क्षेत्र में शांति व सुरक्षा स्थापित करने में ईरान की भूमिका
आज विश्व में सबसे ज़्यादा अहमियत सुरक्षा को दी जाती है।
दूसरे शब्दों में सुरक्षा ही लोगों की नज़र में अहम हो गयी है। सुरक्षा के बारे में राबर्ट आर्ट का प्रसिद्ध कथन है कि सुरक्षा का अर्थ अस्पष्ट है। साथ ही सुरक्षा के अर्थ में बहुत गुंजाइश है। इसी कारण सुरक्षा के अर्थ के बारे में विभिन्न दृष्टिकोण पाये जाते हैं। इसके साथ कहा जा सकता है कि सुरक्षा के बारे में अब तक एक अर्थ पर आम सहमति नहीं हो सकी है किन्तु इस बात में कोई संदेह नहीं है कि सुरक्षा का दायरा बहुत विस्तृत है और इसमें राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरण सहित हर प्रकार की सुरक्षा शामिल है। सुरक्षा के बारे में इस दृष्टिकोण के साथ इस्लामी गणतंत्र ईरान क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सदैव शांति व सुरक्षा स्थापित करने के प्रयास में रहा है। इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद क्षेत्र के एक प्रभावी देश के रूप में ईरान ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भूमिका निभाना आरंभ कर दिया। इस्लामी गणतंत्र ईरान ने शांतिप्रेमी नीति के मद्देनज़र हिंसा और अतिवाद को नकार दिया है और विश्व में शांति व सुरक्षा स्थापित करने के लिए वह सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
यहां सवाल यह उठता है कि इस्लामी गणतंत्र ईरान ने शांति व सुरक्षा स्थापित करने और सीरिया संकट के समाधान के लिए क्या किया है? इस सवाल के जवाब में कहना चाहिये कि इस्लामी गणतंत्र ईरान की नीति संकटों व विवादों को रोकना है और इस कार्य के लिए वह मुख्य रूप से तीन रास्तों को अपनाये हुए है।
एक यह है कि ईरान क्षेत्रीय परिवर्तनों पर गहरी नज़र रखे हुए है, वह इन परिवर्तनों का विश्लेषण करता है और ज़रूरत पड़ने पर खतरे को दूर करने के लिए कदम उठाता है। जैसे उसने इराक और सीरिया में इन देशों की सरकारों के आह्वान पर सैन्य सलाहकार के रूप में उनकी सहायता की और आतंकवादी गुट दाइश का संस्थागत अंत कर दिया।
क्षेत्र में शांति व सुरक्षा स्थापित करने और संकटों को रोकने के लिए ईरान ने जो दूसरी नीति अपनाई है वह सामूहिक विश्वास की बहाली है। इसके लिए ईरान ने क्षेत्रीय देशों के मध्य सहकारिता में वृद्धि कर दी है।
शांति व सुरक्षा स्थापित करने के लिए ईरान ने जो तीसरा रास्ता अपनाया है वह संयुक्त राष्ट्रसंघ, गुट निरपेक्ष आंदोलन और इस्लामी सहयोग संगठन ओआईसी जैसे संगठनों के माध्यम से विस्तृत पैमाने पर सहकारिता कर रहा है। यह तीन मुख्य नीतियां हैं जिन्हें अपना कर ईरान शांति व सुरक्षा स्थापित करने के लिए प्रयास कर रहा है। इसी प्रकार ईरान इसके लिए परस्पर सम्मान की नीति भी अपनाये हुए है और वह महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संगठनों के माध्यम से क्षेत्र में टिकाऊ शांति के लिए सतत प्रयास कर रहा है।
12 दिसंबर वर्ष 2016 को "पश्चिम एशिया में शांति" शीर्षक के अंतर्गत तेहरान में एक कांफ्रेन्स हुई थी जिसमें विश्व के बहुत से विचारकों, बुद्धिजीवियों और गणमान्य लोगों ने भाग लिया था। ईरान ने तेहरान में यह अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेन्स कराके क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश दे दिया कि वह वार्ता, विश्वास और सहकारिता के आधार पर क्षेत्र के समस्त देशों के मध्य टिकाऊ शांति स्थापित करना चाहता है।
इसी प्रकार इस्लामी गणतंत्र ईरान ने दिसंबर वर्ष 2016 को मॉस्को में एक त्रिपक्षीय बैठक की जिसमें आस्ताना और जनेवा वार्ता के परिप्रेक्ष्य में सीरियाई पक्षों के मध्य वार्ता का मार्ग प्रशस्त हो इस बात पर सहमति हुई। ईरान, रूस और तुर्की के विदेशमंत्रियों ने मास्को में एक संयुक्त विज्ञप्ति जारी करके घोषणा की कि तीनों देश इस बात पर सहमत हैं कि सीरिया संकट का सैनिक समाधान नहीं है और वे सीरिया संकट के समाधान के लिए सुरक्षा परिषद के प्रस्तान नंबर 2254 के अनुसार राष्ट्रसंघ की भूमिका का समर्थन करते हैं।
मास्को में ईरान, रूस और तुर्की के विदेशमंत्रियों ने जो संयुक्त विज्ञप्ति जारी की वह क़ज़्ज़ाकिस्तान की राजधानी आस्ताना बैठक का कारण बनी। आस्ताना में जो बैठकें हुईं उनमें सीरिया संकट के समाधान के लिए प्रयास किया गया और उन्हें संयुक्त राष्ट्रसंघ के विशेष दूत स्टीफेन दी मिस्तूरा का समर्थन प्राप्त था। इस समय सीरिया संकट के समाधान के लिए होने वाली वार्ताओं में प्रगति से यह स्पष्ट हो गया है कि इन प्रयासों का लक्ष्य क्षेत्र में शांति व सुरक्षा की स्थापना में सहायता करना, आतंकवाद से मुकाबला करना और क्षेत्र में आतंकवाद को फैलने से रोकना है।
ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतीन और तुर्की के राष्ट्रपति रजब तय्यब अर्दोग़ान ने पिछले 22 नवंबर को क्षेत्र में शांति व सुरक्षा स्थापित करने की दिशा में रूस के सूची नगर में एक अन्य कदम उठाया। सूची नगर में होने वाली बैठक में सीरिया की एकता, अखंडता और संप्रभुता पर बल दिया गया और तीनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि वे आतंकवादी गुटों की पूर्ण पराजय तक एक दूसरे से सहकारिता जारी रखेंगे।
इसी प्रकार सूची बैठक में तीनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने सीरिया संकट के समाधान के लिए इस बात पर सहमति की कि सीरियाई पक्षों के मध्य व्यापक, स्वतंत्र और निष्पक्ष वार्ता हो और यह वार्ता सीरियाई जनता के समर्थन से इस देश के संविधान के संकलन और संयुक्त राष्ट्र संघ की निगरानी में सीरिया में स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव के आयोजन की पृष्टिभूमि बने और इस दिशा में किये जाने वाले समस्त प्रयासों में सहायक बने।
राष्ट्रसंघ में ईरान, रूस और तुर्की के प्रतिनिधियों ने इस संघ के महासचिव और सुरक्षा परिषद के प्रमुख के नाम अलग -अलग पत्र भेजकर उनसे मांग की कि सीरिया संकट के समाधान के संबंध में सूची बैठक में जो संयुक्त विज्ञप्ति जारी की गयी उसे सुरक्षा परिषद के दस्तावेज़ के रूप में प्रकाशित किया जाये।
ईरान ने फिलिस्तीन, यमन और अफगानिस्तान संकट सहित म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों की हृदयविदारक स्थिति के समाधान के लिए होने वाले प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाई और निभा रहा है। इसी प्रकार ईरान ने वार्ता द्वारा ताजिकिस्तान और क़रेअ बाग विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
संविधान में जिन बातों का उल्लेख किया गया है उनके दृष्टिगत ईरान अत्याचार से पीड़ित राष्ट्रों का समर्थन करने और क्षेत्र व विश्व में शांति व सुरक्षा स्थापित करने की प्रक्रिया में भाग लेने को महत्व और उस पर बल देता है।
इसी कारण ईरान ने गुट निरपेक्ष आंदोलन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली वार्ताओं में क्षेत्रीय संकटों के समाधान के लिए समुचित सुझाव पेश किया है। सीरिया संकट के समाधान के लिए ईरान की भूमिका और इसी भूमिका के परिणाम में मध्यपूर्व में शांति व सुरक्षा स्थापित करने के अवसर की मज़बूती ईरान के इन्हीं प्रयासों का परिणाम है।
ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने इससे पहले वर्ष 2013 में राष्ट्रसंघ की महासभा के वार्षिक अधिवेशन में हिंसा व अतिवाद रहित विश्व का सुझाव दिया था और उनके इस सुझाव को स्वीकार कर लिया गया और वह राष्ट्रसंघ का प्रस्ताव बन चुका है। विश्व से हिंसा और अतिवाद को समाप्त करने की दिशा में दिसंबर वर्ष 2014 में तेहरान में एक अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेन्स हुई जिसमें विश्व के 50 से अधिक देशों के बुद्धिजीवियों, विचारकों और वरिष्ठ राजनेताओं ने भाग लिया।
बहरहाल ईरान न केवल सीरिया बल्कि यमन, लेबनान और इराक सहित पूरे विश्व में शांति चाहता है।
दक्षिण कोरिया के एक समाचार पत्र “कोरिया हेराल्ड” ने अप्रैल 2016 में एक लेख लिखा और उसमें ईरान की उन नीतियों की प्रशंसा की गयी थी जिसे उसने मध्यपूर्व में शांति स्थापित करने के लिए अपनाया है। इस समाचार पत्र ने लिखा कि मध्यपूर्व में शांति व सुरक्षा स्थापित करने के लिए ईरान ने जो नीति अपनाई है वह रोचक व ध्यान योग्य है।
ईरान के अनुसार क्षेत्र में शांति व सुरक्षा स्थापित करने का एक प्रभावी मार्ग संयुक्त चुनौतियों से मुकाबले के लिए अधिक से अधिक देशों के मध्य सहयोग है। इसी प्रकार क्षेत्र में शांति व सुरक्षा स्थापित करने के लिए क्षेत्र के देशों का अधिक से अधिक अशांति व अस्थिरता के कारकों से मुकाबले के लिए बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेना भी है। अभी हाल ही में तेहरान में “मोहिब्बाने अहले बैत और तकफीरी समस्या” शीर्षक के अंतर्गत एक अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेन्स हुई थी। इस कांफ्रेन्स में भाग लेने आये मेहमानों से भेंट में ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने क्षेत्र में फूट डालने हेतु दुश्मनों के षडयंत्र के खतरे के जारी रहने की ओर संकेत किया और कहा कि जहां भी कुफ्र और साम्राज्य से मुकाबले की ज़रूरत होगी वहां इस्लामी गणतंत्र ईरान सहायता करेगा और यह बात कहने में हमें कोई संकोच नहीं है।