Oct २२, २०१८ १७:१५ Asia/Kolkata

स्वयं सेवी बल बसीज एसा संगठन है जिसके लाखों ईरानी क्रांतिकारी सदस्य हैं।

वे पूरी निष्ठा के साथ विभिन्न क्षेत्रों में कठिन प्रयास करते हैं। वर्ष 1980 में स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी के आदेश से इस संगठन का गठन हुआ था। इस संगठन के लोगों ने इराक द्वारा ईरान पर थोपे गये आठ वर्षीय युद्ध के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और उसके बाद से इस संगठन ने देश के विकास व प्रगति के विभिन्न क्षेत्रों में ध्यान योग्य भूमिका निभाई है। इस परिप्रेक्ष्य में पिछले एक महीने के दौरान इस संगठन के लाखों जवानों ने देश के वंचित क्षेत्रों में विकास, चिकित्सा और सांस्कृतिक आदि क्षेत्रों में विभिन्न कार्य अंजाम दिये। इन कार्यों के समाप्त हो जाने के चौथे दिन उन्होंने ईरान के विभिन्न नगरों में सभायें कीं और उनमें सबसे बड़ी सभा व तेहरान के आज़ादी स्टेडियम में हुआ। इस सभा को ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने संबोंधित किया। इस महासभा में ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने कई महत्वपूर्ण बिन्दुओं की ओर संकेत किया। स्वयं सेवी बल अर्थात बसीज के एक लाख जवानों का आज़ादी स्टेडियम में जमावड़ा बहुत ही संवेदनशील स्थिति में हुआ। एक ओर अमेरिकी प्रचार, आर्थिक प्रतिबंध, दबाव और उसके मुकाबले में ईरान के बहादुर और मोमिन युवाओं का शक्ति प्रदर्शन और विभिन्न क्षेत्रों में एक के बाद दूसरी उन्हें मिलने वाली सफलताएं। इसी प्रकार एक तरफ आर्थिक कठिनाइयां और उसके मुकाबले में देश के मेधावी व प्रतिभाशाली युवाओं द्वारा संकट के समाधान के लिए वैचारिक एवं ग़ैर वैचारिक प्रयास।

इस भारी जमावड़े में इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने अपने भाषण के पहले भाग में तीन महत्वपूर्ण विषयों की ओर संकेत किया। वे तीनों विषय इस प्रकार थे। ईरान की महानता, इस्लामी गणतंत्र ईरान की शक्ति और ईरानी राष्ट्र का अजेय होना। वरिष्ठ नेता ने कहा कि ये वे वास्तविकताएं हैं जिनके बारे में दुश्मन कामना करता है कि हम उसे न जानें या कम से कम उससे निश्चेत रहें और अपने बारें में, अपने देश के बारे में और अपने राष्ट्र के बारे में कुछ और सोचें परंतु ये वास्तविकताएं इससे भी अधिक स्पष्ट हैं कि उनका इंकार किया जाये।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि ईरान की महानता का संबंध समस्त कालों से है और केवल इस्लामी क्रांति से 200 साल पहले का समय ईरान की महानता का काल नहीं है क्योंकि साम्राज्यवादी ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करते थे और उसके स्रोतों की लूट- खसोट किया करते थे। वरिष्ठ नेता ने ईरान की महानता के बारे में कहा कि हमारा प्रिय देश लंबे समय तक ज्ञान, दर्शनशास्त्र, राजनीति, कला और इस्लामी ज्ञानों में मुसलमान राष्ट्रों और कुछ समय तक वह विश्व के समस्त राष्ट्रों के मध्य अग्रणी रहा है। ईरान की महानता एक स्पष्ट चीज़ है जिसकी पुष्टि करने के लिए हर लेखक बाध्य है।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता स्वयं सेवी बल बसीज के हज़ारों जवानों को संबोधित करते हुए ईरान की शक्ति की ओर संकेत किया और कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान की शक्ति के बारे में इतना ही काफी है कि इस्लामी गणतंत्र ने ईरान को अमेरिका और ब्रिटेन के वर्चस्व से मुक्ति दिला दी। यह वर्चस्व 19वीं शताब्दी के आरंभ से शुरू हुआ था। इस काल में देश के समस्त मामलों पर निर्दयी और अहंकारियों का वर्चस्व था। पहलवी की राजशाही और तानाशाही सरकार थी जिसने ईरान पर विदेशियों के वर्चस्व की भूमि प्रशस्त कर दी थी और वह उन्हीं पर निर्भर थी। ईरान की शक्ति का दूसरा नमूना यह है कि इस्लामी गणतंत्र ने देश को इस प्रकार की दमनकारी और विश्वासघाती सरकार से मुक्ति दिलाई। ईरान की इस शक्ति की ओर इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने संकेत किया।

 

ईरान में इस्लामी व्यवस्था स्थापित हो जाने के बाद उसे गिराने के लिए देश के भीतर और बाहर से बहुत प्रयास किये गये और षडयंत्र रचे गये परंतु इस व्यवस्था को जो जनसमर्थन प्राप्त है उसने कभी भी इस लक्ष्य को पूरा नहीं होने दिया। शायद इस लोकतांत्रिक व्यवस्था को गिराने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कार्य जो अंजाम दिया गया वह इराक के क्रूर तानाशाह सद्दाम द्वारा ईरान पर थोपा गया आठ वर्षीय युद्ध था परंतु ईरान के शूरवीर जवानों और ईरानी जनता के साहसिक प्रतिरोध से वह विफल हो गया। इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने इस संबंध में कहा कि इस्लामी गणतंत्र के दौर से पहले पहलवी और काजारी काल में जो भी युद्ध हुए या शत्रुओं ने देश के एक भाग को देश से अलग कर दिया या स्वयं वे सैनिक लेकर देश में आ गये और राष्ट्र को अपमानित किया। ईरानी राष्ट्र ने पहली बार आठ वर्षीय थोपे गये युद्ध में दुश्मन के विस्तृत मोर्चे को विफल बना दिया। उसे देश से बाहर निकाल दिया और इस प्रकार नह देश की संप्रभुता की रक्षा कर सका। ईरान की शक्ति का यह अर्थ है। अंततः वरिष्ठ नेता इस्लामी गणतंत्र ईरान की शक्ति का सार इस प्रकार बयान करते हैं कि शक्ति यह है कि इस्लामी गणतंत्र क्षेत्र और विश्व में ईरान के सम्मान को बढ़ा सका और साम्राज्यवादी मोर्चे के सामने अकेले डट गया।

 

स्वयं सेवी बल बसीज के जवानों के मध्य जिन चीज़ों पर वरिष्ठ नेता ने बल दिया उनमें से एक ईरानी राष्ट्र का अजेय होना है। वरिष्ठ नेता ने कहा कि उसका मूल कारण लोगों द्वारा इस्लामी मूल्यों के प्रति कटिबद्ध होना और उनका अनुसरण है। उन्होंने उसके नमूनों को इस प्रकार बयान किया कि ईरानी राष्ट्र के अजेय होने को, इराक द्वारा ईरान पर थोपे गये युद्ध में सफलता और दुश्मनों के चालिस वर्षों से जारी षडयंत्रों के मुकाबले में ईरानी राष्ट्र के साहसिक प्रतिरोध को उसकी सफलता के रूप में देखा जा सकता है। वरिष्ठ नेता ने कहा कि दुश्मन के मुकाबले में हमारा राष्ट्र पीछे नहीं हटा और उसे पराजित नहीं किया जा सका। उसने कमज़ोरी का आभास नहीं किया यह ईरानी राष्ट्र की सफलता है।

ईरान की इस्लामी व्यवस्था और लोगों में इन सकारात्मक बिन्दुओं के होने के बावजूद वरिष्ठ नेता ने चेतावनी दी और कहा कि इन सफलताओं पर हमें घमंड नहीं करना चाहिये। उन्होंने उसके कारणों को इस प्रकार बयान किया। सफलता पर घमंड करना, योजना का न होना, सफलता को जारी रखने के लिए कार्यक्रम का न होना निश्चित रूप से दुश्मन के मुकाबले में पिछड़ेपन और दुश्मन के आगे बढ़ने का कारण बनेगा। प्रयास और संभावनाओं से लाभ उठाये जाने को अच्छी तरह से जारी रहना चाहिये। वरिष्ठ नेता इस विषय को अधिक स्पष्ट करने के लिए इस प्रकार कहते हैं" हम आधे रास्ते में हैं। हम अभी रास्ते के शुरू में ही हैं। हमें उस शिखर बिन्दु पर पहुंचना चाहिये जो क्रांति के दृष्टिगत है। उसके लिए प्रयास ज़रूरी है, बहादुरी ज़रूरी है और युक्ति व रणनीति आवश्यक है परंतु आप जवानों के लिए जो चीज़ ज़रूरी है और उस पर ध्यान दें वह यह है कि इस महान राष्ट्र की गति आप जवान ही हैं इस रेलगाड़ी को आगे बढ़ाने के इंजन आप जवान हैं।

ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने अपने बारमबार के बयानों से इस बात को दर्शा दिया है कि वे भविष्य का निर्माण करने वाले देश के युवाओं पर भरोसा करते हैं और उनसे बड़ी आशायें रखते हैं। जैसाकि वरिष्ठ नेता ने स्वयं सेवी बल बसीज के युवाओं के भारी जमावड़े में बल देकर कहा कि हमने इन 40 सालों में कई काम किये हैं। इन समस्त कामों में युवा आगे आगे थे। युवाओं ने समस्याओं का समाधान किया। उसके बाद वरिष्ठ नेता ने देश में युवाओं की सफल भूमिका के कई नमूनों को पेश किया। जैसे इस्लामी क्रांति से पहले तानाशाही पहलवी सरकार से संघर्ष और वे कार्य जो इस्लामी क्रांति की सफलता की दिशा में थे। इसी प्रकार युवाओं ने क्रांति के आरंभिक वर्षों में पृथकतावदियों और आतंकवादियों से मुकाबला किया, देश के विकास व प्रगति के कार्यों में भाग लिया, आठ वर्षीय थोपे गये युद्ध में अतिक्रमणकारियों से मुकाबला किया, उस दौरान ख़राब हुई चीज़ों की मरम्मत की, देश के वैज्ञानिक और तकनीकी विकास की दिशा में प्रयास किये, तकफीरी आतंकवादियों से मुकाबला किया और अंततः देश की आर्थिक समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास किया और कर रहे हैं।

वरिष्ठ नेता ने स्वयं सेवी बल बसीज के हज़ारों युवाओं को संबोंधित करते हुए प्रयास करने वाले उन गुटों की ओर संकेत किया जो देश के वंचित क्षेत्रों में जाकर जनकल्याण के लिए काम कर रहे हैं और विभिन्न प्रकार की सेवाएं दे रहे हैं। वरिष्ठ नेता ने कहा कि आज पूरे देश में लगभग 10 हज़ार परिश्रमी गुट हैं जो वास्तव में भविष्य में देश को शुभसूचना देने वाले हैं। देश के भविष्य के लिए मूल्यवान पूंजी है। वे परिश्रम कर रहे हैं। शायद इन लोगों ने देश के दूरस्थ क्षेत्रों में जाकर निर्धन व वंचित वर्ग के लोगों के लिए हज़ारों महत्वपूर्ण कार्य अंजाम दिये हैं। इसके बाद भी जवानों की भूमिका है जो हमें अच्छे भविष्य की शुभसूचना देती है।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने युवाओं को देश का मालिक बताया। उन्होंने कहा कि ये युवा हैं जो देश की समस्याओं का समाधान करेंगे। वरिष्ठ नेता ने कहा कि आज हमारे देश को जिन समस्याओं का सामना है ईश्वर की कृपा से हमारे युवा उसके बारे में सोचते हैं और उसके संबंध में उनके विचार हैं वे ज़िम्मेदारी का आभास करते हैं।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता के संबोंधन का दूसरा भाग, देश के विकास के सामने मौजूद रुकावटों से मुकाबले के रास्तों के बारे में था। वरिष्ठ नेता ने कहा कि विकास का रास्ता हमारे सामने खुला हुआ है परंतु यह रास्ता टेढ़ा- मेढ़ा और उतार- चढ़ाव से भरा पड़ा है। इस रास्ते में रुकावटें हैं। दुश्मन हमारे मुकाबले में पूरी तरह सक्रिय है। हमें रुकावटों का सामना करके इस रास्ते को तैसर करना चाहिये। इसके लिए कुछ शर्तें हैं। सबसे पहले हमें दुश्मन की उपस्थिति और उसकी मौजूदगी का आभास होना चाहिये है। जब तक इंसान यह न जाने कि दुश्मन उसके मुकाबले में है, वह अपने लिए शरणस्थली नहीं बनायेगा और ज़रूरी हथियारों से लैस नहीं होगा।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता कहते हैं कि विकास व प्रगति के लिए दूसरा रास्ता यह है कि इंसान में आत्म विश्वास हो और प्रतिरोध के लिए उसमें दृढ़ इच्छा हो। वरिष्ठ नेता ने कहा कि मनोबल रहित इंसान, असंमजस में रहने वाला इंसान, डरपोक इंसान, अवसरवादी, अपने को कम समझने वाला इंसान इस मार्ग में कुछ नहीं कर सकता। इस प्रकार के इंसान निराश हैं जो दूसरों को भी निराश कर देते हैं। वे आलसी होते हैं और वे दूसरों को भी आलसी बना देते हैं। वरिष्ठ नेता अपने भाषण में पवित्र कुरआन के सूरे तौबा की 47वीं आयत की ओर संकेत करते और कहते हैं" अगर तुम मुसलमानों के साथ मित्थ्याचारी जेहाद के लिए जाते हैं तो वे केवल बुराई और असमंजस की स्थिति उत्पन्न करने के लिए जाते हैं। वरिष्ठ नेता आगे कहते हैं" अलबत्ता इससे पहले हमने जिन कार्यों का नाम लिया हमारे युवा इस विपत्ति व समस्या से ग्रस्त नहीं थे। उनके अंदर आत्मविश्वास था। बहादुर थे, वे असमंजस में नहीं थे। डरपोक नहीं थे और अगर डरपोक होते तो कार्य आगे न बढ़ पाता।