रविवार- 8 मार्च
1010 प्रसिद्ध ईरानी महाकवि " फिरदौसी" ने अपना अमर रचना " शाहनामा" पूरी की।
1535 बहादुर शाह ने चित्तौड़ के किले पर क़ब्ज़ा किया।
1673 छत्रपति शिवाजी महाराज ने पन्हाला दुर्ग पर क़ब्ज़ा।
1736 ईरान में अफशारी साम्राज्य के संस्थापक नादिर शाह (दुर्रानी) ने ताज पहना
1817 न्यूयार्क स्टाक एक्सचेंज की स्थापना हुई।
1921 प्रसिद्ध कवि साहिर लुधवानवी का जन्म हुआ।
1948 विदेशी उड़ानों के लिए एयर इंडिया ओवरसीज़ की स्थापना हुई।
2000 गुजरात राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ ( आरएसएस) की गतिविधियों में भाग लेने पर लगा प्रतिबंध हटा दिया।
2004 इराक़ में नये संविधान पर हस्ताक्षर हुए।
8 मार्च सन 1968 ईसवी को फ़िलिपीन में तत्कालीन राष्ट्रपति और तानशाह मारकोस के विरुद्ध मोरो लिबरेशन फ्रंट ने सशस्त्र संघर्ष आरंभ किया।
मारकोस पूरी तरह अमरीका के अनुयायी थे उनके शासन काल में फ़िलिपीन के हज़ारों मुसलमान सरकारी सैन्य बलों के हाथों हताहत और गिरफ़तार हुए। मुसलमानों के अधिकार उन्हें दिलाने के लिए मोरो लिबरेशन फ़्रंट नामक एक बड़े छापामार गुट ने मारकोस के विरुद्ध अपनी कार्रवाही आरंभ की, किंतु मारकोस के सत्ता से हटने के बाद इस गुट ने नयी सरकार से वार्तालाप किया जिसके परिणामस्वरुप दोनों पक्षों के बीच संघर्ष विराम पर हस्तक्षर हुए। दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के आधार पर मुसलमान बाहुल्य वाले मीन्डानाओं प्रांत को स्वायत्तता मिली।
8 मार्च वर्ष 1875 को उर्दू शायरी में मरसिया कहने वाले प्रसिद्ध शायर मिर्ज़ा सलामत अली दबीर का स्वर्गवास हुआ। वे 29 अगस्त वर्ष 1803 को दिल्ली में जन्मे और लखनऊ में फ़ार्सी और अरबी भाषाओं में दक्षता प्राप्त की। उन्हें बचपन से ही पैग़म्बरे इस्लाम (स) और उन के पवित्र परिजनों की प्रशंसा में रूचि थी। छोटी आयु में ही उन्होंने मरसिया कहना आरंभ कर दिया और आयु के साठ वर्ष मरसिया कहने में बिताए। दबीर ने मरसिये के स्तर को ऊंचा किया। शायरी में उनकी तुलना अधिकतर मीर अनीस से की जाती है।
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18 इस्फ़ंद वर्ष 1275 हिजरी शम्सी को मुसलमानों के धार्मिक नेता सैयद जमालुद्दीन असदाबादी का देहान्त हुआ। सैयद जमालुद्दीन दर्शनशास्त्र, खगोलशास्त्र, और इतिहास में बहुत निपुण थे। इसी प्रकार वे अरबी, फ़ारसी और तुर्की भाषाओं के अतिरिक्त अंग्रेज़ी, फ़्रांसीसी और रूसी भाषा में भी दक्ष थे। सैयद जमालुद्दीन को मुसलमानों के मध्य एकता और इस्लामी देशों में साम्राज्य विरोधी जनांदोलनों के संस्थापकों में गिना जाता है। उन्होंने युवा काल से ही इस्लामी देशों की यात्राएं आरंभ की और सदैव इस्लामी राष्ट्रों को एकजुट करने में लगे रहे। उन्होंने उरवतुल वुस्क़ा को पेरिस में और लंदन में ज़ियाउल ख़ाफ़ेक़ैन समाचार पत्र को प्रकाशित करके मुसलमानों को जागरूक करने का प्रयास किया जिसके कारण साम्राज्य उनका मुखर विरोधी हो गया। सैयद जमालुद्दीन की कामना, संसार के समस्त मुसलमानों की एकता और समस्त इस्लामी देशों की वास्तविक स्वतंत्रता थी।
18 इस्फ़ंद वर्ष 1360 हिजरी शम्सी को प्रसिद्ध ईरानी धर्मशास्त्री, संघर्षकर्ता व धर्मगुरू आयतुल्लाह रब्बानी शीराज़ी का स्वर्गवास हुआ। वह वर्ष सन 1301 हिजरी शम्सी में शीराज़ में जन्मे थे। उन्होंने सन 1342 हिजरी शम्सी से शाह की तानाशाही सरकार के विरुद्ध भरपूर संघर्ष आरंभ किया। इस संबंध में कई बार आपको गिरफ़्तार करके जेल में डाल दिया गया। इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद वह शीराज़ से सांसद चुने गए। आयतुल्लाह रब्बानी ने अपनी समस्त आयु इस्लाम और मुसलमानों की सेवा करने में गुज़ारी।
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13 रजब 23 वर्ष हिजरत पूर्व को पैग़म्बरे इस्लाम के चचेरे भाई दामाद और उत्तराधिकारी हज़रत अली अ का मक्का नगर में काबे में जन्म हुआ। उन्की मॉं का नाम फ़ातेमा बिन्ते असद और पिता का नाम अबू तालिब था। उनके पालन पोषण और शिक्षा दीक्षा का दायित्व पैगम्बरे इस्लाम ने संभाला। उनकी पत्नी हज़रत फ़ातेमा ज़हरा पैग़म्बरे इस्लाम की पुत्री थीं। हज़रत अली ने इस्लाम धर्म की सुरक्षा के लिए कठिन परिश्रम किये। वे बहुत वीर थे किंतु उनके सीने में कोमल और दयालु हृदय भी था। इसी कारण वे समाज के कमज़ोर लोगों की सहायता और अत्याचारियों से संघर्ष करते। उन्होंने न्याय पर आधारित आदर्श शासन व्यवस्था का उदाहरण पेश किया। वे ईश्वर के महान उपासक थे। बहुत ही साहसी व्यक्ति होने के बावजूद जब वे ईश्वर के समक्ष उपासना के लिए खड़े होते उनका चेहरा ईश्वरीय भय से पीला पड़ जाता था। वे महाज्ञानी थे। उनके स्वर्णिम कथनों का संकलन मौजूद है। 19 रमज़ान सन 40 हिजरी क़मरी को एक पथम्रष्ट व्यक्ति ने उन्हे नमाज़ पढ़ते समय घायल कर दिया जिसके दो दिन बाद वे शहीद हो गये।