Dec १२, २०१७ ०९:०२ Asia/Kolkata

हमने चौथी शताब्दी के अंत या पांचवी शताब्दी के आरंभ के विद्वान और रहस्यवादी अली बिन उसमान हजवीरी की जीवनी की चर्चा की थी और कहा था कि उन्होंने अपने जन्मस्थल ग़ज़्ना में आरंभिक शिक्षा प्राप्त की और अधिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए लंबी 2 यात्रायें की और विभिन्न गुरूओं की सेवा में हाज़िर होकर ज्ञान अर्जित किया।

ज्ञान प्राप्त करने के लिए उन्होंने जो यात्राएं की उनमें लाहौर उनकी यात्रा का अंतिम पड़ाव था। उस समय लाहौर भारत और खुरासान का सीमावर्ती नगर था और उसी नगर में उन्होंने प्रसिद्ध पुस्तक "कश्फुल महजूब" लिखी या उसे पूरा किया। हमने पिछले कुछ कार्यक्रमों में कश्फुल महजूब पुस्तक के बारे में चर्चा की और यह बताया कि कश्फुल महजूब किताब के पांच भाग हैं और इसमें मौजूद विविधता के बावजूद इसमें दो बुनियादी विषय हैं और वह दो विषय यह हैं। एक ईश्वर से इंसान का विशेष संबंध और दूसरे इंसान का अपने नफ्स से मुकाबला।  

"कश्फुल महजूब" किताब

"कश्फुल महजूब" किताब के समस्त भागों के अपेक्षाकृत अलग होने के बावजूद आपस में वे एक दूसरे से जुड़े हुए भी हैं। इस बयान के साथ हमने इस किताब के कुछ भागों की समीक्षा की थी। इस किताब का एक महत्वपूर्ण भाग उसमें मौजूद कहानियां हैं और उनका मुख्य उद्देश्य रहस्यवादी तथ्यों व अर्थों को बयान करना है। अर्थों को बयान करने के लिए कहानियों के तत्वों में जो समन्वय पाया जाता है उससे हजवीरी की शक्ति व दक्षता का पता चलता है।

रहस्यवादी कहानियां साहित्य की एक किस्म हैं जिनका फारसी साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान है। अली बिन उसमान हजवीरी जैसे रहस्यवादी लेखकों ने कहानी से लाभ उठाकर अपनी शिक्षाओं व संदेशों को उत्तम ढंग से संबोधकों तक पहुंचाने का प्रयास किया है। इन लोगों ने रहस्यवादी अर्थों को आसान करके पेश करने और अपनी बातों को अधिक प्रभावी बनाने के प्रयास किये हैं। साहित्यिक आलोचकों का मानना है कि ये लोग इसके ज़रिये ईश्वर के मार्ग में चलने वालों में जोश व उत्साह भरने और मुरीदों को आत्मिक दृष्टि से मजबूत करने में सफल हो सके हैं।  

हजवीरी ने कश्फुल महजूब किताब की प्रस्तावना में अपनी कहानियों को अच्छा बनाने के लिए ग़ुरर शब्द का प्रयोग किया है जिसका अर्थ मजबूत व चुना हुआ होता है। इस शब्द का प्रयोग किताब पढ़ने वालों को उसके अर्थों को समझने में सहायता और वह लेखकों व रहस्यवादी शिक्षाओं को अधिक स्पष्ट करता है। हजवीरी की किताब कश्फुल महजूब में जो कहानियां हैं वे शिक्षाप्रद हैं और ये महान धार्मिक हस्तियों, रहस्यवादियों, परिज्ञानियों और कभी लोगों के बारे में भी हैं। हजवीरी द्वारा कुछ विषयों पर बल दिया जाना इस बात का कारण बना है कि व्यक्तित्व या घटना में थोड़े से बदलाव के साथ दोबारा उसे बयान किया जाता है। इन कहानियों का छोटा होना उनके आरंभ और उनके अंत को एक दूसरे के निकट करता है। इसी तरह कश्फुल महजूब की कहानियों के छोटा होने की वजह से उनके अर्थों का समझना भी सरल हो गया है। इस आधार पर छोटा और साधारण होने की दृष्टि से कश्फुल महजूब की कहानियों की गणना मीनिमालिस्ट कहानियों की पंक्ति में की जा सकती है।

 

बयान करने के लिए अच्छी कहानियों का चयन और घटना के उस भाग का चयन व उस पर अधिक जोर देना, जो कहानी पढ़ने वाले पर अधिक प्रभाव डाल सकता है, कहानी बयान करने की हजवीरी की शैली है और उनकी इस शैली ने वर्तमान समय में मीनी मैलिस्टी कहानियों से निकट कर दिया है। उदाहरण के तौर पर आत्मिक पवित्रता की वजह से कभी जो विशेष हालत प्राप्त होती है उस पर इन कहानियों में बल दिया जाता है और उसी चीज़ को इन कहानियों का केन्द्रीय बिन्दु बनाया जाता है। इस आधार पर हजवीरी की जो अधिकांश कहानियां हैं उनमें उस बिन्दु को आधार बनाया गया है जो अध्यात्म की वजह से सूफी को प्राप्त होते हैं और वह विशेष हालत कभी सूफी- संत के नियंत्रण से बाहर की चीज़ होती है। इन सबके बावजूद इन कहानियों को अध्यात्म से प्राप्त विशेष स्थिति की कहानियों की सूची में नहीं रखा जा सकता। क्योंकि अध्यात्म की वजह से प्राप्त विशेष स्थिति व कहानियां वे घटनाएं होती हैं जिसमें इंसान के जीवन के समस्त पहलु शामिल होते हैं और वे घटनाएं इंसान के नियंत्रण में नहीं होती हैं और यह हालत स्वतः किसी भी समय पैदा हो सकती है और वह इंसान के बस में नहीं होती है। इसी प्रकार इस हालत को बदलने में इंसान की कोई भूमिका नहीं होती है। उदाहरण के तौर पर काफा की मस्ख़ नाम की किताब की एक कहानी में गरगूर समसार नाम का एक व्यक्ति होता है। उसे इस प्रकार की स्थिति का सामना होता है जिसमें उसकी कोई भूमिका नहीं होती है। वह जब सुबह सवेरे नींद से उठता है तो देखता है कि वह एक काकरोच में परिवर्तित हो चुका है। इस बात को कहानी में नहीं समझा जा सकता। यह अचानक और अकारण अस्तित्व में आती है।

"कश्फुल महजूब" किताब

कश्फुल महजूब किताब में जो छोटी- छोटी कहानियां हैं उनका स्वरुप बिल्कुल सादा है और कहानियों के लिए जो चीज़ें जरुरी होती हैं वे सुव्यवस्थित हैं और कारण एवं नतीजा के मध्य जो संबंध होता है वह इनमें मौजूद होता है। लंबी कहानियों और उपन्यास का जो स्वरुप होता है वह प्रायः जटिल होता है किन्तु छोटी कहानियों का स्वरूप आसान होता है। कश्फुल महजूब किताब की जो छोटी कहानियां हैं उनका आरंभ और अंत एक दूसरे से निकट है। इसी कारण कहानी का जो स्वरूप होना चाहिये उसमें समस्त तत्व मौजूद नहीं हैं। जो छोटी कहानियां होती हैं उन्हें रोचक बनाने की ज़रूरत होती है। इस आधार पर इन कहानियों के लेखक आम तौर पर उचित स्थिति का चयन करते हैं और उसके बाद सबसे रोचक व आकर्षण क्षण को उसमें बयान करते हैं। अगर वह आकर्षण व रोचक क्षण कहानी पढ़ने वाले को अधिक प्रभावित कर सका तो उस कहानी को ज़्यादा सफल माना जाता है। कश्फुल महजूब की जो कहानियां हैं थोड़े से अंतर के साथ उनका स्वरूप संक्षिप्त कहानियों जैसा है। इन कहानियों में घटनाएं कम हैं और मूल घटना बयान करने पर ध्यान केन्द्रित किया जाता है। वह घटना प्रायः इंसान के जीवन का सुन्दर क्षण होता है। इसी प्रकार यह भी संभव है कि कहानी में परिवर्तित कैरेक्टर पर ध्यान दिया जाये और उसे केन्द्रीय बिन्दु बनाया जाये।

हजवीरी ने अपनी कहानियों को बयान करने के लिए विभिन्न शैलियों का प्रयोग किया है। इसी कारण कश्फुल महजूब की कहानियों का स्वरूप समान नहीं है। कभी कहानी शुरु होते देर नहीं हुई कि वह अपने अंत के निकट पहुंच गयी या उसमें कोई परिवर्तन ही नहीं हुआ। इसी तरह कभी किसी भूमिका के बिना अस्ल कहानी आरंभ हो जाती है और शिखर बिन्दु पर पहुंच कर समाप्त भी हो जाती है। कुछ अवसरों पर एसा होता है कि कहानी के शुरु में ही उसमें संतुलन समाप्त हो जाता है। यह कहानी में संतुलन का समाप्त हो जाना प्रायः कहानी के आरंभ में हो जाता है जब वह भूमिका के बिना शुरु होती है। कश्फुल महजूब किताब की कहानियों में मौजूद विविधता के बावजूद आलोचकों का मानना है कि इन कहानियों में कारण और उसके नतीजे के मध्य न चाहते हुए भी संबंध स्थापित हैं और यह संबंध रहस्यवाद में स्वीकार्य हैं। उदाहरण के तौर पर एक चीज़ गायब हो जाती है और उसका आरोप किसी पर लगा दिया जाता है। जिस पर आरोप लगाया जाता है वह व्यक्ति ईश्वर से मुक्ति पाने की प्रार्थना करता है। करिश्माई शक्ति से गायब हुई चीज़ मिल जाती है।

हजवीरी ने अपनी कहानियों को बयान करने में कहानी के समस्त तत्वों से लाठ उठाया है किन्तु हर कहानी को बयान करने में उन्होंने विशेष शैली अपनाई है। उन्होंने स्थिति को नजर में रखकर हर कहानी को चाव से पढ़ने योग्य बनाने का प्रयास किया है। मिसाल के तौर पर जिन कहानियों में असामान्य घटनाएं देखने को मिलती हैं प्रायः कहानी के कठिन क्षण में करिश्मा व चमत्कार होने की भूमि समतल हो जाती है। एक बच्चे की कहानी में इस चीज को भली-भांति देखा जा सकता है। कहानी इस प्रकार है ईरान के आमूल क्षेत्र के बाज़ार में एक बच्चे के ऊंट का पैर गीली ज़मीन में धंस जाता है। लोग ऊंट के पैर को ज़मीन से निकालने का प्रयास करते हैं परंतु उनके प्रयासों का कोई परिणाम नहीं निकलता है। बच्चा ईश्वर से दुआ के लिए हाथ उठाता है और मोहम्मद नाम का जो वहां का कसाई होता है वह भी ईश्वर से बच्चे के ऊंट की मुक्ति के लिए दुआ करता और कहता है हे ईश्वर इस ऊंट को मुक्ति प्रदान कर और मुक्ति प्रदान नहीं करता तो क्यों एसा कर दिया कि इस कसाई का दिल बच्चे की हालत पर रो पड़े? उस समय यह कहानी बहुत ही संवेदनशील हालत में पहुंच जाती है।

रहस्यवादी कहानियों में करिश्मा व चमत्कार प्रायः कहानियों का शिखर बिन्दु होता है और होना यह चाहिये कि करिश्मा कहानी के प्रभाव को कम कर दे परंतु जो हालत अस्तित्व में आई होती है उसके दृष्टिगत जो घटनाएं पेश आती हैं उसे हजवीरी के सूफी संबोधक और सूफियों के चाहने वाले स्वीकार करते हैं। क्योंकि यह घटनाएं असाधारण होती हैं और महान ईश्वर की शक्ति से रहस्यवादियों के हाथों ज़ाहिर होती हैं। हजवीरी की कहानियों का अंत अध्यात्मिक उपलब्धि पर होता है। प्रायः करिश्मा या असाधारण घटना हो जाने के बाद कहानी का जो पात्र होता है उसमें परिवर्तन आ जाता है जैसे शर्मिन्दगी, हैरानी और अंत में प्रायश्चित जैसी विभिन्न हालत अस्तित्व में आती है।