आधुनिक क्राउन प्रिंस की पारंपरिक तानाशाही!
तुर्की के इस्तांबूल नगर में सऊदी सरकार विरोधी पत्रकार, जमाल खाशुक़जी की हत्या से विश्व जनमत और विशेषकर मीडिया के सामने सऊदी क्राउन प्रिंस बिन सलमान का अस्ली चेहरा सामने आ गया है।
यही वजह है कि अब उन्हें अरब जगत में नये सद्दाम और नये क़ज़्ज़ाफी के नाम से याद किया जाने लगा है कि जिन्हें इस देश के राज सिंहासन पर नहीं बैठने दिया जाना चाहिए ।
मुहम्मद बिन सलमान ने , जनवरी सन 2015 में सऊदी अरब में सत्ता के ढांचे में प्रवेश के बाद तरक़्क़ी की सीढ़ियां बड़ी तेज़ी से तय की। जून तक वह सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस बन गये यहां तक कि यह भी कहा जाने लगा था कि वह अपने पिता के जीवनकाल में ही सऊदी अरब के नरेश बन सकते हैं लेकिन गत 45 महीनों में उनके क्रियाकलाप ने पूरी दुनिया को उनका विरोधी बना दिया।
बिन सलमान ने जनवरी 2015 से अक्तूबर 2018 के मध्य अर्थात कुल 45 महीनों के दौरान सऊदी अरब के लिए 8 बड़े मामले बनाए अर्थात सऊदी अरब में हर छे महीने में एक बड़ा मामला सामने आया। इन सारे मामलों के परिणाम स्वरूप अब विश्व स्तर पर बिन सलमान को सरकारी आतंकवाद का प्रयोजक माना जाता है और विश्व जनमत, बिन सलमान को सऊदी अरब में सत्ता के गलियारे से दूर हटाने की इच्छा रखता है।
अमरीकी समाचार पत्र न्यूयार्क टाइम्ज़ में जिम रोटनबर्ग ने अपने एक विश्लेषण में लिखा है कि छे महीने पहले अमरीकी मीडिया में बिन सलमान की यात्रा के अवसर पर उनके बारे में खूब बढ़ा चढ़ा कर लिखा जा रहा था। सऊदी राजकुमार ने अपनी आधुनिक व सुधारवादी छवि पेश करने की कोशिश की लेकिन उनका यह सपना 2 अक्तूबर को उस समय टूट गया जब जमाल खाशुकजी इस्तांबूल में अमरीकी कांस्लेट में कुछ दस्तावेज़ लेने के लिए प्रविष्ट हुए। इसे वाशिंग्टन पोस्ट के प्रकाशक ने कि जिस में जमाल खाशुकजी आलेख लिखा करते थे, भयानक सरकारी हत्या का नाम दिया है।
अमरीका के प्रसिद्ध लेखक निकोलस क्रिस्टोफर ने बिन सलमान को सनकी क्राउन प्रिंस का नाम देते कहा है कि वह ऐसे सनकी हैं जो पत्रकार की हत्या करते हैं, एक प्रधानमंत्री को बंधन बनाते हैं, लाखों बच्चों को भूखा रखते हैं इस लिए वह इस लायक़ नहीं है कि उनका किसी कार्यक्रम में स्वागत किया जाए बल्कि वह केवल जेल के योग्य हैं।
ब्रिटेन के प्रसिद्ध पत्रकार डेविड हर्स्ट ने मिडिल ईस्ट आई में लिखा है कि खाशुकजी की हत्या से संबंधित आडियो और वीडियो के सामने आने के बाद ट्रम्प के पास बस एक ही काम करने के लिए बचा है और वह यह है कि वह बिन सलमान को सऊदी अरब के सिहांसन पर न बैठने दें। यह सऊदी सरकार के हाथों मारे गये या जेल में डाले गये असंख्य लोगों और जमाल खाशुकजी के लिए किया जाने वाला सब से कम काम हो सकता है।
हालांकि खाशुक़जी की हत्या बिन सलमान का सब से जघन्य अपराध समझा जाता है लेकिन निश्चित रूप से यमन पर हमला बिन सलमान का सब से अधिक घृणित और आलोचनीय अपराध है। यह युद्ध मार्च सन 2015 में सऊदी अरब के तत्कालीन रक्षा मंत्री बिन सलमान के सीधे आदेश से आरंभ हुआ था और अब तक जारी है। इस युद्ध में लगभग पचास हज़ार यमनी नागरिक मारे गये और इस युद्ध का एक भयानक परिणाम यह निकला है कि यमन महात्रासदी की लपेट में आ गया है। यहां तक कि एसोशिएटेड प्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा कि यमनी बच्चों की हड्डिया बाहर निकली हैं और उनके माता पिता उन्हें पत्ते खिलाने पर विवश हैं।
संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एन्टोनियो गुटरेस ने कहा है कि यमन में हालिया दशकों की सब से अधिक भयानक त्रासदी सामने आ रही है। विश्व खाद्य कार्यक्रम के प्रवक्ता हर्व वर्हूसेल ने गत 16 अक्तूबर को विश्व खाद्य दिवस के उपलक्ष्य में यमन की जनता की भुखमरी की ओर से सचेत करते हुए चेतावनी दी कि यमन, विश्व की अत्यधिक ख़तरनाक भुखमरी से जूझ रहा है यहां तक कि इस देश के एक करोड़ अस्सी लाख लोगों को यह पता नहीं होता कि अगला खाना उन्हें कब और क्या मिलेगा? उन्होंने इस बात की ओर संकेत करते हुए कि वर्तमान समय में अस्सी लाख से अधिक यमनी भुखमरी की कगार पर हैं, कहा कि यदि हालात यही रहे तो इस संख्या में पैंतीस लाख लोगों की वृद्धि हो जाएगी और कुल मिलाकर लगभग एक करोड़ बीस लाख यमनियों को भुखमरी से बचाने के लिए मदद की ज़रूरत होगी। यमन की यह दशा, बिन सलमान के मन में सऊदी अरब का नायक बनने की इच्छा का परिणाम है।
इन हालात में अब बहुत कम लोगों को इस बात में शंका होगी कि मिना त्रासदी जानबूझ कर की गयी लापरवाही थी। यमन के युद्ध के आरंभ के छे महीने बाद 24 सितम्बर सन 2015 में हज के अवसर पर घटने वाली यह घटना, हज के इतिहास की सब से अधिक भयानक घटना थी। सऊदी मीडिया ने मारे जाने वाले हाजियों की संख्या कम करके बताने की कोशिश की और बार बार तीन हज़ार से कम की बात की लेकिन बाद में आंकड़ों से पता चला कि मारे जाने वालों की संख्या कम से कम सात हज़ार थी जिनमें सब से अधिक ईरानी हाजी थे। सऊदी सरकार ने इसे हज के समय घटने वाली आम घटना बताया लेकिन लेबनान के अद्दयार समाचार पत्र ने लिखा कि बिन सलमान के कारवां की वजह से हाजियों की भीड़ का रुख बदला और भगदड़ मच गयी जिस की वजह से यह दुर्घटना घटी।
इस त्रासदी में ईरान के कई प्रसिद्ध लोग भी शहीद हुए। उन में लेबनान में ईरान के राजदूत रहे ग़ज़न्फर रुकना बादी भी शामिल थे। उनके भाई का कहना है कि जब शहीद रुकना बादी की लाश लगभग साठ दिनों के बाद कब्र से निकाल कर हमें दी गयी तो उस पर काटने पीटने के निशान स्पष्ट रूप से दिखायी दे रहे थे जो वास्तव में ईरान से सऊदी अरब के द्वेष को दर्शाते थे। आज एक बार फिर सऊदी शासकों ने खाशुकजी को भी मारने के बाद टुकड़े टुकड़े कर दिये।
सऊद वंश ने इसी प्रकार सऊदी अरब के प्रसिद्ध व वरिष्ठ धर्मगुरु शेख बाक़िर अन्निम्र को वर्ष 2012 में अशांति फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया और फिर दो जनवरी सन 2016 में उन्हें मृत्युदंड दे दिया गया। सूत्रों ने बताया कि मुहम्मद बिन सलमान सीधे तौर पर मृत्युदंड पर नज़र रख रहे थे यहां तक कि उन्होंने शेख निम्र को यातना भी दी और मृत्युदंड से पहले उनके हाथ पैर तोड़ दिये। शेख निम्र के खिलाफ बिन सलमान का यह अपराध एक साल से भी कम समय में उनका तीसरा बड़ा अपराध था।
बिन सलमान ने सन 2016 में कोई बड़ी घटना नहीं की और इस वर्ष केवल यमन का युद्ध ही जारी रहा और इसी प्रकार उन्होंने सऊदी अरब के ईरान के साथ संबंध खत्म कर लिये। ईरान के साथ संबंध खत्म करना, बिन सलमान के सत्ता में पहुंचने के बाद चौथी बड़ी घटना थी। इस दौरान चूंकि इस्लामी गणतंत्र ईरान ने दूरदर्शिता का प्रदर्शन किया और इस दूरदर्शिता और बिन सलमान की महत्वकांक्षा की वजह से ईरान से संबंध तोड़ने से उनका मक़सद पूरा नहीं हो सका। इस दौरान बिन सलमान की इच्छा के विपरीत ईरान का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्व बढ़ा और अमरीका की भरपूर मदद के बावजूद सऊदी अरब की पोज़ीशन कमज़ोर होती गयी।
ऐसा लगता है कि बिन सलमान ने सन 2016 में सारा ध्यान, मुहम्मद बिन नायफ को क्राउन प्रिंस के पद से हटाने और स्वंय वह पद ग्रहण करने पर केन्द्रित कर रखा था जिसमें उन्हें अन्ततः 21 जून सन 2017 को सफलता भी मिल गयी लेकिन इससे 16 दिन पहले अर्थत 5 जून को सऊदी अरब ने क़तर से भी संबंध खत्म कर लिए और जब बिन सलमान क्राउन प्रिंस बने तो व्यवहारिक रूप से सऊदी अरब की सत्ता उनके हाथ में आ गयी।
बिन सलमान एक अत्याधिक स्वार्थी और घमंडी नेता हैं यहां तक कि वह फार्स की खाड़ी की सहयोग परिषद के सदस्यों के बारे में भी भेदभाव पूर्ण विचार रखते हैं । सऊदी अरब ने बहरैन, यूएई और मिस्र को भी क़तर से संबंध खत्म करने और उसकी घेराबंदी करने पर तैयार कर लिया। हालांकि अथाह धन व दौलत की वजह से बहिष्कार की वजह से क़तर में यमन की तरह मानव त्रासदी पैदा नहीं हुई लेकिन क़तर के साथ तनाव को भी बिन सलमान के कारनामों में जगह मिलना चाहिए। क़तर के बहिष्कार को 17 महीने का समय गुज़र चुका है और इस में सऊदी अरब की नाकामी अब पूरी तरह से सामने आ चुकी है। वास्तव में सऊदी अरब क़तर के आंतरिक मामलों में जिस तरह से दखल देना चाहता है, क़तर ने उसकी इजाज़त नहीं दी इसी लिए कतर को दंडित करने का फैसला लिया गया और इस तरह से सऊदी अरब के अनुभवहीन क्राउन प्रिंस के कर्मपत्र में एक और नाकामी लिख डठी।