सोमवार- 30 मार्च
30 मार्च सन 1856 ईसवी को क्रिमिया नामक लड़ाई पेरिस समझौते के साथ समाप्त हुई।
इस लड़ाई में एक ओर रुस और दूसरी ओर फ़्रांस, ब्रिटेन, उसमानी शासन और ऑस्ट्रिया थे। यह लड़ाई पूर्वी यूरोप विशेषकर बालकान में रुस के प्रभाव को सीमित करने के प्रयासों के परिणाम स्वरुप आरंभ हुई। इससे दो वर्ष पूर्व उसमानी शासन फ़्रांस और ब्रिटेन द्वारा कुसतुनतुनिया समझौते पर हस्ताक्षर से इस युद्ध की भूमिका प्रशस्त हुई। पेरिस समझौते के आधार पर कालासागर को स्वतंत्र जलमार्ग घोषित किया गया था तथा रामानिया देश अस्तित्व में आया।
- 30 मार्च सन् 1814 में नेपोलियन बोनापोर्ट को हराने के बाद ब्रिटेन की सेना ने पेरिस की ओर चल पड़ी।
- 30 मार्च सन् 1822 में फ्लोरिडा अमेरिकी गणराज्य में शामिल हुआ।
- 30 मार्च सन् 1842 में बेहोशी की दवा के रूप में ईथर का पहली बार इस्तेमाल हुआ।
- 30 मार्च सन् 1856 में क्रिमिया नामक लड़ाई पेरिस समझौते के साथ समाप्त हुई।
- 30 मार्च सन् 1858 में हैमेन एल.लिपमेन ने इरेजर के साथ जुड़ी पेंसिल का पहला पेटेंट रजिस्टर किया।
- 30 मार्च सन् 1867 में अमेरिका ने रूस से अलास्का को ख़रीदा।
- 30 मार्च सन् 1919 में जर्मनी के डुसेलडॉफ शहर पर बेल्जियम की सेना ने अपना क़ब्ज़ा किया।
- 30 मार्च सन् 1919 में महात्मा गांधी ने रॉलेक्ट एक्ट के विरोध की घोषणा की।
- 30 मार्च सन् 1945 में सोवियत संघ ने आस्ट्रिया पर आक्रमण किया।
- 30 मार्च सन् 1949 में भारत के राजस्थान राज्य की स्थापना आज ही के दिन हुई और जयपुर को उसकी राजधानी बनाया गया।
- 30 मार्च सन् 1950 में मर्रे हिल ने फोटो ट्रांजिस्टर का अविष्कार किया।
- 30 मार्च सन् 1963 में फ्रांस ने अलजीरिया के इकर क्षेत्र में भूमिगत परमाणु परीक्षण किया।
- 30 मार्च सन् 1976 में अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन में भूमि दिवस के नाम से बहुत बड़ा प्रदर्शन हुआ।
- 30 मार्च सन् 1982 में नासा के अंतरिक्ष यान कोलंबिया ने एसटीएस-3 मिशन पूरा कर पृथ्वी पर वापसी की।
- 30 मार्च सन् 2003 में पाकिस्तान के कहुटा परमाणु संयंत्र पर 2 वर्षों के लिए प्रतिबंध लगा।
30 मार्च सन 1867 ईसवी को रुस ने आर्थिक आवश्यकताओं के कारण अलास्का के समृद्ध क्षेत्रों को 72 लाख डॉलर के मूल्य पर अमरीका को बेच दिया था।

30 मार्च सन 1976 ईसवी को अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन में भूमि दिवस के नाम से बहुत बड़ा प्रदर्शन हुआ। उल्लेखनीय है कि 18 अक्तूबर सन 1975 ईसवी में अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन के उत्तरी क्षेत्र के जलील नगर में भूमि की सुरक्षा के नाम से सम्मेलन हुआ।
इस सम्मेलन के पहले घोषणापत्र में ज़ायोनी शासन द्वारा फ़िलिस्तीनियों के क्षेत्रों को हड़प लेने पर खेद व्यक्त किया गया तथा इसकी कड़ाई से आलोचना की गयी। इस सम्मेलन में बल दिया गया कि ज़ायोनी शासन की नीतियां फ़िलिस्तीनियों के अधिकारों के हनन पर आधारित हैं और इस शासन ने मानवाधिकार लोकतंत्र और समानता के अंतर्राष्ट्रीय कानूनों को रौंदा है।
इस सम्मेलन में एक समिति बनाई गयी थी जिसका काम इस सम्मेलन के घोषणापत्र को क्रियान्वित करना था। इसी समिति ने फ़िलिस्तीनी नेताओ के साथ विचार विमर्श के बाद आज के दिन को भूमि दिवस के रुप में मनाने की घोषणा की। आज के दिन फ़िलिस्तीनी विशेष रुप से इस्राईल की वर्चस्वादी नीतियों तथा कार्यवाहियों की आलोचना करते हैं। फ़िलिस्तीन के अतिरिक्त कुछ दूसरे इस्लामी देशों में भी भूमि दिवस मनाया जाता है।

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पांच शाबान वर्ष 38 हिजरी क़मरी को हज़रत इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम का मदीना नगर में जन्म हुआ। वे अपने पिता हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की ही भांति शिष्टाचार व आध्यात्म के उच्च स्थान पर पहुंचे थे। वे बहुत बड़े उपासक थे और अत्याधिक कृपालु, संयमी व विनम्र तथा मिलनसार थे। अत्याधिक सजदे के कारण उन्हें सज्जाद अर्थात अत्याधिक सजदा करने वाले की उपमा दी गयी थी। मुहर्रम की दस तारीख़ को जब उनके पिता इमाम हुसैन और उनके साथियों को शहीद कर दिया गया। वे रोग के कारण बेहोश थे और इसी लिए वे इस युद्ध में भाग न ले सके। अपने पिता के बाद उन्होंने समाज के नेतृत्व का भार संभाला और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का संदेश अपनी फूफी के साथ मिल कर आम लोगों तक पहुंचाया। उनकी दुआओं के संग्रह को सहीफए सज्जादिया कहा जाता है।