Mar ०७, २०१७ १३:४७ Asia/Kolkata

24 मार्च सन 1989 को 70 वर्ष के पश्चात आज़रबाइजान गणराज्य के नगर गंजे की जामा मस्जिद की मरम्मत करवाकर उसको ठीक किया गया।

आज़रबाइजान की एतिहासिक धरोहरों में से एक यह मस्जिद लंबे समय से बंद पड़ी थी।  उल्लेखनीय है कि पूर्व सोवियत संघ और उसके गणराज्यों में होने वाले राजनैतिक परिवर्तनों के बाद आज़रबाइजान गणराज्य के मुसलमानों की ओर से किये जाने वाले प्रदर्शनों के पश्चात बहुत सी मस्जिदों का पुनर्निमाण करके इनको नमाज़ अदा करने के लिए खोला गया।

  • 24 मार्च सन् 1837 में कनाडा में अश्वेत नागरिकों को वोट डालने का अधिकार दिया गया।
  • 24 मार्च सन् 1855 में कोलकाता से आगरा के बीच पहली बार टेलीग्राफ से लंबी दूरी का संदेश प्रेषित किया गया।
  • 24 मार्च सन् 1855 में ब्रिटिश कैबिनेट मिशन भारत पहुंचा।
  • 24 मार्च सन् 1882 में घातक संक्रामक बीमारी टीबी की पहचान आज ही के दिन हुई थी। इसका पता लगाने वाले वैज्ञानिक को बाद में नोबेल पुरस्कार दिया गया।
  • 24 मार्च सन् 1883 में शिकागो और न्यूयार्क के बीच पहली बार फोन से बातचीत हुई।
  • 24 मार्च सन् 1932 में अमेरिका में पहली बार चलती ट्रेन से रेडियो प्रसारण किया गया।
  • 24 मार्च सन् 1959 में इराक़ ने बग़दाद समझौते से ख़ुद को अलग कर लिया।
  • 24 मार्च सन् 1977 में मोरार जी देसाई भारत के चौथे प्रधानमंत्री बने और उन्होंने केन्द्र में पहली बार ग़ैर-कांग्रेसी सरकार बनायी।
  • 24 मार्च सन् 1990 में भारतीय सेना ने श्रीलंका छोड़कर स्वदेश वापसी की।
  • 24 मार्च सन् 2008 में भूटान लोकतांत्रिक देश बना।

 

24 मार्च सन 1820 ईसवी को जर्मनी के दार्शनिक फ़्रेडरिक एंगल्स का जन्म हुआ। वे जर्मनी के विख्यात दार्शानिक कार्ल मार्क्स के सहयोगी और मित्र थे। एंगल्स राजनैतिक गतिविधियों के कारण अधिकारियों की नज़रों में चढ़ चुके थे जिसके कारण सन 1850 में उन्हें ब्रिटेन भागना पड़ा। सन 1848 में कम्यूनिट दलों के पहले सम्मेलन में जारी होने वाले मैनीफ़ेस्टे या कम्यूनिज्म घोषणापत्र एंगल्स और फ़्रेडरिक ने मिलकर तैयार किया था। मार्क्स के बाद एंगल्स ने कम्यूनिज़्म की विचारधारा को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई उनके विचार के आधार पर विश्व दो मुख्य धुर्वों सोशलिज़्म और कैपिटलिज्म में विभाजित हो गया । एंगल्स का निधन सन 1895 में हो गया।

 

24 मार्च सन 1882 ईसवी को जर्मनी के विख्यात चिकित्सक और वैज्ञानिक राबर्ट कोच ने टीबी की बीमारी के रोगाणु का पता लगाया। राबर्ट कोच ने दस वर्ष से अधिक का समय टीबी के रोग के कारणों का पता लगाने में व्यतीत किया। अंतत: वे इस रोग के कारण का पता लगाने में सफल हो गये। इस बीमारी के रोगाणु को कोच के नाम से ही कोख़ बैक्टेरिया कहा जाता है। इस जर्मन चिकित्सक ने सन 1905 में नोबल पुरस्कार प्राप्त किया।

 

 

24 मार्च सन 1905 ईसवी को फ़्रांस के कुशल कथाकार और लेखक जॉल वर्न का 77 वर्ष की आयु में निधन हुआ। वे फ़रवरी सन 1828 में जन्में थे। उन्होंने मनुष्य की भविष्य की ज्ञान संबंधी उन्नति की कल्पना के आधार पर बड़े ही आकर्षक लेख और कहानियां लिखी हैं।

उनकी पुस्तकों में अस्सी दिन में विश्व का चक्कर, बैलून में पांच सप्ताह, रहस्यमयी द्वीप और धरती के केंद्र की यात्रा आदि का नाम लिया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि इन्ही कहानियों को कई रचनात्मक फ़िल्मों की पटकथा बनाया गया है।

 

24 मार्च सन 1989 को 70 वर्ष के पश्चात आज़रबाइजान गणराज्य के नगर गंजे की जामा मस्जिद की मरम्मत करवाकर उसको ठीक किया गया।  आज़रबाइजान की एतिहासिक धरोहरों में से एक यह मस्जिद लंबे समय से बंद पड़ी थी।  उल्लेखनीय है कि पूर्व सोवियत संघ और उसके गणराज्यों में होने वाले राजनैतिक परिवर्तनों के बाद आज़रबाइजान गणराज्य के मुसलमानों की ओर से किये जाने वाले प्रदर्शनों के पश्चात बहुत सी मस्जिदों का पुनर्निमाण करके इनको नमाज़ अदा करने के लिए खोला गया।

 

24 मार्च सन 1820 ईसवी को जर्मनी के दार्शनिक फ़्रेडरिक एंगल्स का जन्म हुआ। वे जर्मनी के विख्यात दार्शानिक कार्ल मार्क्स के सहयोगी और मित्र थे। एंगल्स राजनैतिक गतिविधियों के कारण अधिकारियों की नज़रों में चढ़ चुके थे जिसके कारण सन 1850 में उन्हें ब्रिटेन भागना पड़ा। सन 1848 में कम्यूनिट दलों के पहले सम्मेलन में जारी होने वाले मैनीफ़ेस्टे या कम्यूनिज्म घोषणापत्र एंगल्स और फ़्रेडरिक ने मिलकर तैयार किया था। मार्क्स के बाद एंगल्स ने कम्यूनिज़्म की विचारधारा को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई उनके विचार के आधार पर विश्व दो मुख्य धुर्वों सोशलिज़्म और कैपिटलिज्म में विभाजित हो गया । एंगल्स का निधन सन 1895 में हो गया।

 

24 मार्च सन 1882 ईसवी को जर्मनी के विख्यात चिकित्सक और वैज्ञानिक राबर्ट कोच ने टीबी की बीमारी के रोगाणु का पता लगाया। राबर्ट कोच ने दस वर्ष से अधिक का समय टीबी के रोग के कारणों का पता लगाने में व्यतीत किया। अंतत: वे इस रोग के कारण का पता लगाने में सफल हो गये। इस बीमारी के रोगाणु को कोच के नाम से ही कोख़ बैक्टेरिया कहा जाता है। इस जर्मन चिकित्सक ने सन 1905 में नोबल पुरस्कार प्राप्त किया।

 

 

24 मार्च सन 1905 ईसवी को फ़्रांस के कुशल कथाकार और लेखक जॉल वर्न का 77 वर्ष की आयु में निधन हुआ। वे फ़रवरी सन 1828 में जन्में थे। उन्होंने मनुष्य की भविष्य की ज्ञान संबंधी उन्नति की कल्पना के आधार पर बड़े ही आकर्षक लेख और कहानियां लिखी हैं।

उनकी पुस्तकों में अस्सी दिन में विश्व का चक्कर, बैलून में पांच सप्ताह, रहस्यमयी द्वीप और धरती के केंद्र की यात्रा आदि का नाम लिया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि इन्ही कहानियों को कई रचनात्मक फ़िल्मों की पटकथा बनाया गया है।

 

24 मार्च सन 1982 ईसवी को बंग्लादेश में जनरल मोहम्मद इरशाद ने बिना रक्तपात सैनिक विद्रोह करके अब्दुस्सत्तार की सरकार का तख्ता उलट दिया और सत्ता अपने हाथ में ले ली। अब्दुस्सत्तार नवम्बर सन 1982 ईसवी में आम चुनावों के बाद ज़ियाउर्रहमान के स्थान पर राष्ट्रपति बने थे। जनरल इरशाद को भी जनता और राजनैतिक दलों के कड़े  विरोध के बाद सत्ता से हटना पड़ा और इस देश में दोबारा असैनिक सरकारा जनता द्वारा चुने जाने के बाद सत्ता में आयी।

 

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29 रजब सन 656 हिजरी क़मरी को विख्यात मुसलमान लेखक व विचारक इब्ने अबिल हदीद का 70 वर्ष की आयु में निधन हुआ। बग़दाद पर मंगोलों के आक्रमण में उनकै गिरफ़तार कर लिया गया था किंतु उस समय के कुछ प्रभावशाली लोगों के माध्यम से वे स्वतंत्र हो गये। उन्होंने हज़रत अली अलैहिस्सलाम की विश्व विख्यात पुस्तक नहजुल बलाग़ा के बारे में विस्तार से लिखा है।

 

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17 रजब सन 1271 हिजरी क़मरी को प्रसिद्ध मुसलमान धर्म गुरु व शिक्षक सैयद अबू तुराब खुन्सारी का ईरान के केंद्रीय नगरों में गिने जाने वाले खुन्सार नगर में जन्म हुआ। आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ुन्सारी ने अपने समय के महान धर्मगुरुओं से शिक्षा ली यहॉ तक कि स्वयं भी इस्लामी ज्ञानों में दक्ष हो गये। उन्होंने विभिन्न विषयों में कई पुस्तकें लिखी हैं जो उन्के गहरे और व्यापक ज्ञान की परिचायक हैं। उनकी पुस्तकों में क़स्दुस्सबील और मिसबाहुस्सालेहीन का नाम लिया जा सकता है। वर्ष 1364 हिजरी क़मरी में आयतुल्लाह ख़ुन्सारी का देहान्त हुआ।