Apr ०३, २०१६ ११:३५ Asia/Kolkata

3 अप्रैल वर्ष 2002 ईसवी को ज़ायोनी सैनिकों ने पश्चिमी तट में स्थित फ़िलिस्तीनी नगर जेनीन पर आक्रमण किया।

यह आक्रमण फ़िलिस्तीनी बस्तियों पर ज़ायोनी सैनिकों के आक्रमण की एक कड़ी था, जिसको इस्राईल ने फ़िलिस्तीनियों के इन्तेफ़ाज़ा आंदोलन को कुचलने के लिए इससे कई सप्ताह पूर्व आरंभ किया था। 15 हज़ार की आबादी वाले नगर पर आक्रमण में 10 हज़ार सैनिकों की सहायता लगभग 200 टैंक और दसियों हेलीकाप्टरों ने की। इस्राईल ने ज़मीनी और हवाई दोनों मार्गों से जेनीन कैंप पर आक्रमण किया ज़ायोनी अत्याचारियों ने नगर की बिजली और पानी की लाइनें काट दी और हर प्रकार की सहायता पहुचाने पर रोक लगा दी, इसके बावजूद नगर के लोगों और फ़िलिस्तीनी संघर्षकर्ताओं ने नौ दिनों तक इस्राईली सैनिकों का जमकर मुक़ाबला किया। ज़ायोनी सैनिकों ने जीनीन में लोगों के जनसंहार के अतिरिक्त घरों को ध्वस्त किया, व्यापारिक और आर्थिक केन्द्रों को बर्बाद कर दिया यहां तक कि अस्पतालों को खंडहरों में परिवर्तित कर दिया। ज़ायोनी सैनिकों के आक्रमण पर जेनीन के 70 प्रतिशत भाग खंडहरों में परिवर्तित हो गए। सैकड़ों फ़िलिस्तीनी शहीद और घायल हुए और पांच हज़ार लोग बेघर हो गए।

  • 3 अप्रैल सन् 1922 में जोसेफ स्टालिन को सोवियत कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति का महासचिव नियुक्त किया गया।
  • 3 अप्रैल सन् 1933 में विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट के ऊपर से पहली बार विमान ने उड़ान भरी थी।
  • 3 अप्रैल सन् 1942 में जापान ने द्वितीय विश्वयुद्ध में अमरीका पर अंतिम दौर की सैन्य कार्यवाई शुरू की।
  • 3 अप्रैल सन् 1949 में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा ने उत्तरी अटलांटिक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
  • 3 अप्रैल सन् 1984 में राकेश शर्मा रुस के अंतरिक्ष यान सोयुज टी 11 से अंतरिक्ष पर जाने वाले प्रथम भारतीय अंतरिक्ष यात्री बने।
  • 3 अप्रैल सन् 1999 में भारत ने पहला वैश्विक दूरसंचार उपग्रह इनसैट 1 ई का प्रक्षेपण किया।
  • 3 अप्रैल सन् 2001 में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन  को भारत यात्रा पर पहुँचे।
  • 3 अप्रैल सन् 2002 में पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की जनमत संग्रह की योजना को मंत्रिमंडल की मंज़ूरी मिली।
  • 3 अप्रैल सन् 2006 में नेपाल में माओवादियों ने संघर्ष विराम की घोषणा की।
  • 3 अप्रैल सन् 2007 में सन नई दिल्ली में 14वां सार्क सम्मेलन शुरू।
  • 3 अप्रैल सन् 2008 में मेधा पाटकर को राष्ट्रीय क्रांतिवीर अवार्ड 2008 से नवाज़ा गया।
  • 3 अप्रैल सन् 2010 में एप्पल का पहला आईपेड मार्केट में आया।
  • 3 अप्रैल सन् 2013 में अर्जेंटीना में को आई भीषण बाढ़ से 50 से अधिक लोगों की मौत हुयी।

3 अप्रैल 1890 को जर्मनी के चांसलर और 19वीं शताब्दी के एक सशक्त नेता बिस्मार्क को, जर्मनी के शासक वेल्हेल्म द्वितीय ने पदमुक्त कर दिया। बिस्मार्क ने वर्ष 1871 में जर्मनी के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वेल्हेल्म द्वितीय के जर्मनी नरेश बनने के पश्चात वे कुछ समय तक देश के चांसलर के पद पर बने रहे किंतु फिर दोनों में मतभेद उत्पन्न हो गए और बिस्मार्क अपना पद छोड़ने पर विवश हो गए। इसके बाद उन्होंने अपने घर में रह कर लेखन का काम आरंभ किया। उनकी पुस्तक विचार व ज्ञान को उनका राजनैतिक वसीयतनामा समझा जाता है। यह पुस्तक तीन खण्डों में लिखी गई है। अपनी पुस्तक में उन्होंने जर्मन नरेश पर अनेक आपत्तियां की हैं। वर्ष 1898 में बिस्मार्क का निधन हुआ।

तीन अप्रैल 1941 को ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध इराक़ के राष्ट्रवादियों ने अपने संघर्ष के दौरान जिसका नेतृत्व ब्रिटेन विरोधी धड़े के नेता रशीद आली गीलानी कर रहे थे, बग़दाद पर नियंत्रण कर लिया। गीलानी को जर्मनी का समर्थन प्राप्त था किंतु समय पर जर्मनी की सहायता न पहुंच पाने के कारण , ब्रिटिश सैनिकों ने उनके समर्थकों का दमन कर दिया जिसके बाद इराक़ की सरकार घटक देशों के साथ जुड़ गई और द्वितीय विश्व युद्ध में उसने विपक्षी गठजोड़ के विरोध की घोषणा कर दी।

 

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9 शाबान सन 481 हिजरी क़मरी को मिस्र के विश्व विख्यात धर्मगुरु इब्ने बर्राज त्राबलसी का निधन हुआ। उनका जन्म मिस्र में हुआ था किंतु चुंकि उन्होंने लेबनान के त्रिपोली नगर में जिसे अरबी और फ़ारसी में त्राबलस कहा जाता है एक लम्बे समय तक न्यायाधीश का पद संभाला इस लिए वह त्राबलसी के नाम से विख्यात हुए। वह सैयद मुर्तज़ा और शैख़ तूसी जैसे विख्यात धर्मगुरुओं की सेवा में उपस्थित होकर ज्ञान अर्जित करने में सफल हुए। उन्होंने फ़िक़ह और कलाम जैसे इस्लामी विष्यों पर महत्वपूर्ण पुसतकें लिखी हैं। उनकी सबसे विख्यात पुस्तक का नाम अलजवामेउल फ़क़ीह है जिसमें फ़िक़ह के 820 मामलों के बारे में प्रश्न व उत्तर मौजूद हैं। इसे बहुत ही महत्वपूर्ण पुस्तकों में गिना जाता है।

 

 

9 शाबान 577 हिजरी क़मरी को बग़दाद के प्रख्यात फ़क़ीह अर्थात धर्मशास्त्री और भाषा विशेषज्ञ अबुलबरकात अब्दुर्रहमान बिन मुहम्मद की मृत्यु हुई। वे इब्ने अम्बारी के नाम से प्रसिद्ध थे। उन्होंने अपनी शिक्षा बग़दाद के मदरसए निज़ामिया में पूरी की और अपने ज्ञान में वृद्धि करने तथा ज्ञान के उच्च दर्जों तक पहुंचने के लिए उन्होंने इसी मदरसे में शिक्षा देना आरंभ किया। अबुलबरकात अब्दुर्रहमान बिन मुहम्मद ने अनेक लेख व किताबें लिखीं जिनमें असरारुल अरबिया विशेष रूप से उल्लेखनीय है।