ईरानी बाज़ार- 48
ईरान को फलों की सरज़मीन कहा जा सकता है।
इस देश की उपजाऊ मिट्टी में विभिन्न प्रकार के फल पैदा होते हैं। फ़्रांसीसी पर्यटक जीन शारदिन ईरान की अपनी यात्रा के बाद ईरान में पैदा होने वाले विभिन्न फलों जैसे कि ख़रबूज़ा, खीरा, अंगूर, ख़ुबानी, आलू बुख़ारा, अनार, सेब, गुलाबी, संतरा, नाश्पाती जीर, पिस्ता, बादाम, अख़रोट, हेज़लनट, और ज़ैतून की ओर संकेत करते हुए लिखते हैं कि यूरोप में पाए जाने वाले फल ईरान में भी पाए जाते हैं, बल्कि उससे भी ज़्यादा और सभी फल स्वादिष्ट होते हैं।

ईरान की भौगोलिक विशिष्टताएं जैसे कि जलवायु में विविधता, भौगोलिक स्थिति एवं समुद्र की सतह से ऊंचाई के कारण ईरानी विभिन्न प्रकार के फलों से लाभान्वित होते हैं। अर्ध गर्म इलाक़ों की खजूरों से लेकर संतुलित जलवायु एवं ठंडे इलाक़ों के फलों तक जैसे कि नाश्पाती, आड़ू और नैक्टरीन ईरान में मिलते हैं। ईरान में चार मौसम पाए जाते हैं और साल के सभी मौसमों में गर्म एवं ठंडे इलाक़ों वाले फलों का उत्पादन होता है। संतरे और तरबूज़ कि जो उत्तरी एवं दक्षिणी ईरान में पैदा होते हैं, एक ही समय में फलों की दुकान पर देखे जा सकते हैं।
कृषि उत्पादनों में विविधता की दृष्टि से ईरान का विश्व में चौथा स्थान है। फलों के उत्पादन में विश्व में ईरान का आठवां स्थान है। ईरान अनेक शहर कम से कम किसी एक विशेष फल के उत्पादन के लिए मशहूर हैं। इस तरह से कि शहर और फल का नाम एक दूसरे से जुड़ जाता है। उदाहरण स्वरूप जब कोई अनार बेचने वाला अनार बेचता है तो उसके साथ सावे का नाम भी जोड़ देता है। इसी प्रकार, नतंज़ की नाश्पाती सुनकर ग्राहक को उसकी गुणवत्ता का अंदाज़ा हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका कारण ईरान के विभन्न इलाक़ों में मौसमों का अंतर है, जिसकी वजह से एक फल कुछ शहरों में अच्छी तरह फलता फूलता है। उदाहरण के तौर पर दक्षिण में मीनाब क़स्बे के तरबूज़ की ओर संकेत किया जा सकता है। इस इलाक़े में सूरज की सीधी किरणों के कारण उत्पादन की गुणवत्ता अच्छी होती है, जबकि उत्तरी ईरान में अच्छे तरबूज़ का उत्पादन नहीं किया जा सकता।
ईरान के विभिन्न इलाक़ों में कृषि उत्पादनों को देखते हुए इसे फलों का देश कहा जा सकता है। इसलिए कि हर शहर और प्रांत में विश्व प्रसिद्ध एवं स्वादिष्ट फलों का उत्पादन होता है, इन्हीं फलों में से एक चेरी है।

चेरी का पेड़ काफ़ी जगह में फैला हुआ होता है और यह गर्म, संतुलित एवं ठंडे इलाक़ो में भी उगता है और फल देता है। इस पेड़ के फलने फूलने के लिए मध्यम ठंडे इलाक़े जैसे कि पर्वतीय इलाक़े कि जहां सर्दियों में काफ़ी बारिश होती है और गर्मियों में मौसम सूखा और हल्का ठंडा रहता है। चेरी का पेड़ छोटा और बिना कांटों के होता है, उसकी टहनियां लाल रंग की होती हैं, जिसमें ब्राउन रंग की झलक होती है। उसके पत्ते हरे और चौड़े होते हैं।
चेरी के पेड़ की उम्र 20 से 30 साल की होती है। चेरी में गूदा और गुठली होती है। चेरी के पेड़ के फूल सफ़ेद या सुर्ख़ होते हैं और यह टहनी पर अलग अलग या गुच्छे के रूप में उगते हैं। चेरी का रंग लाल, काला और पीला होता है। चेरी की कली का रंग सफ़ेद एवं गुलाबी होता है और यह बहार का मौसम आने के साथ ही निकलती है। ईरान में चेरी की फ़सल मई के महीने में तैयार हो जाती है और अगस्त के महीने तक बाज़ार में इस फल को ख़रीदा जा सकता है। हालांकि अच्छी तरह पकी हुई चेरी ख़रीदने का बेहतरीन समय जून और जुलाई का महीना है।
चेरी में विटामिन ए और सी, कार्बोहाइड्रेट, फ़ोलिक एसिड, प्रोटीन, कैल्शियम, फ़ास्फ़ोरस, आयरन, पोटैशियम, फ्लोरिन, मैग्नीशियम और अन्य खनिज पदार्थ पाए जाते हैं। चेरी में सेच्युरेटड फ़ैट कम ही होता है। इसमें कैलेस्ट्रोल और सोडियम नहीं होता है, बल्कि फ़ाइबर अधिक होता है। इस फल में कैलरी भी कम होती है। प्रत्येक 100 ग्राम चेरी में लगभग 72 किलो कैलोरी पाई जाती है।

चेरी एंटीऑक्सीडेंट का समृद्ध स्रोत है, जो कैंसर और दिल की बीमारियों में ग्रस्त होने की संभावना को कम करता है। यह फल दिल, आंतों और अमाशय के लिए बहुत लाभदायक होता है। चेरी जोड़ों की बीमारियों के उपचार के लिए भी काफ़ी प्रभावी होती है। स्टार्च की मात्रा कम होने के कारण डायबटीज़ एवं गठिया के रोगियों के लिए सीमित मात्रा में चेरी खाने की सिफ़ारिश की जाती है। इस फल में मौजूद शुगर की मात्रा डायबटीज़ के रोगियों के लिए हानिकारक नहीं है। चेरी बदन की अधिक चरबी को जलाने में भी प्रभावी है और खाने को पचाने में भी लाभदायक होती है। चेरी खाने से शांति प्राप्त होती है, इस प्रकार से कि शरीर में ख़ुशी के हारमोन्स का उत्पादन होता है, जिससे इंसान में अच्छी भावना उत्पन्न होती है। इस फल के पेड़ के महत्व को समझने के लिए यह जानना काफ़ी होगा कि इस फल का गूदा, गुठली और पत्ते और उसकी टहनियों से भी लाभ उठाया जाता है। चेरी के डंठल और पत्तों को उबालकर पीने से मूत्राशय की पत्थरी निकल जाती है और मूत्राशय की नली साफ़ हो जाती है, इसी प्रकार पारम्परिक चिकित्सा में जिगर के उपचार के लिए भी इसकी सिफ़ारिश की जाती है।
ईरान के विभिन्न इलाक़ों में चेरी के बाग़ पाए जाते हैं। ईरान के पश्चिमी आज़रबाइजान प्रांत में उशनविए शहर को चेरी के अधिक बाग़ों के कारण ईरान में चेरी की राजधानी कहा जाता है। चेरी के उत्पादन में ईरान का विश्व में तीसरा स्थान है। ईरान ने इस फल की विभिन्न प्रजातियों का उत्पादन किया जाता है। ईरान में पाए जाने वाले चेरी में मशहद के काले चेरी, लवासानात के गुलाबी चेरी, हाज यूसुफ़ी और मिश्कीन शहर के चेरी की ओर संकेत किया जा सकता है। मशहद के काले चेरी का उत्पादन ख़ुरासाने रिज़वी प्रांत और लवासानात के गुलाबी चेरी का उत्पादन तेहरान में होता है। ईरान के तकदाना चेरी इस फल की एक दूसरी क़िस्म है जो अरदबील प्रांत के दश्त मग़ान समेत ईरान के विभिन्न इलाक़ों में पैदा होती है।

तकदाने सियाह या काले चेरी की बिक्री सबसे अधिक होती है, उसके बाद चेरी की लाल वेरायटी का नम्बर है, जिसका अधिक उत्पदान ख़ुरासान प्रांतों और देश के उत्तर पश्चिमी भागों में होता है। गुलाबी और पीले रंग के चेरी के भी देश एवं विदेश में अपने विशेष ग्राहक होते हैं। ईरान की निर्यात होने वाले चेरी में नीशापुर और उरूमिए के तकदाने की ओर संकेत किया जा सकता है। अच्छी गुणवत्ता के कारण रूस और फ़ार्स की खाड़ी के अरब देशों में इसकी अधिक मांग है। ईरान से निर्यात होने वाले इस फल की फ़सल सामान्य रूप से जुलाई के महीने में तैयार हो जाती है और उचित पैकिंग के बाद इसे निर्यात कर दिया जाता है।

चेरी एक ऐसा फल है जो ताज़ा इस्तेमाल तो किया ही जाता है, इसके अलावा इसे केक और मिठाई बनाने में भी प्रयोग किया जाता है। इसे अधिक समय के लिए ताज़ा सुरक्षित नहीं रखा जा सकता, इसलिए उससे मुरब्बा, जेली, कम्पूत और जैम बनाया जाता है या सुखाकर और जूस निकालकर इस्तेमाल किया जाता है। चेरी समेत कुछ फलों की आयु क्योंकि कम होती है, इसलिए नॉलेज बेस्ड कंपनियों ने एक ऐसा उत्पादन तैयार किया है, जिससे खाद्य पदार्थों एवं कृषि उत्पदानें की आयु में वृद्धि होती है। यह उत्पाद सापक के नाम से मार्केट में उपलब्ध है, इसका उत्पादन नैनो टेक्नोलॉजी द्वारा किया गया है। इस उत्पादन का प्रयोग स्मार्ट पॉलिमर और पैकेट के अंदर ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, इथिलीन और इसी प्रकार नमी को निंयत्रण करके एवं बैक्टरिया एवं फ़ंगस से सुरक्षित रखकर किया जाता है। इस पदार्थ के प्रयोग से खाद्य पदार्थों एवं कृषि उत्पादनों को एक निर्धारित समय तक सुरक्षित रखकर मार्केट में पहुंचाया जाता है। सापक उत्पादनों की सुरक्षा में 60 प्रतिशत तक वृद्धि कर देता है। इस उत्पादों की विभिन्न वैरायटिया हैं और विशेष प्रकार के खाद्य पदार्श एवं कृषि उत्पादों के लिए एक विशेष क़िस्म का प्रयोग किया जाता है। उल्लेखनीय है कि अभी तक केवल दो देशों ने इस प्रोधोगिकी को हासलि किया है, लेकिन इस्तेमाल की गई प्रोधोगिकी की दृष्टि से ईरान का उत्पाद अधिक आधुनिक है और विदेशी उत्पाद से उसकी क़ीमत भी एक चौथाई है।