May ०९, २०१७ ०८:५३ Asia/Kolkata

हम आपको ईरान के महान साहित्यकार, लेखक, कवि, गणितज्ञ, खगोल शास्त्री और पवित्र क़ुरआन के व्याखायाकर मौलाना हुसैन वाएज़ काशेफ़ी के जीवन के बारे में विस्तार से बता चुके हैं। 

उनका पूरा नाम कमालुद्दीन हुसैन बिन अली सब्ज़वारी था किंतु वे मौलाना हुसैन वाएज़ के नाम से मश्हूर हुए।  हुसैन वाएज़ी, नवीं हिजरी क़मरी के महान ईरानी विद्वान थे।  वे कई ज्ञानों के ज्ञाता थे।  हुसैन वाएज़ी ने अपनी आरंभिक पढ़ाई सब्ज़वार में की थी जो उस समय ज्ञान का केन्द्र था।  आरंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए वे पवित्र नगर मशहद चले गए।

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शिक्षा प्राप्ति के बाद हुसैन वाएज़ी ने वर्षों तक लोगों को शिक्षा दी और धार्मिक उपदेश दिये।  सुल्तान हुसैन बायक़रा के शासनकाल में उसके विद्वान मंत्री अमीर अली शीरनवाई के माध्यम से हुसैन वाएज़ी, सरकारी उपदेश नियुक्त हुए।  उनको हेरात में उपदेश के रूप में चुना गया।  उस काल में उपदेशक का पद केवल ऐसे विद्वान को दिया जाता था जो पैग़म्बरे इस्लाम (स) के कथनों की गहरी जानकारी रखता हो।  उनके उपदेश बहुत प्रभावी हुआ करते थे।  वाएज़ काशेफ़ी ने गद्ध और पद्ध दोनों में कई पुस्तकें लिखी हैं।  हुसैन वाएज़ी की कुछ पुस्तकों की समीक्षा हम पिछले कुछ कार्यक्रमों में कर चुके हैं जैसे अख़लाक़े मोहसेनी, मवाहिब, रौज़तुश्शोहदा तथा फ़ुतूतनामे सुल्तानी। 

अनवारे सुहैली, वाएज़ काशेफ़ी की मश्हूर किताबों में से एक है।  वास्वत में उनकी यह पुस्तक, “पंचतंत्र” की बड़ी सटीक और सरल भाषा में समीक्षा है।  महमूद ग़ज़नवी के वंशजों में से एक बहराम शाह के अनुरोध पर “अबुलमआली नसरूल्लाह” ने पंचतंत्र का अरबी भाषा से फ़ारसी में अनुवाद किया।  इसका नाम “केलीले व दिमने बहरामशाही” रखा गया।  फ़ारसी भाषा में पंचतंत्र, केलीले व दिमने के नाम से जानी जाती है।  पंचतत्र पर लिखी गई पुस्तक अनवारे सुहैली, भारतीय उपमहाद्वीप और अफ़ग़ानिस्तान में बहुत मशहूर हुई।  उस समय इन क्षेत्रों में फ़ारसी भाषा प्रचलित थी।  बाद में भारतीय उप महाद्वीप के लोगों और अंग्रेज़ों को फ़ारसी सिखाने में अनवारे सुहैली से बहुत मदद ली गई।  प्रकाशन का काम शुरू होने के बाद भारतीय उप महाद्वीप के कई शहरों में अनवारे सुहैली 30 से अधिक बार प्रकाशित व प्रसारित हो चुकी है।  वर्तमान समय में हुसैन वाएज़ी की किताब अनवारे सुहैली का विश्व की कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।  इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि अनवारे सुहैली को विश्व ख्याति प्राप्त है।

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वाएज़ काशेफ़ी का कहना है कि पंचतंत्र की कहानियों के नैतिक पाठ और उसकी शिक्षाओं ने उन्हें अनवारे सुहैली लिखेन के लिए प्रेरित किया।  उनका मानना है कि एसी कहानियां, पढ़ने और सुनने वाले को बहुत सी नैतिक और शिक्षाप्रद बातें जानने को मिलती हैं।  वे कहते हैं कि मैने यह सोचते हुए कि पंचतंत्र जैसी किताब, भुला न दी जाए और भविष्य में लोग इससे लाभ उठाते रहें, अमीर शेख अहमद के आग्रह पर अनवारे सुहैली लिखी।  बाद में अमीर शेख अहमद, सुहैली के नाम से प्रसिद्ध हुए।

पंचतंत्र के फ़ारसी अनुवाद केलीले वे दिमने को आधार बनाकर ही काशेफ़ी ने अपनी पुस्तक अनवारे हुसैनी लिखी है।  इसमें उन्होंने दो महत्वपूर्ण परिवर्तन किये हैं।  पहला परिवर्तन तो यह है कि उन्होंने केलीले व दिमने का नाम बदल दिया।  इससे पहले तक किसी भी अनुवादक ने पंचतंत्र के फ़ारसी और अरबी नाम, केलीले व दिमने को बदला नहीं था।  काशेफ़ी ने इसमें दूसरा परिवर्तन यह किया कि इस किताब की भूमिका हटा दी।  इससे पहले पंचतंत्र का अरबी में अनुवाद करने वाले इब्ने मुक़फ़्फ़ा ने इसकी भूमिका लिखी थी।  बाद में अरबी से फारसी में अनुवाद करने वाले अबुल मआली ने ही इसकी भूमिका फारसी में लिखी।  काशेफ़ी ने इन दोनों भूमिकाओं को हटाकर एक नई भूमिका लिखी।

वाएज़ काशेफ़ी ने एक और काम यह किया कि पंचतंत्र के अरबी अनुवाद में अरबी भाषा के जो शेर और कहावतें बढ़ा दी गई थीं उनको भी हटा दिया।  इसके स्थान पर उन्होंने सादी, मौलवी और हाफिज़ जैसे फारसी भाषा के कवियों के शेर वहां पर रख दिये।  इन सब बातों के अरतिरिक्त काशेफी ने अनवारे सुहैली में 60 कहानियों का समावेश भी किया है जो केलीले वे दिमने में नहीं थीं।

एक शोधकर्ता डाक्टर मुहम्मद जाफ़र ने अनवारे सुहैली और केलीले व दिमने का तुलनात्मक अध्ययन करने के बाद यह स्पष्ट किया है कि केलीले व दिमने में किन कहानियों का सामवेश किया है और वे इन्हें कहां से लाए हैं।  वे कहते हैं कि काशेफी ने यह कहानियां बूस्तान, गुलिस्ताने सादी, मरज़बाननामे और मसनवी से ली हैं।

हालांकि वाएज़ काशेफी का तो यह मानना है कि उन्होंने इस प्रकार के परिवर्तन करके केलीले व दिमने को सरल बनाने का प्रयास किया है ताकि पाठको को आसानी हो।  बहुत से शोधकर्ता उनकी इस बात से सहमत नहीं हैं।  इस बारे में उस्ताद ज़बीहुल्लाह सफ़ा कहते हैं कि काशेफ़ी ने किताब को सरल बनाने का प्रयास तो किया है किंतु अपने प्रयास में वे सफल नहीं रहे।  एक अन्य शोधकर्ता डाक्टर महमूद नस्र का मानना है कि काशेफ़ी द्वारा किये गए परिवर्तनों से उनकी किताब में दो अलग-अलग प्रकार की बातें दिखाई देती हैं।

इन दोनों शोधकर्ताओं के विचारों के विपरीत, मुहम्मद रौशन का कहना है कि अनवारे सुहैली, सरल भाषा में लिखी गई पुस्तक है।  वे कहते हैं कि यह बहुत रोचक रचना है।  उनका मानना है कि वाएज़ काशेफ़ी ने अपनी पुस्तक में शेर और कहानियों का सामवेश करके उसमें चार चांद लगा दिये हैं।  उनका यह भी कहना है कि भारतीय उप माहद्वीप के विभिन्न नगरों में अनवारे सुहैली का कई बार प्रकाशन, यह दर्शाता है कि वहां पर इसे पसंद किया जाता है।

जिस प्रकार से पंचतंत्र में नैतिक और शिक्षाप्रद बातों को पशु और पक्षियों के माध्यम से कहलवाया गया है ठीक उसी प्रकार से अनवारे सुहैली में भी मिलता है।  इसकी एक अन्य विशेषता यह भी है कि इसमें बहुत ही साधारण भाषा में आम लोगों के दैनिक जीवन का चित्रण किया गया है।  अनवारे सुहैली में दसवी शताब्दी की जीवनशैली का उल्लेख मिलता है।  इसमें अपनी बात कहने के लिए कहानी को माध्यम बनाया गया है अन्यथा कहानी सुनाना उद्देश्य नहीं है।  लेखक के अनुसार वास्तव में कहानी तो माध्यम है मुख्य उद्देश्य, लोगों तक अच्छी बातें पहुंचाना हैं।

अपनी किताब अनवारे सुहैली के कारण वाएज़ काशेफ़ी में भारतीय उपमहाद्वीप में बहुत ख्याति मिली।  उनकी इस रचना को बहुत सराहा गया।  यहां तक कि बहुत से लोग तो दूसरों को उपहार स्वरूप यह किताब दिया करते थे।  कहा जाता है कि वाएज़ काशेफ़ी, विश्व के किसी अन्य क्षेत्र की तुलना में भारतीय उपमहाद्वीप में अधिक लोकप्रिय हुए।  मुंबई, हैदराबाद, लखनऊ और लाहौर में काशेफ़ी की रचनाएं कई बार प्रकाशित हुईं।  वाएज़ काशेफी कि किताब अनवारे सुहैली का भारत की कई स्थानीय भाषाओं में भी अनुवाद किया जा चुका है।