Apr १२, २०१६ ०७:३७ Asia/Kolkata

12 अप्रैल सन 1531 ईसवी को जर्मनी के पूंजीपति प्रोटिस्टेंट ईसाइयों के बीच सैनिक एवं धार्मिक समझौता हुआ।

मार्टिन लूथर के धर्म अर्थात प्रोटस्टेंट से प्रभावित होकर उक्त पूंजीपतियों ने वचन दिया कि कैथोलिक राजाओं के आक्रमण की स्थिति में वे मिलकर प्रतिरोध करेंगे। किंतु यारोप के शक्तिशाली राजा शारलेकन के आक्रमण के सामने प्रोटिस्टेंट ईसाई टिक न सके और उनकी पराज हो गयी।

  • 12 अप्रैल सन् 1621 में सिख गुरु तेग बहादुर का जन्म हुआ।
  • 12 अप्रैल सन् 1801 में विलियम क्रे को कलकत्ता (अब कोलकाता) के फोर्ट विलियम कॉलेज में बंगाली भाषा का प्रोफेसर नियुक्त किया गया।
  • 12 अप्रैल सन् 1801 में रणजीत सिंह ने खुद को पंजाब का महाराजा घोषित किया।
  • 12 अप्रैल सन् 1861 में अमेरिका में गृह युद्ध शुरू हो गया था।
  • 12 अप्रैल सन् 1927 में ब्रिटिश कैबिनेट ने 21 वर्ष की महिलाओं को मतदान करने का अधिकार देने का समर्थन किया।
  • 12 अप्रैल सन् 1928 में जर्मन विमान ब्रेमेन ने अटलांटिक महासागर के पूर्व से पश्चिम की ओर पहली सफल उड़ान भरी।
  • 12 अप्रैल सन् 1945 में अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूज़वेल्ट की कार्यालय में मृत्यु।
  • 12 अप्रैल सन् 1946 में सीरिया पर फ्रांस का क़ब्ज़ा समाप्त हुआ।
  • 12 अप्रैल सन् 1955 में डॉक्टर जोंस साक द्वारा विकसित पोलियो वैक्सीन को सुरक्षित और प्रभावी घोषित किया गया।
  • 12 अप्रैल सन् 1961 में सोवियत संघ ने पहला इंसान यूरी गैगरीन को अंतरिक्ष में भेजा।
  • 12 अप्रैल सन् 1973 में सुडान ने अपना संविधान बनाया।
  • 12 अप्रैल सन् 1978 में भारतीय रेलवे के 125 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देश की पहली डबल डेकर ट्रेन सिंहगढ़ एक्सप्रेस बाम्बे (अब मुम्बई) के विक्टोरिया टर्मिनल से पुणे तक चलायी गयी।
  • 12 अप्रैल सन् 1981 में अंतरिक्ष यान कोलंबिया पहली बार प्रेक्षेपित किया गया।
  • 12 अप्रैल सन् 1991 में खाड़ी युद्ध औपचारिक रूप से समाप्त।
  • 12 अप्रैल सन् 1998 में गिरिजा प्रसाद कोइराला नेपाल के नये प्रधानमंत्री नियुक्त।
  • 12 अप्रैल सन् 2007 में पाकिस्तान ने ईरान गैस पाइनलाइन पर भारत को मंज़ूरी दी।
  • 12 अप्रैल सन् 2008 में अफ़ग़ानिस्तान में भारतीयों के एक काफ़िले पर हुए आत्मघाती हमले में दो भारतीय इंजीनियरों सहित तीन लोगों की मौत।
  • 12 अप्रैल सन् 2009 में ज़िम्बाब्वे ने अपनी आधिकारिक मुद्रा ‘ज़िम्बाब्वे डॉलर’ का त्याग किया।
  • 12 अप्रैल सन् 2013 में फ्रांस की सीनेट ने समलैंगिक विवाह को मान्यता दी।

 

12 अप्रैल सन 1867 ईसवी को जापान के प्रसिद्ध सुधारवादी नरेश मोत्सो हीतो सिंहासन पर बैठे। उन्होंने ऐसे समय में सत्ता संभाली कि जापान विभिन्न क्षेत्रों में कठिनाइयों से जूझ रहा था। इसी लिए सत्ता संभालने के एक वर्ष बाद मोत्सो हीतो ने सामाजिक क्रान्ति की योजना बनाई और जापान में सुधार के कार्य आरंभ कर दिए। उन्होंने क्योटो के बजाए टोकियो को राजधानी बनाया और देश के लिए नये संविधान की रचना की। हालॉकि मोत्सो हीतो के काल में, जो 1912 में समाप्त हुआ, जापान को ध्यान योग्य सफलताएं मिली किंतु चीन और रुस से जापान ने इसी शासन काल में युद्ध भी किया।

 

12 अप्रैल सन 1932 ईसवी को स्पेन में प्रजातांत्रिक सरकार की स्थापना हुई और राजशाही शासन व्यवस्था का अंत हुआ। स्पेन के नरेश अलफांस 13वें के अत्याचारों को देखते हुए इस देश के प्रजातंत्र के समर्थकों ने विद्ररोह आरंभ कर दिया और नरेश को त्यागपत्र देने पर विवश कर दिया। जिसके बाद इस देश में प्रजातंत्र स्थापित हुआ किंतु यह स्थायी न रह सका। क्योंकि 1936 से राजशाही व्यवस्था के समर्थकों ने प्रजातंत्र के समर्थकों के विरुद्ध जनरल फ़्रैन्को के नेतृत्व में युद्ध छेड़ दिया और ढाई साल के अंदर यह युद्ध जीत भी लिया।

 

 

12 अप्रैल सन 1961 ईसवी को मनुष्य पहली बार अंतरिक्ष में पहुंचा और उसने पृथ्वी का चक्कर लगाया। रुस के अंतरिक्ष यात्री यूरी गैगरियन ने आज के दिन वास्टोक अंतरिक्ष यान से 89 मिनट में पृथ्वी का चक्कर लगाया। इस प्रकार अंतरिक्ष यात्रा के क्षेत्र में एक बड़ी उन्नति हुई। सन 1968 ईसवी में जब वे ख्याति के शिखर पर थे रुस के एक वरिष्ठ अंतरिक्ष अधिकारी के साथ एक वायु दुर्घटना में मारे गये। यूरी गैगरिन के सम्मान में 12 अप्रैल के दिन को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस घोषित किया गया है।

 

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24 फ़रवरदीन सन 1380 हिजरी शम्सी को आयतुल्लाह शैख़ मुजतबा मोहम्मदी इराक़ी का 86 वर्ष की आयुमें निधन हुआ। वे 1294 हिजरी शम्सी में ईरान के अराक नगर के निकट एक गांव में पैदा हुए थे। वे आरंभिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद धार्मिक शिक्षा की ओर उन्मुख हुए तथा शैख़ अब्दुल करीम हायरी यज़्दी, सैयद मोहम्मद तक़ी ख़्वानसारी और सैयद मोहम्मद हुज्जत कोह क़मरी जैसे गुरुओं से शिक्षा ग्रहण की। उन्होंने अपना अधिकतर समय अध्ययन एवं शोध कार्यों में व्यतीत किया तथा अनेक महत्वपूर्ण पुस्तकों की एडिटिंग की। इनमें मोहक़्क़िक़ अर्देबीली की 14 खंडों पर आधारित पुस्तक मजमउल फ़ायदा वल बुरहान का नाम विशेष रूप से लिया जा सकता है।

 

24 फ़रवरदीन सन 1290 हिजरी शम्सी को ईरान के विख्यात धर्मगुरू आयतुल्लाह मुजतबा हातेमी लंकरानी इसफ़ेहान में पैदा हुए। इसफ़हान में आरंभिक धार्मिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए पवित्र नगर नजफ़ चले गए। नजफ़ में उन्होंने आयतुल्लाह मिर्ज़ा नाईनी, आयतुल्लाह ज़ियाउद्दीन इराक़ी और आयतुल्लाह सैयद अबुल हसन इसफ़हानी जैसे महान विद्वानों से ज्ञान अर्जित किया। इसके बाद उन्होंने नजफ़ में ही अध्यापन आरंभ कर दिया। आयतुल्लाह लंकरानी ने कुछ समय इराक़ के सामर्रा नगर में भी व्यतीत किया। इराक़ी सरकार की ओर से दबाव डाले जाने के बाद इराक़ से स्वदेश लौटे और उन्होंने इसफ़हान नगर में धार्मिक ज्ञान का प्रचार प्रसार आरंभ कर दिया। 75 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। 

 

 

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18 शाबान वर्ष 1324 हिजरी क़मरी को ईरान में संवैधानिक क्रान्ति के पश्चात ईरानी संसद मजलिसे शूराए इस्लामी का पहला सत्र आधिकारिक रूप से आरंभ हुआ। बहुत बलिदान व संघर्ष के पश्चात यह संसद अस्तित्व में आयी थी। संसद का पहला चुनाव सामाजिक वर्गों पर आधारित था जिसमें व्यापारी, किसान और कारीगर अलग अलग अपने प्रत्याशियों को मत देते थे। इस संसद के महत्वपूर्ण सांसदों में ईरानी जनता के दो धार्मिक नेताओं में सय्यद मोहम्मद तबातबाई और सय्यद अब्दुल्लाह बहबहानी का उल्लेख किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि संसद के गठन के कुछ समय पश्चात ईरान में संविधान का संकलन हुआ और फिर तत्कालीन ईरानी राजा मुज़फ़्फ़रुद्दीन शाह क़ाजार ने उस पर हस्ताक्षर किए। इतिहासकार इस संसद को संवैधानिक क्रान्ति के काल की सबसे सक्रिय संसद मानते हैं।

 

18 शाबान सन 321 हिजरी क़मरी को अरब के विख्यात साहित्यकार शायर और शब्दकोष विशेषज्ञ इब्ने दुरैद का निधन हुआ। वे बहुत ही अच्छे सवभाव और तेज़ बुद्धि वाले व्यक्ति थे। उनकी स्मरण शक्ति भी बहुत तेज़ थी। उन्हें अरबी भाषा के महत्वपूर्ण शब्दकोष की रचना से ख्याति प्राप्त हुई।

उनका विख्यात शब्दकोष अल इश्तेक़ाक़ है। इसी प्रकार उनका पद्य संकलन भी मौजूद है।