Apr ०५, २०१७ ०९:२० Asia/Kolkata

ईरानी पहचान पौराणिक कथाओं जितनी पुरानी है।

फ़िरदोसी के शाहनामे में जो ईरानी पहचान व सभ्यता की पहचान व ईरान के इतिहास व पौराणिक कथाओं का बखान करने वाला सबसे अहम दस्तावेज़ है, ईरान का एक देश और ईरानी जनता का राष्ट्र के रूप में उल्लेख है। संस्कृति, साहित्य और कला के क्षेत्रों में ईरानविदों के शोध दर्शाते हैं ईरान प्राचीन समय से संस्कृति व सभ्यता का केन्द्र रहा है और प्राचीन समय में ईरान की सभ्यता दुनिया में बेहतर सभ्यताओं की क़तार में गिनी जाती थी। इस सभ्यता के पहचान के संघटक बहुत मूल्यवान हैं।

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ईरान भौगोलिक दृष्टि से ऐसे क्षेत्र में स्थित है कि इस क्षेत्र ने उसे संपर्क का ध्रुव बना दिया तो दूसरी ओर दूसरे क्षेत्रों व देशों पर क़ब्ज़ा करने वाली शक्तियों के हमेशा निशाने पर रहा लेकिन इसके बावजूद सांस्कृतिक दृष्टि से इस भूमि पर प्रभुत्व बनाए रखने में सफल रहा और इस तरह इस क्षेत्र में अपनी संस्कृति व सभ्यता की अमिट छाप छोड़ने में सफल रहा। इतिहास इस बात का गवाह है कि जिन कालखन्डों में ईरान विदेशियों के हमलों के निशाने पर रहा, ईरानी न सिर्फ़ यह कि विदेशियों के हर प्रकार के हमलों के मुक़ाबले में अपनी पहचान बचाए रखने में सफल रहे बल्कि आक्रमणकारी जातियों पर अपनी छाप छोड़ने में सफल रहे। इन जातियों पर ईरानी पहचान की छाप इतनी गहरी थी कि इन राजाओं की राजधानियां ईरानी संस्कृति, सभ्यता व कला का जलवा बिखेर रही हैं।              

फ़ारसी भाषा व साहित्य और ख़ास तौर पर फ़ारसी शायरी ईरानी संस्कृति के मुख्य तत्व हैं और इस दृष्टि से तैमूरी शासन काल ईरानी संस्कृति व साहित्य के उज्जवल दजर में गिना जाता है। इस दौर में फ़ारसी साहित्य के क्षेत्र में दक्ष व मशहूर उस्ताद सामने आए और अपनी रचनाओं में उन्होंने ईरानी संस्कृति व पहचान का प्रसार किया। अमीर अलीशीर नवाई भी उन्हीं शायरों में हैं जिन्होंने अपने शेर से ईरानी संस्कृति व पहचान के तत्वों का प्रचार प्रसार किया।

ईरानी संस्कृति व पहचान का एक तत्व न्याय है। न्याय ईरानी पहचान की गहराई में उतरा हुआ तत्व है। यह ऐसा तत्व है जिसे हख़ामनेशी शासन काल से ईरानी जनता की निरंतर बड़ी महत्वकांक्षा का दर्जा हासिल रहा और यह इस्लामी काल में भी एकेश्वरवाद, पैग़म्बरी, और प्रलय के साथ धर्म के मूल सिद्धांत में शामिल रहा। ईरान के पूरे इस्लामी इतिहास में विद्वान, शायर और आत्मज्ञानियों ने हमेशा राजाओं व महाराजाओं से न्याय का आह्वान करते रहे। ईरानी पौराणिक कथाओं में कावे लोहार की कहानी अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले की प्रतीक बन गयी। इसी प्रकार ईरानी राजा फ़रीदून न्याय का प्रतीक है। अमीर अलीशीर नवाई ने अपने शेर में ईरानी पहचान के इस महत्वपूर्ण तत्व को इस्तेमाल किया और चूंकि उनमें ख़ुद न्याय की भावना थी इसलिए उन्होंने अपने शेर में न्याय की अनुंशसा की और अत्याचार के बुरे अंजाम की ओर से लोगों को सचेत किया है।

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धार्मिक विचार और ऐसे नियमों पर आस्था जो पूरे जीवन में इंसान का मार्गदर्शन करें, ईरानी पहचान व विचारधारा की मुख्य डगर है। फ़ारसी साहित्यिक रचनाओं की प्रस्तावना ईश्वर के नाम और महान धार्मिक हस्तियों की प्रशंसा से शुरु होती हैं। अमीर अलीशीर नवाई के दीवान में धर्मपरायणता को ईश्वर की कृपा की उम्मीद के रूप में स्थान हासिल है। इसी प्रकार सिर्फ़ ईश्वर से प्रार्थना और उस पर भरोसे की अनुशंसा की गयी है।                     

ईरानी हमेशा इस नश्वर संसार और इसमें रहने वाले इंसानों के जीवन के एक न दिन ख़त्म होने के बारे में सोचते रहे हैं। इस अटूट सच्चाई  की समझ के ज़रिए अर्थपूर्ण जीवन की कोशिश करते रहे। जीवन की अवधि के कम होने और इसके तेज़ी से गुज़रने के कारण ईरानियों में अवसर के उपयोग की जागरुकता पैदा हुयी। इस जागरुकता के ध्वजवाहक ख़य्याम हैं और बहुत से फ़ारसी भाषी शायरों व लेखकों की रचनाओं में यह प्रकट हुयी है। संसार के नश्वर होने का विचार ईरान पर मंगोलों के हमले के बाद आत्मज्ञानी विचारों का आधार बना। इस विचार के साथ साथ ख़ुशी भी ईरानी संस्कृति व पहचान के तत्वों में शामिल है। ईरानी नए साल और अन्य त्योहारों के साथ साथ साल में बारह जश्न अर्थात हर महीने एक जश्न मनाते थे। इन जश्नों में एकेश्वरवाद, बुद्धिमत्ता, न्याय और ख़ुशी के सिद्धांत छाए रहते हैं। फ़ारसी साहित्य की हस्ती व प्रोफ़ेसर रुस्तगार फ़साई के अनुसार, ख़ुशी वास्तव में इच्छाओं के पूरा होने, न्याय, बुद्धि और ईश्वरीय अनुकंपाओं से संपन्नता को दर्शाती है जो हाथ हिलाने, पायकूबी और हंसी के रूप में ज़ाहिर होती है। 

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अमीर अलीशीर नवाई का मानना है ख़ुशी और मन से दुख के निवारण एक एक क्षण को अहमियत देने, आज की ख़ुशी को कल पर न टालने, दुनिया की नश्वरता की समझ और लोगों से अपेक्षा न रखने पर निर्भर है।

इंसान हमेशा से अपने वजूद और पहचान को अहमियत देता रहा है। जैसा कि महापुरुषों की बातें इंसान की प्रवृत्ति और इंसानी मूल्यों पर केन्द्रित रही हैं। भला नाम कमाना, भलाई करना, दूसरों की कमियों को छिपाना, दुनिया की नश्वरता और इससे दिल न लगाने पर बल, रोज़ी के निर्धारित होने पर आस्था और सच्चाई की जीत वे नैतिक व सांस्कृतिक विशेषताएं हैं जिनका अमीर अलीशीर नवाई के शेरों में उल्लेख है।

ईरानियों का मानना है कि घटनाएं भाग्य का हिस्सा होती हैं और इंसान को इसे हंसी ख़ुशी क़ुबूल करना चाहिए। अमीर अलीशीर नवाई नक़्शबंदिया मत के अनुयायी थे। उनका कहना था कि अगर इंसान यह मान ले कि वह भाग्य के सामने असहाय है तो फिर वह ईश्वर से शिकवा नहीं करता।     

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ईरानी पहचान व संस्कृति का एक और तत्व फ़ारसी भाषा है। भाषा संस्कृति का ध्रुव होती है। हर राष्ट्र भाषा के ज़रिए अपनी संस्कृति स्थानांतरित करता है। फ़ारसी भाषा व साहित्य को भी भाषाई और ऐतिहासिक दृष्टि से राष्ट्रीय व सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखने में सबसे ज़्यादा अहमियत हासिल है। फ़ारसी भाषा व साहित्य से ईरानी पहचान का अटूट संबंध है और इसे अहमियत देना राष्ट्रीय पहचान को अहमियत देना है। अमीर अलीशीर नवाई ने फ़ारसी और तुर्की भाषाओं में शेर कहे हैं। उन्होंने अपने तुर्की और फ़ारसी भाषी शेरों के बारे में एक चौपाई कही है जिसमें उन्होंने तुर्क भाषी शेरों की तारीफ़ की है लेकिन जब उन्होंने अपने तुर्क भाषी शेरों की फ़ारसी भाषी शेरों से तुलना की तो तुर्क भाषी शेरों को शकर और फ़ारसी भाषी शेरों को सोने से उपमा देकर फ़ारसी भाषा को अधिक अहम माना है।