गुरुवार- 19 मार्च
19 मार्च सन 1883 ईसवी को ब्रिटेन के रसायन शास्त्री सर वाल्टर हावर्थ का जन्म हुआ।
19 मार्च सन 1972 को आज ही के दिन भारत और बांग्लादेश ने मैत्री संधि पर हस्ताक्षर किए थे।
19 मार्च सन 1990 को कनाडा की राजधानी ओटावा में महिलाओं की पहली विश्व आइस हॉकी प्रतियोगिता आयोजित हुई।
19 मार्च सन 1998 को भारत के पहले कम्युनिस्ट मुख्यमंत्री एवं माकपा नेता एम. एस. नम्बूदरीपाद का निधन हुआ।
19 मार्च सन 2008 को पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने सरबजीत सिंह की दया याचिका खारिज कर दी।
19 मार्च सन 1883 ईसवी को ब्रिटेन के रसायन शास्त्री सर वाल्टर हावर्थ का जन्म हुआ। उन्होंने हाइड्रोकारबोरेट्स के बारे में व्यापक अध्ययन किया। उन्होंने इसी प्रकार विटामिन सी के बारे में बहुत अध्ययन और शोधकार्य किया। अपने इन्ही परिश्रमों और प्रयासों के कारण हावर्थ ने सन 1937 में रसायन शास्त्र का नोबल पुरस्कार जीता। सन 1950 में हावर्थ का निधन हो गया।
19 मार्च सन 1900 ईसवी को फ़्रेडरिक जूलियो नामक फ़्रांसीसी रसायन और भौतिक शास्त्री का जन्म हुआ। उन्होंने अपनी विश्वविद्यालय की शिक्षा पूरी करने के बाद रेडियम की आविष्कारक मैडम क्यूरी के नेतृत्व में काम करना आरंभ किया। इस बीच उन्होंने मैडम क्यूरी की पुत्री से विवाह भी रचा लिया और अपनी पत्नी के साथ मिलकर शोधकार्य किया जिसके परिणाम स्वरुप उन्होंने रेडियो एक्टिव के नये तत्वों का पता लगाया। फ़्रेडरिक जूलियो का सन 1958 में निधन हुआ।

19 मार्च सन 1970 ईसवी को पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी के शासकों विल्ली स्टॉफ़ और विल्ली ब्रान्ट ने एरफ़र्ट नामक स्थान पर बैठक की। जर्मनी के विभाजन के बाद से दोनों पक्षों के बीच यह इस प्रकार की पहली बैठक थी।
19 मार्च सन 1978 ईसवी को संयुक्त राष्ट्रसंघ की सुरक्षा परिषद ने अपनी शांति सेना लेबनान भेजने के पक्ष में वोट डाला। यह मतदान पॉच दिन पूर्व इस्राईली सेना के लेबनान पर भारी वायु आक्रमण के बाद हुआ था।

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29 इसफ़ंद सन 1329 हिजरी शम्सी को ब्रिटेन और ईरान में ब्रिटेन के पिट्ठू शाह की सरकार के विरुद्ध ईरानी जनता के निरंतर संघर्ष के बाद ईरान की संसद में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित हुआ। आज के दिन ईरान के तेल उद्योग के राष्ट्रीयकरण के प्रस्ताव पर ईरानी संसद ने सहमति व्यक्त की। यह सफलता ईरानी जनता के साम्राज्य विरोधी संघर्ष में एक नय मोड़ थी और इसके बाद से यह संघर्ष और भी तेज़ हुआ। तेल उद्योग के राष्ट्रीय करण के बाद जनता और विशेषकर संघर्षकर्ता धर्मगुरु आयतुल्लाह काशानी के समर्थन से डॉक्टर मुसद्दिक़ ईरान के प्रधान मंत्री बने और उन्होंने इस प्रस्ताव के क्रियानवयन को अपनी सरकार की कार्यसूचि में सर्वपरि रखा। इसके बाद पश्चिम देशों ने ईरान से तेल लेना बंद कर दिया और ब्रिटेन ने जिसके अवैध हित ईरान में समाप्त हो रहे थे ईरान के विरुद्ध हेग के न्यायालय में याचिका दायर की किंतु इस न्यायालय ने ईरान के पक्ष में फैसला सुनाया।
ब्रिटेन और शाह की सरकार की चालों और षडयंत्रों के बावजूद तेल उद्योग के राष्ट्रीयकरण का क़ानून क्रियान्वित हुआ। इस प्रकार 29 ख़ुर्दाद सन 1330 हिजरी शम्सी को ईरान के तेल उद्योग में ब्रिटिश कम्पनियों का मार्ग पूरी तरह बंद कर दिया गया।
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24 रजब सन 7 हिजरी क़मरी को ख़ैबर दुर्ग जो यहुदियों का मज़बुत ठिकाना था पैग़म्बरे इस्लाम (स) और हज़रत अली (अ) ने जीत लिया। इस्लाम की शत्रुता पर आग्रह कर रहे यहूदियों ने मदीना नगर से थोड़ी दूर स्थित ख़ैबर नामक स्थान पर 7 मज़बूत दुर्ग बनाए थे जिन्हें अजेय समझते हुए वे मुसलमानों के विरुद्ध षडयंत्र कर रहे थे। वर्ष 7 हिजरी क़मरी में पैग़म्बर इस्लाम ने खैबर दुर्ग पर मुसलमानों के नियंत्रण की शुभसूचना दी। इसके बाद कुछ समय में मुसलमानों ने ख़ैबर के कई दुर्गों पर अधिकार कर लिया किंतु शेष दो दुर्ग जीतने में मुसलमानों को सफलता नहीं मिल पा रही थी। अंतत: पैग़म्बरे इस्लाम ने इस्लामी सेनापतियों के बीच एक दिन घोषणा की कि कल मैं इस्लाम का झंडा उसके हाथ में दूँगा जो ईश्वर और उसके दूत से प्रेम करता होगा और ईश्वर तथा उसके दूत उस ये प्रेम करते और होंगे। ईश्वर इस दुर्ग पर उसी व्यक्ति के हाथों विजय दिलाएगा। अगले दिन पैग़म्बरे इस्लाम ने इस्लामी सेना की कमान हज़रत अली (अ) के हाथ में दी जिन्होंने अद्वितीय साहस और वीरता का प्रदर्शन करते हुए अंतिम दुर्ग भी जीत लिया।