Apr ०८, २०१८ १६:१४ Asia/Kolkata

जैसाकि हम जानते हैं कि मनुष्य को अपने जीवन के संचालन के लिए खाने की आवश्यकता होती है। 

खाने में प्रोटी का बहुत अधिक महत्व है।  डाक्टरों का कहना है कि प्रोटीन, शरीर की मरम्मत और निर्माण दोनों काम करता है।  इससे पता चलता है कि प्रोटीन मानव शरीर के लिए बहुत ज़रूरी चीज़ है।  प्रोटीन से मांसपेशियां सुदृढ़ होती हैं।  ऊतकों की मरम्मत होती है।  शरीर की कार्यप्रणाली दुरूस्त रहती है।  शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।  प्रोटीन से बाल, नाख़ून, त्वचा, मांसपेशियां और रक्तकोशिकाएं बनती हैं।  प्रोटीन प्राप्त करने के बहुत से स्रोत हैं जिनमें से दूध और मांस को सबसे बड़ा स्रोत बताया गया है।  मांस या गोश्त में पाई जाने वाली प्रोटीन हमें जानवरों के गोश्त से मिलती है।  इस समय मांस हमें उन पशुपालन केन्द्रों से प्राप्त होता है जो विभिन्न प्रकार के पशुओं का पालन करते हैं।

 

पशुपालन को कृषि की ही एक शाखा माना गया है।  पशुपालन के माध्यम से मनुष्य की खाने की आवश्यकता के एक भाग की पूर्ति की जाती है। इंसान को अपने जीवन के बाक़ी रखने के लिए प्रोटीन की भी आवश्यकता होती है।  मनुष्य की आवश्यकता का अधिकांश प्रोटीन मांस से प्राप्त होता है।  मांस की आपूर्ति के लिए पशुपालन बहुत ही आवश्यक है।  वर्तमान समय में पशुपालन एक महत्वपूर्ण उद्योग के रूप में सामने आ चुका है।  लोगों के दैनिक भोजन की आपूर्ति में पशुपालन उद्योग को अनदेखा नहीं किया जा सकता।  एक हिसाब से मांस को दो भागों में बांटा गया है वाइट मीट और रेड मीट।  पशुपालन उद्योग के माध्यम से रेड मीट की आपूर्ति होती है।  रेड मीट के कई लाभ हैं।  इसको विटमिन्स का ख़ज़ाना भी कहा जाता है।  रेड मीट में प्रोटी और लौह प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।  इसमें ज़िंक भी होता है।  रेड मीट में आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है।  रेड मीट, विटमिन बी-12 से भरपूर होता है।  रेड मीट के प्रयोग से शक्ति बढ़ती है, स्टेमिना बढ़ता है और मांसपेशियां मज़बूत होती हैं।  इससे हड्डियां भी मज़बूत होती हैं।  रेड मीट के कई स्वास्थ्य वर्धक लाभ हैं।

 

शरीर को पूर्ण रूप से स्वस्थ्य रखने के लिए रेड मीट की बहुत आवश्यकता होती है।  विशेषज्ञों का कहना है कि प्रोटीन के प्रयोग न करने से लंबाई नहीं बढ़ पाती।  ग्रोथ रुक जाती है।  हड्डियां कमज़ोर हो जाती हैं।  वे बच्चे जो रेड मीट का प्रयोग नहीं करते, सुस्त रहते हैं।  उनके भीतर एकाग्रता की कमी होती है।  ऐसे बच्चे सदैव थकान का आभास करते हैं।  इस प्रकार के बच्चे हमेशा बीमार दिखाई देते हैं।  यहां पर इस बात का उल्लेख ज़रूरी है कि रेड मीट का प्रयोग एक सीमा तक लाभ दायक है और सीमा से अधिक हानिकारक होता है।

रेड मीट उपलब्ध कराने वाले पशुओं में एक भेड़ भी है।  बताया जाता है कि इस समय संसार में भेड़ों की 200 प्रकार की जातियां मौजूद हैं जिनकी संख्या एक अरब से अधिक है।  विश्व में इस समय जो पशुपालन उद्योग सक्रिय है वह लोगों को प्रोटीन पदार्थ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भेड़ों को भी पालता है।  कहते हैं कि 200 प्रकार की जातियों में से केवल 20 प्रकार की भेड़ों की जातियों का ही पालन किया जाता है।  भेड़ की एक विशेषता यह है कि यह हर प्रकार की जलवायु में कम से कम चारे पर जीवित रह सकती है।  अन्य पशुओं की तुलना में भेड़ पालने पर खर्चा कम आता है।  यह एक एसा जानवर है जिससे कई प्रकार के लाभ हैं।  जैसे यह रेड मीट उपलब्ध कराता है।  इसका दूध मनुष्य प्रयोग करता है।  इसके बालों से ऊन बनता है।  इसकी खाल से कई प्रकार की चीज़ें बनाई जाती हैं।  भेड़ के दूध से आर्थिक दृष्टि से लाभ प्राप्त होता है।  हालांकि इससे दूध की पैदावार कम है किंतु इसके दूध की क्वालिटी बहुत अच्छी होती है।  क़ालीन उद्योग में भेड़ के ऊन का प्रयोग व्यापक स्तर पर किया जाता है।  इस प्रकार से कहा जा सकता है कि आर्थिक दृष्टि से भेड़ पालने के कई लाभ हैं।

 

ईरान में तेल से प्राप्त होने वाली आय के अतिरिक्त विदेशी मुद्रा प्राप्त करने के कई अन्य माध्यम भी हैं जिन्हें व्यापारिक दृष्टि से विशेष महत्व प्राप्त है।  इन्ही में से एक, भेड़ का निर्यात भी है।  इस हिसाब से ईरान भेड़ का निर्यात करने वाले देशों में आठवें नंबर पर है।  ईरान में विभिन्न जाति की 70 मिलयन भेड़ें और बकरियां मौजूद हैं।  अलग-अलग जाति के कारण उनके नाम भी अलग-अलग हैं।  ईरान में पाई जाने वाली भेड़ों में अफशारी जाति की भेड़ सबसे अच्छी मानी जाती है।  इस जाति की भेड़ ईरान के लगभग हर क्षेत्र में पाई जाती है जबकि अन्य जातियों की भेड़ें हर स्थान पर नहीं मिलतीं।  यही कारण है कि ईरान में अफशारी जाति की भेड़ की मांग बहुत अधिक है।

भेड़ों के अतिरिक्त पशुपालन में ईरान में बकरियां भी पाली जाती हैं।  भेड़ों की तुलना में बकरियों को अलग स्थान प्राप्त है।  दोनो के दूध और मांस में थोड़ा अंतर पाय जाता है।  कुछ लोग भेड़ के दूध और मांस को पसंद करते हैं तो कुछ अन्य बकरी के।  ईरान में दो करोड़ से अधिक बकरियां पाई जाती हैं।  यह देश के अलग-अलग क्षेत्रों में मौजूद हैं।  भेड़ और बकरी का गोश्त देखने में तो एक जैसा होता है किंतु दोनों में विशेषताओं की दृष्टि से अंतर पाया जाता है।  जहां भेड़ के गोश्त में चर्बी अधिक होती है वहीं पर बकरी के मांस में चर्बी बहुत कम पाई जाती है।  बहुत से लोग भेड़ पर बकरी को वरीयता देते हैं।  बहुत से लोग बकरी का दूध पसंद करते हैं।  डाक्टरों का कहना है कि वे लोग जिन्हें गाय का दूध सूट नहीं करता उनको बकरी का दूध पीना चाहिए।  जानकारों का यह भी कहना है कि बकरी का दूध छोटे बच्चों के लिए बहुत लाभकारी है।  ईरान में छह लाख टन दूध की पैदावार है जिसमें से लगभग 50 प्रतिशत बकरी से प्राप्त होता है।

 

बकरियों की बहुत सी जातियां हैं जिनमें से एक कर्क है।  इस जाति की बकरियां अधिकांश शुष्क जलवायु वाले क्षेत्रों में पाई जाती हैं।  इन बकरियों को कर्क के अतिरिक्त कश्मीरी भी कहा जाता है।  इस जाति की बकरियां, विश्व के हर क्षेत्र में नहीं पाई जातीं बल्कि यह अधिकांश ईरान, रूस, चीन, मंगोलिया और अफ़ग़ानिस्तान में होती हैं।  ईरान में भी केवल कुछ प्रांतों में ही यह बकरियां मौजूद हैं जैसे केरमान, ख़ुरासान और यज़्द।

ईरान में पशुपालन उद्योग बड़े पैमाने पर अपना काम कर रहा है।  इस समय ईरान के भीतर 26000 से अधिक पशुपालन केन्द्र हैं।  इनको दो भागों में बांटा गया है।  एक दुग्ध उप्ताद के लिए और दूसरा मांस के लिए।  ईरान में आधुनिक ढंग के पशुपालन उद्योग का इतिहास 50 वर्ष से अधिक पुराना है।  इससे पहले देश के अधिकांक्ष क्षेत्रों में पारंपरिक ढंग से ही पशुपालन किया जाता था।  ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद से यह उद्योग बहुत ही तेज़ी से फलने-फूलने लगा।  इस दौरान ईरान ने दुग्ध उत्पाद में बहुत तेज़ी से विकास किया।  पहले चरण में ईरान ने दुग्ध उत्पादों के आयात को रोककर दुग्ध उत्पादों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की और बाद में दूध और दूध से बनी चीज़ों का निर्यात आरंभ किया।  वर्तमान समय में ईरान से 30 देशों के लिए लगभग दस लाख टन दुग्ध निर्मित वस्तुएं निर्यात की जाती हैं।