Nov २२, २०१७ १७:२४ Asia/Kolkata

इंसान के शरीर की जटिलता सृष्टि के रहस्यों में से एक है।

अभी तक दुनिया की कोई संस्था या चिकित्सा केन्द्र इंसान के शरीर को पूर्ण रूप से जानने का दावा नहीं कर सका है। इतिहास में चिकित्सा विज्ञान ने विभिन्न चिकित्सा मतों के रूप में जैसे कि मिस्र, ईरान, चीन, भारत और यूनान में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और यह विज्ञान अपने मूल्यवान अनुभवों के आधार पर आधुनिक दौर में भी आगे बढ़ रहा है।

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ईरान की पारम्परिक चिकित्सा शैली दुनिया की प्राचीन चिकित्सा शैलियों में से एक है। इस क्षेत्र में 14 हज़ार किताबें आज भी मौजूद हैं, जिनमें उपचार के लिए हज़ारों नुस्ख़ें सुझाए गए हैं और उनकी विशेषताओं का उल्लेख किया गया है। इन नुस्ख़ों में से 85 प्रतिशत से अधिक में उपचार के लिए जड़ी-बूटियों का सुझाव पेश किया गया है। ईरान के प्रसिद्ध हकीम, उदाहरण स्वरूप राज़ी, अहवाज़ी, अबू अली सीना और जुर्जानी वे लोग थे, जिनकी किताबें 6 शताब्दियों तक पश्चिमी देशों में मूल स्रोत के रूप में पढ़ाई जाती रहीं हैं।

ईरान की पारम्परिक चिकित्सा शैली की विशेषताओं में से स्वास्थ्य को केन्द्र में रखकर, आध्यात्मिकता एवं नैतिकता को दृष्टि में रखना और उन प्राकृतिक शैलियों का चयन करना है, जिससे रोगी पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। ईरान की पारम्परिक चिकित्सा शैली दो भागों पर आधारित है, दवाई और अध्यात्म। ईरानी हकीमों के मुताबिक़, दवाई और ज़िक्र अर्थात ईश्वर की उपासना और उसका नाम जपना, बीमारी के उपचार में प्रभावी हैं। ईरानी हकीमों का मानना है कि ईश्वर ने हर दर्द का उपचार प्रकृति में रखा दिया है, इस प्रकार जड़ी-बूटियां उपचार का एक स्रोत हैं और मनुष्य के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं।

ईरान में लगभग 8 हज़ार प्रकार की जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं, जिनमें से एक चौथाई से अधिक उपचार, इत्र, मसालों और मेक-अप के लिए उपयोग होती हैं। इस प्रकार, ईरान जड़ी-बूटियों से समृद्ध देश है। इनमें से 1700 से अधिक जड़ी-बूटियां या वनस्पतियां केवल ईरान में ही उगती हैं। आर्थिक रूप से भी इनका काफ़ी महत्व है और निर्यात होने वाली महत्वपूर्ण वस्तुओं में शामिल हैं।

आज इस क्षेत्र में 3 हज़ार से अधिक कंपनियां एवं सरकारी व ग़ैर सरकारी केन्द्र सक्रिय हैं, जो इन वनस्पतियों को पहचानने, इन्हें उगाने और इनसे दवाईयां बनाने तथा पैकिंग और मार्केटिंग में व्यस्त हैं। यह उत्पादन, अर्क़, रस, ख़मीर और विभिन्न रूपों में इस्तेमाल किए जाते हैं। समाज के स्वास्थ्य पर जड़ी-बूटियों के इस्तेमाल से पड़ने वाले सीधे प्रभाव के कारण, सरकारी विभाग की भी कुछ ज़िम्मेदारियां बनती हैं। इसी कारण सरकार ने जड़ी-बूटियों के उत्पादनों में गुणवत्ता लाने के लिए और नॉलिज पार्क, अनुसंधान केन्द्रों, विश्वविद्यालयों और संस्थाओं की स्थापना की है। इस क्षेत्र में नॉलिज बेस्ड कंपनियों की उपस्थिति भी महत्वपूर्ण है, जो दवाईयों का औद्योगिकरण करती हैं और मार्केटिंग करती हैं। आज दर्जनों नॉलिज बेस्ड कंपनियां इस क्षेत्र में सक्रिय हैं और अपने उत्पादों को इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर और वियतनाम जैसे देशों को निर्यात करती हैं।

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जड़ी-बूटियों और खाद्य पदार्थों का निर्यात करने वालों की यूनियन, ईरान में हर्बल उत्पादों के निर्यात में सक्रिय संगठन है। इस यूनियन की वेबसाइट www.ishta.ir है। यह ईरान के चैंबर ऑफ कॉमर्स एवं उद्योग से संबंधित है। इसका उद्देश्य जड़ी-बूटियों के निर्यात में वृद्धि करना है। इसकी स्थापना 1345 हिजरी शम्सी में हुई थी। इस यूनियन के उद्देश्यों में गुणवत्ता में बेहतरी लाकर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में जड़ी-बूटियों के निर्यात में वृद्धि करना है।

इस यूनियन के 250 से अधिक सदस्य हैं। इस यूनियन के सदस्यों में से ग्याहाने सब्ज़ ज़िंदगी कंपनी की ओर संकेत किया जा सकता है, जिसकी वेबसाइट www.grennplantsoflife.com है। 2013 में यह कंपनी ईरान में सबसे अधिक जड़ी-बूटियां निर्यात करने वाली कंपनियों में से एक रही। इस कंपनी ने 1969 में दवाईयों के उत्पादन और निर्यात और खाद्य पदार्थों के क्षेत्र में काम करना शुरू किया। यह कंपनी हर्बल अर्क़, सीरप, कैप्सूल, माउथ वाश, क्रीम और जल का उत्पादन करती है। यह उत्पादन के लिए आधुनिक मशीनों और ज्ञान का इस्तेमाल करती है। इस कंपनी ने उच्चतम वैश्विक मापदंडों पर ध्यान केन्द्रित किया है, जिसके कारण उसके कृर्षि उत्पाद ज़हर और कीटनाशकों से पाक होते हैं। इस कंपनी के अनुसंधान विभाग में विश्वविद्यालों के अनुभवी प्रोफ़ेसर और शोधकर्ता उत्पादों के समस्त चरणों की निगरानी करते हैं।

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जड़ी-बूटियों के क्षेत्र में सक्रिय अन्य कंपनियों में आसे यासूज, बारीज एस्सेन्स, ईरान दारू , बू अली दारू, दारू दरमान सलफ़चगान, दारूसाज़ी गुल दारू और मेहर ग्याह का नाम लिया जा सकता है। मेहर ग्याह कंपनी विशेष रूप से हर्बल चाय का उत्पादन करती है। यह जानना दिलचस्प होगा कि डेढ़ शताब्दी पूर्व जब ईरान में चाय पीने का चलन हुआ तो हर्बल चाय ईरानियों में सबसे लोकप्रिय चाय हुआ करती थी। मेहर ग्याह कंपनी की हर्बल चाय में किसी प्रकार के एक्स्ट्रा मटेरियल, टेस्ट बढ़ाने वाले पदार्थों और ग़ैर वनस्पति पदार्थों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। उसके उत्पादन में उच्चतम गुणवत्ता के प्राकृतिक कच्चे माल का प्रयोग किया जाता है। इसके पैकेटों में मौजूद सामग्री में हर्बल सामग्री और मकई स्टार्च शामिल हैं, जिन्हें चिपकाया या पंच नहीं किया जाता है, बल्कि बुना जाता है। हर्बल चाय के हीट-मुहरबंद पॉलिमर पैकेटों में इत्र ख़ुशबू और प्रभावी पदार्थ वनस्पति को सुरक्षित रखते हैं और पैकेट में हवा और नमी को जाने से रोकते हैं। पैकेटों की अच्छी तरह से पैकिंग और उनके पिरामिड आकार के कारण पैकेट के भीतर और बाहर के वातावरण में 98 प्रतिशत तक पानी का विनिमय होता है, ताकि वनस्पति को निकालते समय उसके साथ उसकी समस्त विशेषताएं मौजूद हों।

जड़ी-बूटियों के उद्योग की ईरान की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका है। यह उद्योग स्वदेशी ज्ञान, ईश्वरीय अनुकंपओं और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था पर आधारित है। घरेलू स्तर पर मौजूद प्रतिभाओं के कारण, इस क्षेत्र में निवेश लाभदायक होता है। इस परिप्रेक्ष्य में जड़ी-बूटियों के उद्योग में सक्रिय लोगों का प्रयास है कि आधुनिक ज्ञान के इस्तेमाल, टैक्नोलॉजी के प्रयोग और आधुनिक शैलियों से लाभ उठाकर प्रतिस्पर्धा के लिए भूमि प्रशस्त करें और गुणवत्ता में वृद्धि करके अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तलाश करें।