Mar ०४, २०१७ १०:५६ Asia/Kolkata

17 मार्च सन 636 ईसवी को रोम की पराजय के बाद बैतुल मुक़ददस पर मुस्लमानों का अधिकार हो गया।

17 मार्च सन 636 ईसवी को रोम की पराजय के बाद बैतुल मुक़द्दस पर मुस्लमानों का अधिकार हो गया। इस्लाम के उदय के पश्चात रोम की सेना से मुसलमानों का पहला युद्ध लाल सागर के उत्तर में हुआ। मुसलमानों के दूसरे ख़लीफ़ा के शासन काल में मुसलमान सेनाओं ने रोम की सेना को हराया और दक्षिणी फ़िलिस्तीन को स्वतंत्र करवाया। इस पराजय के बाद रोम के राजा ने एक बड़ी सेना फ़िलिस्तीन की ओर रवाना की किंतु फ़िलिस्तीन में होने वाले दूसरे युद्ध में भी रोम की सेना को मुसलमानों के हाथों भारी पराजय का सामना हुआ।

इस युद्ध में रोम का सेनापति मारा गया था। इसके बाद फ़िलिस्तीन और सीरिया के लोगों ने इस्लाम स्वीकार कर लिया और यह क्षेत्र इस्लामी शासन के अधीन हो गये। सन 1097 से ईसाइयों ने बैतुल मुक़ददस पर अधिकार करने के लिए सलीबी युद्ध आरंभ किया जिसके बाद से कई बार यह क्षेत्र एक से दूसरे के हाथ में आता जाता रहा। अंतत: सन 1250 में मुसलमान सेनापति सलाहुद्दीन अययूबी ने इस पर अधिकार किया। फिर यह क्षेत्र मुसलमानों के हाथों में रहा। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान पूरे फ़िलिस्तीन का क्षेत्र ब्रिटेन के अधिकार में चला गया। बाद में इस क्षेत्र पर ज़ायोनियों ने क़ब्ज़ा कर लिया जिसके कारण इस क्षेत्र के असली स्वामियों अर्थात फ़िलिस्तीनियों और अतिग्रहणकारी ज़ायोनियों के बीच संघर्ष जारी है।

 

17 मार्च सन् 1527 में आगरा के युद्ध में बाबर से चित्तौड़गढ़ के राणा संग्राम सिंह प्रथम पराजित हुए।

17 मार्च सन् 1672 में नीदरलैंड के ख़िलाफ़ इंग्लैंड ने युद्ध की घोषणा की।

17 मार्च सन् 1782 में ईस्ट इंडिया कंपनी और मराठा शासकों के बीच सल्बाई की समझौता हुआ।

17 मार्च सन् 1845 में लंदन के स्टीफन पेरी ने रबर बैंड को पेटेंट कराया।

17 मार्च सन् 1906 में ताइवान में आए भूकंप में लगभग 1000 लोगों की जान गई।

17 मार्च सन् 1942 में अमेरिका में राष्‍ट्रपति फ्रैंकलिन डी रुजवलेट द्वारा दुनिया में कला के बेहतरीन संग्रहों में से एक नेशनल गैलरी ऑफ आर्ट को खोला गया।

17 मार्च सन् 1959 में बौद्ध धर्मगुरू दलाई लामा तिब्बत से भारत पहुंचे।

17 मार्च सन् 1963 में बाली द्वीप पर ज्वालामुखी फटने से तक़रीबन 2000 लोगों की जान गयी।

17 मार्च सन् 1987 में आईबीएम ने पीसी-डीओएस 3.3 वर्जन जारी किया।

 

17 मार्च सन 1828 ईसवी को फ़्रांस के दार्शनिक इतिहासकार और आलोचक हेपोलेट टेन का जन्म हुआ। उन्होंने अपनी पुस्तकों में तीन बातों जाति काल और स्थान को दृष्टिगत रखकर साहित्यिक ऐतिहासिक और कला संबंधी बातों का विस्तार से वर्णन किया है। उनकी पुस्तकों में अंग्रेज़ी साहित्य का इतिहास कला आदि का नाम लिया जा सकता हैं।

सन 1893 ईसवी में हेपोलेट टेन का निधन हुआ।

17 मार्च सन 1948 ईसवी को ब्रिटेन फ़्रांस और हॉनेंड ब्रसेल्ज़ समझौते पर हस्ताक्षर किये जिसके अनुसार तीनों देश वचन बद्ध हुए कि समझौते में शामिल किसी भी देश पर विदेशी आक्रमण होने की स्थिति में सभी सदस्य देश उस आक्रमण का मुक़ाबला करेंगे।

 

 

17 मार्च सन 1968 ईसवी को ब्रिटेन की राजधानी लंदन में वियतनाम युद्ध के विरोध में प्रदर्शन हिंसा में बदल गये।

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने पुलिस के हस्तक्षेप से क्रोधित होकर पुलिस कर्मियों से झड़पे आरंभ कर दीं जिससे 90 पुलिस कर्मी घायल हो गये।

 

17 मार्च वर्ष 1911 को पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिनाह ने मुस्लिम वक़्फ़ का विधेयक प्रस्तुत किया। यह विधेयक इम्परीरियल लेजिस्लेटिव काउन्सिल में दो वर्ष के प्रयासों के बाद पारित हुआ। यह विधेयक अत्यंत महत्त्पपूर्ण था क्योंकि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद भारतीय मुसलमान कमज़ोर व आभाव की भावना में ग्रस्त हो गए थे और मुस्लिम शासकों की संतान को अपनी जायदाद गिरवी रखकर जीवन यापन करना पड़ता था और जब ऋण बढ़ जाता था तो ऋण देने वाले कोई न कोई विवाद खड़ा करके उनकी जायदाद को अत्यंत कम मूल्य पर बेच देते थे। जिनाह द्वारा प्रस्तुत किए गए विधेयक के बाद मुस्लिम शासकों की जायदाद उनके परिजनों के लिए वक़्फ़ हो जाती थी और उसे बेचा नहीं जा सकता था। इस प्रकार मुस्लिम शासकों के परिजन शांति के साथ जीवन बिताने लगे।

 

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27 इस्फ़ंद वर्ष 1302 हिजरी शमसी को ईरान के प्रख्यात धर्मगुरू आयतुल्लाह अबुल क़ासिम रहमानी का बेहशहर नगर में जन्म हुआ। उन्होंने बाल्यकाल से ही धार्मिक शिक्षा ग्रहण करना आरंभ कर दी। इसके बाद वे उच्च शिक्षा की प्राप्ति के लिए इराक़ के पवित्र नगर नजफ़ चल गए जहां उन्होंने आयतुल्लाह सैयद मोहसिन हकीम और आयतुल्लाह ख़ूई जैसे विख्यात विद्वानों से शिक्षा प्राप्त की। नजफ़ में चौदह वर्ष रहने के बाद आयतुल्लाह रहमानी स्वदेश लौटे और उन्होंने अपने पैतृक नगर में धार्मिक शिक्षा केंद्र के साथ ही मस्जिद और इमाम बाड़े का निर्माण कराया, साथ ही वे धार्मिक गतिविधियां भी करते रहे। 72 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।

 

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22 रजब 656 हिजरी क़मरी को मुसलमान साहित्यकार व विद्वान इब्ने अबिल हदीद का 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया। बग़दाद पर मंगोलों के आक्रमण के अवसर पर उनको गिरफ़्तार कर लिया गया था किन्तु कुछ लोगों की सहायता से वह स्वतंत्र हो गये। उनका सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य हज़रत अली (अ) के भाषणों और पत्रों पर आधारित नहजुल बलाग़ा की व्याख्या है जिसमें उन्होंने साहित्य, इतिहास और वादशास्त्र की दृष्टि से नहजुल बलाग़ा के वैभव को प्रकट किया। उनकी अन्य महत्त्वपूर्ण पुस्तकों में अलअबक़रियुल हेसान और अस्सबउल अलवीयात का नाम लिया जा सकता है।

 

22 रजब सन 1246 हिजरी क़मरी को प्रसिद्ध धर्मगुरू और हकीम मुल्ला अली नूरी का निधन हुआ। उन्होंने शिक्षा देने के साथ ही अध्ययन जारी रखा यहॉ तक कि दर्शनशास्त्र के क्षेत्र में उच्च स्थान तक पहुँच गये। उन्होंने कई पुस्तकें लिखीं जिसमें हवाशिए असफ़ार उल्लेखनीय है।