रविवार- 29 मार्च
1901, ऑस्ट्रेलिया में पहला संघीय चुनाव हुआ...
1857, भारत में ब्रिटिश शासन के ख़िलाफ़ बंगाल नेटिव इन्फैंट्री विद्रोह और लंबे समय से चल रहे के सिपाही स्वतंत्रता संग्राम में सिपाही मंगल पांडे स्वतंत्रता सेनानी के रूप में जाने गए।
1867, ब्रिटिश संसद में कनाडा के गठन के लिए उत्तरी अमरीका अधिनियम पारित किया गया।
1901, ऑस्ट्रेलिया में पहला संघीय चुनाव हुआ।
1932, अमरीका में जैक बेनी ने पहली बार रेडियो पर अपने कार्यक्रम की शुरुआत की।
1967, फ्रांस ने पहली बार अपनी परमाणु पनडुब्बी की शुरआत की।
1981, पहला लंदन मैराथन नार्वेजियन इजेज सिमंसेंन द्धारा जीता गया।
2001, संयुक्त राज्य अमेरिका का ग्लोबल वार्मिंग पर क्योटो संधि को मानने से इंकार।
2004, आयरलैंड कार्यस्थलों पर ध्रूम्रपान प्रतिंबंधित करने वाला पहला देश बना।
2008, दुनिया के 370 शहरों ने पहली बार ऊर्जा बचत करने के लिए अर्थ आवर मनाने की शुरूआत की।
29 मार्च सन 1573 ईसवी को फ़्रांस के नरेश चार्ल्ज़ नवें ने प्रोटस्टेंट ईसाइयों के पक्ष में स्वतंत्रता आदेश नामक ऐतिहासिक आदेश जारी किया। इस आदेश के अनुसार फ़्रांस के प्रोटेस्टेंट ईसाइयों को जो इस देश के कैथोलिक ईसाइयों के साथ चौथे युद्ध में जीत गये थे अपने धार्मिक समारोह और पर्व मनाने की स्वतंत्रता मिल गयी। कैथौलिक और प्रोटस्टेंट ईसाइयों के बीच चौथा युद्ध 16 जुलाई सन 1572 ईसवी से आरंभ हुआ था।
29 मार्च सन 1676 ईसवी को उसमानी शासन के साथ हॉलैंड का युद्ध समाप्त हुआ। इस युद्ध में उसमानी शासन को सफलता मिली और यूक्रेन का कुछ भाग जो उस समय हॉलैंड से जुड़ा हुआ था उसमानी शासन के कब्ज़े में चला गया।

यह युद्ध 1671 में हॉलैंड के क़ज़्ज़ाक़ नागरिकों के विद्रोह और उनके प्रति उसमानी शासन के समर्थन से आरंभ हुआ। उसमानी सेना को एक बार लमबार्ग युद्ध में हॉलैंड ने पराजित किया किंतु उसमानी सेना ने अंतत: यह युद्ध जीत लिया।
29 मार्च सन 1902 ईसवी को मारसिल आमह नामक फ़्रांसीसी लेखक का जन्म हुआ। उन्होंने आरंभ में तो इंजीनियरिंग की शिक्षा ली किंतु बीमारी के कारण उसे छोड़ दिया और फिर पत्रकारिता में लग गये और धीरे धीरे प्रसिद्ध लेखक बन गये। उनकी पुस्तकों में चार सत्य और सुंदर चित्र आदि का नाम लिया जा सकता है। 1967 में उनका देहान्त हुआ।

29 मार्च सन 1849 ईसवी को पंजाब पर अंग्रेज़ी शासन आरंभ हुआ।
अंग्रेज़ों ने पंजाब के तत्कालीन शासक दलीप सिंह को अपदस्थ करके इस क्षेत्र पर अपना शासन थोप दिया। फ़िरोज़पुर से अंग्रेज़ शासक लार्ड डलहौज़ी ने आज ही के दिन पंजाब पर सिख शासन के अंत की घोषणा की। दलीप सिंह को 50 हज़ार रुपय वार्षिक देने का वचन देकर अंग्रेज़ शासकों ने ब्रिटेन भेज दिया जहॉ वे ईसाइ हो गये।
29 मार्च सन 1849 से पंजाब पर आरंभ होने वाला ब्रिटिश शासन 98 वर्ष तक चला और अंतत: भारत की स्वतंत्रता के बाद इस शासन का अंत हुआ।
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10 फ़रवरदीन सन 1358 हिजरी शम्सी को ईरान में इस्लामी क्रान्ति की सफलता और पहलवी शासन के पतन के पश्चात देश की प्रशासनिक व्यवस्था के निर्धारण के लिए जनमत संग्रह कराया गया। इस जनमत संग्रह का ईरानी जनता ने हार्दिक स्वागत किया और इसमें भरपूर भाग लिया। जनमत संग्रह दो दिनों तक चला।
जनमत संग्रह में भाग लेने वाले लोगों में 98 दशमलव 2 प्रतिश लोगों ने ईरान में इस्लामी गणतंत्र व्यवस्था की स्थापना के पक्ष में वोट डाला। यह बात पश्चिमी देशों विशेषकर अमरीका को अच्छे नहीं लगी और उसने बारमबार यह दर्शाने का प्रयास किया कि ईरानी जनता इस्लामी शासन व्यवस्था से ऊब चुकी है किंतु ईरानी जनता ने विभिन्न अवसरों पर इस्लामी शासन व्यवस्था का समर्थन करके निराधार अमरीकी दावों की पोल खोल चुकी है।
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4 शाबान सन 26 हिजरी क़मरी को हज़रत अली (अ) के पुत्र हज़रत अबुलफ़ज़लिल अब्बास का शुभ जन्म हुआ। आप की सम्मानीय माता का नाम उमुल्बनीन था। हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स) की शहादत के बाद हज़रत अली (अ) ने उनसे विवाह कर लिया था।
हज़रत अब्बास (अ) ने हज़रत अली (अ) जैसे महान पिता और हज़रत इमाम हसन (अ) और इमाम हुसैन (अ) जैसे भाइयों की छत्रछाया में रह कर परिपूर्णता प्राप्त की। इन महान हस्तियों की संगत ने हज़रत अब्बास ( अ) के आध्यात्मिक व्यक्तित्व और उन के सदगुणों पर गहरा प्रभाव डाला। हज़रत अब्बास ( अ) हज़रत इमाम हसन और हज़रत इमाम हुसैन (अ) से हार्दिक प्रेम करते थे। जब हज़रत इमाम हसन (अ) ने इमामत का दायित्व संभला तो वे सदैव इनके साथ रहते थे। हज़रत इमाम हुसैन (अ) से आप को इतना प्रेम था कि इस्लाम के मार्ग में और हज़रत इमाम हुसैन के आज्ञापालन में अपनी जान भी न्योछावर कर दी। हज़रत अब्बास (अ) पैग़म्बरे इस्लाम के परिजनों की आध्यात्मिक परिपूर्णताओं से लाभ उठा कर ज्ञान और प्रतिष्ठा के शिखर पर पहुंचे । इस प्रकार से कि बहुत से लोग अपनी ज्ञान संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए आप के पास आते थे। वे दरिद्रों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सदैव प्रयासरत रहते थे।
4 शाबान सन 440 हिजरी क़मरी को ईरान के प्रसिद्ध सूफ़ी और कवि अबूसईद अबुलख़ैर का निधन हुआ। वे सन 357 हिजरी क़मरी में पैदा हुए। उन को क़ुरआन की व्याख्या फ़िक़ह अर्थात धर्म शास्त्र एवं पैग़म्बरे इस्लाम के कथनों को एकत्रित करने में दक्षता प्राप्त थी। इसी आधार पर चौथी और पॉंचवीं शताब्दी हिजरी क़मरी के सब से महत्वपूर्ण सूफ़ियों में उन की गिनाती होती थी।
उन को कविताएं लिखने व कहने में बहुत रूचि थी ।