ईरान की शक्ति व वैभव के बारे में वरिष्ठ नेता के विचार
हमने इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई द्वारा अभी हाल में तेहरान स्थित आज़ादी स्टेडियम में स्वंयसेवी बल बसीज के सदस्यों के बीच दिए गए भाषण के एक भाग पर चर्चा की।
इस भाषण में इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने इस्लामी गणतंत्र ईरान के अजेय रहने और उसकी शक्ति व वैभव पर बल दिया और युवा वर्ग के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान की सराहना की। उन्होंने दुश्मन की ओर से ईरान की तरक़्क़ी के मार्ग में पैदा की जाने वाली रूकावटों की ओर इशारा किया और इनसे निपटने की ज़रूरत पर बल देते हुए दुश्मन की मौजूदगी के एहसास और आत्म विश्वास को इन रुकावटों को नाकाम बनाने के लिए दो आरंभिक क़दम बताए।
इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने हमले के क्षेत्र की पहचान को ईरान की प्रगति के मार्ग में दुश्मनों की रुकावटों से निपटने के लिए तीसरा क़दम बताते हुए फ़रमायाः "दुश्मन के ख़तरों को सही समझने की ज़रूरत है, उसके आकार को पहचानें, यह पता होना चाहिए कि किस क्षेत्र पर हमला हो रहा है, इस बात का ज्ञान होना चाहिए कि दुश्मन कहां से हमला करता है।"
उन्होंने दुश्मन की ओर से हमला होने वाले कुछ क्षेत्रों को गिनवाते हुए कहा कि इस्लाम और इस्लामी क्रान्ति उनका पहला क्षेत्र है। ईरान की जनता की इस्लम आस्था ने उसे दुश्मन के हमले के मुक़ाबले में सुदृढ़ बना दिया है और उसकी यह आस्था ही इस्लामी क्रान्ति की बुनियाद है। आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने इस्लामी क्रान्ति से पहले ईरान में विदेशियों की पैठ की व्याख्या करते हुए राजनैतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में विदेशियों के कुछ हस्तक्षेप को गिनवाते हुए फ़रमाया कि इस्लाम और इस्लामी क्रान्ति ने उनके बढ़े हुए हाथ को रोक दिया। उसके बाद इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ ने फ़रमायाः "उनके दिल में इस्लामी क्रान्ति, ईरानी राष्ट्र के महाआंदोलन के प्रति द्वेष है। इसलिए वे मक्कारी करते हैं। वे इस बात से डरते हैं कि क्षेत्र में कहीं एक बड़ी इस्लामी शक्ति उभर न आए और क्षेत्र में उनके हितों को ख़त्म न कर दे। इस्लामी और क्रान्ति की शक्ति से डरते हैं, इसलिए शक्ति के तत्वों को ख़त्म करना चाहते हैं।"
इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने राजनैतिक स्थिरता, सामाजिक सुरक्षा, राष्ट्रीय एकता, क्रान्ति के सिद्धांतों की पाबंदी, इस्लामी व क्रान्तिकारी संस्कृति की जड़ों की मज़बूती, विज्ञान व प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेज़ी से प्रगति, सैन्य तरक़्क़ी, मीज़ाईल शक्ति और क्षेत्र में ईरान की मौजूदगी को इस्लामी गणतंत्र ईरान की शक्ति के तत्व गिनवाते हुए निष्कर्ष पेश कियाः "ईरान को शक्तिशाली बनाने वाली चीज़, इस्लामी ईरान के ख़िलाफ़ साम्राज्य का रणक्षेत्र है।"
आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ईरानी राष्ट्र से दुश्मनों के मुक़ाबले का एक और क्षेत्र देश की स्थिति को ग़लत दिखाने की उनकी कोशिश बतायी और जनता को देश की सही स्थिति की समझ को दुश्मन के इस हथकंडे को नाकाम बनाने में प्रभावी बताया। उन्होंने दुश्मन द्वारा इस लक्ष्य के लिए मीडिया को हथकंडे के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की ओर इशारा करते हुए फ़रमायाः "वे ख़राब छवि पेश करके ईरानी राष्ट्र के विचार को बदलना चाहते हैं, वे ईरान की ख़राब छवि, क्षेत्र की ग़लत छवि और अपने अस्ली चेहरे को छिपाकर ऐसा कर रहे हैं।"
इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि अमरीका सहित दूसरी साम्राज्यवादी शक्तियां यह दर्शाने की कोशिश करती हैं कि उनकी स्थिति बहुत मज़बूत है, जबकि ऐसा नहीं है। अलबत्ता वरिष्ठ नेता ने इस बात को माना कि साम्राज्यवादियों के हाथ में पैसे, हथियार, परमाणु शस्त्र, आधुनिक प्रौद्योगिकी और मीडिया है लेकिन विश्व स्तर पर साफ़्ट पावर नंबर वन है। साफ़्ट पावर की व्याख्या में उन्होंने फ़रमायाः "साफ़्ट पावर यानी तर्क, नई बात, जीवन पर प्रभाव डालने वाली नई बात पेश करना। उनके पास तर्क नहीं है, नई बात नहीं है। साफ़्ट पावर की नज़र से अमरीका बहुत कमज़ोर है, उसकी बातों में धौंस धमकी है, उसका तर्क कमज़ोर है, आज दुनिया में उसकी लिब्रल डेमोक्रेसी बदनाम हो गयी है।"
वह दुनिया में अमरीका की वास्तविक छवि के नमूने के तौर पर उसकी इराक़, सीरिया, लेबनान, अफ़ग़ानिस्तान सहित दुनिया के अनेक क्षेत्रों तथा दुनिया की दूसरी शक्तियों के मुक़ाबले में हार को पेश करते हैं।
आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई दुश्मन की ओर से ईरान व इस्लामी व्यवस्था की छवि को कमज़ोर दिखाए जाने के हथकंडे का उल्लेख करते हुए फ़रमाते हैः "वे इस्लामी ईरान की अलग छवि पेश करते हैं जो ग़लत व धूर्ततापूर्ण है। जिस छवि को वे विश्व जनमत के मन में बिठाना चाहते हैं, यहां तक कि वे कोशिश करते हैं ईरानी राष्ट्र के मन में भी वही छवि बैठ जाए।"
दुश्मन ईरान की निराशाजनक छवि इस तरह दर्शाते हैं कि कुछ पश्चिमी अधिकारी भी भ्रान्ति का शिकार हो गए हैं। जैसा कि इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने स्वंयसेवी बल बसीज के सम्मेलन में कहाः "हाल में यह बात सुनने में आयी कि अमरीकी राष्ट्रपति ने कुछ योरोपीय राष्ट्राध्यक्षों से कहा कि आप लोग दो तीन महीना इंतेज़ार करें, दो तीन महीने के बाद इस्लामी गणतंत्र ईरान का काम तमाम हो जाएगा।" वरिष्ठ नेता इस संदर्भ में इस्लामी क्रान्ति के आरंभिक काल की ओर इशारा करते हुए कि जब पश्चिमी और उनके आंतरिक एजेंट, इस्लामी गणतंत्र व्यवस्था को कुछ महीने के भीतर गिराने की बात करते थे, फ़रमायाः "उस समय को चालीस साल हो चुके हैं। वह छोटा पौधा अब मज़बूत पेड़ बन गया है, ये बेचारे ख़ुद को और अपने योरोपीय सहयोगियों को दो तीन महीने इंतेज़ार की झूठी तसल्ली दे रहे हैं।"
इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प की इस सतही सोच का निष्कर्ष पेश करते हुए फ़रमाते हैः "दुश्मन ईरानी राष्ट्र को नहीं पहचान पाया। क्रान्ति, क्रान्तिकारी व ईमानी भावना को नहीं पहचान पाया। इन वर्षों में ग़लत समीक्षा से वह भ्रम का शिकार रहा है और अभी भी भ्रम का शिकार है।" अलबत्ता इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आर्थिक समस्या को ईरान की मौजूदा मुश्किल मानते हैं लेकिन उनकी नज़र में वास्तविक मुश्किल मुश्किल को हल करने की ओर से निराशा है। वह फ़रमाते हैः "दुश्मन ईरानी राष्ट्र को यह समझाना चाहता है कि रास्ता बंद है, अमरीका की शरण और उसके सामने घुटना टेकने के सिवा मुश्किल का हल नहीं है, अलबत्ता यह कभी नहीं होगा। मैं ईश्वर की ताक़त और आपके सहयोग से जब तक जान में जान है, देश में ऐसा नहीं होने दूंगा।"
इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ईरान की वास्तविक छवि को एक शक्तिशाली, प्रतिरोधी व गौरवपूर्ण बताते और इस बात की पुष्टि में फ़रमाते हैः "मंझे राजनेता यहां तक कि अमरीका, पश्चिम और योरोपीय देशों में जिनके हमसे अच्छे संबंध नहीं हैं, ईरानी राष्ट्र की सराहना करते हैं इस बात के लिए कि ईरानी राष्ट्र 40 साल दुश्मन के मुक़ाबले में पीछे नहीं हटा, बल्कि बड़ी सफलताएं हासिल की हैं, ख़ुद को शक्तिशाली बना लिया है। यह तारीफ़ के क़ाबिल है।"
ईरान के बारे में एक और वास्तविकता, उसकी अपार संभावनाए हैं। इन संभावनाओं की व्याख्या में इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता कहते हैः"दुनिया में ऐसे कम देश होंगे जिनके पास इतनी संभावनाएं हों, भौगोलिक संभावनाएं, मौसमी संभावनाएं, मानव संसाधन की संभावनाएं, भूमिगस स्रोतों की संभावनाएं ज़मीन के ऊपर मौजूद संभावनाएं। इस देश की संभावनाएं देश की प्रगति व अर्थव्यवस्था के लिए बहुत अहम हैं।" अलबत्ता वह इन संभावनाओं के सही उपयोग न होने की आलोचना करते हैं। इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता देश की एक और अहम संभावना, ईरान की धर्मपरायक युवा नस्ल को मानते हैं जिस पर दुश्मन की नज़र नहीं है। आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई इस युवा पीढ़ी की इन शब्दों में विशेषता बयान करते हैः "देश में धर्मपरायण जवान नस्ल में रक्षा करने की क्षमता है, वैज्ञानिक क्षमता है, सांस्कृतिक व सामाजिक क्षेत्र में और बहुत से क्षेत्र हैं जहां ये क्षमताएं उभर कर सामने आयी हैं। यह देश की वास्तविक छवि है।"
इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने स्वंयसेवी बल बसीज की सभा में ईरान के ख़िलाफ़ अमरीका की पाबंदियों को इस अर्थ में मानते हैं कि इस वर्चस्ववादी शक्ति के पास धमकी देने का कोई और रास्ता नहीं है, लेकिन इसके साथ ही वह बल देते हैः "आर्थिक पाबंदियां हमारी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के सामने कमज़ोर है। हमारी अर्थव्यवस्था पाबंदियों को नाकाम बना सकती है और ईश्वर की कृपा से पाबंदियों को हम नाकाम बना देंगे और पाबंदियों की नाकामी अमरीका की हार होगी।"
आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई स्वयंसेवी बल बसीज को वास्तविक ईरान की छवि का एक और आयाम बताया जो दुश्मन से नहीं डरता और दूसरे देशों के लिए आदर्श बन गया है। वह ईरान की छवि के एक और उज्जवल बिन्दु का इन शब्दों में वर्णन करते हैः "देश के निर्माण में सक्रिय विभिन्न संस्थाएं, प्रतिरक्षा काल के मोर्चों से नई नस्ल को परिचित कराने के लिए सक्रिय विभाग, क्रान्ति की रैलियां, मस्जिद में एतेकाफ़ नामक उपासना की सभाएं और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की याद में आयोजित शोक सभाओं में दिन प्रतिदिन लोगों की संख्या बढ़ना, यह देश की वास्तविक छवि है। इनसे ईरानी राष्ट्र को पहचाना जा सकता है।"
आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने तेहरान स्थित आज़ादी स्टेडियम में जनसभा को संबोधित करते हुए अंत में कुछ बिन्दुओं का उल्लेख किया। उन्होंने दुश्मन के हाथ में मीडिया को ख़तरनाक और उसे केमिकल हथियारों से उपमा दी कि जिसमें सैन्य उपकरण तो तबाह नहीं होते लेकिन इंसान मारे जाते हैं। मीडिया भी लोगों को नहीं मारता बल्कि कोशिश करता है कि उनकी मानसिकता को अपने हित में बदल कर उनसे दुश्मन को पहचानने और उसके ख़िलाफ़ प्रतिरोध की शक्ति को छीन ले। उसके बाद वरिष्ठ नेता ने एकता की रक्षा और राष्ट्र में ज़िम्मेदारी क़ुबूल की भावना सुदृढ़ करने पर बल दिया। उन्होंने इस बारे में कहाः "अगर दुश्मन यह समझ जाए कि ईरानी राष्ट्र व धर्मपरायण ईरानी जवान नस्ल अपनी ज़िम्मेदारी को महसूस कर रही है, मंच पर उपस्थिति की ज़रूरत को महसूस कर रही है और वह मंच पर मौजूद है, तो वह पीछे हट जाएंगे। हमें दुश्मन को ठोस संदेश देना चाहिए। हमारी बात, हमारे व्यवहार और हमारी जीवन शैली से दुश्मन महसूस करे कि उसे एक शक्तिशाली समूह का सामना है। अगर हमारे भीतर वह कमज़ोरी देखेगा तो दुस्साहसी हो जाएगा और अपना कुप्रयास बढ़ा देगा।"
आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने इस सभा में पवित्र रक्षा के काल की एक यादगार घटना के उल्लेख के साथ अपने भाषण का अंत किया। आपने फ़रमायाः "यह 1 लाख की इस स्टेडियम की भीड़ 1986 में इसी जगह 1 लाख की भीड़ की याद दिलाती है जिसे हमने संबोधित किया था, जो जंग के मोर्चे पर गयी, देश के लिए बड़ी सफलता उपहार में लायी। आप प्रियजन भी ईश्वर की कृपा से ज्ञान-विज्ञान के मैदान में, प्रयास के मैदान में, आर्थिक गतिविधियों के क्षेत्र में, व्यक्तिगत व सामूहिक कोशिश के क्षेत्र में, सामाजिक व सांस्कृतिक नेटवर्क बनाने के क्षेत्र में और जिस जगह गोली चलाने की ज़रूरत पड़ेगी, ईश्वर की कृपा से सफल होंगे।"