ईरानी बाज़ार- 49
अंजीर की गणना उन सूखे मेवों में होती है जो दुनिया के बहुत से देशों में पैदा होते है।
अंजीर को मैडिट्रेनियन फल भी कहा जाता है क्योंकि आरंभ में यह फल यहीं पर पैदा हुआ था। इतिहासकार बताते हैं कि अंजीर, मिस्र में 4000 वर्ष ईसापूर्व भी पाई जाती थी। धर्मग्रंथों में भी अंजीर का उल्लेख मिलता है। बाइबिल में अंजीर का उल्लेख किया गया है। इंजील में अंजीर को स्वर्ग का फल बताया गया है। यहूदी भी इसे पवित्र मानते हैं। पवित्र क़ुरआन के एक सूरे का नाम ठीन है जिसका अर्थ होता है अंजीर। सूरे का आरंभ वत्तीन वज़्ज़ैतून से होता है। क़ुरआन के व्याख्याकारों का कहना है कि क़ुरआन में अंजीर का उल्लेख, उसके लाभों और विशेषताओं की ओर संकेत करता है।
अंजीर उन फलों में से एक है जिसके फाएदे को हज़ारों साल पहले पहचान लिया गया था। यह बहुत ही प्राचीन फल है। सूखे मेवों में इसे एक महत्वपूर्ण मेवे के रूप में माना जाता है। सूखी अंजीर क्षारीय होती है जो शरीर के पीएच के संतुलन को बनाए रखने में सहायता करती है। अंजीर की तासीर गर्म होती है। कुछ लोग इसे भिगोकर भी खाते हैं। कहते हैं कि अंजीर का तेल भी निकाला जाता है जो कई प्रकार के रोगों के उपचार में लाभकारी होता है। अंजीर के भीतर घुलनशील और अघुलनशील दोनों प्रकार के फायबर पाए जाते हैं। यह फाएबर अंजीर में प्रचुर मात्रा में होते हैं। घुलनशील फायबर, रक्त में ग्लूकोज़ की मात्रा को कम करने और साथ ही मोटापा कम करने में सहायक होते हैं जबकि अघुलनशील फायबर, पेट साफ करके क़ब्ज़ मिटाने में सहायता करते हैं।
अंजीर एक स्वादिष्ट फल होने के साथ ही बहुत ही लाभदायक है। अंजीर में कैल्शियम और पोटेश्यिम पाया जाता है। इसमें फाइबर, उच्च मात्रा में होता है। इसके अतिरिक्त अंजीर में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, खनिज लवण, अम्ल, सोडियम, गंधक, गोंद, लौह और फास्फोरस पाया जाता है। अंजीर में विटमन ए, बी और सी भी पाए जाते हैं। अंजीर, कैसर विरोधी होने के साथ शारीरिक दुर्बलता को दूर करती है, हड्डियों को मज़बूत बनाती है और स्नायु दुर्बलता को कम करती है। यह क़ब्ज़, बवासीर, पेचिश, अपच, दमा, श्वास रोगों, फेफड़े के रोग, त्वचा रोग, खून की कमी, दांतों और मसूढ़ों रोगों तथा कई अन्य प्रकार के रोगों में लाभकारी है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि अंजीर एक स्वादिष्ट फल होने के साथ ही साथ स्वास्थ्यवर्धक एवं उपयोगी फल है।
ईरान सहित विश्व के कई देशों में अंजीर की खेती की जाती है। कहते हैं कि ईरान में जो अंजीर पाई जाती है वह पोषण तत्व की दृष्टि से बहुत ही उच्च क्वालिटी की होती है। ईरान में पैदा की जाने वाली अंजीर विश्व के बहुत से देशों को निर्यात की जाती है जैसे चीन, जापान, हांगकांग, वियतनाम, मलेशिया, सिंगापूर, दक्षिणी कोरिया, ताइवान, भारत, इराक़, बेल्जियम, हालैण्ड, ब्रिटेन, आज़रबाइजान गणराज्य और फार्स की खाड़ी के तटवर्ती देश। ईरान के विभिन्न प्रांतों में 50 हज़ार हेक्टेयर से अधिक भूभाग पर अंजीर की खेती होती है। ईरान में 80 हज़ार टन से अधिक की अंजीर की पैदावार होती है। ईरान में जो अंजीर पैदा होती है वह केवल एक रंग की न होकर कई रंगों की होती है जैसे पीली, हरी, काली और प्याज़ के रंग की।
ईरान का लोरितस्तान प्रांत एसा राज्य है जहां पर सबसे अधिक अंजीर की पैदावार होती है। लोरिस्तान प्रांत की जलवायु अंजीर के लिए अति उपयुक्त है। यही कारण है कि यहां पर बहुत बड़े पैमाने पर अंजीर पैदा की जाती है। यहां पर अंजीर की पैदावार इतनी अधिक है कि अधिकांश स्थानीय लोगों की अर्थव्यवस्था इसी पर निर्भर है। ईरान से जितनी अंजीर निर्यात की जाती है उसका 33 प्रतिशत भाग लोरिस्तान प्रांत में पैदा होता है। लोरिस्तान प्रांत का एक नगर है "पुल दुख़्तर"। इस नगर की काली अंजीर, पूरे ईरान में पसंद की जाती है। देश के भीतर काली अंजीर पैदा करने वाला सबसे महत्वपूर्ण नगर पुल दुख़्तर है।
देश के भीतर जितनी अंजीर पैदा की जाती है उसमें से 90 प्रतिशत अंजीर दक्षिणी ईरान और फार्स प्रांत में पैदा होती है। ैदा होती है। फार्स प्रांत में जो अंजीर पैदा होती है उसमें प्राकृतिक खाद का प्रयोगइस प्रांत के 20 से अधिक नगरों में अंजीर की पैदावार होती है लेकिन इनमे इस्तेहबान, दाराब, नेईरीज़ और जहरुम सर्वोपरि हैं। किया जाता है।े वाला सबसे महत्वपूर्ण नगर पुल फार्स प्रांत में जो अंजीर पैदा होती है उसमें प्राकृतिक खाद का प्रयोग किया जाता है।
इस्तेहबान, ईरान का एसा नगर है जहां पर पूरे देश में सबसे अधिक अंजीर की पैदावार होती है। यहां पर प्रतिवर्ष 7000 टन से अधिक अंजीर को सुखाकर उन्हें विभिन्न रूपों में बदला जाता है। यहां की अंजीर ईरान में ही नहीं बल्कि संसार के बहुत से क्षेत्रों में पसंद की जाती है। फाओ की रिपोर्ट के अनुसार ईरान का इस्तेहबान नगर सूखी अंजीर निर्यात करने वाला संसार का सबसे बड़ा नगर है।
अंजीर ऐसा फल है जिसको अन्य फलों की भांति एक विशेष मौसम में पैदा किया जाता है किंतु प्राचीनकाल से यह पूरे साल उपलब्ध रहता है। इसके लिए अंजीर को सुखाकर रखा जाता है। चिकित्सकों का कहना है कि ताज़े फल की तुलना में सूखा अंजीर अधिक स्वादिष्ट और लाभदायक होता है। सूखे अंजीर में 123 मिलीग्राम पोटेशियम और 2 ग्राम सोडियम होता है। सूखे अंजीर में एन्टीआक्सीडेंट्स, भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। सूखे अंजीर में तीन प्रतिशत कैल्शियम होता है जो शरीर की कैलश्यिम की आवश्यकता को पूरा करने में सहायक सिद्ध होता है।
ईरान से बहुत से सूखे मेवे निर्यात किये जाते हैं जैसे किश्मिश, खजूर, ख़ूबानी, अंजीर, पिस्ते, बादाम और कई अन्य मेवे। प्राचीन काल से फलों को सुरक्षित रखने की शैली यह रही है कि उनको सुखा लिया जाता है। पहले यह काम पारंपरिक ढंग से किया जाता था। वर्तमान समय में सूखे मेवों के महत्व के दृष्टिगत इस क्षेत्र में बहुत से देश आगे आने लगे हैं। अब मेवों को ख़ुश्क करने का उद्योग बहुत सक्रिय हो चुका है। खेतों या बड़े-बड़े फ़ार्मों के निकट मशीनें लगाकर किसानों को यह अवसर दिया जाता हे कि वे अपने उत्पादों को नष्ट होने से बचाने के साथ ही साथ उन्हें उस प्रक्रिया के हवाले कर सकते हैं जहां पर फलों को सुखाकर उन्हें अधिक मूल्य पर बेच सकते हैं।
ईरान में एसी बहुत सी कंपनियां सक्रिय हैं जो फलों को सुखाकर उनकी पैकिंग भी करती हैं। फलों को सुखाने में रासायनिक प्रक्रिया का प्रयोग नहीं किया जाता है। इस तकनीक के माध्यम से अबतक बहुत से फलों को सुखाकर निर्यात किया जा चुका है जैसे सेब, केले, कीवी, पुर्तग़ाल, नाशपाती, आड़ू, ख़ूबानी और अंजीर आदि। ईरान से प्रतिवर्ष 2 अरब डालर के सूखे मेवे, विश्व के बहुत से देशों को निर्यात किये जाते हैं जैसे जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, इटली, स्पेन, स्वीडन, नार्वे, क़तर, संयुक्त अरब इमारात, कुवैत, आस्ट्रेलिया, जापान, चीन, दक्षिणी कोरिया और रूस आदि।