Nov २९, २०१७ १६:४९ Asia/Kolkata

विश्व में बहुत से उद्योग हैं। 

इन उद्योगों में कुछ एसे हैं जिनमें लाभ की संभावना बहुत अधिक है। अधिक लाभ कमाने वाले प्रमुख उद्योगों में से एक, दवा निर्माण उद्योग भी है।  लाभ कमाने की दृष्टि से यह तीसरा सबसे बड़ा उद्योग है।  "फारच्यून" पत्रिका ने सन 2000 में अपने एक लेख में लिखा था कि उचित पूंजि निवेश के हिसाब से दवा बनाने का उद्योग अत्यन्त विश्वसनीय उद्योगों में से है।  इसमे निवेश किये गए पैसे में सामानयतः वृद्धि देखी गई है।  इस उद्योग में लगातार पूंजी निवेश का मुख्य कारण यह है कि जनसंख्या में तेज़ी वृद्धि हो रही है और लोग अपने स्वास्थय के प्रति जागरूक होते जा रहे हैं।  दूसरा कारक यह भी है कि विश्व की जनसंख्या में बूढ़ों की तादाद बढ़ रही है।  बुढ़ापे में स्वाभाविक रूप से लोग बीमारियों में घिर जाते हैं जिनको दवाओं की बहुत ज़रूरत पड़ती है।  यह वे कारक हैं जिनके कारण दवा निर्माण उद्योग में पूंजी निवेश करने के बाद उसमे पैसों के फंसने की संभावना बहुत ही कम होती है।  क्योंकि दवाओं की क़ीमतें बहुत तेज़ी से नहीं बढ़तीं इसलिए औषधि निर्माण उद्योग, आर्थिक संकट जैसी समस्या से जल्दी प्रभावित नहीं होता।  इसमें मंदी बहुत कम ही देखी जाती है।  सन 2008-2009 के आर्थिक संकट के दौरान दवा निर्माण उद्योग ने सात प्रतिशत विकास के साथ अपनी गतिविधियां जारी रखीं।  कहा जाता है कि इस समय दवा निर्माण उद्योग में इस समय प्रतिवर्ष एक ट्रिलियन डालर से अधिक का टर्नओवर देखा गया है।

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यहां पर इस बिंदु की ओर संकेत करना ज़रूरी है कि अन्य उद्योगों की तुलना में दवा निर्माण उद्योग में शोध पर अधिक लागत लगानी पड़ती है।  इस उद्योग में रिसर्च एंड डेवलपमेंट के क्षेत्र में पूंजी निवेश बहुत ज़रूरी है।  अन्य किसी उद्योग की तुलना में दवा बनाने वाले उद्योग में ही रिसर्च एंड डेवलेप्मेंट पर बहुत अधिक पैसा लगाया जाता है।  क्योंकि इस उद्योग का सीधा संबन्ध, लोगों के जीवन से है इसीलिए इसमें लगातार विकास होता रहता है।  दवा बनाने वाली बड़ी-बड़ी कंपनियों को होने वाले अपार लाभ के कारण यह कंपनियां, रिसर्च एंड डेवलपमेंट या शोध पर बहुत अधिक धन ख़र्च करती हैं।  विश्व की बड़ी-बड़ी कंपनियां, अपने लाभ का लगभग 40 प्रतिशत भाग शोध और मार्केटिंग पर ख़र्च करती हैं।  यह काम इसलिए किया जाता है ताकि नया उत्पाद अधिक विश्वसनीय हो और उसको अधिक से अधिक बेचा जा सके।

औषधि निर्माण उद्योग में किसी भी दवा को बनाने से पहले उसपर गहराई से शोध किया जाता है।  वर्तमान समय में जो दवाएं लोगों के लिए लाभदायक हैं उनपर निश्चित रूप में इनके बनने से पहले शोध किया जा चुका है और सही परिणाम आने के बाद ही उनका निर्माण किया गया।  अब वे दवाएं जो भविष्य में तैयार की जाएंगी उनपर विगत से शोध का काम शुरू हो चुका है।  इन्ही बातों के दृष्टिगत दवा निर्माण उद्योग में दवा बनाने से पहले ही उसपर शोध के लिए भारी रक़म ख़र्च करनी पड़ती है।  इस क्षेत्र में काम करने वालों का कहना है कि कभी-कभी एक दवा को बनाने से पहले उसपर 15 वर्षों तक शोध करना पड़ता है जिसपर बहुत लागत आती है।

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वास्तविकता यह है कि औषधि निर्माण उद्योग, किसी सीमा तक सीमित हाथों में है।  विश्व की अधिकांश दवाएं, उत्तरी अमरीका और यूरोप में बनाई जाती हैं।  सन 2013 में पेश किये गए सर्वेक्षण के अनुसार इसमें सबसे अधिक भागीदारी उत्तरी अमरीका की 37 प्रतिशत थी जबकि अफ़्रीका और मध्यपूर्व की भागीदारी मात्र 4 प्रतिशत थी।  दवा बनाने के उद्योग की समीक्षा, इस उद्योग में पैसे के टर्नओवर के आधार पर की जाती है।  इस टर्नओवर में कच्चे माल की ख़रीदारी, प्रचार और इसी प्रकार की बहुत सी चीज़ें शामिल होती हैं।  अन्तर्राष्ट्रीय दवा निर्माण उद्योग में दवा बनाने वाले देशों में विकसित देश ही सबसे आगे हैं।  इस उद्योग का 79 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं देशों के नियंत्रण में है।  दूसरे शब्दों में दवा बनाने के क्षेत्र में विकासशील देशों की भागीदारी मात्र 21 प्रतिशत है जबकि संसार की 85 प्रतिशत जनसंख्या इन्हीं देशों में है।

ऐसा लगता है कि पश्चिम में आर्थिक और तकनीकी दृष्टि से हो रहे विकास जैसे कारकों के कारण वहां पर दवाओं का अधिक निर्माण और निर्यात किया जाता है।  दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि अमरीका और यूरोप में बनाई जाने वाली दवाएं, बनने के बाद अधिकतर एशियई और अफ़्रीकी देशों को निर्यात की जाती हैं।  जानकारों का कहना है कि निकट भविष्य में अमरीका और यूरोप की बनी हुई दवाएं जिन देशों में अधिक निर्यात की जाएंगी उनके नाम इस प्रकार हैं ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, यूक्रेन, पोलैण्ड, अर्जन्टीना, मिस्र, इन्डोनेशिया, अल्जीरिया, दक्षिणी अफ़्रीका, रोमानिया और वियतनाम आदि।  इसका मुख्य कारण इन देशों में बढ़ती जनसंख्या, विगत की तुलना में वर्तमान समय में लोगों की दवायों तक पहुंच और इन देशों के आर्थिक विकास कार्यक्रमों की भूमिका है।

इस समय बढ़ता औषधि उद्योग, सामान्यतः जेनरिक या जातिगत क्षेत्र में बढ़ रहा है।  सामान्य: जेनेरिक वे दवाएं होती हैं जो बिना किसी पेटेंट के बनाई और बेची जाती हैं।  सामान्य रूप में दवाओं को दो श्रेणियों में बांटा जाता है, जेनेरिक और ब्रांडेड दवाएं।  जेनेरिक या सामान्य दवाएं, ब्रांडेड दवाओं की तुलना में काफ़ी सस्ती होती हैं।  कभी-कभी जेनेरिक और ब्रांडेड दवाओं के मूल्य में बीस गुना से अधिक का अंतर होता है।  जेनेरिक मेडिसिन का कोई विशेष ब्रांड नहीं होता इसलिए इसके विज्ञापन पर अधिक धन ख़र्च नहीं होता है। यही कारण है कि ब्रोंडेड दवाओं की तुलना में जेनेरिक दवाएं सस्ती होती हैं।  वैसे यह तो होता है कि अलग-अलग जेनेरिक कंपनियों की दवाओं के मूल्यों में कुछ अंतर पाया जाता है।  यूरोप और अमरीका की बड़ी-बड़ी कंपनियां, अधिकतर ब्रांडेड दवाएं ही बनाती हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार ईरान के पास औषधि निर्माण उद्योग का कम से कम 80 साल पुराना अनुभव है।  ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता से पहले तक देश में प्रयोग की जाने वाली दवाएं अधिक्तर आयात की जाती थीं जिनमें दवा बनाने वाली बड़ी-बड़ी कंपनियों की भूमिका हुआ करती थी।  उस काल की सबसे बड़ी समस्या दवा के क्षेत्र में विदेश पर निर्भरता थी जिसके कारण देश के भीतर दवा बनाने वाली कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा नामकी कोई चीज़ नहीं थी।  ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद देश के भीतर दवा निर्माण उद्योग के उद्देश्य से कुछ फैक्ट्रियां लगाई गईं।  इसके बाद से लगभग 4 दशकों के दौरान ईरान ने दवाएं बनाने में इतनी अधिक सफलता प्राप्त कर ली कि वर्तमान समय में देश की आवश्यकता की 95 प्रतिशत दवाएं ईरान के भीतर ही बनाई जाती हैं।  जहां एक ओर ईरान में दवाएं बनाने के छोटे और बड़े कारख़ाने खोले गए हैं वहीं फार्मसूटिकल क्षेत्र में छात्रों ने बढ़चढकर भाग लेना आरंभ किया।

ईरान के दवा निर्माण उद्योग पर दृष्टि डालने से पता चलता है कि सन 1979 से 2015 के बीच देश का औषधि निर्माण उद्योग 30 प्रतिशत से बढ़कर 96 प्रतिशत को पार कर गया।  ईरानी डाक्टर बल्डप्रेशर, दिल की बीमारियों और कई अन्य बीमारियों का इलाज देश के ही भीतर ईरान में बनी दवाओं से कर रहे हैं।  यह दवाएं प्रभावी रही हैं जिसके कारण लोगों में इनके प्रति विश्वास बढ़ा है।  इस समय ईरान में बनने वाली दवाएं, विदेश में बनने वाली दवाओं की तुलना में प्रभावशाली सिद्ध हो रही हैं जिसके कारण इसका बाज़ार ख़ूब पनप रहा है।  ईरान में विभिन्न प्रकार की बीमारियों के उपचार के उददेश्य ये दवाएं बनाई जा रही हैं जिनका हर स्तर पर स्वागत किया जा रहा है जैसे एड्स, कैंसर, एमएस, ख़तरनाक संक्रमण और बहुत सी अन्य बीमारियों की दवाएं।  रेडियो आइसोटोप दवाएं भी देश के परमाणु ऊर्जा संगठन के सहयोग से बनाई गई हैं।

हालिया दशक के दौरान वैज्ञानिक और तकनीकी तरक़्क़ी के दृष्टिगत इस समय ईरान की गणना, दवाएं बनान वाले दस बड़े देशों में होने लगी है।  ईरान में बनाई जाने वाली दवाएं विदेश भी भेजी जाती हैं अर्थात उनका बड़े पैमाने पर निर्यात किया जाता है।