Apr २२, २०१७ ११:५८ Asia/Kolkata

हमने ईरान के नवीं शताब्दी के प्रसिद्ध गणितज्ञ, पवित्र क़ुरआन के व्याख्याकार, खगोलशास्त्री और लेखक हुसैन वाएज़ काशेफ़ी के जीवन के कुछ आयामों के बारे में आपको बताया था।

इस महान बुद्धिजीवी ने विभिन्न क्षेत्रों में जनता और समाज की अत्यधिक सेवाएं की है और कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखी हैं जिनमें से कुछ अब भी सुरक्षित हैं।

हमने बताया था कि मौलाना हुसैन वाएज़ काशेफ़ी के नाम से प्रसिद्ध कमालुद्दीन हुसैन बिन अली सब्ज़वारी ईरान के नवीं शताब्दी के प्रसिद्ध गणितज्ञ, पवित्र क़ुरआन के व्याख्याकार, खगोलशास्त्री और लेखक, उनके दौर में वह तैमूरी शासन श्रंखला का राज था। उन्होंने अपनी आरंभिक शिक्षा उस समय सब्ज़वार में ही प्राप्त की और उसके बाद वह पवित्र नगर मशहद चले गये और उसके बाद हेरात गये।

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वह वर्षों तक धर्म के प्रचार–प्रसार तथा धार्मिक शिक्षाओं को फैलाने में व्यस्त रहे और अमीर अलीशेर नवाई के बुद्धिमान मंत्री सुल्तान हुसैन बायक़रा के काल में उन्हें हेरात में बड़े धर्मगुरूओं और बुद्धिजीवियों को उपदेश देने के लिए नियुक्त किया गया। हमने बताया था कि वाएज़ काशेफ़ी ने पद्य और गद्य की बहुत सी पुस्तकें लिखी हैं और रौज़तुश्शोहदा नामक उनकी पुस्तक की हमने समीक्षा भी की थी।

फ़ुतुवत का शाब्दिक अर्थ होता है पुरुषार्थ, दया, दान, परोपकार, उदार इत्यादि है। फ़ुतुवत किसी व्यक्ति की विशेषता है किन्तु जब से यह सूफ़ीवाद में मिश्रित हो गयी तब से यह सामाजिक क्षेत्र में प्रविष्ट हो गयी। सूफ़ी विचारधारा के हर महान धर्मगुरू ने अपने विचारों और दृष्टिकोणों के आधार पर फ़ुतुवत की अलग अलग परिभाषा की है। सूफ़ीवाद के फ़ुतूवत के साथ प्राचीन और अच्छे संबंध हैं। सूफ़ीवाद ने फ़ूतूवत को क़ानूनी रूप दे दिया और उसके लिए चरण, क़ानून और संस्कार निर्धारित किए। फ़ूतूवत की संस्कृति के विस्तार से स्वाभाविक रूप से इस संबंध में पुस्तकें और छोटी पुस्तकें लिखे जाने का क्रम आरंभ हुआ और इस प्रकार की पुस्तकें, स्वयं एक ऐसी पद्धति और शैली में परिवर्तित हो गयीं जिसे फ़ुतुवत नामा लिखने की शैली कहा जाता था जो इस्लाम धर्म के सांस्कृतिक व अध्यात्मिक इतिहास का महत्वपूर्ण स्रोत समझी जाती थीं। पहले लेखक जिन्होंने फ़ुतूवत के बारे में एक संपूर्ण पुस्तक लिखी अब्दुर्रहमान सुल्लमी थे जिनका निधन वर्ष 412 हिजरी क़मरी में हुआ था। फ़ुतूवत लिखने की शैली धीरे धीरे विकसित हुई और उसने ध्यान योग्य प्रगति प्राप्त कर ली और विभिन्न वर्गों और पेशावराना लोगों के प्रविष्ट होने से इसका स्वरूप अत्यंत जटिल हो गया और सांस्कृतिक, सामाजिक यहां तक कि आर्थिक व राजनैतिक दृष्टि से बहुत अधिक महत्वपूर्ण हो गयी। ईरान में पुरुषार्थ और फ़ुतूवत की संस्कृति का विस्तार धीरे धीरे नवीं और दसवीं शताब्दी तक फैल गया और सफ़वी शासन काल में फ़ुतूवत ईरान के आम लोगों में बहुत अधिक प्रचलित हो गयी। इस प्रचलन के कारण सफ़वी शासन काल में बहुत अधिक फ़ूतूवत नामे लिखे गये। सफ़वी शासन काल में और उसके बाद लिखे गये फ़ुतूवत नामे आम भाषा और लेखकों के कम पढ़े लिखे होने के कारण कमज़ोर और ग़लतियों से भरा हुआ गद्य है।

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हुसैन वाएज़ काशेफ़ी का प्रसिद्ध फ़ूतूवत नामे सुल्तानी, सूफ़ीवाद के फ़ूतूवत की महत्वपूर्ण पुस्तकें हैं। पुरुषार्थ और फ़ुतूवत के क्षेत्र के शोधकर्ताओं का मानना है कि सूफ़ीवाद के फ़ूतूवत के बारे में सबसे प्रसिद्ध पुस्तक चाहे वह अरबी भाषा में लिखी हो या फ़ार्सी भाषा में, वाएज़ काशेफ़ी की फ़ुतुवत नामे सुल्तानी है जिसका संबंध सूफ़ीवाद के नक़शबंदी मत से है। इस पुस्तक में नैतिकता, सूफ़ीइज़्म की विशेष सभाओं और उनकी विभिन्न रीति रिवाजों के बारे में अत्यंत दुर्लभ जानकारियां प्रदान की गयी हैं। इनमें भिश्तियों, भरत्तलोकों, पहलवानों और कुश्ती लड़ने वालों तथा विभिन्न प्रकार की कहानियां और अनेक युद्धों की बात बयान की गयी हैं। चूंकि यह पुस्तक समस्त पुस्तकों से श्रेष्ठ थी, इसमें मूल्यवान सूचनाएं वर्णित हैं जिसके माध्यम से फ़ुतूवत के चरण को प्राप्त किया जा सकता है। यह पुस्तक बयान करती है कि पंद्रहवीं शताब्दी के निकट तक यह पुस्तक ईरान में व्यापक स्तर पर फैली हुई थी और लोगों में इसका बहुत अधिक प्रचलन था।

फ़ुतूवत नामे सुल्तानी अन्य विभिन्न आयामों से भी महत्वपूर्ण है। ईरान के समकालीन शोधकर्ता और प्रोफ़ेसर रसूल जाफ़रियान फ़ूतूवत नामे सुल्तानी की कुछ बातों की ओर संकेत करते हुए कहते हैं कि ईरान में शीया मत के व्यापक प्रचार में इस पुस्तक ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस पुस्तक के नवें अध्याय में फ़ूतूवत की विशेष का वर्णन है। फ़ूतूवतियों के बीच प्रचलित इस विशेष रीति व रीवाज के संस्कार को मुल्ला हुसैन ने बयान किया है। इसी चर्चा के दौरान उन्होंने दो भाषण भी बयान किए जिसमें बारह इमामों के नाम वर्णित हैं और दूसरा भाषण सेतो पूर्ण रूप से लगता कि वह शीया हैं।

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प्रोफ़ेसर मुहम्मद जाफ़र महजूब ने फ़ुतूवत नामे सुल्तानी पर नोट लिखे हैं और उन्होंने इस पुस्तक में फ़ुतूवत के इतिहास पर विस्तृत भूमिका लिखी है जिसमें उन्होंने फ़ूतूवत नामे सुल्तानी और इसकी लिपि और उसकी शैलियों की विशेषता बयान की है। प्रोफ़ेसर जाफ़र महजूब ने वाएज़ काशेफ़ी की पुस्तकों में फ़ूतूवत नामे को उनकी सबसे मूल्यवान और महत्वपूर्ण पुस्तक बतायी है। प्रोफ़िसर महजूब का कहना है कि पुरुषार्थ की शैलियों और फ़ूतूवत के क़ानून के बारे में अरबी और फ़ारसी भाषन में लिखी गयी पुरानी और नई विषय वस्तुओं के बीच, फ़ुतूवत नामे सुल्तानी सभी से विस्तृत, व्यापक, व्यवस्थित और सूक्ष्म है। फ़ुतूवत नामे में वर्णित फ़ूतूवत के कम व अधिक सिद्धांतों को किसी भी प्रकार से सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं है। फ़ूतूवत नामे में इस बात का उल्लेख नहीं किया जाता कि यह संस्कार किससे बाक़ी है, या किसने इसे शुरु किया या यह घटना कैसे अस्तित्व में आई इत्यादि किन्तु हुसैन वाएज़ काशेफ़ी ने इन समस्त विषयों पर पूरी सूक्ष्मता से ध्यान दिया और उसके अंतर्गत समस्त विवरण बयान किया और उनका यह प्रयास रहता था कि उक्त क़ानून या संस्कार के बारे में कोई भी वस्तु उनसे छूटने न पाए, अर्थात पूरे विस्तार के साथ और उसके समस्त आयामों के साथ उसे बयान करने का प्रयास करते थे ताकि जो भी उनकी पुस्तक पढ़े उससे इस विषय पर अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए किसी दूसरी पुस्तक का रुख़ न करना पड़े।

फ़ूतूवत नामे सुल्तानी में काशेफ़ी ने जो सूत्र लिखे हैं उनमें सबसे पहले उनकी शिक्षाएं और अनुभव हैं और उसके बाद उन्होंने अध्ययन की गयी विभिन्न पुस्तकों से लाभ उठाया है। इमाम मुहम्मद ग़ज़ाली की अहयाए उलूमे दीन, हजवेरी की कशफ़ुल महजूब और कमालुद्दीन अब्दुर्रज़्ज़ाक़ काशी का फ़ूतूवत नामा, उन महत्वपूर्ण पुस्तकों में है जिनसे लाभ उठाते हुए काशेफ़ी ने फ़ूतूवत नामे सुल्तानी पुस्तक लिखी है।

फ़ूतूवत नामे सुल्तानी में सात अध्याय हैं जिसमें फ़ूतूवत के मामले के समस्त संस्कार और रीतिरिवाज, फ़ूतूवत के मार्ग पर चलने वालों, फ़ूतूवत के विभिन्न वर्गों के लोगों के लगभग समस्त मामलों का वर्णन किया गया है। यह पुस्तक, ईरान के सामाजिक, अध्यात्मिक और सांस्कृतिक इतिहास को समझने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें नैतिकता से लेकर आम लोगों की आस्था, फ़ूतूवत के सूफ़ीवाद, उसकी शैलियों, उस पर आस्था रखने वालों की श्रेणियों, आस्थाओं के बारे में पूरे विस्तार से चर्चा की गयी है और जिस प्रकार इस पुस्तक में इन विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई है कोई दूसरी पुस्तक में इतने विस्तार से साथ नहीं मिलती।

हुसैन वाएज़ काशेफ़ी ने जिस विषय पर भी क़लम उठाया, उस पर उसका पूरा हक़ अदा कर दिया। वह दक्ष लेखक गद्य में निपुण, फ़ूतूवत की सूक्ष्मताओ से पूरी तरह अवगत और आम लोगों की संस्कृति में पूरी तरह डूबे हुए थे। उनकी यह पुस्तक फ़ुतूवत के विषय या इस विषय की परिभाषा या इसकी तावील के बारे में आयतों के वर्णन, पैग़म्बरे इस्लाम, हज़रत अली अलैहिस्सलाम तथा बारह इमामों के कथनों के उल्लेख की दृष्टि से अद्वितीय है। इसमें फ़ूतूवत की विशेष शब्दावलियों का प्रयोग किया है और इससे जुड़े लोगों के नाम और उनकी कुछ चीज़ों का भी वर्णन किया गया है और यह भी बताया गया है कि उनका अतीत कैसा था और दर्शनशास्त्र में उनकी कितनी रुची थी, इन सब बातों के दृष्टिगत फ़ूतूवत नामे सुल्तानी अपने वर्ग की समस्त पुस्तकों में अद्वितीय पुस्तक है।