डोनल्ड ट्रम्प का कार्यकाल के आरंभ में मानवाधिकार के हनन।
अभी डोनल्ड ट्रम्प का राष्ट्रपति काल आरंभ हुए एक महीना भी नहीं गुज़रा है कि उनके द्वारा मानवाधिकार के हनन का दायरा बढ़ता जा रहा है।
उनका एक मानवाधिकार विरोधी क़दम जिस पर बहुत अधिक हंगामा मचा हुआ है, सात मुस्लिम देशों के नागरिकों के अमरीका में प्रवेश पर प्रतिबंध है। आज हम मुख्य रूप से इसी विषय की समीक्षा करेंगे। अमरीका के 45वें राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने सत्ता में आने के केवल दस ही दिन बाद अपने देश को इस प्रकार से दुनिया के सामने ला खड़ा किया जो निश्चित रूप से पिछले सौ साल में अभूतपूर्व है। उन्होंने एक अध्यादेश पर हस्ताक्षर करके सभी शरणार्थियों के अगले 120 दिनों तक और सीरियाई शरणार्थियों के अगले आदेश तक अमरीका में प्रवेश पर रोक लगा दी। उन्होंने इसी तरह ईरान, इराक़, लीबिया, सोमालिया, सूडान, सीरिया व यमन के नागरिकों के अगले 90 दिन तक अमरीका में प्रवेश को प्रतिबंधित कर दिया।
शरणार्थियों और सात मुस्लिम देशों के नागरिकों को वीज़ा दिए जाने पर प्रतिबंध संबंधी अमरीकी राष्ट्रपति के आदेश पर देश विदेश में आपत्तियों की लहर सी आ गई और अमरीका की अनेक हस्तियों और अधिकिरयों ने तथा अन्य देशों के उच्चाधिकारियों, अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं तथा मीडिया कर्मियों ने इस फ़ैसले को जातिवादी और अमानवीय बताया। संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अदीस अबाबा में अफ़्रीक़ी संघ के शिखर सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में कहा कि अफ़्रीक़ा की सीमाएं उन लोगों के लिए जिन्हें सुरक्षा की ज़रूरत है, खुली हुई हैं, उस समय भी जब दुनिया के सबसे विकसित देशों की बहुत सी सीमाएं बंद कर दी गई हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ के मानवाधिकार उच्चायुक्त ज़ैद राद हुसैन ने भी एक ट्वीट में कहा कि केवल राष्ट्रीयता के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव, मानवाधिकार के क़ानूनों के अनुसार वर्जित है। अमरीका ने जिस प्रकार के प्रतिबंध लगाए हैं वे स्नेहपूर्ण नहीं हैं और उनसे, आतंकवाद से संघर्ष के लिए आवश्यक स्रोत व साधन तबाह होंगे।
अमरीकी राजनितिज्ञों विशेष कर डेमोक्रेट्स, नागरिक संस्थाओं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने पूरे अमरीका में ट्रम्प के इस क़दम पर अपने आक्रोष और घृणा का प्रदर्शन किया और बल देकर कहा कि जब तक इस फ़ैसले को वापस नहीं लिया जाता वे विरोध जताने का सिलसिला जारी रखेंगे। हिलेरी क्लिंटन ने एक ट्वीट में लोगों की आपत्तियों का समर्थन करते हुए लिखा कि मैं उन लोगों से एकजुटा व समरसता की घोषणा करती हूं जो पूरे अमरीका में मान्यताओं और संविधान की रक्षा के लिए इकट्ठा हुए हैं।
हारवर्ड विश्व विद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के प्रोफ़ेसर स्टीफ़न मार्टिन वॉल्ट ने एक ट्वीट में लिखा कि ट्रम्प की ओर से कुछ देशों के नागरिकों को वीज़ा दिए जाने पर रोक एक तरह से मुसलमानों के ख़िलाफ़ धार्मिक सांप्रदायिकता है क्योंकि यह प्रतिबंध, सुरक्षा के क्षेत्र में नहीं आता और इसे धार्मिक भेदभाव ही कहा जाएगा। दूसरी ओर एक डेमोक्रेट सिनेटर क्रिस मोरफ़ी ने अपने एक ट्वीट में लिखा कि शरणार्थियों और सात मुस्लिम देशों के यात्रियों को वीज़ा देने पर प्रतिबंध, ग़ैर क़ानूनी है। क़ानून पूरी तरह से स्पष्ट है और मुसलमानों को वीज़ा दिए जाने पर प्रतिबंध ग़ैर क़ानूनी है और हम अगले सप्ताहों में इस ख़तरनाक और घृणा फैलाने वाले आदेश को तुरंत निरस्त किए जाने के लिए एक विधेयक पेश करेंगे। इस अमरीकी सिनेटर ने सात देशों के नागरिकों को वीज़ा देने पर रोक लगाने के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के नए आदेश पर चोट करते हुए लिखा है कि हम तुम्हारे सिरों पर बम गिराते रहेंगे, मानवीय त्रासदी उत्पन्न करते रहेंगे और तुम्हें तुम्हारे देशों में ही क़ैद करके रखेंगे।
जॉर्ज बुश जूनियर के राष्ट्रपति काल में अमरीका के विदेश सचिव रह चुके निकोलस बर्न्ज़ ने ट्रम्प के शरणार्थी विरोधी क़दम की आलोचना करते हुए ट्वीट किया कि हम एक पलायनकर्ता और शरणार्थी राज्य हैं। मैडलिन अलब्राइट, हेनरी किसिंजर, ग्लोरिया स्टीफ़न और अलबर्ट आइंस्टाइन सभी अन्य स्थानों से अमरीका आए थे। रिपब्लिकन सिनेटर जान मैककैन ने कहा कि अमरीका में शरणार्थियों के प्रवेश को रोकने संबंधी नए राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प का आदेश, सिर्फ़ आतंकी गुट दाइश को प्रोपेगंडे की ख़ूराक उपलब्ध कराएगा। उन्होंने सीबीएस टीवी चैनल से बात करते हुए ट्रम्प के इस आदेश को एक ग़लत प्रक्रिया बताया।
अमरीकी सेनेट में बहुसंख्यक रिपब्लिकन पार्टी के नेता मिच मैककोनल ने भी घोषणा की है कि उनके देश को राष्ट्रपति के शरणार्थी विरोधी क़ानून के क्रियान्वयन में बहुत अधिक ध्यान देना चाहिए। शरणार्थियों की जांच पड़ताल कड़ी करना अच्छा विचार है लेकिन यह विषय भी अत्यधिक अहम है कि आतंकवाद से संघर्ष में देश के भीतर व बाहर हमारे सबसे अच्छे स्रोतों में से एक मुसलमान हैं। न्यूयार्क के प्रख्यात मनोचिकित्सक डाक्टर जॉन गार्टनर का कहना है कि डोनल्ड ट्रम्प भयंकर रूप से आत्ममुग्धता के मनोरोग में ग्रस्त हैं और उनमें बुरी आत्ममुग्धता के अनेक लक्षण पाए जाते हैं।
ब्रिटेन की मुस्लिम परिषद के महासचिव हारून ख़ान ने ट्रम्प की ओर से शरणार्थियों और कुछ मुस्लिम देशों के नागरिकों को वीज़ा दिए जाने पर रोक की निंदा करते हुए कहा कि ब्रिटेन की सरकार का दायित्व है कि वह खुल कर इस आदेश का विरोध करे। हारून ख़ान ने एक बयान में कहा कि ये प्रतिबंध न केवल अनुचित बल्कि ख़तरनाक रूप से ब्रिटेन की समानता व भेदभाव विरोधी मान्यताओं के विरुद्ध है। ये प्रतिबंध सांसद नाज़िम ज़हावी जैसे दोहरी नागरिकता रखने वाले ब्रिटिश नागरिकों के लिए कष्टदायक हैं अतः ब्रिटेन की सरकार को स्पष्ट रूप से अमरीकी सरकार से कह देना चाहिए कि इस प्रकार की नीति, हास्यास्पद और आतंकवाद के मुक़ाबले में पूरी तरह से अनुपयोगी है।
फ़्रान्स के विदेश मंत्री जॉन मार्क एरो ने भी एक ट्वीट में अमरीका में शरणार्थियों के ख़िलाफ़ भेदभावपूर्ण कार्यवाहियों की आलोचना की। उन्होंने लिखा कि शरणार्थियों को स्वीकार करना एक मानवताप्रेमी ज़िम्मेदारी है और आतंकवाद की कोई राष्ट्रीयता नहीं होती अतः भेदभाव उचित प्रतिक्रिया नहीं है। यह ऐसी स्थिति में है कि जब फ़्रान्स के राष्ट्रपति ने बल देकर कहा है कि अमरीका की नई सरकार जनता को धोखा देने के विचारों को बढ़ावा दे रही है। फ़्रान्सवां ओलान्द ने कहा कि आज जो कुछ अमरीका की नई सरकार कर रही है उसे जनता को धोखा देना बल्कि चरमपंथ कहा जाना चाहिए।
इटली के प्रधानमंत्री पाओलो जेन्टीलोनी ने भी ट्वीटर पर अपने एक संदेश में इस बात पर बल देते हुए कि उनका देश शरणार्थियों और मुस्लिम देशों के आगमन के संबंध में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करता, कहा है कि इटली अपनी मान्यताओं पर कटिबद्ध है और उसका समाज खुला हुआ, सार्वजनिक पहचान लिए हुए और बिना किसी भेदभाव के, यूरोप के स्तंभों में से एक है। इटली के परिवहन मंत्री ग्राज़यानो देलरियो ने भी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं के साथ मुलाक़ात में बल देकर कहा कि ट्रम्प का फ़ैसला राजनैतिक मान्यताओं से परे और अमरीका व यूरोप के इतिहास के विरुद्ध है। विदित रूप से ट्रम्प का फ़ैसला समाज के संबंध में हमारे दृष्टिकोण से भी विरोधाभास रखता है। शरणार्थियों के आगमन को सीमित करना वर्षों से चली आ रही अमरीका की संस्कृति के विपरीत है और इसने दक्षिणपंथियों की संस्कृति को बढ़ावा दिया है। यह यूरोप के संबंध में भी पूरी तरह से मार्ग बदलने के अर्थ में है।
ट्रम्प की ओर से शरणार्थियों और कुछ मुस्लिम देशों के नागरिकों को वीज़ा ने दिए जाने के फ़ैसले के विरोध की लहरें अन्य स्थानों से अधिक अमरीका में उठ रही हैं। इस आदेश के बाद अराजकता, बौखलाहट और जनाक्रोश ने अमरीका के अनेक राज्यों विशेष कर हवाई अड्डों को अपनी लपेट में ले लिया है। अमरीका में राजधानी समेत अनेक स्थानों पर आम लोग और मानवाधिकार व नागरिक स्वतंत्रता के कार्यकर्ता नए राष्ट्रपति के आदेश के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं और मुसलमानों के समर्थन में नारे लगा रहे हैं।
बहरहाल ट्रम्प की ओर से शरणार्थियों और ईरान समेत सात मुस्लिम देशों के नागरिकों को अमरीका का वीज़ा देने पर प्रतिबंध के आदेश से पता चलता है कि अमरीका में भेदभाव फिर से उभर आया है और इस देश के सत्तारूढ़ लोगों की संस्कृति के एक भाग में परिवर्तित हो चुका है। मुसलमानों के साथ भेदभाव से यह भी स्पष्ट होता है कि अमरीका में जातिवाद में वृद्धि हुई है। ट्रम्प ने ऐसी स्थिति में यह जातिवादी क़दम उठाया है कि उन पर इससे पहले अपने चुनाव प्रचार के दौरान मुसलमानों के विरुद्ध बातें करने के कारण अत्यधिक आलोचना हुई थी जो अब भी जारी है लेकिन इन बातों पर ध्यान दिए बिना अपनी जातिवादी नीतियां जारी रखे हुए हैं।
ट्रम्प ने सीबीएस चैनल से बात करते हुए कहाः “मेरा मानना है कि एक सरकार के रूप में हमें इस चरण में जातीय भेदभाव के बारे में सोचना शुरू करना चाहिए। अगर हम इस्राईल पर एक नज़र डालें तो देखेंगे कि इस नीति को अनेक बार बड़ी सफलता से लागू किया जा चुका है। अलबत्ता यह भी स्पष्ट कर दूं कि मुझे भेदभाव से घृणा है लेकिन हमें इसे इस्तेमाल करके बुनियादी क़दम उठाने होंगे।“ अमरीका, ऐसी स्थिति में इस प्रकार के क़दम उठा रहा है जब वह प्रजातंत्र और मानवाधिकार की रक्षा के दावे करते नहीं थकता।