शुक्ववार- 20 मार्च
20 मार्च सन 1956 ईसवी को अफ़्रीकी देश टयूनीशिया को फ़्रांस के अधिकार से मुक्ति मिली और यह देश स्वतंत्र हुआ।
इस देश का इतिहास बहुत पुराना है। इस पर बहुत से देशों तथा सरकारों को अधिकार रह चुका है। 1574 ईसवी में उसमानी शासन ने टयूनीशिया पर अधिकार किया। 19वीं शताब्दी के आरंभ से योरोपीय वर्चस्ववादियों ने इस क्षेत्र की ओर रुख किया। फ़्रांस ने इस देश पर 1881 में आक्रमण करके इसे अपने अधीन कर लिया।
टयूनीशिया में जनता ने फ़्रांस के विरुद्ध प्रथम विश्व युद्ध से पहले ही संघर्ष आरंभ किया किंतु द्वितीय विश्व युद्ध में फ़्रांस के कमज़ोर पड़ जाने के बाद टयूनेशिया के स्वतंत्रता प्रेमियों ने अपना संघर्ष तेज़ कर दिया और अंतत: 1956 ईसवी में टयूनीशिया को स्वतंत्रता मिली।
टयूनीशिया का क्षेत्रफल 1 लाख 63 हज़ार वर्ग किलोमीटर है। अलजीरिया और लीबिया इसके पड़ोसी देश हैं।
- 20 मार्च सन् 1351 में दिल्ली के सुल्तान मोहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु हुई।
- 20 मार्च सन् 1602 में यूनाइटेड डच ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना हुई थी।
- 20 मार्च सन् 1739 में दिल्ली सल्तनत पर नादिरशाह ने कब्ज़ा किया।
- 20 मार्च सन् 1904 में सी.एफ.एंड्रूज़, महात्मा गाँधी के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होने भारत आये।
- 20 मार्च सन् 1916 में अल्बर्ट आइंस्टीन की किताब जनरल थ्योरी ऑफ रिलेटिवली का प्रकाशन हुआ।
- 20 मार्च सन् 1920 में लंदन से दक्षिण अफ्रीका के बीच पहली उड़ान शुरू हुई।
- 20 मार्च सन् 1987 में नासा ने पाला बी 2 पी की शुरुआत की।
- 20 मार्च सन् 1956 में सोवियत संघ ने परमाणु परीक्षण किया।
- 20 मार्च सन् 1966 में लंदन वेस्टमिनिस्टर के सेंट्रल हॉल में प्रदर्शनी के लिए रखा गया फुटबॉल वर्ल्ड कप चोरी हुआ था।
- 20 मार्च सन् 1977 में भारत की भूतपूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी लोकसभा चुनाव में पराजित हुईं थी।
- 20 मार्च सन् 1987 में अमेरिकी सरकार द्वारा एड्स के इलाज के लिए दी जाने वाली यह पहली दवा एंटी एड्स दवा AZT को फूड एंड ड्रग एडमिनिशट्रेशन ने मंजूरी दी।
- 20 मार्च सन् फ्रांस ने 1982 में परमाणु परीक्षण किया।
- 20 मार्च सन् 1991 में बेगम ख़ालिदा ज़िया बांग्लादेश की राष्ट्रपति बनी।
- 20 मार्च सन् 1995 में टोक्यो में भूमिगत रेल मार्ग में विषैली गैस के लीक होने से लगभग 15 लोगों की जान गई और हजारों लोग घायल हुए।
- 20 मार्च सन् 2010 में गौरैया नाम के चिड़िया को बचाने के लिए पहली बार ‘विश्व गौरैया दिवस’ मनाया गया।
20 मार्च मार्च 1727 को महान वैज्ञानिक इसहाक़ न्यूटन का 84 वर्ष की आयु में देहान्त हुआ। वे सन 1642 ईसवी में क्रिसमस के दिन ब्रिटेन के एक छोटे से गांव में जन्मे थे। पिता की मृत्यु उनके जन्म से पूर्व ही हो गई थी। 18 वर्ष की आयु में उन्हें कैंब्रिज विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला। सन 1665 में उन्होंने कैब्रीज से बीए की डिग्री प्राप्त की। तीन कार्यों ने न्यूटन को अमर कर दिया। इनमें से एक कैल्कूलेस (calculus) का आविष्कार था। दूसरे प्रकाश से संबंधित उनका शोध था जिसमें उन्होंने सिद्ध किया कि प्रकाश वास्तव में विभिन्न प्रकार की रेडियोधर्मी लहरों का संग्रह है और इन रंगों के मिलने से सफ़ेद रंग अस्तित्व में आता है। न्यूटन का तीसरा महत्त्वपूर्ण कारनामा गुरूत्वाकर्षण शक्ति की खोज है। न्यूटन वे पहले वैज्ञानिक हैं जिनको सर की उपाद्धि मिली।

20 मार्च 1815 ईसवी को नेपोलियन बोनापार्ट फ़्रांस का सम्राट बना किन्तु 18 जून वर्ष 1815 को वॉटरलू मैदान में उसकी सत्ता का सूर्यास्त हो गया और 28 जून को उसे सेनेट द्वीप में बंदी बनाया गया। उसी स्थिति में 5 मई वर्ष 1821 को नेपोलियन बोनापार्ट का देहान्त हुआ।
20 मार्च वर्ष 1898 को रेडियम का पता चला। यह धातु अत्यंत दुर्लभ और मूल्यवान है। इसको पिछली शताब्दी के महान वैज्ञानिकों पियर क्यूरी और मैडम क्यूरी ने खोजा। इस खोज से चिकित्सा संसार और विज्ञान के मैदान में महान क्रांतियां आईं।
20 मार्च वर्ष 2003 ईसवी को अमरीका और ब्रिटेन ने आतंकवाद से संघर्ष, सद्दाम शासन की समाप्ति और सामूहिक जनसंहारक शस्त्रों की समाप्ति का बहाना बताकर इराक़ पर आक्रमण कर दिया। विश्वजनमत और विश्व की अधिकांश सरकारों ने इस आक्रमण को ग़ैर क़ानूनी बताते हुए इसकी आलोचना की। कुछ अवसरों पर इराक़ की जनता ने प्रतिरोध किया किन्तु सद्दाम की सरकार ने कोई विशेष प्रतिरोध नहीं किया और इसके परिणाम स्वरूप अप्रैल वर्ष 2003 को अमरीका ने बग़दाद पर क़ब्ज़ा कर लिया। इस प्रकार से इराक़ी राष्ट्र को यद्यपि एक अत्याचारी तानाशाह से मुक्ति मिल गई किन्तु वह अतिग्रहणकारी एवं विस्तारवादियों के जाल में फंस गया। बग़दाद-वाशिंग्टन के मध्य हुए समझौते के आधार पर और जनता व धार्मिक नेतृत्व के कड़े प्रतिरोध के बाद यद्यपि अमरीकी सैनिकों को इराक़ से निकलना पड़ा किन्तु अब भी अमरीकी दूतावास में 15 हज़ार अमरीकी कर्मी मौजूद हैं। विशेषज्ञ इसे अमरीकी कूटनयिक छावनी के नाम से याद करते हैं।
***
आज पहली फ़रवरदीन है यह ईरानियों के निकट बसंट ऋतु का पहला दिन है आज के दिन से सुहाने मौसम का आरंभ होता है हरियाली से वंचित वातावरण आज के दिन से हरा भरा होने लगता है।
ईरान के लोग आज के दिन को ईद के रुप में मनाते हैं इसे ईदे नौरोज़ कहा जाता है यह ईरानियों की सबसे बड़ी ईद है।
ईरानी आज के दिन एक दूसरे से मिलने जाते हैं ईद कार्ड आदि भेजकर एक दूसरे के लिए मंगलमय वर्ष की कामना करते हैं।
आज ही के दिन से हिजरी शम्सी वर्ष आरंभ होता है।