ईश्वरीय वाणी-७२
सूरे क़मर मक्के में नाज़िल हुआ और इसमें 55 आयते हैं।
इस सूरे का नाम इसकी पहली आयत से लिया गया है। इस सूरे के विषय इस प्रकार हैं, प्रलय का समय निकट होना, चांद का टुकड़े होना, ईश्वरीय आयतों के इंकार पर विरोधियों पर बल, हज़रत नूह की उद्दंड क़ौम की कहानी, हज़रत नूह के जीवन काल में आने वाला भयावह तूफ़ान, आद, समूद और हज़रत लूत क़ौम की कहानियां, इन क़ौमों का अपने पैग़म्बरों का विरोध करना और इन क़ौमों का अंजाम, आले फ़िरऔन और उन्हें दिए गए दंड का उल्लेख, इन क़ौमों की पैग़म्बरे इस्लाम के विरोधियों व अनेकेश्वरवादियों से तुलना, प्रलय में अपराधियों को दंड और सदाचारियों को मिलने वाला महाईनाम।
इस सूरे की आयतें यूं तो छोटी हैं लेकिन अर्थ की दृष्टि से बहुत व्यापक हैं।
क़मर सूरे की पहली आयत में ईश्वर कहता है, प्रलय निकट हो गया और चांद के दो टुकड़े हो गए।
पहली आयत में दो बड़ी घटनाओं का उल्लेख है। एक प्रलय के दिन का निकट होना जो परलोक के जीवन के लिए आरंभ होगा और बहुत बड़े बद्लाव के साथ आएगा। दूसरी घटना चांद के दो टुकड़े होने का चमत्कार है जो ईश्वर की किसी काम को अंजाम देने की अनंत शक्ति और पैग़म्बरे इस्लाम की पैग़म्बरी की सच्चाई पर तर्क है।
इस्लामी इतिहास के अनुसार, चांद के दो टुकड़े होने का चमत्कार चौदहवीं की रात को हुआ था। उस रात मक्के के कुछ अनेकेश्वरवादी पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल लाहो अलैहि व आलेही व सल्लम, के पास आए और कहा, “हे मोहम्मद हर पैग़म्बर ने अपनी पैग़म्बरी की सच्चाई के लिए चमत्कार पेश किया है। आप भी अपने दावे की सच्चाई में कोई चमत्कार पेश कीजिए। अगर ईश्वर के पैग़म्बर हैं और उसके निकट आपका उच्च स्थान है तो हमारे लिए चांद के दो टुकड़े कीजिए।” पैग़म्बरे इस्लाम ने ईश्वर से चांद के दो टुकड़े करने की दुआ की। अचानक चांद के दो टुकड़े हो गए। पैग़म्बरे इस्लाम ने ईश्वर का सजदा किया और साथ साथ पैग़म्बरे इस्लाम के अनुयाइयों ने भी सजदा किया। उसके बाद चांद अपनी पहली हालत में लौट गया। अनेकेश्वरवादियों ने कहा हे मोहम्मद! जिस वक़्त हमारे मुसाफ़िर यमन और शाम से लौटेंगे तो उनसे पूछेंगे कि क्या उन्होंने अपने मार्ग में या जिन देशों में वे मौजूद थे वहां इस तरह का दृष्य देखा है या नहीं? अगर उन्होंने चांद को टुकड़े होते देखा है तो हम इस बात का यक़ीन कर लेंगे कि यह आपके ईश्वर का काम है और अगर कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं देखा तो यह बात स्पष्ट हो जाएगी कि आपका यह काम जादू के अलावा कुछ और नहीं था। जिस वक़्त विभिन्न क्षेत्रों के लोग मक्का पहुंचे तो उन्होंने चांद के दो टुकड़े होने की घटना को ख़ुद अपनी आंखों से देखने की बात कही लेकिन फिर भी अनेकेश्वरवादी पैग़म्बरे इस्लाम पर ईमान न लाए।
क़मर सूरे की आयत नंबर दो में ईश्वर कह रहा है, और ये कोई भी निशानी या चमत्कार देखते हैं तो मुंह फेर लेते हैं और कहते हैं कि यह जादू का क्रम है।
आयत इस बिन्दु की ओर संकेत करती है कि अनेकेश्वरवादियों ने पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल लाहो अलैहि व आलेही व सल्लम के हाथों बारंबार चमत्कार देखा था और चांद के दो टुकड़े होना उन्हीं चमत्कारों में से एक चमत्कार था।
क़मर सूरे की तीसरी आयत में अनेकेश्वरवादियों द्वारा पैग़म्बरे इस्लाम की पैग़म्बरी के विरोध का कारण बताया गया है। इस आयत में ईश्वर कह रहा है, उन्होंने झुठलाया और अपनी इच्छाओं का अनुसरण किया और हर मामले की एक नियत अवधि है। अनेकेश्वरवादियों द्वारा पैग़म्बरे इस्लाम का विरोध और उनके चमत्कार का इंकार, इसी प्रकार प्रलय के इंकार का कारण इच्छाओं का अनुसरण था। हठधर्मिता, निरंकुशता, भोग विलास, और पाप के कारण अनेकेश्वरवादियों ने सत्य के निमंत्रण को स्वीकार नहीं किया क्योंकि इस निमंत्रण को क़ुबूल करने की स्थिति में कुछ ज़िम्मेदारियां लेनी पड़तीं।
क़मर सूरे की आयत नंबर 6 से 8 पूरी मानवता को प्रलय के दिन और लोगों से उनके कर्म का हिसाब किताब पूछे जाने का उल्लेख करती है। अतः आप भी उनसे रूख़ फेर लें जिस दिन पुकारने वाला एक अत्यंत अप्रिय चीज़ की ओर पुकारेगा। वे अपनी झुकी हुयी निगाहों के साथ अपनी क़ब्रों से निकल रहे होंगे मानो वे बिखरी हुयी टिड्डिया हैं।
क़ब्र से निकलने वालों को बिखरी हुयी टिड्डियों से उपमा इसलिए है क्योंकि बहुत से पक्षियों के विपरीत टिड्डियां उड़ते वक़्त किसी अनुशासन का पालन नहीं करतीं जबकि पक्षी जब सामूहिक रूप से उड़ते हैं तो अनुशासन का ख़्याल रखते हैं। जी हां उस दिन अनेकेश्वरवादी इतना डरे होंगे कि नशे में धुत लोगों की तरह एक दूसरे से टकराएंगे मानो अपने आप में नहीं हैं।
बाद की आयत में ईश्वर कहता है, जिस वक़्त वह इस निमंत्रण पर क़ब्र से निकलेंगे तो डर के मारे गर्दन निकाले हुए बुलाने वाले की ओर तेज़ी से बढ़ेंगे। उस दिन नास्तिकों का पूरा वजूद डर से कांप रहा होगा और वे कहेंगे, आज का दिन बहुत ही कठिन व भयानक दिन है।
क़मर सूरे में हठधर्मियों व बहाना ढूंढने वालों को ईश्वर सचेत करता है कि वे हज़रत नूह, हज़रत लूत की क़ौमों और आले फ़िरऔन से पाठ लें क्योंकि अनेकेश्वरवादियों व अपराधियों का अंजाम नरक है।
क़मर सूरे की आयत नंबर 9 से बाद की आयतों में आद, समूद, हज़रत नूह और हज़रत लूत की क़ौमों और आले फ़िरऔन के अंजाम बारे में वर्णन किया गया है कि किस प्रकार इन क़ौमों को अपनी हठधर्मिता का अंजाम भुगतना पड़ा। जिस वक़्त हज़रत नूह अपनी क़ौम के मार्गदर्शन न पाने की ओर से निराश हुए तो ईश्वर से इन शब्दों में प्रार्थना की, “नूह ने अपने पालनहार को पुकारा कि मैं इस उद्दंड क़ौम से हार गया हूं तू मेरी मदद कर।”
बाद की आयतें हज़रत नूह की क़ौम को ईश्वर की ओर से होने वाले प्रकोप का यूं उल्लेख करती है, “नूह के कहने पर मूसलाधार बरसते हुए पानी से आसमान के पट खोल दिए। पूरी धरती पर हमने पानी के सोते प्रवाहित किए और सारा पानी उस काम के लिए मिल गया जो नियत हो चुका था।”
ईश्वर आगे की आयत में कहता है, हमने नूह को उस सवारी पर सवार किया जो तख़्तों और कीलों से बनी थी।
इसके बाद ईश्वर हज़रत नूह की नांव पर अपनी विशेष कृपा का उल्लेख इन शब्दों में करता है, “यह नांव हमारी निगाहों के सामने मौजों को चीरती थी और हमारे संरक्षण में आगे बढ़ती जाती थी। इस प्रकार नूह और उनके साथियों को मुक्ति मिली और बाक़ी बचे हुए समुद्र में डूब गए।”
इसके बाद इस महाघटना के नतीजे का ईश्वर यूं उल्लेख करता है, “हमने इस घटना को बाद की क़ौमों के लिए पाठ व निशानी क़रार दिया। क्या कोई है जो पाठ ले।”
हज़रत नूह की कहानी के बाद, क़मूर सूरे की आयतों में आद, समूद और हज़रत लूत की क़ौम के अंजाम का उल्लेख किया गया है। उसके बाद आले फ़िरऔन और उसके सर्वनाश को बयान किया गया है। रोचक बिन्दु यह है कि इनमें से हर एक जाति व क़ौम के पाठ लेने योग्य अंजाम के उल्लेख के बाद एक बहुत ही प्रभावी वाक्य आया है और वह यह है, “हमने क़ुरआन को नसीहत के लिए आसान बनाया तो क्या कोई नसीहत लेने वाला है?”
क़मर सूरे की आख़िर की आयतों में ईश्वर नास्तिकों और ईश्वर पर आस्था रखने वालों के अंजाम का यूं उल्लेख करता है, “निःसंदेह अपराधी गुहराही व दीवानेपन में पड़े हुए हैं। जिस दिन वे अपने मुंह के बल आग में घसीटें जाएंगे। (उनसे कहा जाएगा) चखो आग की लपट का मज़ा। निश्चय ही हमने हर चीज़ एक अंदाज़े के साथ पैदा की है। और हमारा आदेश तो पलक झपकने की तरह की एक बात है और हमने तुम्हारी तरह के लोगों का सर्वनाश कर दिया तो क्या कोई पाठ लेने वाला है? लोगों ने जो कुछ कर्म किया है सब कर्मपत्र में मौजूद है। उसमें हर छोटा-बड़ा कर्म दर्ज कर दिया गया है।”
पवित्र क़ुरआन की बाद की आयत, अत्याचारियों व नास्तिकों के अंजाम की ओर उल्लेख के बाद सदाचारियों के अच्छे भविष्य को संक्षेप में यू बयान करती है, “इस बात में शक नहीं कि सदाचारी बाग़ों व नहरों के बीच होंगे। सर्वशक्तिमान शासक के पास पाक स्थान में।”
इन आयतों में सदाचारियों के स्थान को कितने सुंदर ढंग से बयान किया गया है। उनके स्थान की दो विशेषताएं हैं। एक यह कि वह सत्य का स्थान है जहां किसी प्रकार के असत्य की कोई गुंजाइश नहीं होगी। स्वर्ग के बारे मे ईश्वर के सभी वादे व्यवहारिक रूप में मौजूद होंगे और उन वादों की सत्यता स्पष्ट हो जाएगी।
दूसरे यह कि वह ईश्वर की निकटता का स्थान है। उस ईश्वर की निकटता जिसके क़ब्ज़े में सारी नेमतें व अनुकंपाए हैं। इसलिए वह अपने मेहमानों के सत्कार में किसी प्रकार का संकोच नहीं करेगा।
आख़िर की दो आयतों में स्वर्गवासियों को मिलने वाली नेमतों की बात की गयी है। एक भौतिक जो विशाल बाग़ और नहरों के रूप में मौजूद होंगी और दूसरी आध्यात्मिक नेमत और वह महान ईश्वर की निकटता है। यह इसलिए है ताकि इंसान चरणबद्ध रूप में तय्यार हो, उसकी आत्मा को ऊंची उड़ानों के लिए तय्यार करे और उसे प्रफुल्लता प्रदान करे।
ये आयतें सच्चे मोमिनों व सदाचारियों को इस बात का संतोष दिलाती हैं कि उन पर ईश्वर के सामिप्य व कृपा की वर्षा होगी। यह बात सोच कर कि ईश्वर पूरी सृष्टि का मालिक है और सर्वशक्तिमान है, इंसान को ऐसा सुकून मिलता है जिसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता।