मंगलवार- 31 मार्च
31 मार्च सन 1596 ईसवी को फ़्रांस के विश्व विख्यात दार्शनिक गणितज्ञ और भौतिक शास्त्री रेने डेकार्ट का जन्म हुआ।
31 मार्च सन 1596 ईसवी को फ़्रांस के विश्व विख्यात दार्शनिक गणितज्ञ व भौतिक शास्त्री रेने डेकार्ट का जन्म हुआ। दर्शनशास्त्र और गणित की शिक्षा पूरी करने के बाद वे शिक्षा देने लगे और फिर कुछ समय विश्व की सैर में बिताया और कुछ समय वह हांलैंड में अध्ययन में व्यस्त रहे। वे गणित को विभिन्न ज्ञानों में सम्पूर्ण ज्ञान समझते थे। वे दूसरे सभी विषयों में गणित का प्रयोग आवश्यक समझते थे। डेकार्ट ने दर्शन शास्त्र पर अपनी गहरी छाप छोड़ी है। कुछ लेखक तो उन्हें आधुनिक दर्शनशास्त्र का जनक कहते हैं। डेकार्ट ने दर्शनशास्त्र के साथ ही भौतिक शास्त्र का भी व्यापक और गहरा अध्ययन किया।
सन 1650 ईसवी में इस प्रसिद्ध दार्शनिक का निधन हुआ।
- 31 मार्च सन् 1774 में भारत में डाक सेवा का पहला कार्यालय खुला।
- 31 मार्च सन् 1867 में मुंबई में प्रार्थना समाज की स्थापना हुई।
- 31 मार्च सन् 1870 में अमेरिका में पहली बार किसी अश्वेत नागरिक ने वोट दिया।
- 31 मार्च सन् फ्रांस 1889 में में एफिल टावर को आधिकारिक रुप से खोला गया।
- 31 मार्च सन् 1917 में अमेरिका ने डेनिश वेस्ट इंडीज खरीदा और उसका नाम वर्जिन आइलैंड रखा।
- 31 मार्च सन् रॉयल ऑस्ट्रेलिया एयरफोर्स की 1921 में स्थापना हुई।
- 31 मार्च सन् 1959 में बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा को तिब्बत से निर्वासन के बाद भारत में शरण दी गई।
- 31 मार्च सन् 1964 में मुंबई में इलेक्ट्रिक ट्राम अंतिम बार चली।
- 31 मार्च सन् 1966 में सोवियत रूस ने पहला चंद्रयान लूना10 लांच किया।
- 31 मार्च सन् 1979 में माल्टा ने ब्रिटेन से स्वतंत्रता की घोषणा की।
- 31 मार्च सन् 1983 में कोलंबिया के शहर पोपायन में आए विनाशकारी भूंकप में 500 लोगों की मौत हुई।
- 31 मार्च सन् 1997 में वासलेव क्लार्क को नया नेटो सैनिक कमांडर नियुक्त किया गया।
- 31 मार्च सन् 2005 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने उत्तर कोरिया को अनाज की आपूर्ति रोकी।
- 31 मार्च सन् 2007 में विश्व तैराकी चैम्पियनशिप में माइकल फ़ेल्प्स ने छह स्वर्ण हासिल किये।
- 31 मार्च सन् 2008 में पाकिस्तानी वायुसेना की बस के पास बम विस्फोट में 12 लोग मारे गए।
- 31 मार्च सन् 2011 में जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक भारत की आबादी बढ़ कर 121 करोड़ (1 अरब 21 करोड़) हो गई है। दस साल पहले हुई गणना के मुकाबले यह 17।64 फ़ीसदी ज़्यादा है।
31 मार्च सन 1809 ईसवी को रुस के ड्रामा लेखक निकोलाय वासीलियोविच गोगोल का यूक्रेन में जन्म हुआ। वे कामेडी और उत्साहवर्धक कहानियां लिखने में दक्ष थे। उन्होंने अपने लेखनो में रुसी जनता के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला है। गोगोल ने सन 1832 में तारास बोलबा नामक विख्यात उपन्यास लिखा। गोगोल ने रोम की यात्रा की जिसके बाद उन्होंने धार्मिक पत्र के नाम से एक पुस्तक लिखी। इस पुस्तक को रुसी साहित्य में विशेष स्थान प्राप्त है।
सन 1852 ईसवी में गोगोल का निधन हुआ।

31 मार्च सन 1948 ईसवी को जब सशस्त्र ज़ायोनियों के हाथों निहत्थे फिलिस्तीनियों का जनसंहार जोरों पर था मिस्र की राजधानी काहेरा से फ़िलिस्तीनियों को हैफ़ा नगर ले जा रही रेलगाड़ी को धमाके से उड़ा दिया गया। ज़ायोनियों की इस आतंकवादी कार्यावाही में 40 फिलिस्तीनी मारे गये और अन्य 60 घायल हुए। इस धमाके से चार दिन पहले भी सशस्त्र ज़ायोनियों ने फ़िलिस्तीन में एक रेलगाड़ी में विस्फोट किया था। उस घटना में भी 24 लोग मारे गये थे और 61 घायल हुए थे। ज़ायोनियों ने फ़िलिस्तीन में इस्राईल नामक अवैध राज्य बनाने के लक्ष्य के अंतर्गत आम फ़िलिस्तीनियों को मारना आरंभ कर दिया था तथा व सार्वजनिक स्थानों पर बसों और रेलगाड़ियों को निशाना बनाने लगे थे। उनका प्रयास था कि फ़िलिस्तीनियों को अपना देश छोड़कर भाग जाने पर विवश कर दें।

31 मार्च सन 1979 को अरब संघ के सदस्य देशों ने इस संघ में मिस्र की सदस्यता को स्थगित कर दिया और अधिकांश देशों ने मिस्र से संबंध तोड़ लिए। मिस्र के विरुद्ध अरब देशों की यह कड़ी प्रतिक्रिया कैम्पडेविड के लज्जाजनक समझौते पर क़ाहेरा द्वारा हस्ताक्षर किये जाने का परिणाम थी। मिस्र के तत्कालीन राष्ट्रपति अनवर सादात ने जनवरी 1978 ईसवी में इस समझौते पर हस्ताक्षर किये थे। अरब देशों के साथ ही कई दूसरे इस्लामी देशों ने भी मिस्र के इस क़दम से आक्रोषित होकर उसके साथ अपने संबंध समाप्त कर लिए थे। किंतु अमरीका के भारी दबाव के बाद सन 1980 में अरब संघ में मिस्र की वापसी की भूमिका प्रशस्त हुई।

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12 फ़रवरदीन सन 1358 हिजरी शम्सी को ईरान की जनता ने इस्लामी क्रान्ति की सफलता और दो दिन तक चलने वाले जनमत संग्रह में भाग लेने के बाद एक ऐतिहासिक चयन का प्रदर्शन किया। इस जनमत संग्रह में 98 दशमलव 2 प्रतिशत लोगों ने ईरान में इस्लामी गणराज्य की स्थापना के पक्ष में वोट डाला। इसके बाद से हर साल 12 फ़रवरदीन को ईरान में इस्लामी गणंत्र दिवस के रुप में मनाया जाता है। हालॉकि इस्लामी गणतंत्र की लड़ाई के दौरान भी लोग अपने देश को इस्लामी गणराज्य बनाने की मांग करते रहे थे किंतु इस्लामी क्रान्ति की सफलता के बाद इमाम ख़ुमैनी ने जनमत संग्रह आयोजित कराके पूरे देश की जनता को अपनी इच्छा व्यक्त करने का अवसर दिया। इस जनमत संग्रह के परिणामों ने इस्लामी शासन व्यवस्था के गिने चुने विरोधियों को एकांत में डाल देने के साथ ही विश्व वासियों के समक्ष यह स्पष्ट कर दिया कि ईरानी जनता अपने देश में ऐसा प्राजांतत्र चाहती है जिसका आधार इस्लामी शिक्षाएं और क़ानून हो। ईरान में इस्लामी गणतंत्र की घोषणा के अवसर पर हज़रत इमाम ख़ुमैनी ने अपने संदेश में जनता को बधाई दी।
12 फ़रवरदीन सन 1369 हिजरी शम्सी को ईरानी शोधकर्ता उस्ताद हुसैन एमाद ज़ादे का देहान्त हुआ। उन्हें किताबें लिखने, शोधकार्य करने और इस्लामी संस्कृति व शिक्षाओं के प्रसार में बहुत रूचि थी। उन्होंने विभिन्न इस्लामी और क़ुरआनी विषयों पर 120 किताबें लिखीं हैं जिनमें पवित्र क़ुआन का अनुवाद, व्याख्या, ईश्वरीय दूतों का इतिहास और विस्तृत इस्लामी इतिहास की किताबें उल्लेखनीय हैं।
12 फ़रवरदीन सन 1232 हिजरी शम्सी को विख्यात धर्मगुरु आयतुल्लाह सय्यद मोहम्मद इब्राहीम ख़ुन्सारी ईरान के इस्फ़हान नगर में जन्मे। उन्होंने आरंभिक शिक्षा अपने चाचा सय्यद मोहम्मद बाक़िर ख़ुन्सारी से प्राप्त की और फिर अपने समय के प्रतिष्ठित धर्मगुरुओं से शिक्षा प्राप्त कर धार्मिक ज्ञान में इज्तेहाद के स्तर तक पहुंचे। इसके बाद आयतुल्लाह ख़ुन्सारी धर्मशास्त्र और धर्मशास्त्र के सिद्धांत की शिक्षा देने लगे। उन्होंने बहुत से प्रतिष्ठित शिष्यों को प्रशिक्षित किया। 12 फ़रवरदीन सन 1292 हिजरी शम्सी को आयतुल्लाह ख़ुन्सारी का देहान्त हुआ। उन्हें इस्फ़हान में उनके चाचा की क़ब्र के निकट दफ़्न कर दिया गया।
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6 शाबान सन 1325 हिजरी क़मरी को इस्लामी जगत के विख्यात धर्मगुरु अल्लमा ख़ुई शहीद हुए। उन्होंने शैख़ मुर्तज़ा अन्सारी जैसे महापुरुषों से शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने अपने देश ईरान में संविधान पर आधारित सरकार को सत्ता में लाने के लिए कड़े परीश्रम किए। उन्होंने मोहम्मद अली शाह की अत्याचारी सरकार के विरुद्ध संघर्ष किया और अंतत: इसी क़ाजारी शासक के हाथों शहीद कर दिए गए।