया के विरुद्ध शत्रुतापूर्ण नीति अपना कर संचार माध्यमों को झूठा बताना और मीडिया के ख़िलाफ़ अमरीकी समाज के वातावरण को दूषित करने का काम पूरी शक्ति से जारी रखना चाहते हैं। अलबत्ता मीडिया पर हमला केवल ट्रम्प तक सीमित नहीं है बल्कि उनके सलाहकार और मुख्य रणनीतिकार स्टीव बेनन ने न्यूयार्क टाइम्ज़ से बात करते हुए कहा है कि समाचारिक संगठन, चुनावों के बारे में अपनी ग़लत भविष्यवाणियों के कारण अपमानित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया को शर्म आनी चाहिए और उसे अपना मुंह बंद रखना चाहिए और कुछ समय तक सिर्फ़ सुनना चाहिए। मुझे लगता है कि यहां डेमोक्रेटिक पार्टी नहीं बल्कि मीडिया विपक्ष है।
इन तमाम बातों के बाद अब पत्रकारों और संचार विशेषज्ञों के मन में यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या ट्रम्प संचार माध्यमों को अनुपयोगी बता कर उन्हें अपने आप से दूर कर देंगे? अधिकांश टीकाकारों का कहना है कि ट्रम्प ऐसा नहीं कर पाएंगे। कुछ टीकाकार ट्रम्प के मुक़ाबले में मीडिया की विफलता को भी स्वीकार करते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र के एक अमरीकी विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर जेफ़ जारविस कहते हैं कि डोनल्ड ट्रम्प का राष्ट्रपति पद के लिए प्रत्याशी बनना ही पत्रकारों की विफलता का सूचक है। उनका कहना है कि राष्ट्रपति चुनाव में ट्रम्प की सफलता से पता चलता है कि मीडिया, सच्चाई तक पहुंचने में विफल रहा है। वॉशिंग्टन पोस्ट के एक पत्रकार जॉन मिलर ने चुनाव में ट्रम्प की जीत के बाद ट्वीट किया। मैं और मेरे साथी बुरी तरह हार गए। बहरहाल अब आने वाले दिन ही बताएंगे कि ट्रम्प और मीडिया के बीच लड़ाई कब तक जारी रहेगी। मीडिया के पास जो कुछ था उसने ट्रम्प के ख़िलाफ़ इस्तेमाल कर लिया और अब ट्रम्प की बारी है और लगता है वह पूरी शक्ति के साथ बदला लेने को आतुर हैं।