गुरुवार- 9 अप्रैल
1667, पेरिस में पहली पब्लिक आर्ट प्रदर्शनी लगाई गई।
1756, बंगाल के नवाब अली वर्दी ख़ान का 80 वर्ष की आयु में निधन।
1838, लंदन में नेश्नल आर्ट गैलरी खोली गई।
1860, पहली बार मनुष्य की आवाज़ रिकार्ड की गई।
1953, वार्नर ब्रदर्स ने ‘हाउस ऑफ़ वैक्स' शीर्षक से पहली 3 डी फिल्म प्रदर्शित की।
1965, कच्छ के रण में भारत पाक में युद्ध छिड़ा।
1988, अमरीका ने पनामा पर आर्थिक प्रतिबंध लगाये।
2002, बहरीन में नगर निगम चुनाव में महिलाओं को हिस्सा लेने की अनुमति मिली।
2003, इराक़ को सद्दाम की तानाशाही से मुक्ति मिली।
2008, नेपाल में संविधान सभा के लिए मतदान हुआ।
2010, श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के यूनाइटेड पीपुल्स फ्रीडम एलायंय ने 225 सीटों वाली संसद में 117 सीटें जीतीं।
2011, भारत सरकार द्वारा लोकपाल क़ानून बनाने की मांग मान लेने के बाद अन्ना हज़ारे ने 95 घंटे से जारी आमरण अनशन समाप्त कर दिया।
9 अप्रैल सन 1778 ईसवी को ब्रिटेन के रासायनशास्त्री हमफ़्रे डेविस का जन्म हुआ। उन्होंने अपने शोधकार्य के दौरान सोडियम पोटैशियम कैलशियम मैग्नीज़ियम स्ट्रेन्शियम और बैरियम के तत्वों को दूसरे तत्वों से अलग किया यह कार्य उस समय रसायान शास्त्र की बड़ी उन्नति समझा गया । वे इलेक्ट्रोकेमिकल के जनक समझे जाते हैं। सन 1829 ईसवी में उनका निधन हुआ।
9 अप्रैल सन 1879 ईसवी को रुस की क्रान्ति के नेता लियून ट्रोटेस्की का जन्म हुआ। उन्हें क्रान्तिकारी गतिविधियों के चलते दो बार देश निकाला देकर साइबेरिया भेजा गया और वे दोनों ही बार वहॉ से फ़रार होने में सफल रहे 1917 में रुस की क्रान्ति की सफलता के पश्चात ट्रोटेस्की स्वदेश लौटे और विदेश मामलों के आयुक्त निर्धारित कर दिए गये। एक वर्ष बाद वे युद्ध मामलों के आयुक्त बनाए गये। प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी के साथ शाति समझौते पर हस्ताक्षर के बाद देश के भीतर क्रान्ति के विरोधियों का मुकाबला करने में लग गये किंतु लेनिन की मृत्यु के बाद वे सत्ता की लड़ाई में स्टैलिन से हार गये जिसके बाद उन्हें 1925 में साइबेरिया और चार वर्ष बाद तुर्की की ओर देश निकाला दे दिया गया सन 1940 में वे मैक्सिको में स्टैलिन के कारिन्दों के हाथों मारे गये।
9 अप्रैल सन 1948 ईसवी को फ़िलिस्तीन के बैतुल मुक़ददस नगर के पश्चिम में दैरे यासीन नामक गावं में ज़ायोनियों ने निर्मम जनसंहार किया। यह जनसंहार अरबों और ज़ायोनियों के पहले युद्ध के दौरान हुआ था। इसमें ज़ायोनियों के आतंकवादी संगठन एयरगोन के लड़ाके लिप्त थे जिसका नेतृत्व ज़ायोनी शासन के पूर्व प्रधान मंत्री मेनाखिम बेगीन के हाथ में था। आतंकवादी ज़ायोनियों ने दैरे यासीन गांव में घुसकर 270 फ़िलिस्तीनियों को मार डाला इस जनसंहार से भयभीत होकर बड़ी संख्या में फ़िलिस्तीनी दूसरे देशों की ओर पलायन कर गये।

9 अप्रैल सन 1991 ईसवी को पूर्व सोवियत संघ में शामिल जार्जिया ने अपनी स्वतंत्रा की घोषणा की। रुस के ज़ार शासक ने 18वीं शताब्दी के अंत में जॉर्जिया में अपना प्रभाव बढ़ाया और 19वीं ईसवी शताबदी तक इस देश पर पूर्ण रुप से अधिकार कर लिया। 1917 में सोवियत संघ की क्रान्ति के पश्चात जॉर्जिया कुछ समय के लिए स्वतंत्र हो गया था किंतु शीघ्र ही सोवियत संघ की लाल सेना ने इसपर दोबारा कब्ज़ा कर लिया। सन 1936 में वह सोवियत संघ के सदस्य गणराज्यों में शामिल हो गया। जॉर्जिया में राष्ट्रवादी विचारधारा रखने वाले लोगों ने 1980 के दशक में सोवियत संघ में होने वाले परिवर्तनों का लाभ उठाते हुए स्वतंत्रता के लिए प्रयास किए और आज के दिन यह देश स्वतंत्र हो गया।
9 अप्रैल सन 1833 ईसवी को स्वीडन के महान रसायनशास्त्री, डाइनामाइट के आविष्कारक और नोबेल पुरस्कार के संस्थापक अलफ़्रेड नोबेल स्टाकहोम के निकट जन्मे। वह युवाकाल में ही ज्वलंत पदार्थों के संबंध में शोध में रूचि और योग्यता के आधार पर विश्वविद्यालय की शिक्षा प्राप्त किए बिना ही, वे प्रसिद्ध रसायनशास्त्री बन गये। डायनामाइट का आविष्कार करके वह प्रसिद्धि के शिखर पर पहुंचे। बाद में इस ज्वलंत पदार्थ को अधिकांश युद्धों में प्रयोग किया जाने लगा, इससे वह बहुत ही अप्रसन्न हुए। उन्होंने नोबेल पुरस्कार का भी आधार रखा जो प्रति वर्ष भौतिक शास्त्र, रसायनशास्त्र, चिकित्सा, साहित्य और शांति के क्षेत्रों में विद्वानों और बुद्धिजीवियों को दिया जाता है। हालिया दिनों में यह पुरस्कार भी पक्षपात की भेंट चढ़ गया है और कुछ ऐसे लोगों को यह पुरस्कार प्रदान किए गये जो वास्तव में इसके योग्य नहीं थे। इस महान रसायनशास्त्री का सन 1896 में निधन हो गया।
9 अप्रैल वर्ष 1626 ईसवी को ब्रिटिश दर्शनशास्त्री फ़्रैंसिस बेकन का 65 वर्ष की आयु में निधन हुआ। उनके जीवन को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है। पहले भाग में वह ब्रिटिश सांसद बने और राजनीति के क्षेत्र में उन्होंने प्रगति की। वर्ष 1621 ईसवी में उनपर घूस लेने का आरोप लगा और उनको भारी जुर्माना अदा करना पड़ा और सांसद की उनकी योग्यता को रद्द कर दिया गया। उसके बाद उनके जीवन का दूसरा चरण आरंभ हुआ। इस चरण में वह विश्व से कट कर रहने लगे और पुस्तकें लिखना आरंभ की और विभिन्न पुस्तकों की रचना करके वे एक बेहतरीन रचनाकार के रूप में उभरकर सामने आए।

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21 फ़रवरदीन सन 1367 हिजरी शम्सी को इराक़ी युद्धक विमानों ने पश्चिमी ईरान के मरीवान नगर और उसके निकट एक गांव पर रासायनिक आक्रमण किया। इराक़ की बास सरकार के इस अपराध के परिणाम स्वरुप भारी संख्या में आम नागरिक हताहत व घायल हुए। इसी प्रकार आज ही के दिन इराक़ी सेना ने दक्षिण पूर्वी इराक़ के फ़ाव क्षेत्र पर भी रासायनिक बम्बारी की थी ईरान पर अपने अतिक्रमण के अंतिम वर्षों में इराक़ी सरकार ने रासायनिक आक्रमणों में बहुत तेज़ी कर दी थी किंतु पश्चिमी देश और अंतर्राष्ट्रीय संगठन इस अपराध के न केवल मूक दर्शक बने रहे बल्कि कुछ पश्चिमी देशों ने तो रासायनिक हथियार उपलब्ध कराने में इराक़ की सहायता भी की थी।
21 फ़रवरदीन सन 1378 हिजरी शम्सी को इस्लामी गणतंत्र ईरान की सेना के वरिष्ठ कमांडर और सशस्त्र सेना आयोग के उपाध्यक्ष अली सय्याद शीराज़ी की आतंकवादी गुट एम के ओ ने हत्या कर दी। वे सन 1323 हिजरी शम्सी में ईरान के पूर्वोत्तरी नगर मशहद में जन्मे थे। वे शाह शासन के विरोधियों में से थे इसी लिए शाह ने उन्हें गिरफ़तार करवा के जेल में डाल दिया था। इस्लामी क्रान्ति की सफलता के बाद वे जेल से छूटे। इसके बाद वे इस्लामी क्रान्ति की सेवा में लग गये और अपनी आयु के अंतिम क्षणों तक वे इस सेवा में संलग्न रहे।
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15 शाबान सन 255 हिजरी क़मरी को मानवता के मोक्षदाता पैग़म्बरे इस्लाम के वंशज और ईश्वरीय दूत इमाम हसन असकरी के सुपुत्र हज़रज मोहम्मद मेहदी (अ) का इराक़ के उत्तरी नगर सामर्रा में जन्म हुआ। उनका नाम पैग़म्बरे इस्लाम के नाम पर मोहम्मद है। उनकी उपाधि मेहदी (अ)र्थात मार्गदर्शन करने वाला है। इमाम मेहदी ने (अ)पने जीवन के पांच वर्ष अपने पिता के साथ बिताए और इमाम हसन (अ)सकरी अ के शहीद हो जाने के बाद उन्होंने मानवजाति के मार्गदर्शन के ईश्वरीय दायित्व को संभाला उन्होंने 69 वर्षों तक अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से जनता से संपर्क रखा और लोगों का मारगदर्शन किया इसके पश्चात ईश्वर के आदेश पर वे ओझल हो गए और उस समय तक अज्ञातवास में रहेंगे जब ईश्वर उन्हें पुन: प्रकट होने का आदेश देगा। प्रकट होने के पश्चात हज़रत मेहदी अलैहिस्सलाम अत्याचार और अन्याय से भरे संसार को न्याय से भर देंगे।
15 शाबान सन 329 हिजरी क़मरी को हज़रत इमाम मेहदी अलैहिस्सलाम के चौथे प्रतिनिधि अली बिन मोहम्मद समरी का स्वर्गवास हो गया। ईश्वर के आदेश के अनुसार जब बारहवें इमाम लोगों की नज़र से ओझल हो गए तो कुछ वर्षों तक विशेष प्रतिनिधियों के माध्यम से इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने लोगों से संपर्क बनाए रखा और उनका मार्गदर्शन करते रहे। अंतिम मुलाक़ात में अली बिन मोहम्मद समरी को इमाम महदी अलैहिस्सलाम का पत्र मिला जिसमें इमाम ने कहा था कि समरी के बाद इमाम महदी अलैहिस्सलाम का कोई प्रतिनिधि नहीं होगा। इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने श्रद्धालुओं से कहा कि अब वे अपनी समस्याओं का समाधान धर्मगुरूओं की सहायता सें करें।
15 शाबान सन 837 हिजरी क़मरी को प्रख्यात लेखक व कवि इब्ने हिज्जा हमवी का निधन हुआ। उनका जन्म सीरिया में हुआ था। युवाकाल में भी वे हाफ़िज़े क़ुरआन बन गए। उन्होंने वरिष्ठ धर्मगुरूओं की सेवा में उपस्थित होकर अरबी साहित्य की शिक्षा प्राप्त की और देखते ही देखते अपने काल के प्रसिद्ध साहित्यकारों में गिने जाने लगे। अलख़ज़ानतुल अदब उनकी प्रसिद्ध पुस्तकों में है।