शनिवार - 28 मार्च
2000, वेस्टइंडीज के तेज़ गेंदबाज़ कोर्टनी वाल्श ने 435 विकेट लेकर कपिल देव का रिकार्ड तोड़ा।
1923, फासीवादी इटली की वायु सेना रिजिया एरोनॉटिका की स्थापना की गई।
1965, डॉक्टर मार्टिन लूथर किंग ने अश्वेतों के अधिकारों के लिए अलाबामा की राजधानी मांटगुमरी में लगभग 25 हज़ार लोगों के जुलूस का नेतृत्व किया।
1979, अमरीका के इतिहास में हुई सबसे बड़ी परमाणु दुर्घटना में पेंसिलवेनिया के थ्री माइल आयलैंड परमाणु संयंत्र में रेडियो सक्रिय भाप लीक हुई।
1989, सोवियत संघ में प्रथम आम चुनाव हुआ जिसमें लोगों को ग़ैर कम्युनिस्ट पार्टी प्रतिनिधि को चुनने का विकल्प दिया गया था।
2000, वेस्टइंडीज के तेज़ गेंदबाज़ कोर्टनी वाल्श ने 435 विकेट लेकर कपिल देव का रिकार्ड तोड़ा।
2006, अमरीका ने पाकिस्तान के पेशावर में स्थित अपना वाणिज्य दूतावास बंद किया।
2007, अमरीका में सीनेट ने इराक़ से सेना वापसी को मंज़ूरी प्रदान की।
2015, भारत की बैडमिंटन ख़िलाड़ी साइना नेहवाल दुनिया की नंबर एक महिला बैडमिंटन खिलाड़ी बन गईं।
28 मार्च सन 1572 ईसवी को हॉलैंड में स्पेन के सेना कमांडर के अत्याचारों के विरुद्ध जनान्दोलन आरंभ हुआ। इस आंदोलन का नेतृत्व प्रिंस आरेन्ज ने किया था। हॉलैंड पर स्पेन के नरेश फ़िलिप द्वितीय ने अधिकार करने के बाद अपने सेनाकमांडर को इस क्षेत्र का संचालन सौंप दिया था जिसने हालैन्ड वासियों पर अत्याचार की हद कर दी। इसी कारण यह जनान्दोलन अस्तित्व में आया इससे पहले भी स्पेन की सेना ने 1566 ईसवी में आरंभ होने वाले हालैंड की जनता के आंदोलन को निर्ममता से कुचल दिया था जिसके बाद देश भर में लोगों ने विद्रोह आरंभ किया जिसके परिणाम स्वरुप सन 1576 ईसवी में हालैंड को स्वतंत्रता मिली।
28 मार्च सन 1736 ईसवी को ब्रिटेन के अविष्कारक जेम्स वाट का उत्तरी इंग्लैंड के ग्रीनीक नगर में जन्म हुआ। जेम्स वाट ने भाप की शक्ति का पता लगाया जिसके परिणाम स्परुव जल तथा थल यातायात के क्षेत्र में एक क्रान्ति आ गयी। भाप से चलने वाले समुद्री जहाज़ और रेल इंजन इसी आविष्कार का परिणाम हैं।
28 मार्च सन 1868 ईसवी को रुस के प्रसिद्ध लेखक मैकसिम गोरकी का जन्म हुआ। गोरकी ने अपनी गरीबी के कारण शिक्षा प्राप्ति के दौरान काम भी किया। उन्होंने अपनी पहली कहानी तिफ़लीस के स्थानीय समाचार पत्र में छपवायी। वे उस समय इसी नगर में रेलवे स्टेशन पर काम करते थे। दो वर्ष बाद उनकी कहानियां पुस्तकों के रुप में छपने लगीं और उन्हें बहुत पसंद किया जाने लगा। धीरे धीरे उनका नाम विश्व विख्यात लेखकों के साथ लिया जाने लगा। उन्होंने अपनी कहानियों में रुस की जनता के जीवन की गहरी समीक्षा की है और समाज की समस्याओं के समाधान का मार्ग खोजने का प्रयास किया है। उनकी मॉ नामक प्रसिद्ध कथा पर फ़िल्म भी बनी है इसमें उन्होंने जार शासकों के अत्याचार के विरुद्ध रुसी मज़दूरों के संघर्ष को सराहा है। इस फ़िल्म को विश्व ख्याति प्राप्त हुई। सन 1936 में गोरकी का निधन हुआ।

28 मार्च सन 1939 ईसवी को स्पेन में लंगभग ढाई वर्ष के गृह युद्ध के बाद तानाशाही के समर्थकों ने जनरल फ़्रैन्सिसको फ़्रैन्को के नेतृत्व में लोकतंत्रवादियों पर विजय प्राप्त की और इस देश की राजधानी मेडरिड पर अधिकर कर लिया। स्पेन में आंतरिक समस्या तब आरंभ हुई जब इस देश के अत्याचारी नरेश अलफ़ोन्स तेरहवें को लोकतंत्रवादियों के दबाव में राजगददी छोड़नी पड़ी और स्पेन में प्रजातांत्रिक शासन की स्थापना हुई किंतु कुछ समय बाद नाज़ी जर्मनी और शिस्ट इटली के समर्थन से जनरल फ़्रैन्को ने स्पेन की आर्थिक और राजनैतिक समस्याओं को बहाना बनाकर प्रजांतत्रवादियों से युद्ध आरंभ कर दिया। इस युद्ध में जनरल फ़्रैन्को की सफलता के बाद 36 वर्षों तक स्पेन में सैनिक शासन रहा।

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9 फ़रवरदीन सन 1373 हिजरी शमसी में आयतुल्लाह अली अकबर मरंदी का निधन हुआ। मीरज़ा अली अकबर मरंदी प्रसिद्ध शिया बुद्धिजीवी और धर्मगुरु थे। उन्होंने तबरेज़ में आरंभिक शिक्षा प्राप्त की उसके बाद नजफ़ में बड़े बड़े धर्मगुरुओं से ज्ञान प्राप्त किया। उन के गुरुओं में सैयद अबुल हसन इस्फ़हानी, आयतुल्लाह नाइनी, आक़ा ज़िया इराक़ी, कुमपानी जैसे धर्मगुरुओं का नाम लिया जा सकता है।

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तीन शाबान वर्ष चार हिजरी क़मरी को पैग़म्बरे इस्लाम के नवासे हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने इस संसार में आंखें खोलीं। उन्होंने अपने जीवन के आरंभिक छः वर्ष अपने नाना की छत्रछाया में बिताए। उनका प्रशिक्षण एक ऐसे परिवार में हुआ था जो परिपूर्णता, नैतिक गुणों और शिष्टाचार का केंद्र था। पैग़म्बरे इस्लाम द्वारा प्रशिक्षित हज़रत अली अलैहिस्सलाम उनके पिता और पैग़म्बर की सुपुत्री हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा उनकी माता थीं। इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने अपने पिता हज़रत अली और भाई इमाम हसन अलैहिस्सलाम की शहादत के बाद वर्ष 50 हिजरी क़मरी में इस्लामी समुदाय के नेतृत्व की ईश्वरीय ज़िम्मेदारी संभाली। उस समय सत्ता पर बनी उमय्या ने अवैध रूप से क़बज़ा कर रखा था। बनी उमय्या के भ्रष्ट शासक यज़ीद ने व्यवहारिक रूप से इस्लाम धर्म को तबाह करना आरंभ कर दिया था इस लिए इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने अपने ईश्वरीय दायित्व का पालन करते हुए जनता को उसकी करतूतों से अवगत कराया। इससे ओक़ाशित हो कर यज़ीद ने उनकी हत्या का षड्यंत्र रचा। अंततः वर्ष 61 हिजरी क़मरी में कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन को यज़ीद की सेना ने घेर लिया और उन्हें तथा उनके 72 साथियों को शहीद कर दिया। इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत से इस्लामी जगत में जागरूकता आई और जल्द ही यज़ीद का शासन समाप्त हो गया। पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने अपने नवासे हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के लिए कहा है कि हुसैन मार्गदर्शन का दीपक और मुक्ति की कश्ती हैं। इमाम हुसैन के शुभ जन्म दिवस के पावन अवसर पर हमारी ओर से भी हार्दिक बधाई स्वीकार करें।
