Apr ०९, २०१८ १३:४१ Asia/Kolkata

विश्व में कुल आठ करोड़ दस लाख मधुमक्खी के छत्तों से 15 लाख टन शहद का उत्पादन किया जाता है।

ईरान मधुमक्खी के पालन और शहद उत्पादन में विश्व के 10 बड़े देशों में से एक है।

 

मधुमक्खी ईश्वर की एक सबसे अधिक उत्पादन करने वाली एवं आश्चर्यजनक रचना है। इसे दुनिया में जैव विविधता का एक मुख्य कारण माना जाता है। कुछ लोगों का मानना है कि मधुमक्खी के बिना जीवन ही ख़तरे में पड़ जाएगा और ज़मीन पर जीवन बहुत कठिन हो जाएगा। इसलिए कि मधुमक्खियां परागन (pollination) में अहम भूमिका निभाती हैं। वनस्पतियों में परागन की प्रक्रिया विभिन्न प्रकार से होती है। वनस्पतियों में परागन कीड़े मकोड़ों द्वारा विशेष रूप से मधुमक्खियों से होता है। उदाहरण स्वरूप सेब और चेरी जैसे पेड़ों का 90 प्रतिशत परागन मधुमक्खियों द्वारा होता है, जबकि बादाम के पेड़ का परागन केवल मधुमक्खी द्वारा ही होता है।

मधुमक्खियों द्वारा परागन का आर्थिक मूल्य शहद और मोम के उत्पादन से कहीं अधिक है। यही कारण है कि कुछ देशों में शहद उत्पादन करने वालों को भुगतान करके लोग अपने बाग़ों और खेतों में मधुमक्खियों का छत्ता लगवाते हैं। प्रोफ़ैसर फ़िलिप मेककेब मधुमक्खियों का पालन करने वालों के अंतरराष्ट्रीय संघ एपिमोंडिया के प्रमुख का मानना है कि उत्पादन के चक्र से मधुमक्खियों को हटा लेने का अर्थ पर्यावरण को ख़तरा और जैव विविधता एवं इंसानों के वजूद के लिए मधुमक्खियों का होना ज़रूरी है।

विश्व में 20 हज़ार प्रकार की मक्खियां पायी जाती हैं। मधुमक्खियां सामूहिक रूप से जीवन व्यतीत करती हैं। मधुमक्खियां फूलों और वनस्पतियों से रस लेकर अपने छत्ते में शहद का उत्पादन करती हैं, शहद एक संपूर्ण भोजन है और बीमारियों के लिए उपचार का माध्यम है। शहद का रंग फूलों पर निर्भर करता है। शहद कभी ट्रांसप्लांट होता है और कभी उसका रंग गहरा होता है। शहद के स्रोत के अनुसार, शहद का रंग चमकदार सफ़ेद, ब्राउन या काले रंग से मिलता जुलता हो सकता है। कहा जाता है कि गहरे रंग के शहद में हल्के रंग के शहद की तुलना में अधिक मिनरल्स होते हैं।

 

शहद में अधिक एवं संपूर्ण पौष्टिक आहार पाया जाता है। शहद की इस गुणवत्ता का कारण, मधुमक्खियों द्वारा फूलों का चयन है। मधुमक्खियां लाभ वाले फूलों और नुक़सान देने वाले फूलों के बीच अंतर कर सकती हैं। वे हर फूल पर नहीं बैठती हैं, बल्कि बेहतरीन कलियों का चयन करती हैं। पूर्ण पौष्टिक आहार होने के साथ साथ शहद न्यूट्रीशन की कमी को पूरा कर देता है और बीमारियों के उपचार में भी सहयोगी है। शहद में फ़ास्फ़ोरस, कैल्शियम, आयरन, पोटेशियम, आयोडीन, मैग्नीशियम, सीसा, तांबा, सल्फ़र, निकिल और सोडियम जैसे मिनरल्स होते हैं। एक किलोग्राम शहद में 3 हज़ार से अधिक कैलोरी होती है। इसके अलावा शहद में एंज़ाइम, प्रोटीन, एमिनो एसिड, कार्बनिक एसिड जैसे कि फॉर्मिक एसिड और ख़ुशबू होती है। फॉर्मिक एसिड प्राकृतिक रूप से एक एंटी बैक्टीरिया होता है, जिसके कारण शहद ख़राब नहीं होता है। शहद को घावों विशेष रूप से मुंह और गले के घावों के लिए एंटी बैक्टीरिया के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

2013 के आंकड़ों के मुताबिक़, मधुमक्खी के छत्तों की संख्या के आधार पर मधुमक्खी पालन में ईरान का विश्व में चौथा स्थान है, जबकि शहद के उत्पादन में ईरान का स्थान आठवां है। ईरान में विभिन्न प्रकार की जलवायु के कारण 13 करोड़ हेक्टेयर चरागाहें, जंगल और बाग़ हैं, जो मधुमक्खी पालन के लिए उचित हैं। चार ऋतुओं के कारण ईरान में पूरे साल मधुमक्खी पालन की संभावना मौजूद रहती है।

 

ऐतिहासिक दृष्टि से, ईरान में प्राचीन काल से ही मधुमक्खी पालन का रिवाज रहा है। ईसा पूर्व सदियों पहले मनोरंजन और साइड के काम के रूप में मधुमक्खी पालन किया जाता था। बीसवीं सदी में ईरान में मधुमक्खी पालन में काफ़ी परिवर्तन हुआ। धीरे धीरे मधुमक्खी के छत्तों ने नया रूप ले लिया और पेड़ की डाली, जार और बास्केट जैसी पारम्परिक चीज़ों का स्थान मधुमक्खियों के छत्तों के लिए बनाए गए विशेष प्रकार के बॉक्स ने लिया। लगभग 40 वर्ष पूर्व रानी मधुमक्खी में सुधार हुआ और उसका पालन सरकारी व निजी स्तर पर किया जाने लगा। आज 1 लाख से भी अधिक रानी मधुमक्खियों का उत्पादन किया जाता है और उन्हें मधुमक्खियों का पालन करने वालों को वितरित कर दिया जाता है।

ईरान के विभिन्न प्रांतों जैसे कि पूर्वी एवं पश्चिमी आज़रबाइजान, अर्दबील, कुर्दिस्तान, लोरिस्तान, गुलिस्तान, माज़न्देरान और इस्फ़हान में मधुमक्खियों का पालन किया जाता है। ईरान के उत्तर पश्चिमी इलाक़ों जैसे कि पूर्वी एवं पश्चिमी आज़रबाइजान और अर्दबील का शहद बहुत ही उमदा होता है। विश्व में शहद के प्रसिद्ध ब्रांडों में अर्दबील का सबलान ब्रांड भी है। अर्दबील प्रांत ईरान में शहद के उत्पादन का केन्द्र है। इस प्रांत की सबलान की चोटियों और मिश्कीन शहर जैसे इलाक़ों में संतुलित जलवायु एवं विविध वनस्पतियों के कारण, मधुमक्खियों के प्रत्यक छत्ते से औसत 40 किलोग्राम शहद का उत्पादन किया जाता है। मधुमक्खियों का पालन करने वाले विभिन्न प्रकार की समस्याओं से निपटने के लिए प्राकृतिक पदार्थों का इस्तेमाल करते हैं। उनका उत्पादन ऑर्गेनिक होता है। इस प्रांत का ख़लख़ाल क़स्बा शहद उत्पादन में ईरान में पहले स्थान पर है।

ईरान में शहद के उत्पादन का दूसरा केन्द्र पश्चिमी आज़रबाइजान है, इस प्रांत में हर साल 20 हज़ार टन से अधिक शहद का उत्पादन किया जाता है। इस प्रांत में 10 लाख से अधिक मधुमक्खी के छत्ते हैं। 6 हज़ार लोग इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। विशाल चरागाहें और हरे भरे जंगल हैं। पैकिंग के लिए आधुनिक कारख़ाने हैं, जिसके कारण शहद और उसके अन्य उत्पादों जैसे कि मोम, पराग, रॉयल जेली और यहां तक कि मधुमक्खी के ज़हर का उत्पादन किया जाता है।

मधुमक्खी के छत्ते से शहद के अलावा, विभिन्न प्रकार के उत्पाद जैसे कि ज़हर, मोम, रोयल जेली और पराग का उत्पादन किया जाता है, जो आर्थिक एवं उपचार की दृष्टि से शहद से अधिक महत्वपूर्ण हैं। मधुमक्खी का ज़हर प्रतिरक्षा प्रणाली से संबंधित बीमारियों के उपचार के लिए इस्तेमाल किया जाता है। मधुमक्खी के गोंद या मोम में एंटिबॉयोटिक विशेषताएं होती हैं। मधुमक्खी से हासिल होने वाला यह एक लाभदायक उत्पाद है। रॉयल जेली पहली तीन में लार्वा का भोजन होती है। इस खाद्य पदार्थ में काफ़ी अधिक पौष्टिक आहार होता है। यह अलज़ाइमर, ब्लड प्रेशर, एक प्रकार के गठिया एवं कैंसर में लाभदायक होती है। इसमे काफ़ी अधिक पौष्टिक आहार होता है।

ईरान में शहद का इस्तेमाल विश्व के अन्य देशों की तुलना में अधिक होता है। विश्व में शहद का इस्तेमाल औसत 250 ग्राम से 300 ग्राम है, जबकि ईरान में इसका इस्तेमाल एक किलोग्राम है, जो वैश्विक स्तर से 3 गुना अधिक है। क्षेत्रीय देश ईरानी शहद के लिए अच्छा बाज़ार हैं, लेकिन देश में अच्छी क़ीमत में अधिक मांग के कारण ईरानी व्यापारी उसके निर्यात में रूची नहीं रखते हैं। यही कारण है कि पश्चिमी आज़रबाइजान समेत ईरान का शहद बहुत कम मात्रा में पड़ोसी और एशिया एवं यूरोप के कुछ देशों को निर्यात किया जाता है। ईरान से शहद आयात करने वाले देशों में से एक तुर्की है। यह देश ईरान से शहद आयात करके फ़ार्स खाड़ी के देशों, मध्य एशियाई देशों और यूरोपीय देशों को निर्यात करता है।