Apr ०९, २०१८ ११:३२ Asia/Kolkata

मनुष्य के शरीर को जिन पदार्थों की आवश्यकता होती है उनमें से एक प्रोटीन है।

अंतर्राष्ट्रीय खाद्य संस्था फ़ाओ का कहना है कि बेहतर है कि मनुष्य के शरीर की आवश्यकता की 50 प्रतिशत प्रोटीन, जानवरों से प्राप्त होने वाली प्रोटीन से पूरी हो। दूध और इससे बनने वाली वस्तुएं, जानवर से प्राप्त होने वाली महत्वपूर्ण प्रोटीन के स्रोत हैं जिसको जानवरों से प्राप्त होने वाली अन्य प्रोटीनों की तुलना में मूल्य कम होने के दृष्टिगत, दुनियाभर में अधिकतर परिवार सामन्य रूप से प्रयोग करते हैं। दुनिया के अधिक आय वाले देशों में रहने वाले लोगों का 85 प्रतिशत कैल्शियम दूध से पूरा होता है। दुनिया में जनसंख्या में वृद्धि, जीवन स्तर को बेहतर बनाने, खाद्य पदार्थों में सुधार तथा दूध के प्रयोग में बेपनाह वृद्धि के दृष्टिगत पहले से अधिक इस शक्तिशाली खाद्य पदार्थ की आवश्यकता का आभास किया जाने लगा। यही कारण है कि फ़ाओ की ओर से जारी आंकड़ों में बताया गया है कि दुनिया के विभिन्न देशों में हलिया तीन दशकों के दौरान दूध के उत्पादन में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है और यह संख्या वर्ष 1983 में 50 करोड़ टन थी जबकि वर्ष 2013 में यह संख्या 76 करोड़ 90 लाख टन तक पहुंच गयी है।

 

फ़ाओ की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2011 में आस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना, यूरोपीय देशों, क़िरक़िज़िस्तान और पाकिस्तान में प्रतिवर्ष 150 किलोग्राम से अधिक, पश्चिमी एशिया के अधिकतर देशों, उत्तरी और दक्षिणी अफ़्रीक़ा में, लैटिन अमरीका और कैरेबियन सागर के क्षेत्र में 30 से 150 किलोग्राम तथा दक्षिणी एशिया के देशों, सेन्ट्रल अफ़्रीक़ा और पूर्वी एशिया के अधिकतर पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्रों में दूध का प्रयोग 30 किलोग्राम से कम था। अमरीका जैसे देशों में अधिकतर दूध, उद्योग या बड़े बड़े पशुपालन के रूप में उत्पादित होता है किन्तु भारत जैसे देशों में आम तौर पर दूध व्यक्तिगत स्तर पर पशुपालन के माध्यम से उत्पादित किया जाता है और भारत के गांवों में रहने वाले लोग अपने यहां पले हुए जानवरों का दूध निकालते हैं जबकि 50 प्रतिशत दूध का वही लोग प्रयोग कर लेते हैं। फ़्रांस जैसे यूरोपीय देश अपने यहां उत्पादित 30 प्रतिशत दूध, अच्छी नस्ल की बकरियों से उत्पादित करते हैं।

उल्लेखनीय है कि हल्के और भारी जानवरों के दूध में फ़ैटी एसिड की अनुचित मात्रा के कारण, भेड़ और बकरी के दूध, खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करने के अतिरिक्त उपचार की विशेषता से भी संपन्न हैं। गाय का दूध अधिक मात्रा में दुग्धशर्करा या लैक्टोस से संपन्न होने के कारण आमाशय की समस्या पैदा करता है किन्तु भेड़ के दूध से इस प्रकार की समस्या पैदा नहीं होती। गाय का दूध सेवन करने से अमाशय में पैदा होने वाली एलर्जी और बीमारियां, भेड़ और बकरी का दूध पीने से दूर हो जाती हैं।

 

खाद्य पदार्थों में दूध और उसके उत्पादों के महत्व के कारण, विभिन्न देशों की सरकार की ओर से दूध और उससे बनने वाले उत्पादों की पैदावार में वृद्धि के लिए समर्थन की नीतियां अपनाई गयीं। दुग्ध उत्पादों में वृद्धि के लिए सरकारों ने दुग्ध उत्पादकों को विशेष सुविधाएं दे रखी हैं और इस उद्योग में सक्रिय लोगों को सब्सिडी इत्यादि देकर दूध और उससे बनने वाली वस्तुओं के उत्पादन में वृद्धि का प्रयास किया। इसी समर्थन के कारण दुग्ध उत्पादों के मूल्य कम होते हैं जिससे अधिक से अधिक लोगों के दुग्ध उत्पादों के प्रयोग की भूमिका प्रशस्त होती है। इसी प्रकार ईरान सहित दुनिया के बहुत से देशों के स्कूलों में दोपहर के समय बच्चों को दूध या मिड मील इत्यादि दिया जाता है।   

 

आंकड़ों के अनुसार ईरान में दूध उत्पादन उसके उपभोग से अधिक है। वर्ष 2016 में 96 लाख 50 हज़ार टन दूध ईरान में पैदा हुआ जबकि वर्ष 2017 में लगभग 1 करोड़ टन दूध का उत्पादन हुआ और विभिन्न प्रकार के दुग्ध उत्पादों में उसे बदला गया। ईरान के दुग्ध उत्पादन के व्यापारिक आंकड़ों पर नज़र डालने से पता चलता है कि हालिया पांच वर्ष के दौरान लगभग पांच अरब डॉलर के दुग्ध उत्पादन निर्यात किए गये। वर्ष 2016 में ईरान ने लगभग 10 लाख टन कच्चा दूध निर्यात किया।

इसी प्रकार ईरान के 8 प्रतिशत से अधिक दुग्ध उत्पादों को विभिन्न प्रकार के पनीर, मक्खन, छाज, दही और विभिन्न प्रकार के स्वाद के साथ दूध जैसी तीस प्रकार की विभिन्न वस्तुओं को उच्च गुणवत्ता के सांचे में ढाल कर निर्यात किया गया। इस बीच दुग्ध उत्पादों में सबसे अधिक दही और छाज को निर्यात किया गया। ईरान के ट्रांज़िट आंकड़ों को देखने के बाद पता चलता है कि ईरान के अधिकतर दुग्ध उत्पाद इराक़, अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान, सीरिया, संयुक्त अरब इमारात, जार्जिया, तुर्कमनिस्तान, आज़रबाइजान गणराज्य और ताजेकिस्तान जैसे देश को निर्यात हुए। एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2017 में ईरान ने एक अरब डॉलर के दुग्ध उत्पाद निर्यात किए हैं।

 

ईरान के दुग्ध उत्पादों में एक विशेष प्रकार का सूखा छाछ अर्थात कश्क है। कश्क छाज की भांति दही से तैयार होता है। यह ईरान का स्थानीय उत्पाद है। फ़ारसी भाषा में कश्क के बारे में विभिन्न प्रकार के मुहावरों के पाए जाने से पता चलता है कि ईरान समाज में प्राचीन काल से ही यह उत्पाद बहुत अधिक प्रयोग होता रहा है। कश्क, दूध से बनने वाला एक उत्पाद है जिसे पारंपरिक ढंग बनाया जाता है। सबसे पहले दूध को इतना अधिक उबाला जाता है कि वह गाढ़ा हो जाए या छाछ को मक्खन बनने से पहले सुखाकर बनाया जाता है या बिना चर्बी वाले दही से कश्क तैयार किया जाता है।

कश्क बनाने का आरंभिक पदार्थ, भेड़, बकरी, गाय या मिश्रित दूध होना चाहिए। खाद्य उद्योग में कश्क को औद्योगिक तरीक़े से द्रव कश्क के रूप में सीधे दूध से तैयार किया जाता है। पारंपरिक द्रव कश्क को सूखे कश्क को गाढ़ा बनाकर तैयार किया जाता है। कश्क छोटा होने के बावजूद एक बहुत ही क़ीमती और मूल्यवान खाद्य पदार्थ है जिसमें दूध की सारी विशेषताएं पायी जाती हैं और इसमें कैल्शियम, फ़ैट, नमक, प्रोटीन और विटामिन बी3 इत्यादि पोषक तत्व पाए जाते हैं। बताया जाता है कि हर 100 ग्राम कश्क में लगभग 105 से 120 किलो कैलोरी पायी जाती है जो मनुष्य के शरीर की प्रतिदिन की ऊर्जा और प्रोटीन की आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है। कहा जाता है कि कश्क जिस दूध का बना होगा उसमें उसी दूध और उसमें पायी जाने वाली विशेषताओं से संपन्न होगा।

दुग्ध उत्पादों में एक पनीर है। इस दुग्ध उत्पाद को बनाने की प्रक्रिया में बहुत अधिक पनीर का पानी पैदा होता है जिसे आम तौर पर दुग्ध उत्पादन बड़ी बड़ी कंपनियां, सुखा लेती हैं और पाउडर बना लेती हैं। पनीर के पानी का पाउडर बनना, एक प्रकार का आर्थिक नुक़सान है और ऐसे ही उसे फेंकने के कारण वातावरण प्रदूषित होता है। नैनो उद्योग शोधकर्ता नामक ईरानी कंपनी ने प्रतिदिन पनीर के पानी से 100 लीटर कंज़र्वेटिव प्रोटीन बनाया था। कंज़र्वेटिव प्रोटीन, पनीर के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

हालिया वर्षों में ईरान का दुग्ध उत्पादन, अच्छे गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाकर बेहतरीन पैकिंग के साथ दुनिया के विभिन्न देशों में निर्यात करने में सफल रहा है। ईरान में सैकड़ों दुग्ध कंपनियां सक्रिय हैं जिनमें से कुछ प्रसिद्ध कंपनियों के नाम हैं पाक, पेगाह, दामदारान, मीहन, हेराज़, काले, रामिक, मीमास और पाकबान। ईरान की पेगाह कंपनी की वेबसाइट का पता हैः http:// pegah-en.pegah.ir/ पेगाह ईरान में एक प्रसिद्ध खाद्य उत्पादन कंपनी है जो आधुनिक उद्योग के साथ देश तथा मध्यपूर्व की सबसे बड़ी दुग्ध उत्पाद कंपनी है। इस कंपनी के अधीन 29 छोटी कंपनियां काम करती हैं। यह कंपनी दूध, दही, मक्खन, मलाई, पनीर, छाछ, आइस्क्रीम, जूस, सूखा दूध, सूखा छाछ, गैस वाले वनस्पति पेय इत्यादि बनाती है। यह कंपनी ईरान और विदेशों में सक्रिय है।

ईरान के दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में एक अन्य कंपनी काले है। यह भी ईरान की बड़ी कंपनियों में से एक है जिसकी स्थापना वर्ष 1369 हिजरी शम्सी में की गयी। इस कंपनी में 16 छोटी छोटी कंपनियां शामिल हैं जो ईरान के दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में सक्रिय बड़ी कंपनियों में से एक है। काले दुग्ध कंपनी प्रतिदिन 2500 टन कच्चे दूध को 160 प्रकार के दुग्ध उत्पादों में बदलती है और देश की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ अपने उत्पादों के एक बड़े भाग को यूरोपीय देशों सहित विदेशों में निर्यात करती है। काले कंपनी प्रतिवर्ष दस करोड़ डॉलर के उत्पाद निर्यात करती है। काले कंपनी के ब्रांड को वर्ष 1392 हिजरी शम्सी के ईरान के नेश्नल औद्योगिक चैंपियन फ़ेस्टेवल में ईरान के सौ बेहतरीन ब्रांडेड उत्पादों में चुना गया। काले कंपनी ईरान की उदाहरणीय निर्यातकर्ता कंपनी है जिसे यूरो मानिर्टिंग संस्था की ओर से वर्ष 2015 में 48वीं दुनिया की खाद्य पदार्थ निर्माता कंपनी के रूप में चुना गया।