Apr १०, २०१६ ०५:३३ Asia/Kolkata

1912, टाइटेनिक ब्रिटेन के साउथेप्टन बंदरगाह से अपनी पहली और आख़िरी यात्रा पर रवाना हुआ...

1866, हेनरी बेर्घ ने न्यूयॉर्क शहर में पशु क्रूरता निवारण के लिए अमरीकन सोसायटी की स्थापना की।

1875, स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्यसमाज की स्थापना की।

1887, अमरीकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन को स्प्रिंगफील्ड के इलिनोइस में अपनी पत्नी के साथ फिर से दफन किया गया।

1912, टाइटेनिक ब्रिटेन के साउथेप्टन बंदरगाह से अपनी पहली और आख़िरी यात्रा पर रवाना हुआ।

1922, ऐतिहासिक जेनेवा सम्मेलन शुरू। जेनेवा में 34 देशों के प्रतिनिधियों ने प्रथम विश्व युद्ध के बाद के विश्व की मौद्रिक अर्थ नीति पर विचार विमर्श शुरु किया।

1930, पहली बार सिंथेटिक रबर का उत्पादन हुआ।

1963, पनडुब्बी यूएसएस थ्रेशर के समुद्र में डूबने से 119 अमेरिकी नाविकों की मौत हो गई।

1973, पाकिस्तान ने पुराने संविधान को निरस्त किया।

1999, भारत और पाकिस्तान के दो शीर्ष औद्योगिक संघों ने भारत-पाकिस्तान चैम्बर्स ऑफ़ कामर्स का विधिवत गठन किया।

2008, सर्वोच्च न्यायालय ने केन्द्रीय शिक्षण संस्थाओं और केंद्र सरकार से सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं में अन्य पिछड़े वर्गो (ओबीसी) के छात्रों के लिए 27% आरक्षण को संवैधानिक क़रार दिया।

2010, पोलैंड के राष्ट्रपति लेक काजिंस्की के दुर्घटनाग्रस्त हुए विमान में सवार सभी 96 लोगों की मौत हो गई।

 

10 अप्रैल सन 1946 ईसवी को लेबनान से फ़्रांसीसी सेना की अंतिम टुकड़ी भी वापस चली गयी। प्रथम विश्व युद्ध और उसमानी शासन के बिखर जाने के बाद फ़्रांस ने लेबनान और सीरिया पर अधिकार कर लिया था किंतु जब द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी ने फ़्रांस पर अधिकार कर लिया तो लेबनान पर जर्मनी के पिटठू फ़्रांसीसी अधिकारियों का शासन समाप्त हो गया। बाद में सन 1941 ईसवी में ब्रिटेन और फ़्रांस की सेना ने दोबारा लेबनान पर अधिकार कर लिया। लेबनान की जनता ने निरंतर स्वतंत्रता के लिए संघर्ष  जारी रखा यहॉ तक कि सन 1943 में फ़्रांस ने लेबनान में राष्ट्रपति के चुनाव पर सहमति व्यक्त की। लेबनान में संविधान की भी रचना हुई जिसमें इस देश पर फ़्रांस के वर्चस्व को नकारा गया था जिसके बाद इस देश में विद्रोह फैल गया। सन 1945 में लेबनान स्वतंत्र हुआ इसी वर्ष इस देश से ब्रिटिश व फ़्रांसीसी सेना के बाहर निकलने के समझौते पर हस्ताक्षर हुए जिसे अप्रैल सन 1946 में क्रियान्वित किया गया।

 

 

10 अप्रैल सन 1973 ईसवी को ज़ायोनी शासन की गुप्तचर संस्था मोसाड के जासूसों ने लेबनान की राजधानी बैरुत में तीन फ़िलिस्तीनी नेताओं की हत्या कर दी। इन नेताओं के नाम कमाल नासिर कमाल उदवान ओर मुहम्मद युसुफ़ नज्जार थे। मोसाड के कमांडोज़ ने भूमध्य सागर के मार्ग से लेबनान में घुसकर इन्हें शहीद कर दिया। इसी प्रकार इसके दस वर्ष बाद 10 अप्रैल सन 1983 ईसवी को पुर्तगाल में एक फ़िलिस्तीनी अधिकारी की मोसाड ने हत्या करवा दी वे पी एल ओ के अध्यक्ष यासिर अरफ़ात के राजनैतिक सलाहकार थे। ज़ायोनी शासन फ़िलिस्तीनी नेताओं का दमन करके फ़िलिस्तीन में अपने अवैध कब्ज़े को सुदृढ़ करने का प्रयास करता रहा है।

 

10 अप्रैल सन 1994 ईसवी को नैटो के सदस्य देशों के युद्धक विमानों ने पहली बार बोस्निया के नगरों पर अधिकार के लिए आगे बढ़ रही सर्ब सेनाओं पर वायु आक्रमण किया।

 

10 अप्रैल सन 1998 ईसवी को उत्तरी आयरलैंड की राजनैतिक पार्टियों ने लगभग तीस वर्ष की हिंसा के पश्चात बहु प्रतीक्षित शांति समझौते पर हस्ताक्षर किये।

 

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22 फ़रवरदीन सन 1376 हिजरी शम्सी को इस्लामी गणतंत्र ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों के विरुद्ध जर्मनी के एक न्यायालय द्वारा फैसला सुनाए जाने के एक दिन बाद योरोपीय संघ के सदस्य देशों की सरकारों ने ईरान की राजधानी तेहरान से अपने राजदूतों को वापस बुला लिया। इस न्यायालय पर ज़ायोनियों का गहरा प्रभाव था और उसने इस्लामी गणतंत्र ईरान की सरकार को जर्मनी में अपने एक विरोधी की हत्या का अपराधी ठहराया। इस्लामी गणतंत्र ईरान ने भी इस आरोप का कड़ाई से खंडन करते हुए अपने राजदूतों को भी उक्त देशों से वापस बुला लिया। बरलिन के न्यायालय में ईरान पर लगाया जाने वाला आरोप वास्वत में ईरान के विरुद्ध अमरीका और ज़ायोनी शासन के संयुक्त राजनैतिक प्रहार का एक भाग था। ईरान ने इसी लिए इस न्यायालय को अमान्य घोषित करते हुए भविष्यवाणी की कि योरोपीय संघ के सदस्य देश अपने राजदूतों को तेहरान भेजने पर विवश होंगे और वास्वत में भी ऐसा ही हुआ। इस फैसले के दस महीने बाद एक एक करके तेहरान से चले जाने वाले राजदूत फिर तेहरान लौट आये।

 

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16 शाबान सन 588 हिजरी क़मरी को मुसलमान धर्मशास्त्री, पवित्र क़ुरआन के व्याख्याकार और पैग़म्बरे इस्लाम तथा उनके परिजनों के कथनों को नक़ल करने वाले “इब्ने शहर आशूब” का निधन हुआ।  उनका जन्म लगभग 489 हिजरी क़मरी में उत्तरी ईरान के माज़ंदरान नामक क्षेत्र में हुआ था।  उन्होंने बचपन से ही पढ़ाई आरंभ कर दी थी और आठ वर्ष की आयु में पूरा क़ुरआन याद कर लिया था।  इब्ने शहर आशूब ने ज़मख़शरी, मुहम्मद ग़ज़ाली और ख़तीबे ख़ारेज़्मी जैसे अपने काल के वरिष्ठ धर्मगुरूओं से पैग़म्बरे इस्लाम तथा उनके परिजनों के कथनों को नक़ल करने की अनुमति प्राप्त की थी।  वे एक अच्छे कवि भी थे।  उनकी पुस्तक “मनाक़ेबे आले अबीतालिब” में पैग़म्बरे इस्लाम के पवित्र परिजनों की विशेषताओं का उल्लेख किया गया है।  इब्ने शहर आशूब ने विभिन्न विषयों पर बहुत सी पुस्तकें भी लिखी हैं।

 

16 शाबान सन 612 हिजरी क़मरी में अरब के एक नेत्रहीन कवि इब्ने दह्हान का निधन हुआ।  अपने काल के प्रचलित समस्त ज्ञानों की उन्हें पूर्ण जानकारी थी।  वे बहुत ही सुन्दर ढंग से कविताएं कहा करते थे।  इब्ने दह्हान को अरबी, फ़ार्सी, तुर्की, रोमी तथा हिंदी भाषाओं का भी ज्ञान था।  उनकी रचनाओं में यद्यपि कुछ कविताएं ही शेष बची हैं किंतु कुछ इतिहासकारों का यह मानना है कि उन्होंने अरबी व्याकरण के बारे में भी कुछ पुस्तकें लिखी हैं।

16 शाबान 1244 हिजरी क़मरी को भारत के एक कवि एवं लेखक अहमद मीनाई का जन्म हुआ था।  उन्होंने 15 वर्ष की आयु से शेर कहने आरंभ कर दिये थे।  कविता कहने की उनकी शैली बहुत ही निराली थी।  मीनाई ने पैग़म्बरे इस्लाम (स) तथा उनके परिजनों की प्रशंसा में बहुत सी कविताएं कही हैं।  उन्होंने गध और पध दोनों क्षेत्रों में लिखा है।  उनके द्वारा लिखी गई पुस्तकों की संख्या बहुत अधिक है।