Oct १५, २०१७ १३:५० Asia/Kolkata

इस्लाम एक एसा परिपूर्ण ईश्वरीय धर्म है जिसमें मानव जीवन के समस्त पहलुओं पर ध्यान दिया गया है और उससे संबंधित शिक्षाएं मौजूद हैं।

दूसरे धर्मों की अपेक्षा इस्लाम धर्म के अनुयाइयों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। अमेरिका में स्थित अध्ययन केन्द्र पिव (PEW) ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि वर्ष 2015 में विश्व की कुल जनसंख्या का 24 प्रतिशत मुसलमान हैं।

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आम तौर पर जिन लोगों को इस्लाम  की शिक्षाओं का ज्ञान नहीं होता है और जब उन्हें इस्लाम की उच्च, तार्किक और मानवता का निर्माण करने वाले ईश्वरीय धर्म की शिक्षाओं का ज्ञान हो जाता है कि ये शिक्षाएं लोक-परलोक में कल्याण का कारण हैं तो वे इस्लाम धर्म को स्वीकार कर लेते हैं। विश्व में एसे लोग भी हैं जो पहले से इस्लाम के बारे में नकारात्मक विचार रखते हैं और इनहीं विचारों के कारण वे इस्लाम विरोधी गतिविधियां करते हैं किन्तु अंत में जब उन्हें इस्लाम धर्म की सच्चाई का पता चल जाता है तो वे इस्लाम धर्म को स्वीकार कर लेते हैं। इस प्रकार के बहुत से लोगों का उल्लेख इतिहास में मिलता है। हालिया वर्षों में भी इसके विभिन्न नमूनों को देखा जा सकता है। हालैन्ड के एक राजनेता अरनाउड वेन डोर्न उन लोगों में से हैं जो पहले इस्लाम विरोधी गतिविधियां अंजाम देते थे किन्तु जब उन्हें इस्लाम की सच्चाई का पता चला तो उन्होंने इस्लाम धर्म को स्वीकार कर लिया।

वर्ष 2008 में हालैन्ड में इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ (फितना) नाम की एक फिल्म बनी। यह फिल्म 15 मिनट से अधिक नहीं थी परंतु इसमें मुसलमानों पर बहुत से निराधार आरोप लगाये गये और उनकी पवित्र मान्यतों के खिलाफ बहुत सी निराधार बातें कही गयीं।

इस फिल्म में इस्लाम को हिंसाप्रेमी धर्म बताया गया है और समस्त मुसलमानों को आतंकवादी कहा गया है। पूरी फितना फिल्म में वास्तविकताओं को तोड़ मरोड़कर पेश करके यूरोप में इस्लामोफोबिया को हवा देने का प्रयास किया गया था। इस फिल्म में जो कुछ दिखाया गया है वे इस फिल्म के निर्माता ग्रीट विल्डर्ज़ और हालैंड फ्रीडम पार्टी में वेन डोर्न सहित उनके सहयोगियों के पक्षपाती दृष्टिकोण थे। फित्ना फिल्म से मुसलमान क्रोधित हुए और बहुत से ग़ैर मुसलमानों ने भी स्वीकार किया कि यह फिल्म अवास्तविक थी और इसका लक्ष्य फूट डालना था। यद्यपि विल्डर्ज़ अब भी इस्लामी विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने में संलग्न हैं परंतु उनके सहायक अरनाउड वेन डोर्न का जीवन ही परिवर्तित हो गया।

वेन डोर्न इस्लाम विरोधी गतिविधियों के दौरान इस महान ईश्वरीय धर्म से अवगत हो जाते हैं और पवित्र कुरआन का अध्ययन आरंभ कर देते हैं। वह हालैंड के एक महत्वपूर्ण नगर हेग की नगर परिषद के सदस्य थे। इस परिषद के एक मुसलमान  सदस्य से उनकी दोस्ती हो जाती है। इन दोनों की दोस्ती इस बात का कारण बनती है कि वेनडोर्न, इस्लाम की ओर आकृष्ट हों।

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अब वे संचार माध्यमों के दुष्प्रचारों से दूर रहकर इस्लाम धर्म की वास्तविकताओं से अवगत हो जाते हैं। वह उस समय भी इस्लाम के बारे में किताबों का अध्ययन करते थे और इस्लाम की शिक्षाओं से अधिक अवगत होते थे जब इस्लाम विरोधी गतिविधियां अंजाम देने वाले दल से अलग हो चुके थे। एक वर्ष के अध्ययन के बाद वे अंततः इस्लाम धर्म स्वीकार कर  लेते हैं। यह खबर सुनकर इस्लाम विरोधी और मुसलमान दोनों आश्चर्य करते हैं। इस्लामी विरोधी यह खबर सुनने के बाद इसलिए बहुत क्रोधित हो जाते हैं कि अतीत में उनके साथ इस्लाम विरोधी कार्यवाहियां अंजाम देने वाले उनके एक साथी ने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया है। अब वे वेनडोर्न के विरुद्ध भी आरोप और दुष्प्रचार आरंभ कर देते हैं। साथ ही जब मुसलमान अरनाउड वेनडोर्न के मुसलमान होने की खबर सुनते हैं तो वे आश्चर्य के साथ प्रसन्न भी हो जाते हैं क्योंकि वे वेन डोर्न को फितना फिल्म से पहचानते हैं। वास्तव में एक बार फिर सिद्ध हो जाता है कि जो भी इस्लाम धर्म की शिक्षाओं का सही तरह से अध्ययन करेगा तो उसे बुद्धि, तर्क और प्रवित्ती के अनुसार पायेगा और उसके समक्ष नतमस्तक हो जायेगा।

 वेन डोर्न कहते हैं मुसलमान होने से पहले वे इस्लाम धर्म की वास्तिकताओं से अवगत नहीं थे और इस धर्म को हालैंडी समाज के लिए ख़तरा समझते थे परंतु इस धर्म से अवगत हो जाने के बाद मुझे इस धर्म के संबंध में समस्त सवालों के जवाब मिल गये और मैं समझ गया कि इस्लाम में पूर्ण पहचान निहित है। इसी प्रकार वह इस्लाम विरोधी “फितना” फिल्म बनाने में अपनी भूमिका को इस्लाम की पहचान न होने का परिणाम बताते हैं। अलबत्ता वह स्पष्ट करते हैं कि इस्लाम से परिचित न होने के कारण इस्लाम और मुसलमानों के अपमान का औचित्य नहीं दर्शाया जा सकता।  वेनड्रोन का यह वाक्य, उन इस्लाम विरोधियों के लिए ठोस जवाब है जिनका यह मानना है कि इस्लाम की जानकारी न होने के कारण इस्लाम और मुसलमानों की मान्यताओं का अपमान किया जा सकता है।  इस्लाम तर्क का धर्म है।  इस्लाम के अनुयाई स्वतंत्र वातावरण में अपनी आस्थाओं को बयान करने और उसका बचाव करने के लिए तैयार हैं।  इसी आधार पर वेन डोर्न का मानना है कि अब वे संसार में विशेषकर हालैंड के लोगों के लिए इस्लाम के प्रचार व प्रसार का पूरा प्रयास करेंगे।  वे आगे कहते हैं कि अब मैं इस ज़िम्मेदारी का आभास करता हूं कि लोगों, विशेषकर जवानों को इस्लाम की ओर आमंत्रित करूं और उनको इस धर्म से परिचित कराऊं।  वे कहते हैं कि यूरोप के लोग यदि यह समझ जाएं कि इस्लाम, इस सीमा तक तार्किक और सुन्दर है तो निश्चित रूप से इस धर्म की ओर उनका रुझान बढ़ेगा।

पिछले कुछ समय से इस्लामी और पश्चिमी देशों में जो आतंकवादी हमले हुए हैं उनके कारण इस्लामोफोबिया और इस्लाम विरोधी कार्यवाहियों में वृद्धि हुई है।  पश्चिम की सरकारें वहां के अतिवादी संचार माध्यम और राजनैतिक पार्टियां, इन आतंकवादी हमलों के बहाने सारे मुसलमानों पर हिंसा और आतंकवाद का आरोप लगा रहे हैं जबकि आतंकवाद की सबसे अधिक भेंट मुसलमान चढ रहे हैं।  इस बारे में वेन डोर्न कहते हैं कि हर धर्म में और विश्व में हर स्थान पर आपको अतिवादी मिल जाएंगे।  विडंबना यह है कि संचार माध्यम, केवल उन एक प्रतिशत अतिवादियों को ही दुनिया को दिखाते हैं और उनकी कार्यवाहियों को बढ़ा –चढा कर पेश करते हैं।  मुसलमान शांति प्रेमी और बहुत परिश्रमी होते हैं।  अगर लोग इस्लाम का अधिक अध्ययन करते तो वे उसकी सुन्दरता से अधिक अवगत होते।

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विगत में इस्लाम विरोधी कार्यवाहियां करने वाले पश्चिमी राजनेता वेन डोर्न का मानना है कि पश्चिम में इस्लाम विरोधी मोटे तौर पर धर्म विरोधी कार्यवाही महत्वपूर्ण है।  उनका मानना है कि पश्चिमी राजनेता और वहां के प्रभावी लोग किसी भी रूप में धर्म को स्वीकार नहीं करते। इंसान जितना धर्म से दूर होगा उतना ही वह धन-दौलत, भोग-विलास, और इसी प्रकार की दूसरी भौतिक चीज़ों की ओर अधिक जाएगा। पश्चिम में औद्योगिक देश लोगों से यह चाहते हैं कि वे अपने भीतर सकारात्मक बातों की ओर ध्यान देने के बजाए भोग-विलास पर ध्यान दें।  पश्चिम में भोग-विलास को ही कल्याण समझा जाता है।  इसके विपरीत जो लोग धार्मिक स्वभाव के लोग हैं वे मज़बूत इच्छा शक्ति के स्वामी होते हैं और भौतिक चीज़ों को कम महत्व देते हैं।  यह बात पश्चिम के राजनेताओं के हित में नहीं है कि लोग स्वतंत्र ढंग से काम करें और स्वतंत्र ढंग से सोचें।  यह बात मैं उन लोगों से कह सकता हूं जो ईश्वर पर आस्था रखने या रखने के दोराहे पर खड़े हैं।  वेन डोर्न कहते हैं कि पश्चिम की सरकारों और संचार माध्यमों के समस्त प्रयास, इस्लाम की छवि को ख़राब करके पेश करना है।

इस्लाम विरोधी दुष्प्रचारों के बावजूद पश्चिम के लोगों को संबोधित करते हुए वेल डोर्न कहते हैं कि अगर आप लोग अपने भेदभाव को किनारे रख दो तो देखोगे कि इस्लाम वास्तव में एक बहुत ही सुन्दर और अच्छा धर्म है।  इस्लाम हमें शिक्षा देता है कि आराम और कठिनाइयों के काल में एक-दूसरे का समर्थन करें।  इस्लाम इन्सान को आंतरिक शांति और बुद्धि प्रदान करता है और आपके आंतरिक जीवन को गहराई प्रदान करता है।  मेरे हिसाब से जीवन, भौतिकवाद से अलग है। इस्लाम को अपनाकर आप एक मज़बूत इच्छा शक्ति और स्वतंत्र विचारों के स्वामी बन सकते हैं।

                         

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आरनाउड वेन डोर्न मुसलमान होने के बाद हज करने गए जिसने उनके धार्मिक आस्थाओं को मज़बूत बनाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।  हज का आध्यात्मिक वातावरण हर इन्सान को परिवर्तित कर देता है।  हज के दौरान उन्होंने अपने एक साक्षात्कार में कहा कि वर्तमान समय में मैं धर्म परायण मुसलमानों के बीच मौजूद हूं।  आशा करता हूं कि खेद के कारण जो मैं आंसू बहा रहा हूं उनसे मेरे पाप धुल जाएंगे।  उन्होंने कहा कि जब मैं हज पर गया तो हज के दिन मेरे जीवन के सबसे अच्छे दिन थे।  इस बात अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि जब वेन डोर्न पैग़म्बरे इस्लाम (स) के पवित्र रौज़े के सामने गए होंगे तो उनको कितनी आत्मग्लानि हुई होगी।  यह वही पैग़म्बर हैं जिनको उसने और फ्रीडम पार्टी में उनके सहयोगियों ने खुलकर बुराभला कहा था।  अब उनके लिए यह सिद्ध हो चुका था कि उन्होंने जो कुछ कहा वे ग़लत थे।  हालैण्ड के ताज़ा मुसलमान इस बारे में कहते हैं कि जब मैं पैग़म्बरे इसलाम (स) के पावन रौज़े के सामने खड़ा हुआ तो मुझे बड़ी लज्जा का आभास हुआ।  मैं आशा करता हूं कि ईश्वर मेरे प्रायश्चित को स्वीकार  और मुझे माफ करेगा।  उनकी अभिलाषा थी कि वे पवित्र नगर मदीना में अधिक से अधिक अपना समय गुज़ारें।

हर प्रकार के दुष्प्रचारों के बावजूद लोग इस्लाम की ओर आ रहे हैं।  पश्चिम में इस्लाम के प्रति लगाव रखने वालों में दिन-प्रतिदिन वृद्धि हो रही है।  हालैण्ड की जनसंख्या लगभग एक करोड़ साठ लाख है जिसमें दस लाख से अधिक मुसलमान हैं।  वहां पर मुसलमान होने वालों की संख्या में तेज़ी से वृद्धि हो रही है।  वेन डोर्न के इस्लाम स्वीकार करने के एक साल के बाद उनका बेटा एलेक्ज़ेंडर वेन भी मुसलमान हो गया। अपने मुसलमान होने के बारे में वह इस प्रकार कहता है। मैने देखा कि इस्लाम स्वीकार करने के बाद मेरे पिता बहुत शांतिप्रिय हो गए हैं।  इससे मुझको पता चला कि इस्लाम के भीतर कोई सकारात्मक बात ज़रूर मौजूद है।  इसी वजह से मुसलमानों के बारे में मेरा विचार बदल गया और मैंने स्वेच्छा से इस्लाम स्वीकार किया और पवित्र क़ुरआन का अध्ययन करना शुरू कर दिया।